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MP में डॉक्टरों को रोकने की कवायद तेज, कलेक्टर्स को मिली जिम्मेदारी; 2,601 बॉन्डेड डॉक्टरों ने संभाली सेवा

भोपाल मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी को पाटने के लिए एक अहम और सख्त कदम उठाया है। इस साल राज्यभर के जिला और ब्लॉक-स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर 3,118 बॉन्डेड डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई है। विभाग का मुख्य संदेश बिल्कुल साफ है- 'डॉक्टरों को नौकरी छोड़ने नहीं देना है।' इसके लिए प्रशासन ने सभी जिला कलेक्टरों को मैदान में उतरकर इन युवा डॉक्टरों की शुरुआती समस्याओं को समझने और उन्हें पूरी सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। बॉन्ड नियमों के पालन में आया रिकॉर्ड उछाल पिछले कुछ वर्षों के मुकाबले इस बार अनिवार्य बॉन्ड प्रणाली का अनुपालन काफी बेहतर रहा है:     इस साल कुल 3,118 डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई।     इनमें से 2,601 डॉक्टर (यानि 83% से अधिक) पिछले हफ्ते तक अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर चुके हैं।     तुलनात्मक रूप से देखें तो साल 2025 में यह आंकड़ा मात्र 39.5% और 2024 में 42% था।     इतनी बड़ी संख्या में डॉक्टरों के जुड़ने से राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी का आंकड़ा जो पहले करीब 5,000 था, अब घटकर लगभग 2,000 के आसपास रह जाने की उम्मीद है। नई चुनौतियों से पार पाना बड़ी प्राथमिकता स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस समय सबसे बड़ी चिंता इन डॉक्टरों के रिटेंशन (नौकरी में टिके रहना) को लेकर है। इनमें से अधिकांश युवा डॉक्टर पहली बार बड़े शहरों से बाहर दूरदराज और आदिवासी जिलों में काम करने पहुंचे हैं। वहां उन्हें आवास, भोजन, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर कई तरह की शुरुआती परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग का मानना है कि यदि शुरुआती महीनों में इन्हें एक सकारात्मक और अनुकूल माहौल मिल जाए, तो उनके नौकरी छोड़ने के मामलों में भारी कमी आएगी। जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपील इस दिशा में कलेक्टर्स को विशेष रूप से ब्रीफ किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में डॉक्टरों के रहने और काम करने की स्थितियों की समीक्षा के लिए ओरिएंटेशन सत्र आयोजित करें। इसके अलावा, विभाग ने स्थानीय विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क साधा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके समर्थक या स्थानीय लोग डॉक्टरों पर अनावश्यक दबाव न बनाएं, बल्कि एक सकारात्मक और सहयोगी रुख अपनाएं। क्या हैं मेडिकल बॉन्ड के कड़े नियम?     मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए नियम स्पष्ट हैं:     सामान्य वर्ग के एमबीबीएस स्नातक: ग्रामीण क्षेत्रों में 1 साल की अनिवार्य सेवा, ऐसा न करने पर 10 लाख रुपये का जुर्माना।     एससी/एसटी वर्ग: नियम के तहत एक साल की सेवा और जुर्माना राशि 5 लाख रुपये।     मेरिटोरियस/सीएम वेलफेयर योजना: सरकारी कॉलेजों से पढ़ने वाले इन छात्रों को 2 साल की सेवा देनी होगी और 10 लाख रुपये का बॉन्ड पेनल्टी है।     निजी कॉलेज के छात्र (सरकारी फीस पर): जिन छात्रों की फीस सरकार ने उठाई है, उन्हें 5 साल की सेवा देनी होगी और 25 लाख रुपये का जुर्माना प्रावधान है।     नॉन-सर्विस पीजी छात्र (MD/MS): 1 वर्ष की सेवा और 10 लाख रुपये जुर्माना।     इन-सर्विस उम्मीदवार, डिमॉन्स्ट्रेटर और मेडिकल ऑफिसर: इनके लिए 5 साल की अनिवार्य सेवा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान तय किया गया है।

भूमि नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने वाले जावर के पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर पर अभियोजन की स्वीकृति

