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कुल्हाड़ी के हमले में घायल कैप्टन स्मित की हालत में नहीं हुआ पूरा सुधार, खोपड़ी टूटी; जल्द उड़ान भरना चाहते हैं

मुंबई  फ्लाईदुबई की तेल अवीव जा रही उड़ान में को-पायलट के हमले में घायल भारतीय कप्तान स्मित मच्छर की हालत को लेकर नया अपडेट सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, हमले में उनकी खोपड़ी टूट गई थी और चोट का असर उनकी नजर के साथ-साथ तंत्रिका तंत्र पर भी पड़ा है. सऊदी अरब में डॉक्टरों ने उनकी खोपड़ी की सर्जरी की, जिसके बाद उन्हें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ले जाया गया. अब UAE में डॉक्टर उनकी नजर और न्यूरोलॉजिकल स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं. फिलहाल, उनकी हालत स्थिर है।  स्मित मच्छर की हालत कैसी है? सूत्रों के मुताबिक, कॉकपिट में कुल्हाड़ी से हुए हमले में कप्तान स्मित मच्छर की खोपड़ी टूट गई थी. चोट की वजह से उनकी नजर प्रभावित हुई और उन्हें तंत्रिका तंत्र में भी नुकसान हुआ. सऊदी अरब में डॉक्टरों ने उनकी खोपड़ी की सर्जरी की. इसके बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए यूएई भेजा गया. वहां डॉक्टर उनकी नजर और न्यूरोलॉजिकल स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।  सूत्रों ने कहा कि भारतीय पायलट स्मित मच्छर को लगातार तेज सिरदर्द की समस्या भी हो रही है. सूत्रों के मुताबिक, दर्द से राहत देने के लिए उन्हें हेवी डोज वाली और नींद की दवाएं दी जा रही हैं. हालांकि, इस मुश्किल स्थिति के बीच स्मित का हौसला बना हुआ है. सूत्रों के मुताबिक, वह सकारात्मक हैं और बार-बार कह चुके हैं कि वह दोबारा विमान उड़ाना चाहते हैं।  जांच एजेंसियों ने दर्ज किया स्मित का बयान सूत्रों ने बताया कि स्मित का बयान जांच एजेंसियां दर्ज कर चुकी हैं. उनकी मेडिकल स्थिति को देखते हुए यह बयान घटना की पूरी तस्वीर समझने में अहम हो सकता है. जांच का मुख्य सवाल यही है कि उड़ान के दौरान कॉकपिट में आखिर क्या हुआ।  नेतन्याहू ने की फोन पर बात इससे पहले इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से शनिवार को फोन पर स्मित से बातचीत की थी. इस दौरान कैप्टन स्मित मच्छर ने बताया कि हमले से पहले सह-पायलट ने प्रार्थना करने की इच्छा जताई थी और उसका सम्मान करते हुए वह दूसरी ओर मुड़ गए थे. मच्छर ने बताया कि कुछ मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे जोरदार प्रहार महसूस हुआ और इसके बाद उन पर लगातार हमले किए गए।  नेतन्याहू ने उनसे कहा कि इतनी कठिन परिस्थितियों में उनके साहस और संयम बनाए रखने की क्षमता से वह हैरान हैं. उन्होंने कहा, ‘आपने इतनी सारी जानें बचाईं… आपने दुनिया की आत्मा को बचाया.’ विमान को सऊदी अरब में आपात स्थिति में उतारा गया था।  कॉकपिट में क्या हुआ था? दरअसल, यह घटना 30 सितंबर 2026 की है. फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट दुबई से तेल अवीव जा रही थी. करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छर पर पीछे से हमला कर दिया. हमले में मच्छर गंभीर रूप से घायल हुए और विमान तेजी से नीचे गिरने लगा. उन्होंने पहले कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन को-पायलट ने उसे बंद कर दिया. इसके बाद घायल मच्छर ने आखिरी ताकत लगाकर अंदर से दरवाजा घुमा कर खोल दिया. यात्री अंदर पहुंचे और हमलावर को काबू किया। 

दिवाली-छठ पर बिहार जाने वालों के लिए खुशखबरी! दिल्ली-पटना वंदे भारत स्पेशल का प्रस्ताव, 13 घंटे में सफर

