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कलेक्टर समन्वय कर बेहतर परिणाम दें : मुख्य सचिव जैन

कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस में मुख्य बिंदुओं की समीक्षा कृषि वर्ष की कार्ययोजना पर भी हुआ विमर्श योजनाओं और कार्यक्रमों के लक्ष्य को समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश भोपाल मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन नेकलेक्टर्स से कहा है कि वे जिलों में सरकार के प्रतिनिधि है और शासन की प्रत्येक योजना और कार्यक्रम के क्रियान्वयन में सभी विभागों के अमले के साथ लीडर की भूमिका निभाकर सर्वश्रेष्ठ परिणाम दें। उन्होंने ग्रामीण विकास के लिए जिला पंचायत और नगरीय क्षेत्र के विकास योजनाओं के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ उत्कृष्ट समन्वय बनाकर कार्य करने की जरूरत बताईं। मुख्य सचिव ने कहा कि टीम के रूप में काम करने में ही परिणाम आयेंगे और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सेक्टर बनाकर माह में कम से कम दो बैठक कर लंबित योजनाओं और कार्यक्रम के क्रियान्वयन में शतप्रतिशत उपलब्धि सुनिचिश्त करें। मुख्य सचिव श्री जैन ने बुधवार को मंत्रालय में कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस के पालन प्रतिवेदन पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में समीक्षा की। कलेक्टर कमिश्र्नर और पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सम्मिलित हुए। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाये जाने के दृष्टिगत संबंधित विभागों को आगामी एक वर्ष की कार्य योजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गए है। मुख्य सचिव श्री जैन ने सुशासन को मध्यप्रदेश शासन का मूल्य मंत्र बताया उन्होंने कहा कि नामांतरण, बटवारा और सीमांकन जैसे प्रकरणों में सौ-सौ दिन की पेंडेंसी असंतोषजनक है। उन्होंने सम्पूर्ण राजस्व प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बावजूद इस तरह की कार्यप्रणाली को समन्वय के साथ दुरूस्त करने को कहा है। नामांतरण में मुरैना-भिंड, बटवारा के प्रकरणों में अनूपपूर और रीवा, भूमि के सीमांकन प्रकरणों में विदिशा और सतना, खसरा अपडेट में रीवा और इंदौर तथा अवैध कब्जा हटाने के मामले में भिंड और विदिशा जिलों की स्थिति अपेक्षाकृत असंतोषजनक पायी गयी है। राजस्व संग्रहण में कम वसूली को भी मुख्य सचिव ने गम्भीरता से लिया और निर्देश दिए कि टेक्नोलॉजी का लाभ लेकर राजस्व संग्रहण बढाये। उन्होंने राजस्व प्रकरणो में बटांकन के बाद रिकार्ड दुरूस्त होने के पश्चात ही प्रकरण को निराकृत मानने को कहा है। बैठक में समग्र पोर्टल में केवाईसी को इस वर्ष के अन्त तक शत-प्रतिशत करने के निर्देश दिये है। मुख्य सचिव श्री जैन ने एमपीई सेवा पोर्टल को प्रदेश के नागरिकों के लिए सेवाओं और सुविधा की दृष्टि से रिफार्म बताते हुए कलेक्टर्स और अन्य विभागों से कहा कि मार्च अंत तक सभी 1700 सेवाएं जुड़ जाए जिससे नागरिक इस पोर्टल के माध्यम से सेवाएं प्राप्त कर सकें। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन और लोक सेवा गांरटी अधिनियम के प्रकरणों की समीक्षा की। बैठक मे बताया गया कि लोक सेवा गारंटी के तहत प्राप्त 1 करोड़ 9 लाख आवेदनों में से 1 करोड़ का निराकरण किया गया है इस मामले में निवाड़ी और बड़वानी टॉप पर जबकि मऊगंज और शिवपुरी निचले पायदान पर हैं। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कलेक्टर संवेदनशीलता बरतें और समयअवधि बैठक में हर सप्ताह समीक्षा करें। उन्होंने निवास और आय प्रमाण पत्र, सीमांकन, अविवादित नामांतरण और जन्म के एक वर्ष पश्चात पंजीयन जैसी सेवाएं समय अवधि में निराकृत करने के निर्देश दिये। वर्तमान में 735 सेवाएं लोक सेवा गारंटी अधिनियम में अधिसूचित हैं जिनमें से 602 ऑनलाइन है शेष 133 सेवाओं को भी ऑनलाइन करने के निर्देश दिए है। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन की कई शिकायतों को अटेंड नहीं किये जाने पर बैतूल, मऊगंज, शहडोल और भोपाल जिलों को सुधार करने की हिदायत दी। उन्होंने भूमि विवाद के मामलों में समय पर एफआईआर दर्ज नही करने पर सेवा में कमीं बताया और आमजन को राहत पहुंचाने वाले इन कार्यों को सर्वोच्च्प्राथमिकता से करने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स से कहा कि वे टीम भावना से काम करें और जन प्रतिनिधियों सहित आम आदमी से संवेदनशील व्यवहार रखें और यह उनकी कार्य संस्कृति में भी दिखना चाहिए । उन्होंने वन ग्राम से राजस्व ग्राम कार्य की धीमी गति पर अंसतोष व्यक्त किया तथा वन भूमि का दावा कार्य में भी कम प्रगति पर कलेक्टर्स को राजस्व और वन अमले के साथ बेहतर समन्वय कर 31 मार्च तक सभी प्रकरण निराकृत करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव श्री जैन ने कृषि वर्ष 2026 के विभिन्न 10 आयाम की समीक्षा की और वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर कृषि विकास के विभिन्न पहलूओं पर रणनीति बनाने के लिए कहा है। उन्होंने मिट्टी, पानी और मौसम को सटीक तकनीकी से जोड़ने और जिला स्तर पर प्लान बनाने को कहा है। उन्होंने सिंचाई सुविधाओं के निर्माण के समय आकल्पित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता में अंतर होने को गम्भीरता से लिया और कहा कि राजस्व कृषि तथा जल संसाधान विभाग इस दिशा में सटीक योजना बनाकर क्रियान्वयन करें। बैठक में पराली/नरवाई जलाने पर रोक लगाने के लिए किसानों के बीच वैज्ञानिक तकनीकों के प्रसार करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रेसराईज्ड सिंचाई, परड्राप, मोरक्राप, उद्यानिकी क्लस्टर , खाद्य प्रसंस्करण, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना एक बगिया माँ के नाम, डॉ. भीमराव कामधेनु योजना की भी समीक्षा की गयी। मुख्य सचिव ने कलेक्टरर्स कों सभी योजनाओं का उत्कृष्ट क्रियान्वयन के निर्देश दिए है। स्वास्थ्य एवं पोषण अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किये जाने के लिए कलेक्टर को निर्देश दिए कि वे माह में स्वास्थ्य विभाग के साथ कम से कम दो बार बैठक करें और स्वास्थ्य मापदंडों के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित करें। बैठक में गर्भवती महिलाओं की एएनसी जाँच पूरी गुणवत्ता से करने और असत्य आकँडें प्रस्तुत नहीं करने के लिए निर्देश दिये हैं। 