भूमि नामांतरण के एवज में रिश्वत मांगने वाले जावर के पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति 8 हजार रुपये रिश्वत मांगने के प्रकरण में कलेक्टर सीहोर  बालागुरु के. ने जारी किया आदेश भोपाल राजस्व प्रशासन में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामलों में जिला स्तर पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। कलेक्टर सीहोर श्री बालागुरु के. ने जावर तहसील में पदस्थ पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन की स्वीकृति प्रदान की है। यह कार्रवाई लोकायुक्त में दर्ज शिकायत और जांच में सामने आए तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। जारी आदेश के अनुसार, पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया था कि पटवारी द्वारा भूमि नामांतरण के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के सत्यापन में 8 हजार रुपये रिश्वत मांगने की पुष्टि जारी आदेश के अनुसार शिकायत के सत्यापन के लिए निरीक्षक श्री मुकेश तिवारी द्वारा शिकायतकर्ता को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया गया।रिकॉर्डिंग के दौरान पटवारी द्वारा 8 हजार रुपये रिश्वत लेने पर सहमति व्यक्त की गई। इसके बाद स्वतंत्र पंच साक्षियों की उपस्थिति में रिकॉर्डेड वार्तालाप का अवलोकन कर प्रारंभिक पंचनामा तैयार किया गया और जावर जाकर ट्रेप की कार्रवाई की गई। रिकॉर्ड की गई बातचीत में रिश्वत की मांग स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुई। एफएसएल जांच में पटवारी की आवाज प्रमाणित सीहोर जिले के तहसील कार्यालय जावर में पंचों की उपस्थिति में वॉयस रिकॉर्डर और मेमोरी कार्ड का जप्ती पंचनामा तैयार कर उन्हें सीलबंद किया गया। आरोपी पटवारी की आवाज का नमूना (वॉइस सैंपल) लेकर एफएसएल भोपाल भेजा गया। एफएसएल रिपोर्ट में रिकॉर्ड की गई आवाज को पटवारी श्री राठौर की आवाज होना प्रमाणित किया गया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पंजीबद्ध हुआ प्रकरण धर्मेन्द्र सिंह राठौर, पटवारी हल्का नंबर 24, तहसील जावर, जिला सीहोर के विरुद्ध लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करते हुए भूमि नामांतरण के लिए 8 हजार रुपये रिश्वत की मांग करने का आरोप है। प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के आधार पर कलेक्टर सीहोर श्री बालागुरु के. ने माना कि आरोपी के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 19(1)(बी) एवं (सी) के प्रावधानों के तहत सक्षम प्राधिकारी की अभियोजन स्वीकृति आवश्यक होने से कलेक्टर सीहोर द्वारा पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध न्यायालय में अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

मध्यप्रदेश में खनन का नया मॉडल, निजी कंपनियों को मिलेगी हिस्सेदारी; 30 हजार करोड़ राजस्व का लक्ष्य