 नई दिल्ली दिवाली और छठ के आसपास दिल्ली से बिहार जाने वाली ट्रेनों में टिकट मिलना हर साल बड़ी चुनौती बन जाता है. इस बार भी त्योहारों से पहले रेगुलर ट्रेनों में सीटों की डिमांड ऐसी रही कि 60 दिन पहले बुकिंग खुलते ही ट्रेनें फुल हो गईं. इस रूट पर रेगुलर ट्रनों में अब तत्काल कोटे का ही सहारा है, वो भी अगर रेलवे का ऐप सही-सलामत काम करे. क्योंकि सभी ट्रेनों में या तो टिकट बुकिंग रिग्रेट (Regret) हो चुकी है या वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी है कि टिकट कंफर्म होने को कोई चांस नहीं।  ऐसे में यात्रियों के लिए रेलवे की तरफ से एक नया विकल्प सामने आ सकता है. दिल्ली से पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल चलाने की तैयारी है, जिससे त्योहारों के दौरान सफर करने वाले यात्रियों को कुछ राहत मिल सकती है. रेलवे ने अभी इस ट्रेन को चलाने की अंतिम मंजूरी नहीं दी है, लेकिन उत्तर रेलवे (Nothern Railway) ने प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है. मंजूरी मिलती है तो यात्रियों को दिवाली और छठ के बीच दिल्ली-पटना रूट पर तेज रफ्तार ट्रेन का विकल्प मिल सकेगा. आइए जानते हैं यह ट्रेन कब चलेगी, कहां रुकेगी और कितना किराया हो सकता है।  कब से कब तक चल सकती है ट्रेन? प्रस्ताव के मुताबिक, दिल्ली और पटना के बीच वंदे भारत स्पेशल की सेवाएं 21 अक्टूबर से 28 नवंबर के बीच चलाने की तैयारी है. इसके लिए दो जोड़ी ट्रेनों का प्रस्ताव रखा गया है।  पहली जोड़ी 02252/02251 नई दिल्ली से 21 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चलेगी. नई दिल्ली से इसके फेरे सोमवार, बुधवार और शनिवार को प्रस्तावित हैं. वहीं पटना से वापसी 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक मंगलवार, गुरुवार और रविवार को होगी. इस जोड़ी के कुल 16 फेरे प्रस्तावित हैं।  दूसरी जोड़ी 02253/02254 पटना से 24 अक्टूबर से 28 नवंबर तक चलाने का प्रस्ताव है. पटना से इसके फेरे शनिवार, सोमवार और बुधवार को होंगे. वहीं नई दिल्ली से इसकी वापसी 22 अक्टूबर से 26 नवंबर तक रविवार, मंगलवार और गुरुवार को प्रस्तावित है।  दिल्ली-पटना 13 घंटे लेगी ट्रेन यह ट्रेन करीब 994 किलोमीटर का सफर लगभग 13 घंटे में पूरा करेगी. प्रस्तावित समय के मुताबिक, नई दिल्ली से ट्रेन सुबह 8:35 बजे रवाना होगी. रास्ते में यह अलीगढ़, कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज, पं. दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर और आरा में रुकेगी. इसके बाद ट्रेन रात करीब 9:30 बजे पटना पहुंचेगी।  वापसी में क्या होगी टाइमिंग? पटना से नई दिल्ली के लिए ट्रेन सुबह 10 बजे रवाना होने का प्रस्ताव है. यह दोपहर करीब 3:35 बजे प्रयागराज पहुंचेगी और इसके बाद रात करीब 11:30 बजे नई दिल्ली पहुंचने का समय रखा गया है. यानी दिल्ली से पटना जाने वाले यात्रियों को सुबह रवाना होकर रात तक पटना पहुंचने का विकल्प मिल सकता है. वापसी में भी सुबह पटना से निकलकर रात तक दिल्ली पहुंचा जा सकेगा।  कितना हो सकता है किराया? अगर रेलवे बोर्ड से मंजूरी मिलती है तो एसी चेयर कार का किराया भोजन सहित करीब ₹2,575 से ₹2,600 हो सकता है. वहीं एग्जीक्यूटिव चेयर कार के लिए भोजन सहित किराया करीब ₹4,650 से ₹4,680 रहने का प्रस्ताव है. यानी टिकट बुक करने से पहले यात्रियों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि उनके बजट और यात्रा के समय के हिसाब से यह विकल्प कितना सुविधाजनक बैठता है. भोजन का विकल्प टिकट बुक करते समय ही चुनना होगा. भोजन नहीं लेने पर टिकट कुछ सस्ता हो सकता है।  अभी टिकट बुक कर सकते हैं? फिलहाल नहीं. यह ट्रेन अभी प्रस्तावित है और रेलवे बोर्ड की मंजूरी का इंतजार है. मंजूरी मिलने के बाद ही रिजर्वेशन शुरू होगा. उत्तर रेलवे के सीपीआरओ के मुताबिक, मंजूरी मिलते ही आईआरसीटीसी पर बुकिंग शुरू की जाएगी. इसलिए अगर आप दिवाली या छठ के दौरान दिल्ली से पटना जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस ट्रेन की घोषणा और बुकिंग शुरू होने पर नजर रखना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।  त्योहारों में क्यों बढ़ जाती है ट्रेनों की मांग? दिवाली और छठ के समय दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर जाते हैं. खासकर छठ के दौरान घर लौटने वाले यात्रियों की संख्या काफी बढ़ जाती है. इस वजह से रेगुलर ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है. रेलवे भीड़ को संभालने के लिए अलग-अलग रूट पर स्पेशल ट्रेनें चलाता है. दिल्ली-पटना वंदे भारत स्पेशल भी इसी तैयारी का हिस्सा हो सकती है। 