मुख्यमंत्री साय शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में हुए शामिल

शहीद गैंदसिंह के नाम पर चौक, मूर्ति स्थापना और सामाजिक केंद्रों की घोषणा रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के तत्वावधान में साइंस कॉलेज ग्राउंड रायपुर में आयोजित शहीद शिरोमणि गैंदसिंह के 201वें शहादत दिवस एवं श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने महान जनजातीय नायक एवं स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत शहीद गैंदसिंह का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने शहीद गैंदसिंह के सम्मान में नया रायपुर में चौक के नामकरण एवं मूर्ति स्थापना, चंगोराभाटा स्थित समाज के सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार, तथा बालोद जिले के देवरी, कांकेर जिले के मरकाटोला, दानीटोला, नगरी, डोंगरगांव एवं बस्तर जिले के भानपुरी तथा करूटोला में हल्बा समाज के सामाजिक केंद्रों के निर्माण हेतु प्रत्येक स्थान के लिए 10-10 लाख रुपये प्रदान किए जाने की घोषणा की। इसके साथ ही ग्राम कितूर में रंगमंच निर्माण तथा चपका बस्तर में श्रीराम मंदिर के जीर्णोद्धार की भी घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जनजातीय समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि देश में स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत भले ही वर्ष 1857 से मानी जाती है, किंतु उससे बहुत पहले ही छत्तीसगढ़ की धरती पर जनजातीय क्रांतियों की गूंज सुनाई देने लगी थी। महान क्रांतिकारी शहीद गैंदसिंह अंग्रेजी हुकूमत से संघर्ष करते हुए वर्ष 1825 में शहीद हुए, और उस कालखंड में भी आदिवासी समाज ने आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में एक-दो नहीं बल्कि कुल 14 जनजातीय क्रांतियां हुईं, जिन्होंने अंग्रेजों की सत्ता की नींव हिला दी। यह धरती शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गैंदसिंह और वीर गुण्डाधुर जैसे महान जननायकों की भूमि रही है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश इन वीरों और जनजातीय नायकों को लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में उचित स्थान नहीं मिला। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय नायकों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हुई 14 जनजातीय क्रांतियों पर आधारित ट्राइबल म्यूजियम नया रायपुर में निर्मित किया गया है, जिसका लोकार्पण स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस संग्रहालय में इन सभी क्रांतियों का सचित्र विवरण एवं गहन जानकारी प्रस्तुत की गई है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि सभी लोग इस म्यूजियम का अवश्य अवलोकन करें, ताकि छत्तीसगढ़ की बलिदानी धरती में जनजातीय नायकों के योगदान को भली-भांति समझा जा सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पद पर जनजातीय समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ प्रदेश का नेतृत्व भी जनजातीय समाज के बेटे के हाथों में है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए। उनके नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया, जो आज हजारों करोड़ रुपये के बजट के साथ जनजातीय समाज के विकास को नई दिशा दे रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से जनजातीय समाज के कल्याण की नई इबारत लिखी जा रही है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का कार्य राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता से किया जा रहा है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे पुरखों ने शिक्षा को विकास का मूलमंत्र बताया है। शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान संचालित हो रहे हैं। उन्होंने समाज के प्रबुद्धजनों से शिक्षा को बढ़ावा देने, शासन की योजनाओं की जानकारी समाज तक पहुंचाने तथा युवाओं को अपने अधिकारों और लक्ष्यों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल में नक्सलवाद लंबे समय तक विकास में सबसे बड़ी बाधा रहा है, किंतु डबल इंजन सरकार के संकल्प और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से इस बाधा को दूर किया जा रहा है। वर्षों से विकास से वंचित इस अंचल में अब विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि शहीद गैंदसिंह छत्तीसगढ़ के पहले वीर शहीद जननायक थे, जिन्होंने वर्ष 1824-25 में अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष का बिगुल फूंका। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा संसाधनों की लूट और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ साहसिक संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों का योगदान अतुलनीय रहा है। कार्यक्रम में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी आदिवासी समाज के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. देवेंद्र माहला, महामंत्री गिरवर सिंह ठाकुर, महेश गागड़ा सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।  