भोपाल  प्रदेश की धरती में छिपे खनिज संसाधनों की तलाश अब राज्य सरकार निजी कंपनियों के माध्यम से कराएगी। इसके लिए खनिज विभाग ने मिनरल एक्सप्लोरेशन पॉलिसी तैयार की है। इसमें कंपनियों को खनिजों की खोज के बदले उत्खनन में हिस्सेदारी देने का प्रावधान किया जा रहा है। इससे सरकार को खनिजों की खोज पर सीधे राशि खर्च नहीं करनी पड़ेगी और पर कार खनिज धडार मिलने पर राजस्व अवसर भी बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पॉलिसी पर आगे काम बढ़ाने का अनुमोदन कर दिया है। पॉलिसी में खासतौर पर क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ एलीमेंट की खोज (Critical Rare Earth Minerals Mining) पर जोर दिया गया है। इन खनिजों की पहचान के लिए अत्याधुनिक तकनीक और महंगी मशीनों की जरूरत होती है। मप्र खनिज निगम के माध्यम से कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित कर उन्हें अलग अलग क्षेत्रों में खोजबीन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। कंपनियां अपने संसाधनों से सर्वे और खोज करेंगी। इसके बदले उन्हें उत्खनन व उद्योग में भागीदारी भी मिलेगी। सैटेलाइट से निगरानी, अवैध खनन पर पेनाल्टी दूसरी ओर, खनिज विभाग ने गौण खनिजों के खनन को नियंत्रित करने के लिए नए माइनर मिनरल रूल्स का ड्राफ्ट तैयार कर शासन को भेजा है। मंजूरी मिलने के बाद इन्हें लागू किया जाएगा। नए नियमों में पर्यावरण संरक्षण के साथ खनन गतिविधियों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। इसके तहत सैटेलाइट से खदानों की निगरानी, ऑनलाइन चालान और ई-चेकगेट के माध्यम से परिवहन संबंधी प्रक्रियाओं को डिजिटल किया जाएगा। निर्धारित क्षेत्र और गहराई से अधिक खनन करने या बिना अनुमति खनन करने पर पेनाल्टी बढ़ाने का प्रस्ताव है। पांच साल में राजस्व दोगुने करने का लक्ष्य सीएम डॉ. मोहन यादव ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ किया जाए। निवेश के साथ प्रदेश में रोजगार के अवसर भी सृजित हों। खनिज से होने वाली आय का अधिकतम हिस्सा जनहित पर खर्च करें। खनिज विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल के अनुसार, 2026-27 में खनिज राजस्व 13,720 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। वहीं, 2030-31 तक इसे बढ़ाकर 30 हजार करोड़ करने की योजना है। नई एक्सप्लोरेशन पॉलिसी और खनन नियमों में बदलाव को इस लक्ष्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पॉलिसी से ये फायदा? सरकार पर खर्च का बोझ कमः निजी कंपनियां अपने संसाधनों से खनिजों की खोज करेंगी। सरकार को सीधे निवेश नहीं करना पड़ेगा। दुर्लभ खनिजों की तलाश में तेजीः क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ एलीमेंट की खोज के लिए आधुनिक तकनीक व मशीनों का उपयोग बढ़ेगा। निवेश को प्रोत्साहनः खनिजों की खोज और उत्खनन में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। खनिज आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा। राजस्व में वृद्धिः नए खनिज भंडार मिलने व व्यावसायिक उत्खनन से सरकार की आय बढ़ सकती है। रोजगार के नए अवसरः खनन, खनिज प्रसंस्करण और उनसे जुड़े उद्योगों में स्थानीय स्तर पर रोजगार बढेगा। अवैध खनन पर अंकुशः सैटेलाइट निगरानी, ई-चेकगेट व ऑनलाइन चालान से अवैध खनन पर निगरानी मजबूत होगी। पर्यावरण संरक्षणः खदानों के आसपास पर्यावरण सुधार को अनिवार्य बनाने और उल्लंघन पर पेनाल्टी से पर्यावरणीय नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन अधिग्रहण को चुनौती, सरकार से 2 हफ्ते में मांगा जवाब

 उज्जैन उज्जैन शहर में होने वाले सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण में जाने वाली जमीन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई है। इसमें नगर निगम के सड़क चौड़ीकरण के लिए निर्माण हटाने व जमीन निगम की घोषित करने को चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नोटिस जारी कर उज्जैन नगर निगम व सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। हालांकि कोर्ट ने इस मामले में निगम कार्रवाई पर रोक तो नहीं लगाई लेकिन अंतरिम व्यवस्था दी कि जो भी कार्रवाई होगी, वो कोर्ट आदेश के अधीन रहेगी। चौबीस खंभा मार्ग उज्जैन निवासी छात्र सोमिल कराड़े ने निगम द्वारा सड़क चौड़ीकरण को लेकर जारी आदेश को चुनौती दी है। दायर की थी याचिका उनका कहना है कि केंद्र सरकार 13 साल पहले पारित भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद राज्य सरकार के मप्र म्यूनिसिपल एक्ट की धारा-305 का औचित्य नहीं रह जाता। इसके तहत निगम को सड़क बनाने में बाधक निर्माण हटाने के साथ ही उस जमीन का आधिपत्य मिल जाता है। भूमि अधिग्रहण कानून में इसके लिए दावे आपत्ति बुलाकर मुआवजा तय करने की प्रक्रिया है, जबकि निगम एक्ट में केवल नोटिस के जरिए ही प्रक्रिया पूरी हो जाती ऐसे में दो नियम एक दूसरे के विपरीत होने के चलते उन्होंने याचिका दायर की है। है। कोर्ट ने चार सप्ताह बाद मामले पर दोबारा सुनवाई करने का निर्णय लिया है। जानकारी के लिए बता दें कि अगला उज्जैन सिंहस्थ (कुंभ मेला) 27 मार्च से 27 मई 2028 तक आयोजित किया जाएगा। वाघमारे केस का हवाला सुनवाई के दौरान जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने सवाल उठाए कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुभदा वाघमारे केस में इस विषय को तय कर चुकी है तो फिर कोर्ट इस पर कैसे सुनवाई कर सकती है। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि सुभदावाघमारे द्वारा जब कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, उस समय केंद्र सरकार का कानून लागू नहीं हुआ था। इस पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह में सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही चार सप्ताह का निर्णय लिया है। बाद इस पर दोबारा सुनवाई करने का निर्णय लिया गया है।