‘नए उत्तर प्रदेश’ की तस्वीर सामने रखी CM योगी ने, 24,000+ स्टार्टअप और 8 यूनिकॉर्न की गिनाई उपलब्धियां

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को उप्र की प्रगति से साक्षात्कार कराया। उन्होंने 2017 के बाद प्रदेश की उड़ान को अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट किया। वहीं पूर्ववर्ती सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो, तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा? पूर्ववर्ती सरकारों ने अनलिमिटेड पोटेंशियल का नहीं किया उपयोग मुख्यमंत्री ने लिखा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश के अनलिमिटेड पोटेंशियल का उपयोग नहीं किया, बल्कि इसे 'बीमारू' ही बनाए रखा। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत का जो विजन दिया, डबल इंजन सरकार ने उसे उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा है। मोबाइल से मॉड्यूल और माइक्रोचिप तक पहुंच रही विकास यात्रा मुख्यमंत्री ने बताया कि आज साढ़े 9 वर्ष के भीतर देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी है। जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की HCL-Foxconn चिप इकाई बन रही है, 644 मेगावाट के डेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके हैं और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप व8 यूनिकॉर्न हैं। यानी यात्रा मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप तक पहुंच रही है। 2017 से पहले सैफई महोत्सव ही था सांस्कृतिक उत्थान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से पहले की तस्वीर भी दिखाई। कहाकि आज के परिदृश्य से अलग पहले सिर्फ घोषणाएं होती थीं, पर परियोजनाएं जमीन पर उतरने के लिए संघर्ष करती थीं। क्योंकि तब परिवारवाद ही विकास था, सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान और माफियाकरण ही औद्योगिकीकरण का मॉडल बन गया था। भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा उप्र मुख्यमंत्री ने बताया कि हमने प्राथमिकता बदली। परिवार के विकास की जगह प्रदेश का विकास, माफिया के संरक्षण की जगह निवेशक का संरक्षण और तुष्टीकरण की जगह टेक्नोलॉजी पर जोर दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स बढ़ा तो डेटा सेंटर की आवश्यकता बढ़ी और डेटा बढ़ा तो आज उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर से एआई सिटी तक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा है। तकनीक का निर्माता बन रहा उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने बताया कि एआई-प्रज्ञा के माध्यम से 10 लाख युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम भी युवाओं को नौकरी खोजने वाले से आगे बढ़ाकर रोजगार देने वाला बना रहा है। कभी उत्तर प्रदेश तकनीक का बाजार था, आज उसका निर्माता बन रहा है। असेंबली से एआई तक यह यात्रा केवल तकनीक की नहीं, हमारे युवाओं के रोजगार, उद्यम और समृद्धि की यात्रा है। 'नए उत्तर प्रदेश' की दिख रही नई उड़ान सीएम ने बताया कि इसी कड़ी में आज (मंगलवार) लखनऊ में एचसीएल टेक की स्थापना के 10 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता करूंगा। इस अवसर पर HCL GUVI Emerging Tech Skilling Centre का शुभारंभ भी होगा। 'विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश' के संकल्प के साथ यही 'नए उत्तर प्रदेश' की नई उड़ान है।

ऊर्जा मंत्री तोमर का बड़ा ऐलान, MP ट्रांसको ने HTLS कंडक्टर से बढ़ाई ट्रांसमिशन क्षमता