संभल में जज के ट्रांसफर पर बवाल, वकीलों ने बताया दबाव की कार्रवाई

लखनऊ यूपी के संभल में हिंसा के मामले में सीओ रहे एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने वाले चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का ट्रांसफर कर दिया गया है। सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले को लेकर संभल जिला न्यायालय में अधिवक्ताओं में रोष देखने को मिला। मंगलवार को सीजेएम विभांशु सुधीर का सुल्तानपुर स्थानांतरण किए जाने के बाद बुधवार को अधिवक्ताओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की।   बुधवार को जिला न्यायालय परिसर में एकत्र हुए अधिवक्ताओं ने स्थानांतरण के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीजेएम विभांशु सुधीर द्वारा न्यायिक कार्यों में पारदर्शिता और सक्रियता दिखाई जा रही थी। अधिवक्ताओं का कहना है कि उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण और सराहनीय निर्णय लिए गए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में गति आई। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने मीडिया कवरेज को लेकर भी आपत्ति जताई और कहा कि स्थानांतरण से जुड़े तथ्यों को सही तरीके से सामने लाया जाना चाहिए। अधिवक्ताओं का मत है कि बेहतर कार्य करने वाले अधिकारी का तबादला न्याय व्यवस्था के लिए उचित संदेश नहीं देता।हालांकि, स्थानांतरण शासन का विषय है, लेकिन अधिवक्ताओं ने इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। आपको बता दें कि संभल हिंसा मामले में सीओ रहे अब एएसपी अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने वाले चंदौसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर का तबादला हो गया है। विभांशु सुधीर का कार्यकाल यहां मात्र तीन माह का रहा। हाईकोर्ट ने उनके स्थान पर सिविल जज (वरिष्ठ श्रेणी) आदित्य सिंह को सीजेएम चंदौसी नियुक्त किया है। इसके अलावा सीतापुर की सीजेएम राजेंद्र कुमार सिंह को इसी पद पर कन्नौज स्थानांतरित किया गया है। इस फेरबदल में इसी स्तर के आठ अन्य न्यायिक अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में परिवर्तन किया गया है। एक सप्ताह पहले ही संभल में शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। अदालत ने यह आदेश गोली लगने से घायल खग्गू सराय निवासी एक युवक के पिता की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया था।  