नवरात्र 2026 में महाअष्टमी-नवमी की सही तारीख क्या? जानें कन्या पूजन और हवन का शुभ दिन

शारदीय नवरात्र में इस बार महाष्टमी और महानवमी की तिथि को लेकर लोगों के मन में काफी कंफ्यूजन है. खासकर उन लोगों के बीच जो अष्टमी का व्रत रखते हैं या फिर नवमी के दिन कन्या पूजन और हवन करते हैं।  कई परिवारों में अष्टमी की पूजा की परंपरा है, तो कई घरों में नवमी की पूजा प्रमुख रूप से की जाती है. ऐसे में सवाल है कि इस बार अष्टमी का व्रत और पूजन किस दिन करना चाहिए? महानवमी की पूजा कब होगी? कन्या पूजन किस दिन करना शुभ रहेगा? और संधि पूजा का मुहूर्त क्या है? इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी. आइए पंडित प्रवीण मिश्र जी से जानते हैं कि महा अष्टमी और महा नवमी की तिथि के बारे में।  19 अक्टूबर को होगी महाष्टमी की पूजा इस वर्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे होगा. उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी. इसलिए जिन लोगों के यहां अष्टमी के दिन विशेष पूजा, हवन या कन्या पूजन की परंपरा है, वे 19 अक्टूबर को यह अनुष्ठान कर सकते हैं।  अगर आप अष्टमी का व्रत रखते हैं तो 19 अक्टूबर को व्रत रखें और विधि-विधान से मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करें।  कन्या पूजन या कन्या भोजन कराने वाले लोग भी 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान यह अनुष्ठान कर सकते हैं. कोशिश करें कि अष्टमी से जुड़े पूजा-पाठ और कन्या पूजन सुबह 10:51 बजे से पहले कर लिया जाए।  रात में अष्टमी पूजा की परंपरा है तो क्या करें? कुछ परिवारों में महाष्टमी की पूजा रात्रि में करने की परंपरा होती है. खासकर कुछ परिवारों में कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा रात के समय की जाती है. ऐसे परिवार 18 अक्टूबर की रात को अष्टमी तिथि लगने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।  महानवमी की पूजा कब होगी? 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी. इसलिए 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जा सकता है।  अगर आपके परिवार में नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है, तो आप 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद कन्या पूजन और हवन कर सकते हैं।  यानी 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों का कन्या पूजन किया जा सकता है।  20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं नवमी का कन्या पूजन कुछ लोग उदया तिथि को विशेष महत्व देते हैं. ऐसे लोग 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं. हालांकि, इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक ही रहेगी. इसलिए 20 अक्टूबर को नवमी के अनुसार पूजा, हवन और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर 12:50 बजे से पहले यह अनुष्ठान पूरा कर लेना चाहिए. इस तरह, जो लोग उदया तिथि को मानते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं।  महानवमी का व्रत कब रखें और पारण कब करें? जिन लोगों के यहां महानवमी का व्रत रखने की परंपरा है, वे नवमी के दिन यानी 19 अक्टूबर को व्रत रख सकते हैं. नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करें और पूरे दिन व्रत रखें. व्रत का पारण अगले दिन यानी विजयादशमी के दिन करना उचित माना जाता है।  संधि पूजा का शुभ मुहूर्त इस वर्ष संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा. यह कुल 48 मिनट का समय होगा. अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर कुल 48 मिनट का यह समय संधि काल कहलाता है. इसी दौरान संधि पूजा की जाती है।  शास्त्रों में संधि काल को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण करके चंड और मुंड नामक असुरों का संहार किया था. इसी वजह से संधि पूजा में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है. मान्यता है कि इस विशेष समय में मां चामुंडा की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है. भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी को कमल पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। 