एमपी ट्रांसको ने शुरू किया एचटीएलएस कंडक्टर से क्षमता उन्नयन: ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती विद्युत मांग तथा ट्रांसमिशन नेटवर्क पर बढ़ते पावर फ्लो को देखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने ग्वालियर के महत्वपूर्ण 132 केवी पारेषण नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने का कार्य शुरू कर दिया है। इसके तहत मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों में लगे एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों को अत्याधुनिक हाई टेम्परेचर लो सैग (एचटीएलएस) कंडक्टरों से बदला जा रहा है। कार्य पूर्ण होने पर इन लाइनों की विद्युत पारेषण क्षमता करीब तीन गुना तक बढ़ सकेगी। 39.8 सर्किट किलोमीटर लाइन में शुरू हुआ क्षमता उन्नयन कार्य ऊर्जा मंत्री तोमर ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत 220 केवी महलगांव सबस्टेशन से जुड़े 132 केवी डीसीडीएस महलगांव-तिघरा तथा महलगांव-मोतीझील सर्किटों में कंडक्टर बदलने का कार्य शुरू हो गया है। कुल लगभग 39.8 सर्किट किलोमीटर लाइन में मौजूदा एसीएसआर पैंथर कंडक्टरों के स्थान पर पैंथर समतुल्य एचटीएलएस कंडक्टर लगाए जा रहे हैं। इससे इन महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइनों की करंट वहन क्षमता बढ़ेगी और मौजूदा नेटवर्क से अधिक विद्युत शक्ति का पारेषण संभव हो सकेगा। सबस्टेशनों मे भी होगा अपरेटिंग का कार्य कंडक्टर बदलने के साथ संबंधित सबस्टेशनों के फीडर बे और उपकरणों की क्षमता का भी उन्नयन किया जा रहा है। इसके तहत 220 केवी महलगांव सबस्टेशन में दो 132 केवी फीडर बे, 132 केवी मोतीझील सबस्टेशन में एक तथा 132 केवी तिघरा सबस्टेशन में एक फीडर बे के अपरेटिंग का कार्य भी शुरू किया गया है। इससे लाइन और सबस्टेशन उपकरणों की क्षमता में आवश्यक सामंजस्य स्थापित होगा।  मौजूदा कॉरिडोर से ही बढ़ेगी  तीन गुना पारेषण क्षमता एचटीएलएस कंडक्टरों की करंट वहन क्षमता पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में काफी अधिक होती है। इसके कारण मौजूदा ट्रांसमिशन लाइन के उसी कॉरिडोर में करीब तीन गुना अधिक पावर का पारेषण किया जा सकेगा। इस तकनीक के माध्यम से बिना नया ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए मौजूदा नेटवर्क की क्षमता बढ़ाई जा रही है। बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर किया जा रहा उन्नयन ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि ग्वालियर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार और बढ़ती निर्माण एवं औद्योगिक गतिविधियों के कारण विद्युत मांग में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं नए ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) उपलब्ध कराना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर में ही क्षमता बढ़ाना महत्वपूर्ण तकनीकी विकल्प है। पावर फ्लो का बेहतर प्रबंधन होगा संभव एचटीएलएस कंडक्टरों के माध्यम से महत्वपूर्ण 132 केवी लाइनों की क्षमता बढ़ने से पावर फ्लो का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा और इन लाइनों पर अतिरिक्त ऑपरेशनल मार्जिन उपलब्ध होगा। संबंधित स्विचयार्ड और फीडर बे उपकरणों के उन्नयन से बढ़ी हुई पारेषण क्षमता का प्रभावी उपयोग भी सुनिश्चित होगा। ग्वालियर शहर के बढ़ते लोड को पूरा करने में होगा सहायक  ट्रांसमिशन लाइन की इस क्षमता उन्नयन से ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों की बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं के अनुरूप पारेषण नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही मौजूदा ट्रांसमिशन कॉरिडोर और उससे जुड़े स्विचयार्ड एवं फीडर बे इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा। ज्यादा लोड वहन करने व अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम उल्लेखनीय है कि एचटीएलएस कंडक्टर पारंपरिक एसीएसआर कंडक्टरों की तुलना में अधिक तापमान पर कार्य करने में सक्षम होते हैं और उच्च तापमान पर भी इनका सैग अपेक्षाकृत कम रहता है। कंडक्टर की अधिक थर्मल करंट वहन क्षमता के कारण मौजूदा ट्रांसमिशन नेटवर्क से अधिक पावर का पारेषण किया जा सकता है।  

UPI पर चार्ज पड़ा तो बदलेंगे पेमेंट का तरीका! 76% यूजर्स एक्स्ट्रा फीस देने को तैयार नहीं