बाघ संरक्षण की वैश्विक मिसाल बना मध्यप्रदेश

नवाचार, सुशासन, जन-सहभागिता और सतर्क निगरानी तंत्र से ‘टाइगर स्टेट’ की पहचान हुई सशक्त भोपाल मध्यप्रदेश भौगोलिक दृष्टि से भारत का हृदय प्रदेश है। जैव-विविधता और वन्यप्राणी संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश राष्ट्रीय के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सशक्त पहचान बना चुका है। प्रदेश का लगभग एक-तिहाई भू-भाग वनाच्छादित है, यही कारण है कि यहां वन्यजीवों, विशेषकर बाघ, तेंदुआ, चीता जैसी बिग-कैट प्रजाति के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास उपलब्ध हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022 में कराई गई बाघ गणना के अनुसार देश में कुल 3,682 बाघ पाए गए हैं, जिनमें से 785 बाघ मध्यप्रदेश में दर्ज किए गए। यह संख्या देश में सर्वाधिक है। इसी के आधार पर मध्यप्रदेश को ‘टाइगर स्टेट’ का गौरव प्राप्त हुआ है। मध्यप्रदेश में बाघों की बढ़ती संख्या, वैज्ञानिक प्रबंधन, पारदर्शी आंकड़े और सख्त निगरानी यह प्रमाणित करती है कि प्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश का नेतृत्व कर रहा है। यदि यही निरंतरता बनी रही, तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश न केवल ‘टाइगर स्टेट’ बल्कि वैश्विक संरक्षण मॉडल के रूप में भी स्थापित होगा। संरक्षित क्षेत्रों का सशक्त नेटवर्क मध्यप्रदेश में बाघ संरक्षण के लिए एक मजबूत और सुव्यवस्थित संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क विकसित किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 11 राष्ट्रीय उद्यान, 26 वन्यप्राणी अभयारण्य और 09 टाइगर रिजर्वहैं। इन संरक्षित क्षेत्रों में वैज्ञानिक पद्धति से निगरानी, आवास प्रबंधन, शिकार की रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अंतरराज्यीय बाघ पुनर्स्थापना में ऐतिहासिक भूमिका मध्यप्रदेश को यह गौरव भी प्राप्त है कि यहां विश्व की पहली अंतर्राज्यीय बाघ पुनर्स्थापना परियोजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। कान्हा एवं पेंच टाइगर रिजर्व से बाघों को अन्य प्रदेशों में स्थानांतरित कर वहां बाघ आबादी को पुनर्जीवित किया गया है। मध्यप्रदेश की यह पहल पूरे देश के लिए एक मॉडल बन चुकी है। राष्ट्रीय औसत से दोगुनी वृद्धि आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच देश में बाघों की संख्या में 24.10 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मध्यप्रदेश में यह वृद्धि 49.24 प्रतिशत रही। वार्षिक आधार पर देश में बाघों की औसत वृद्धि लगभग 6.02 प्रतिशत रही। मध्यप्रदेश में यह दर 12.31 प्रतिशत तक पहुंच गई जो राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी अधिक हैं। इससे सिद्ध हुआ है कि प्रदेश की संरक्षण रणनीतियां प्रभावी रही हैं। मृत्यु दर पर वैज्ञानिक और पारदर्शी दृष्टिकोण बाघ संरक्षण रणनीतियों में केवल संख्या बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि मृत्यु दर का विश्लेषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019 से 2025 तक देश में बाघ मृत्यु दर औसतन 5 प्रतिशत से कम रही, जबकि मध्यप्रदेश में यह दर लगभग 6 से 7 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में बाघों की अधिक संख्या और बेहतर निगरानी प्रणाली के कारण मृत्यु की घटनाएं अधिक सटीकता से दर्ज होती हैं। इसे संरक्षण में विफलता नहीं, बल्कि बेहतर डिटेक्शन रेट के रूप में देखा जाना चाहिए। वर्ष 2025 में 55 बाघ मृत्यु घटनाओं का विश्लेषण वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश में दर्ज 55 बाघ मृत्यु घटनाओं का विस्तृत अध्ययन किया गया। इनमें प्राकृतिक कारणों से 38 बाघों की मृत्य हुई, जो कुल मौतों का 69 प्रतिशत है।इनमें आपसी संघर्ष, बीमारी, वृद्धावस्था, दुर्घटनाएं, रेल और सड़क हादसे शामिल हैं। शिकार से 11 बाघों की मृत्यु हुई है, जो कुल मृत्यु संख्या का 20 प्रतिशत है।इनमें से अधिकांश मामलों में विद्युत करंट के उपयोग की पुष्टि हुई। उल्लेखनीय है कि इन प्रकरणों में अवैध शिकार की मंशा सिद्ध नहीं हुई, बल्कि फसलों और पशुधन की रक्षा का प्रयास प्रमुख कारण रही है। व्याघ्र अंगों की तस्करी के लिये 6 बाघों का शिकार हुआ, जो कुल मौतों का 11% है।इन मामलों में बाघ के अवयव जब्त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इससे वन अमले की सक्रियता और सजगता सिद्ध हुई है। आधुनिक तकनीक और सख्त कानूनों से प्रभावी बाघ संरक्षण बाघ संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा रियल-टाइम निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों में विद्युत विभाग की टीम के साथ विद्युत लाइन के आसपास संयुक्त गश्त, फील्ड इंटेलिजेंस नेटवर्क, स्थानीय समुदायों की सहभागिता और विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत सख्त कार्रवाई जैसे उपाय निरंतर अपनाए जा रहे हैं। बाघ संरक्षण का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। टाइगर रिजर्व आधारित पर्यटन से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता है। गाइड, वाहन चालक, होम-स्टे संचालकों को आजीविका के अवसर मिल रहे हैं। इससे प्रदेश की पर्यटन आय में वृद्धि हो रही है। जनसहभागिता से प्रभावी वन और वन्य-जीव संरक्षण वन विभाग ने आम नागरिकों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि बाघ संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में लें। किसी भी सूचना, शिकायत या सुझाव के लिए विभागीय माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।  

झारखंड के गांव में बाहरी लोगों की NO ENTRY!