Ladli Behna Yojana 41वीं किस्त का इंतजार खत्म होने वाला! महिलाओं के खाते में कब आएंगे ₹1500?

भोपाल  मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चल रही लाड़ली बहना योजना एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि इस बार योजना की 41वीं किस्त जारी होनी है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। इस बार लाभार्थियों को योजना की 41वीं किस्त का इंतजार है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि इस बार महिलाओं के बैंक खाते में 1500 रुपये की अगली राशि आखिर कब तक आएगी? तो चलिए बिना देर किए इस बारे में जानने की कोशिश करते हैं।  कब आएगी लाडली बहना योजना की 41 किस्त? अगर आप भी लाडली बहना योजना की 41वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं, तो अभी सरकार की तरफ से इसकी आधिकारिक तारीख का ऐलान नहीं हुआ है। हालांकि माना जा रहा है कि लाडली बहनों को उनकी अगली किस्त के 1500 रुपये 10 से 15 अक्टूबर के बीच मिल जाएंगे। हालांकि किस्त के जारी होने से पहले लाभार्थी बहनों को कुछ चीजें चेक कर लेनी चाहिए। सरकारी पोर्टल के मुताबिक, महिला के नाम पर अपना बैंक खाता होना जरूरी है। इसके अलावा ई-केवाईसी भी पूरी होनी चाहिए, वरना पैसे बैंक में नहीं आएंगे। 1500 रुपये पाने के लिए कौन से 3 काम करवाना जरूरी है? पहला काम     लाड़ली बहना योजना के तहत दी जाने वाली किस्त के 1500 रुपये सरकार द्वारा महिलाओं के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजे जाते हैं     इसलिए बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही होना जरूरी है     अगर बैंक खाते की जानकारी गलती है, तो आपकी किस्त अटक सकती है दूसरा काम     लाभार्थी यह जरूर चेक कर लें कि उनका बैंक खाता आधार कार्ड से लिंक है या नहीं     साथ ही बैंक खाते में डीबीटी सुविधा भी एक्टिव होनी चाहिए     अगर ऐसा है, तो बेहतर है वरना किस्त प्राप्त करने में आपको दिक्कत हो सकती है तीसरा काम     लाड़ली बहना योजना के तहत मिलने वाली किस्त का लाभ लेने के लिए आपको ई-केवाईसी भी करवानी होती है     अगर आप ई-केवाईसी नहीं करवाते हैं तो आपकी किस्त अटक सकती है     इसलिए ये जरूर चेक करें कि आपकी केवाईसी हो रखी है या नहीं लाड़ली बहना योजना की 41वीं किस्त कब आ सकती है?     लाड़ली बहना योजना के तहत सरकार सामान्य तौर पर हर महीने की 10 से 15 तारीख के बीच किस्त जारी कर देती है     इसी आधार पर 41वीं किस्त के भी इसी समय के बीच आने की उम्मीद है यानी 10 से 15 तारीख के बीच     हालांकि, अभी सरकार की तरफ से तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है बैंक अकाउंट में किस्त नहीं आने पर कहां करें शिकायत? अगर सरकार द्वारा किस्त की घोषणा के बाद भी आपके अकाउंट में पैसा नहीं आता है, तो आप राज्य सरकार के हेल्पलाइन नंबर 0755-2700800 या 181 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकती हैं. इसके अलावा अपनी ग्राम पंचायत, वार्ड कार्यालय या महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय ऑफिस में संपर्क करके भी समस्या का तुरंत समाधान पा सकती हैं।       

MP में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ी, लांजी बना अहम कॉरिडोर; हाथी-बाघ के लिए सुरक्षित रास्ता