नई दिल्ली यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) भुगतान पर 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने के बाद UPI ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू में करीब 10% और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की गिरावट आ सकती है. LocalCircles के मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है. सर्वे के मुताबिक, MDR लागू होने के बाद अधिक राशि वाले UPI भुगतान का एक हिस्सा कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और बैंक ट्रांसफर की ओर जा सकता है।  ₹2,000 से अधिक के भुगतान UPI वैल्यू का 67% LocalCircles के CEO सचिन तापड़िया के मुताबिक, यह अनुमान MDR लागू होने से पहले किए गए अलग-अलग मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे पर आधारित है. अगस्त में ₹2,000 से अधिक के भुगतान मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का केवल करीब 4% थे, लेकिन इनका हिस्सा कुल मर्चेंट UPI भुगतान की वैल्यू में 67% था. इन भुगतानों की कुल राशि करीब ₹6 लाख करोड़ प्रति माह बैठती है।  अगस्त 2026 में UPI के जरिए कुल 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ रही. इनमें मर्चेंट भुगतान की संख्या 15.51 अरब और वैल्यू ₹8.95 लाख करोड़ रही. ऐसे में ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट भुगतान संख्या में कम होने के बावजूद UPI की कुल वैल्यू पर बड़ा असर डाल सकते हैं।  MDR लगने पर 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका 2 अक्टूबर को जारी LocalCircles के कंज्यूमर सर्वे में 76% लोगों ने कहा कि अगर UPI इस्तेमाल करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे बड़े भुगतानों के लिए कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल कर सकते हैं. केवल 14% लोगों ने कहा कि अगर मर्चेंट MDR का बोझ उन पर डालता है तो वे अतिरिक्त राशि देकर भी UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे।  अगर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर मर्चेंट ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क लेता है, तो 27% लोग कैश का इस्तेमाल करेंगे, जबकि 26% क्रेडिट कार्ड की ओर जाने की बात कही. 14% डेबिट कार्ड और 4% बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS का इस्तेमाल कर सकते हैं. भविष्य में ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए 26% लोगों ने क्रेडिट कार्ड और इतने ही लोगों ने कैश को पसंदीदा विकल्प बताया. 13% ने डेबिट कार्ड और 11% ने बैंक ट्रांसफर को प्राथमिकता दी. वहीं, केवल 20% लोगों ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क लगने के बावजूद UPI उनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला माध्यम रहेगा।  UPI वॉल्यूम पर 4% असर का अनुमान LocalCircles के मुताबिक, MDR लागू होने के पहले पूरे महीने में UPI की कुल वैल्यू में करीब 10% की गिरावट आ सकती है. वहीं, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की कमी का अनुमान है।  इस 4% गिरावट में करीब 1% सीधा असर उन ट्रांजैक्शन पर पड़ सकता है जिन पर MDR लागू होगा. बाकी करीब 3% गिरावट उपभोक्ताओं के भुगतान व्यवहार में बदलाव से हो सकती है. यानी जहां मर्चेंट अतिरिक्त शुल्क लगाएंगे, वहां ग्राहक UPI के बजाय दूसरे भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं।  ### ₹2,000 तक UPI भुगतान पर नहीं लगेगा शुल्क MDR एक तरह का शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट की ओर से बैंक और भुगतान कंपनियों को दिया जाता है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति से मर्चेंट (P2M) UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा।  सरकार ने 14 सितंबर को ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो चार्ज जारी रखने का फैसला किया था. UPI QR कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट भी प्रस्तावित MDR से बाहर रहेंगे. LocalCircles का अनुमान है कि मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का करीब 96% हिस्सा इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होगा।  सरकार ने कहा- ग्राहकों से MDR नहीं वसूला जाएगा सरकार का कहना है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सितंबर में कहा था कि इस शुल्क की जिम्मेदारी ग्राहकों की नहीं है. सरकार भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ मिलकर ऐसा तंत्र तैयार कर रही है, जिसके जरिए बैंक मर्चेंट्स की निगरानी कर सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि MDR ग्राहकों से न वसूला जाए।  ज्यादातर मर्चेंट MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं LocalCircles के 32,796 मर्चेंट्स के सर्वे में 41% ने कहा कि वे ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं देंगे. वहीं, 9% मर्चेंट UPI भुगतान स्वीकार ही नहीं करते. सिर्फ 17% मर्चेंट 0.4% या उससे अधिक MDR वहन करने के लिए तैयार दिखे. 15% ने कहा कि वे अधिकतम 0.04% MDR ही स्वीकार करेंगे।  LocalCircles के मुताबिक, MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं होने वाले मर्चेंट कीमत बढ़ा सकते हैं, अलग से शुल्क लगा सकते हैं या ग्राहकों को कैश, कार्ड और बैंक ट्रांसफर जैसे विकल्पों की ओर भेज सकते हैं।  जीरो MDR व्यवस्था में हो रहा बदलाव प्रस्तावित MDR व्यवस्था UPI पर लंबे समय से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था में बड़ा बदलाव है. UPI के विस्तार में इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. अगस्त में संसद ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया था. इससे RuPay डेबिट कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने पर लगी व्यापक रोक हट गई और केंद्र को यह तय करने की अनुमति मिली कि किन भुगतान माध्यमों को शुल्क मुक्त रखा जाएगा।  सरकार ने UPI सिस्टम को बनाए रखने की लागत का भी हवाला दिया है. UPI ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहन राशि वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर ₹3,631 करोड़ पहुंच गई थी, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है. वित्तीय सेवा विभाग ने संसदीय समिति को बताया है कि लंबे समय तक जीरो MDR व्यवस्था को बनाए रखना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं हो सकता।  नई व्यवस्था में ₹2,000 तक के भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं होगा. ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े भुगतान पर ₹5 का फ्लैट शुल्क होगा, जबकि कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान पर 0.02% … Read more

बुंदेलखंड में चीतों की नई दहाड़, CM मोहन यादव आज 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती रिजर्व में छोड़ेंगे 2 चीते