गोमो. हरिहरपुर थाना क्षेत्र के जीतपुर गांव में मंगलवार की रात संदिग्ध चार युवकों को गांव में घुसने पर ग्रामीण एकजुट होकर शोर मचाते हुए पीछा किया। लेकिन युवकों ने अंधेरा का फायदा उठाकर जीतपुर सरकारी विद्यालय के पीछे स्थित जंगल की ओर भाग निकले। घटना की मिलते ही थाना के सब इंस्पेक्टर डी. हांसदा दल बल के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के साथ पूरे जंगल में टोर्च की रौशनी सहारे खोजबीन किया। लेकिन तब तक वे लोग भाग चुके थे। महिलाएं भी एकजुट होकर घर के बाहर खड़ी ग्रामीणों ने डंडा, टोर्च लेकर देर रात तक तलाश करते रहे। वहीं महिलाएं भी एकजुट होकर घर के बाहर खड़ी नजर आई। बता दें कि 16 जनवरी को इसी गांव के एक बंद घर से करीब डेढ़ लाख रुपय की संपत्ति की चोरी हुई थी। जिसके बाद संदिग्ध व्यक्ति का चहल पहल ज्यादा बढ़ गया था। गांव में दूसरी चोरी की घटना ना हो इसके लिए जीतपुर गांव में पुलिस के सहयोग से ग्रामीण पिछले पांच दिनों से पहरेदारी कर रहे हैं। गांव में बाहरी लोगों के लिए प्रवेश वर्जित  चोरी की घटना के बाद से गांव में पुलिस के द्वारा दिए गए बैरियर को बीच सड़क पर लगा दिया गया है ताकि बाहरी लोगों की प्रवेश से पूर्व बैरियर में अपनी पहचान बतानी होगी।  ग्रामीणों ने कहा कि गांव में बाहरी लोगों के साथ कबाड़ी तथा फेरी करने वाले को भी अपनी पहचान बताना होगा, अन्यथा नहीं घुसने दिया जायेगा‌। गांव में कबाड़ी लेने के लिए पश्चिम बंगाल नंबर की मोपेड बाइक से घूमने वाले को भी चिन्हित किया जा रहा है। मौके पर पूर्व मुखिया जागरनाथ महतो, कपिल सिंह, पंसस सोहन महतो आदि शामिल थे। लोगों को चिन्हित किया जा रहा ग्रामीणों की सूचना पर हमलोग गांव पहुंचे। तब तक संदिग्ध युवक जंगल की ओर भाग निकले। खोजबीन किया पर उन लोगों का कुछ भी पता नहीं चल पाया, हालांकि वैसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है। – डी. हांसदा, सब इंस्पेक्टर, हरिहरपुर थाना

प्रदेश में बनेगी पहली सहकारी क्षेत्र की अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला

आम उपभोक्ता भी करा सकेंगे दूध व दुग्ध उत्पादों की जांच नेशनल डेयरी प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट अंतर्गत किया जा रहा है प्रयोगशाला का निर्माण भोपाल प्रदेश में पहली सहकारी क्षेत्र की अत्याधुनिक केन्द्रीय राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल में स्थापित की जा रही है, जिसका अधिकांश निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। यह प्रयोगशाला केन्द्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग की नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई है। मध्यप्रदेश राज्य में मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन, भोपाल में सहकारिता क्षेत्र की यह पहली राज्य स्तरीय प्रयोगशाला होगी। राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला में आम उपभोक्ता भी दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच करा सकेंगे। यदि आपके घर में आने वाले दूध या उससे बने उत्पादों में मिलावट की आशंका है, तो अब जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, जहां आम उपभोक्ता के साथ देश एवं प्रदेश की खाद्य उत्पादक संस्थाएं भी दूध और दुग्ध उत्पादों का परीक्षण करा सकेंगी। उपभोक्ताओं को मिलेगा शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद परियोजना का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाला दूध एवं दुग्ध उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना तथा खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। प्रदेश में अब तक दूध एवं दुग्ध उत्पादों की जांच एक बड़ी चुनौती रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। NABL और FSSAI से मान्यता प्राप्त होगी प्रयोगशाला यह प्रयोगशाला केंद्र शासन के मार्गदर्शन एवं वित्तीय सहयोग से स्थापित की जा रही है, जिसे (नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज) तथा (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) से मान्यता प्राप्त होगी। अत्याधुनिक मशीनें स्थापित प्रयोगशाला के निर्माण के लिये भारत सरकार द्वारा 12 करोड़ 40 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक सात मशीनों की खरीदी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष मशीनों, केमिकल्स एवं ग्लासवेयर की खरीदी प्रक्रिया जारी है। शीघ्र ही दूध एवं दुग्ध पदार्थों के परीक्षण का कार्य प्रारंभ किया जाएगा। 100 से अधिक मानकों पर होगा परीक्षण राज्य स्तरीय केन्द्रीय प्रयोगशाला में अत्याधुनिक उपकरणों के माध्यम से दूध एवं दुग्ध पदार्थों की 100 से अधिक मानकों पर जांच की जाएगी। इसमें पेस्टिसाइड्स, एंटीबायोटिक्स, हेवी मेटल्स, अफ्लाटॉक्सिन, वसा की शुद्धता, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ यूरिया, आयोडीन, माल्टोज, शुगर, नमक एवं अन्य प्रकार की मिलावटों की जांच शामिल होगी। आम उपभोक्ता और खाद्य उत्पादक संस्थाओं को सीधा लाभ इस प्रयोगशाला की सुविधा आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ देश की विभिन्न खाद्य उत्पादक संस्थाओं को भी उपलब्ध होगी। इसके स्थापित होने से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा, शुद्धता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और प्रदेश के उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।  