सागर  वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर आज सात अक्तूबर को सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस रिजर्व में दो चीतों को खुले वातावरण में छोड़ेंगे। इस पहल से बुंदेलखंड की धरती पर वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत होगी। उक्त आशय की जानकारी खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दी है। उन्होंने कहा कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों का आगमन सागर सहित पूरे बुंदेलखंड के लिए अत्यंत गौरव की बात है। खुले मैदानों और घास के क्षेत्रों के प्रमुख वन्यजीव चीते की मौजूदगी से इस क्षेत्र की जैव विविधता को एक विशिष्ट पहचान मिलेगी। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर सागर और बुंदेलखंड के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में कूनो से लाए गए दो चीतों को विमुक्त करेंगे। इसके साथ ही यह मध्यप्रदेश में चीतों का तीसरा आवास बन जाएगा। चीतों की मौजूदगी से सागर और बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर सृजित होंगे। देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटकों के यहां पहुंचेंगे, जिससे होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसाय और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। सागर और बुंदेलखंड के लिए बड़ी सौगात मंत्री राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। यह योजना केवल वन्यजीवों को बसाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सागर और बुंदेलखंड में पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। चीतों की सुरक्षा और मेहमाननवाजी के लिए रिजर्व क्षेत्र में लगभग 439 हेक्टेयर का विशेष सुरक्षित और अनुकूल वातावरण वाला क्षेत्र विकसित किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सतत निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सभी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। 439 हेक्टेयर क्षेत्र में चीतों के लिए विशेष व्यवस्थाएं कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को मध्यप्रदेश में चीतों के तीसरे आवास के रूप में विकसित किया गया है। चीतों की सुरक्षा और अनुकूलन के लिए लगभग 439 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आधुनिक बाड़ों (बोमा) और अन्य सुविधाओं से युक्त सुरक्षित आवास तैयार किया गया है। वन विभाग द्वारा चीतों की सुरक्षा, नियमित निगरानी और स्वास्थ्य देखभाल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही, क्षेत्र में मौजूद अन्य वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया गया है। प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, जिसे नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है, सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। वर्ष 1997 में स्थापित इस क्षेत्र को नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य के साथ एकीकृत करने के बाद 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू सहित विविध वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है तथा संकटग्रस्त भारतीय गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है। चीता पुनर्स्थापना अभियान को मिला नया विस्तार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को विमुक्त कर भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए। अब यह अभियान मध्यप्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों तक विस्तार ले रहा है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों की विमुक्ति इसी व्यापक संरक्षण अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी है। देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 5 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में भारत में जन्मी मादा चीता KJP21 ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। इसके साथ देश में चीतों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है, जिनमें 41 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। 7 अक्टूबर को कूनो से नर थोलो और मादा CCB-3 को वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व लाया जाएगा। इनके स्थानांतरण के बाद कूनो में 54 चीतें रहेंगे। गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में दक्षिण अफ्रीकी मूल के नर चीते प्रभास और पावक, मादा धीरा तथा सितंबर 2026 में बोत्सवाना से लाकर विमुक्त की गई मादा राधा मौजूद हैं। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों की विमुक्ति के साथ मध्यप्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश करेगा। बढ़ेगा वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय रोजगार मंत्री राजपूत के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की ओर आकर्षित होंगे। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, परिवहन, गाइड, वाहन चालक, छोटे व्यवसायी और हस्तशिल्प कलाकारों को रोजगार तथा आय के नए अवसर मिलेंगे। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को तीव्र गति मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाए गए चीतों को छोड़कर देश में चीता पुनर्स्थापना अभियान की ऐतिहासिक शुरुआत की थी। उसी व्यापक अभियान की अगली कड़ी के रूप में अब प्रदेश के अन्य उपयुक्त वनों में चीतों को बसाया जा रहा है। 

लाड़ली बहना 41वीं किस्त: दुर्गा पूजा से पहले मिल सकते हैं ₹1,500, लाभार्थी जरूर करें ये काम

भोपाल  त्योहार के समय लोगों को उम्मीद है कि सरकारी योजनाओं के पैसे जल्द मिलेंगे. मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना चलायी जाती है. जिसमें हर महीने 1500 रुपये की किस्त सीधे बैंक अकाउंट में भेजे जाते हैं. सितंबर महीने में मध्य प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना की 40वीं किस्त जारी की गई थी, जो 13 सितंबर को महिलाओं के अकाउंट में ट्रांसफर किया गया था. वहीं अब महिलाओं को अक्टूबर महीने में आने वाली 41वीं किस्त का इंतजार है।  'मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना' राज्य की करीब 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए एक बड़ा आर्थिक संबल बन चुकी है. अब सभी लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का दुर्गा पूजा से पहले मिलने का बेसब्री से इंतजार है।  कब आएगी लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त? सरकार हर महीने लाड़ली बहना योजना की किस्त 10 से 15 तारीख के बीच जारी करती है. ऐसे में लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त 10 से 12 अक्टूबर के बीच जारी करने की पूरी संभावना है. सरकार ने कई बार त्योहार के अवसर पर समय से पहले योजना के पैसे जारी करती है. 11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होने वाली है तो माना जा रहा है कि सरकार दुर्गा पूजा से पहले ही महिलाओं के अकाउंट में 41वीं किस्त भेज सकती है. आधिकारिक घोषणा होते ही राशि सीधे महिलाओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से जमा कर दी जाएगी।  किस्त आने से पहले कर लें जरूरी काम कई बार तकनीकी समस्याओं या बैंक की जानकारी में गड़बड़ी की वजह से किस्त रुक जाती है. ऐसे में पैसे ट्रांसफर होने से पहले ये जरूरी काम जरूर जांच लें।  पात्र महिलाओं का बैंक अकाउंट आधार से लिंक होना जरूरी है. वरना किस्त रोकी जा सकती है।  बैंक में जाकर सुनिश्चित करें कि आपके खाते पर डीबीटी (Direct Benefit Transfer) सुविधा चालू है।  समग्र पोर्टल पर आपकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए. अधूरा ई-केवाईसी होने पर अगली किस्त रुक सकती है।  कैसे चेक करे किस्त का स्टेटस? अगर आप देखना चाहते हैं आपका आवेदन स्वीकृत है या नहीं या पिछली किस्तों का स्टेटस क्या है, तो आप योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibehna.mp.gov.in पर जाएं. यहां आप आवेदन एवं भुगतान की स्थिति के ऑप्शन पर क्लिक करें और अपने समग्र आईडी या आवेदन नंबर दर्ज करें. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर OTP आएगा उससे वेरिफाई करें. इसके बाद आपके सामने भुगतान की सारी जानकारी दिखने लगेगी।  बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत? अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं।  किस्त से पहले ये काम जरूर जांच लें किस्त आने से पहले लाभार्थी महिलाओं को अपने बैंक खाते और योजना की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए. सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है. संयुक्त बैंक खाता मान्य नहीं है. बैंक खाते में आधार लिंक होना चाहिए और डीबीटी भी चालू होना जरूरी है. इसके अलावा समग्र पोर्टल पर आधार की ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए. अगर बैंक खाते, आधार, मोबाइल नंबर या समग्र की जानकारी में कोई गलती है, तो उसे समय रहते ठीक करा लेना चाहिए. इससे किस्त आने के समय परेशानी नहीं होगी।  ऐसे चेक करें 41वीं किस्त का स्टेटस     सबसे पहले लाड़ली बहना योजना की आधिकारिक वेबसाइट (cmladlibehna.mp.gov.in) खोलें.     वहां ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ विकल्प पर क्लिक करें.     अब अपना आवेदन नंबर या समग्र आईडी डालें     इसके बाद कैप्चा भरें.     रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को डालकर वेरिफिकेशन करें.     वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद स्क्रीन पर आवेदन और किस्त से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी.     लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आएगी? जानें लेटेस्ट अपडेट पैसा नहीं आए तो क्या करें? अगर किस्त जारी होने के बाद भी खाते में पैसा नहीं पहुंचता है तो महिला लाड़ली बहना योजना के हेल्पडेस्क नंबर 0755-2700800 पर संपर्क कर सकती है. योजना के आधिकारिक पोर्टल पर भी हेल्पडेस्क की जानकारी दी गई है।  इसके अलावा भुगतान से जुड़ी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 के जरिए भी दर्ज कराई जा सकती है. इसलिए किस्त जारी होने के बाद सबसे पहले बैंक खाते की स्थिति और योजना के भुगतान स्टेटस की जांच जरूर करें। 

8th Pay Commission: जनवरी 2026 से लागू होंगी सिफारिशें तो DA पर भी पड़ेगा असर, जानें क्या बदलेगा

नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता यानी डीए में बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार है। साल की दूसरी छमाही के लिए डीए बढ़ोतरी का ऐलान इसी महीने यानी अक्टूबर में ही होने की उम्मीद है। आठवें वेतन आयोग के दौर में यह दूसरी बार होगा जब सरकार महंगाई भत्ते का ऐलान करेगी। इससे पहले अप्रैल महीने में भी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए डीए को 2 पर्सेंट बढ़ाया गया था। कब हुआ था 8वें वेतन आयोग का गठन वैसे तो सरकार ने पिछले साल जनवरी महीने में ही आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया था लेकिन 2025 के नवंबर महीने में टर्म्स ऑफ रेफरेंस और समिति का गठन हुआ। इससे एक महीने पहले यानी अक्टूबर 2025 में सातवें वेतन आयोग के आखिरी दौर में सरकार ने डीए बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया था। बता दें कि सातवें वेतन आयोग की अवधि दिसंबर 2025 में खत्म हो गई। अब ऐसा माना जा रहा है कि सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें जब लागू करेगी तो जनवरी 2026 से ही प्रभावी होगा। अप्रैल में पहली बार डीए का ऐलान आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद सरकार ने अप्रैल महीने में पहली बार डीए का ऐलान किया था। यह ऐलान जनवरी से जून छमाही के लिए किया गया था। डीए में 2 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई और इसका कैल्कुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत ही किया गया। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों का भत्ता 60 पर्सेंट है। कितनी हो सकती है बढ़ोतरी? केंद्र सरकार के कर्मचारियों को फिलहाल 60 पर्सेंट की दर से डीए मिल रहा है। AICPI-IW के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर DA में 4 से 5 पर्सेंट बढ़ोतरीका अनुमान लगाया जा रहा है। अगर यह बढ़ोतरी होती है तो केंद्रीय कर्मचारियों का डीए 64 पर्सेंट से 65 पर्सेंट का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। हालांकि, अंतिम डीए दर का फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। बता दें कि 8वां वेतन आयोग कर्मचारियों के पूरे वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन की समीक्षा कर रहा है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में फिटमेंट फैक्टर सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। इसके आधार पर नए वेतन ढांचे में बेसिक पे में बड़ा बदलाव हो सकता है। वहीं, डीए पर क्या फैसला होगा, इसके बारे में वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद ही फैसला होगा। ऐसा अनुमान है कि वेतन आयोग अपनी सिफारिशें मई या जून 2027 तक सरकार को सौंप देगा। इसके बाद सरकार इसे लागू करेगी।

पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की तैयारी? ‘पश्चिम बंगा’ पर अगले विधानसभा सत्र में आ सकता है बिल

कलकत्ता पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि सीएम सुवेंदू अधिकारी की सरकार जल्द विधानसभा में नाम बदलने का विधेयक ला सकती है. उन्होंने दावा किया कि अगले विधानसभा सत्र में पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंगा’ करने का प्रस्ताव रखा जा सकता है. बीजेपी नेता के मुताबिक यह फैसला राज्य को उसके इतिहास और बंगाली पहचान से जोड़ने के मकसद से लिया गया है. पिछले 27 सान में तीन बार पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशें राज्‍य सरकारों की तरफ से की गई. हालांकि केंद्र और राज्‍य में अलग अलग पार्टी की सरकार होने के कारण पहले ऐसा नहीं हो सका. इस बार इस बात की संभावना प्रबल है कि वेस्‍ट बंगाल का नाम बदलकर पश्चिम बंगा रख दिया जाए।  अब वेस्‍ट बंगाल नहीं, पश्चिम बंगा? समिक भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लोगों को जल्द ‘बांग्ला’ या ‘वेस्‍ट बंगाल जैसे नामों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बहुत जल्द विधानसभा में विधेयक पेश करेगी. हालांकि यह प्रस्ताव कब और किस प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, इसकी अंतिम स्थिति विधानसभा में विधेयक आने के बाद ही साफ होगी. नाम बदलने का मुद्दा पश्चिम बंगाल में नया नहीं है. इसके पीछे बंगाली पहचान और औपनिवेशिक दौर से जुड़े नाम को बदलने की दलील पहले भी दी जाती रही है. लेकिन राजनीतिक सहमति और केंद्र की मंजूरी नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।  1999 से चल रही नाम बदलने की कहानी पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिशों का इतिहास करीब ढाई दशक पुराना है. 1999 में ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार ने पश्चिम बंगा नाम रखने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था. उस समय बांग्ला नाम पर भी चर्चा हुई थी. प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया लेकिन मंजूरी नहीं मिली. 2011 में ममता बनर्जी सरकार आने के बाद यह मुद्दा फिर उठा. उस समय पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव रखा गया. सरकार का तर्क था कि अंग्रेजी वर्णक्रम में वेस्‍ट बंगाल नीचे आता है. इससे राष्ट्रीय बैठकों में राज्य के प्रतिनिधियों को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ता है. हालांकि केंद्र ने इसे मंजूरी नहीं दी।  2016 में फिर बदला प्रस्ताव 2016 में नाम बदलने की कवायद दोबारा शुरू हुई. सरकार ने अलग-अलग भाषाओं में ‘बांग्ला’, ‘बंगाल’ और ‘बंगाल’ जैसे नामों पर विचार किया. 2018 में विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘बांग्ला’ नाम रखने का प्रस्ताव पास किया. यह प्रस्ताव भी केंद्र की मंजूरी हासिल नहीं कर सका. केंद्र की ओर से संवैधानिक संशोधन की जरूरत बताई गई. साथ ही बीजेपी के एक वर्ग ने ‘बांग्ला’ नाम को बांग्लादेश से मिलता-जुलता होने पर आपत्ति जताई थी. यानी नाम बदलने की कोशिश कई बार हुई लेकिन हर बार मामला राजनीतिक और संवैधानिक पेच में फंस गया।  वाराणसी में बनेगा पश्चिम बंगा भवन समिक भट्टाचार्य ने वाराणसी में प्रस्तावित ‘पश्चिम बंगा भवन’ की जानकारी भी दी. उनके मुताबिक राज्य का संस्कृति और पर्यटन विभाग केंद्र और कूचबिहार के राजपरिवार के वंशजों के साथ मिलकर इसकी योजना पर काम कर रहा है. यह भवन सांस्कृतिक केंद्र के साथ बंगाल से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए ठहरने की जगह भी होगा. इसमें सम्मेलन कक्ष, पुस्तकालय और बंगाली साहित्य व गीतों का संग्रह प्रस्तावित है. वाराणसी और बंगाल के पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध को भी इस परियोजना की बड़ी वजह बताया गया है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार पश्चिम बंगा नाम का प्रस्ताव विधानसभा से आगे निकलकर केंद्र की मंजूरी तक पहुंच पाएगा? पिछले अनुभवों को देखते हुए इस पर सबकी नजर रहेगी।