PCB का बड़ा प्रस्ताव: बांग्लादेश के वर्ल्ड कप मैच पाकिस्तान में कराने की तैयारी

नई दिल्ली बांग्लादेश के टी20 वर्ल्ड कप खेलने को लेकर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। उसने जिद पाल रखी है कि वह भारत में वर्ल्ड कप के मैच नहीं खेलेगा, दूसरी तरफ आईसीसी ने अब तक उसके मैच भारत से बाहर करने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। इस बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पहली बार आधिकारिक तौर पर आईसीसी के सामने पेशकश की है कि वो बांग्लादेश के मैचों की मेजबानी के लिए तैयार है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने सुरक्षा कारणों से भारत में टी20 विश्व कप खेलने से बांग्लादेश के इनकार का समर्थन किया है और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को भेजे गए एक पत्र में बांग्लादेश के मैचों की मेजबानी करने की पेशकश की है। आईसीसी बोर्ड की बैठक बुधवार को होनी है जिसमें टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी पर फैसला लिया जायेगा। बांग्लादेश को ग्रुप चरण के चारों मैच भारत में खेलने हैं जिनमें से पहले तीन कोलकाता में और एक मुंबई में होना है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने हालांकि अपनी सरकार के समर्थन से भारत जाने से इनकार किया है और उसके मैच श्रीलंका में कराने की मांग की है। पीसीबी के एक सूत्र ने बताया, ‘पीसीबी ने ईमेल में कहा है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की मांग जायज है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए और अगर बांग्लादेश के मैचों को श्रीलंका में स्थानांतरित करने में कोई समस्या आती है तो पाकिस्तान उसके सभी मैचों की मेजबानी करने के लिए तैयार है।’ आईसीसी और बीसीबी के बीच इस मसले पर कई बार बात हो चुकी है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। आईसीसी का कहना है कि टूर्नामेंट निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा जबकि बीसीबी भारत टीम नहीं भेजने पर अड़ा है। पीसीबी ने इस मसले पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है लेकिन बोर्ड के सूत्रों ने कहा कि बांग्लादेश सरकार ने आईसीसी में सहयोग के लिये पाकिस्तान से संपर्क किया था। पाकिस्तान के सारे मैच हाइब्रिड मॉडल के तहत श्रीलंका में होंगे।  

पौधरोपण कार्य में स्थानीय प्रजातियों को दी जाए प्राथमिकता : आयुक्त भोंडवे

पौधरोपण एवं पौध संरक्षण पर संभाग स्तरीय कार्यशाला हुई भोपाल नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा वर्ष 2026 में प्रस्तावित व्यापक पौधरोपण अभियान की तैयारियों के अंतर्गत “पौधरोपण एवं पौध संरक्षण” विषय पर संभाग स्तरीय कार्यशाला का आयोजन बुधवार को स्वर्ण जयंती सभागार, आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल में किया गया। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2026 का पौधरोपण केवल औपचारिक लक्ष्य पूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पौधों के संरक्षण, जीवित रहने की दर तथा दीर्घकालीन पर्यावरणीय लाभ पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि “पौधा लगाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक आवश्यक उनका संरक्षण करना है। जब तक पौधे सुरक्षित नहीं रहेंगे, तब तक पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूर्ण नहीं हो सकता।” आयुक्त श्री भोंडवे ने बताया कि प्रदेश स्तर पर सुनियोजित एवं वैज्ञानिक पद्धति से पौधारोपण सुनिश्चित करने के लिए संभाग स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। शहडोल, ग्वालियर, इंदौर, रीवा, उज्जैन, जबलपुर एवं सागर संभाग में कार्यशालाओं के आयोजन के बाद भोपाल संभाग में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधरोपण कार्य में स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए, नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाए तथा नागरिक सहभागिता को भी अभियान से जोड़ा जाए, जिससे नगरीय क्षेत्रों में स्थायी हरित विकास को गति मिल सके। एक दिवसीय प्रशिक्षण सह क्षमतावर्धन कार्यशाला में भोपाल संभाग अंतर्गत नगरीय निकायों के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, पौधरोपण प्रभारी, नोडल अधिकारी, उद्यान अधिकारी, माली वर्ग एवं स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य पौधरोपण कार्य से जुड़े मैदानी अमले को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना, पौधों के संरक्षण की प्रभावी रणनीति तैयार करना तथा नगरीय क्षेत्रों में हरित आवरण को सुदृढ़ करना रहा।  

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का हुआ लोकार्पण

श्रीमंत शंकर देव के विचार सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विविधता की नींव : डेका श्रीमंत शंकर देव के लेखनी से पूरा देश गौरवान्वित हुआ है : साय रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकरदेव के विचारों, दर्शन और साहित्य को समर्पित शोध संस्थान का भव्य लोकार्पण आज गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल रमेन डेका ने की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, डॉ. कृष्ण गोपाल जी सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी, युवा वर्ग तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मध्य एम.ओ.यू. पर भी हस्ताक्षर किया गया। एम.ओ.यू. के पश्चात दोनों ही विश्वविद्यालय के शोधार्थी एक-दूसरे विश्वविद्यालय में अंतरविषयक अनुसंधान कर सकेंगे। इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, सामानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं। डेका ने कहा कि इस शोध पीठ की स्थापना उत्तर पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमी एवं शोध के स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह शोध पीठ भारत की महान संत परंपरा, भक्ति आंदोलन और सामाजिक सुधारों पर केंद्रित अध्ययन का सशक्त केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक प्रयास देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस शोध पीठ के संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रूपये दिए गए हैं जिसके लिए उन्हांेने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया। राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव ने समाज सुधारक, शिक्षाविद, कलाकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, चित्रकार, साहित्यकार, गीतकार, संगीत और वैष्णव धर्म के प्रवर्तक व प्रचारक के रूप में ख्याति अर्जित की है। श्रीमंत शंकर देव को उत्तर पूर्व भारत के महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठ कर समरस समाज की कल्पना की। नामघर और सत्र परंपरा के माध्यम से उन्होंने समानता, करूणा और उदारता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया। श्रीमंत शंकर देव द्वारा रचित साहित्य अंकिया नाट और बोरगीत आज भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उनके विचारों ने असमिया समाज को एक सूत्र में पिरोया और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पूज्य शंकरदेव जी का कार्यक्षेत्र भले ही असम था, लेकिन उनके द्वारा सामाजिक जागरण का जो कार्य किया गया, उसका प्रभाव संपूर्ण देश पर पड़ा। श्रीमंत शंकर देव जी द्वारा रचित साहित्य, नाटक, भजन में भारतीय संस्कृति का उद्घोष है।. हमारा देश अपनी एकता और अखंडता के लिए जाना जाता है। इसके पीछे शंकरदेव जी जैसे भारत माता के सपूत हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की संस्कृति को समर्पित किया। वर्तमान और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के योगदान को बताकर हम एक सक्षम और समृद्ध भारत बना सकते हैं। इससे लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार होता है। शंकर देव जी ने अपनी एक रचना में कहा कि भारत भूमि में जन्म लेना सबसे सौभाग्य की बात है। उन्होंने 500 वर्ष पहले एक भारत का जो संदेश दिया, उसे आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ का नारा देकर साकार कर रहे हैं। मुख्य वक्ता डॉ कृष्ण गोपाल जी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा असम राज्य विविधताओं से भरा हुआ है। यहां विविध प्रकार की जनजाति भौगालिक, नदी, पहाड़, जंगल, घने वन उपस्थित है। जिस कारण यहां हजारों वर्षों से दूर दूर विविध जनजाति निवास करते है। इन जनजातियों को एक सूत्र में बांधने का महत्वपूर्व कार्य श्रीमंत शंकर देव ने किया। उन्होंने कृष्ण भक्ति के माध्यम से किया लोगो को जोड़ा। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख व्यक्तिव है उन्होंने भक्ति के साहित्य का लेखन किया, नाट्य, गायन खड़े प्रशिक्षण दिया। गांव गांव में नाम घर की स्थापना किए। आज असम के हर गांव है जिसे नाम स्थापित है। भक्ति, संस्कृति एवं सामाजिक सद्भाव का घर कहलाता है। उन्होंने श्रीमंत शंकर देव के योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे संस्कार और संस्कृति से जोड़ा। यह शोध संस्थान केवल भवन नहीं, बल्कि विचारों की कार्यशाला बनकर उभरेगा। यहाँ से निकलने वाले शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान दिलाएंगे। कार्यक्रम के अंत में संस्थान की स्थापना से जुड़े सभी सहयोगियों और प्रबंधन समिति को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की गई कि यह केंद्र भविष्य में ज्ञान, नवाचार और सत्य की खोज का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करेगा। गौरतलब है श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उत्तरपूर्वी भारत तथा मध्य भारत के भक्ति आन्दोलन से जुड़े महान संतों के योगदान एवं व्यापक प्रभाव को भारतीय जनमानस के समक्ष लेकर आना साथ ही दोनों ही क्षेत्रों के जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मौखिक परंपरा को लेखबद्ध करना है। शोधपीठ के द्वारा शोधवृत्ति भी शोधार्थियों को प्रदान किया जाएगा। शोधपीठ में भाषा, साहित्य, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय अध्ययन, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य के विषय के शोधार्थी शोधकार्य कर सकते हैं।  

अपराधियों पर ऐसी कार्यवाही करें जिससे उनके हौसले पस्त हों : मुख्य सचिव जैन

संवेदनशील होकर कानून व्यवस्था बनायें कलेक्टर-एसपी कांफ्रेंस के पालन प्रतिवेदन पर समीक्षा भोपाल मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिये है कि वे अवैध खनिज कारोबार सहित समाज विरोधी अन्य गतिविधियों को सख्ती से रोके और ऐसी कार्रवाई करें जिससे इस तरह की गतिविधियों में संलग्न लोगों के हौसले पस्त हों और भविष्य में इस तरह के अपराध नहीं हो। मुख्य सचिव श्री जैन ने भिंड मुरैना शहडोल जबलपुर और नरसिंहपुर जिलों को विशेष अभियान चलाकर इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने को कहा है। मुख्य सचिव ने कलेक्टर और एस.पी को संयुक्त बैठक करने और प्रदेश में कानून व्यवस्था ठीक बनायें रखने के लिए लक्ष्य निर्धारित कर एक्शन लेने निर्देशित किया। कलेक्टर-पुलिस अधीक्षक कान्फ्रेंस के पालन प्रतिवेदन की समीक्षा बैठक बुधवार को मंत्रालय में हुई। कांन्फ्रेंस में पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना, जिलों के कलेक्टर और एस.पी तथा अन्य पुलिस और प्रशासनिक वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कान्फ्रेसिंग से सम्मिलित हुए। बैठक में बताया गया कि कानून व्यवस्था के दृष्टिगत ऐसी बस्तियां, जहां संकरी सड़कें हैं और मूवमेंट में समस्या आती है, ऐसे स्थानों वाले 24 जिलों में अब तक जोनल प्लान तैयार किया गया है। ऐसी 1343 गलियों और बस्तियों को संवेदेनशील माना गया है और 23 जिलो में जीआईएस मैप पर अंकित किया है। शेष जिलों के अधिकारियों को आगामी 3 माह में सम्पूर्ण कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए, जिससे बेहतर पुलिसिंग हो सके। डीजीपी श्री मकवाना ने बताया कि प्रदेश में 1900 से अधिक गुम बालिकाओं को बरामद किया गया है और महिला अपराध की रोकथाम के लिए विद्यालयीन स्तर पर भी में जागरूकता अभियान चलाया गया है। मुख्य सचिव श्री जैन ने महिला अपराधों की रोकथाम के लिए जिला और पुलिस प्रशासन को संयुक्त रूप से अभियान चलाने के लिए निर्देश दिये हैं। बैठक में जानकारी दी गई कि ड्रग फ्री इंडिया अभियान के तहत अगले 3 वर्षों का एक्शन प्लान तैयार किया गया है। ड्रग एवं अन्य नशीले पदार्थ के उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष मुहिम चलाने के निर्देश दिये गए है। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि कलेक्टर और एस.पी संयुक्त बैठक करें और फोकस बिंदु पर कार्रवाई करें। बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विरूद्ध अपराधों की सख्ती से रोकथाम और ऐसे मामलों में पीड़ित पक्षकारों को निर्धारित अवधि में राहत राशि वितरित किये जाने के निर्देश दिये है। लंबित प्रकरणों में सागर के कलेक्टर और एस.पी. सहित लंबित प्रकरणों में असंतोषजनक प्रदर्शन करने वाले जिलों को संवेदनशील होकर प्रकरणों के निराकरण के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव श्री जैन ने पूरी गम्भीरता से निराकरण की समय अवधि निर्धारित करते हुए एस.ओ.पी जारी करने के निर्देश दिये। मुख्य सचिव श्री जैन ने कहा कि व्यापक प्रचार-प्रसार, जागरूकता अभियान, ब्लैक स्पॉट कम करने जैसी गतिविधियां संचालित कर सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों की संख्या में 45 से 50 प्रतिशत तक कमी लायी जा सकती है। उन्होंने गुना, डिंडौरी, मैहर मुरैना श्योपुर जैसे जिलों को और अधिक कार्य करने के निर्देश दिये। प्रदेश में 481 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किये गए है और इन्हें ठीक करने के प्रयास जारी है। बैठक में जीरो फेटिलिटी डिस्ट्रिक्ट, कैशलेस उपचार योजना पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव श्री जैन ने बताया कि कैशलेस योजना में देश के मध्यप्रदेश सहित 6 राज्य शामिल हैं और प्रधानमंत्री जल्द ही इस योजना का शुभारंभ करेंगे। परिवहन सचिव ने बताया कि प्रदेश में अब तक इस योजना में 1600 अस्पताल पंजीकृत हुए है, जिनमें सड़क दुर्घटना में पीड़ित को एक सप्ताह तक डेढ़ लाख रूपये तक इलाज मुफ्त मिलेगा। जिला स्तर पर इस योजना के क्रियान्वयन के लिए विशेषज्ञ, ट्रैफिक, स्वास्थ्य एवं एन.आई.सी के साथ संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिये गए है। मुख्य सचिव श्री जैन ने निर्देश दिए कि 15 साल से अधिक पुराने शासकीय वाहनों को तत्काल हटाया जाये। बैठक में अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिवशेखर शुक्ला ने भारतीय न्याय सहिता के सभी पहलूओं के प्रशिक्षण के लिए की गयी कार्यवाही की जानकारी दी।