बालाघाट  मध्य प्रदेश का लांजी क्षेत्र अब महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से आने वाले वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक रास्ता बनता जा रहा है। पश्चिम लांजी सामान्य वन क्षेत्र के जंगलों से होकर वन्यजीव नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य और कान्हा टाइगर रिजर्व के बीच आवाजाही कर रहे हैं। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे कट्टीपार के जंगल इस प्राकृतिक वन्यजीव गलियारे की अहम कड़ी बनकर उभरे हैं। लांजी से पश्चिम दिशा में नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य करीब 80 किलोमीटर और पूर्व में कान्हा टाइगर रिजर्व करीब 100 किलोमीटर दूर है। दोनों बड़े वन क्षेत्रों के बीच मौजूद लगातार फैला जंगल वन्यजीवों को सुरक्षित आवाजाही का प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराता है। हाथी ने 15 दिन तक किया विचरण अप्रैल 2026 में छत्तीसगढ़ की ओर से आया एक हाथी कट्टीपार के रास्ते बालाघाट पहुंचा था। हाथी ने किरनापुर और हट्टा क्षेत्र के जंगलों में करीब 15 दिन तक विचरण किया। इसके बाद वह उकवा के जंगलों से होते हुए कान्हा की दिशा में चला गया।यह इस गलियारे से हाथियों की आवाजाही का पहला मामला नहीं है। वर्ष 2022 में भी इसी रास्ते से तीन हाथियों के गुजरने की जानकारी सामने आई थी। नवेगांव-नगझीरा की बाघिन भी पहुंची थी लांजी वन्यजीवों की आवाजाही का एक और उदाहरण वर्ष 2025 में सामने आया, जब नवेगांव-नगझीरा अभयारण्य की एक बाघिन लांजी-किरनापुर क्षेत्र में पहुंची। बाघिन करीब एक महीने तक इस इलाके के जंगलों में विचरण करती रही और इसके बाद वापस लौट गई।इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि यह क्षेत्र अलग-अलग वन क्षेत्रों के बीच वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 23 बीटों में बाघ से लेकर बायसन तक मौजूद दक्षिण सामान्य वन मंडल बालाघाट के पश्चिम लांजी सामान्य वन क्षेत्र का विस्तार करीब 23 हजार हेक्टेयर में है। यहां 23 बीट हैं, जिनमें बाघ, तेंदुआ, बायसन और भालू समेत कई वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की जाती है। लांजी और महाराष्ट्र की सीमा के बीच से बाघ नदी बहती हुई किरनापुर क्षेत्र की ओर आती है। नदी के दोनों तरफ जंगल होने के कारण गर्मी के मौसम में जब पानी के स्रोत सीमित होते हैं, तब नवेगांव-नगझीरा क्षेत्र के वन्यजीव नदी पार कर इस ओर आ जाते हैं। कुछ यहीं बना लेते हैं ठिकाना वन विभाग के अनुसार, दूसरे वन क्षेत्रों से आने वाले वन्यजीव इस इलाके में कई दिनों तक विचरण करते हैं। इनमें से कुछ वापस अपने पुराने क्षेत्र में लौट जाते हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक इसी क्षेत्र में बने रहते हैं। पश्चिम लांजी सामान्य के वन परिक्षेत्र अधिकारी सपन ताम्रकार के मुताबिक, कान्हा और नवेगांव-नगझीरा के बीच पश्चिम लांजी सामान्य का जंगल प्राकृतिक गलियारे की तरह काम कर रहा है। दोनों वन क्षेत्रों से वन्यजीवों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। बालाघाट बना बाघों का नया ठिकाना, बढ़ती संख्या से वन विभाग अलर्ट, 200 से ज्यादा टाइगर मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त है. देश भर में साल 2014 से 2022 के बीच 65 प्रतिशत आबादी बढ़ी है. इसमें सिर्फ एमपी में 155 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी. ऐसे में एमपी टाइगर की संख्या एक हजार से ज्यादा हो गई है. इसमें अकेले में बालाघाट में अकेले 200 से ज्यादा बाघ होने की संभावना है. इसी बीच बालाघाट में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है।  दरअसल, बालाघाट के कान्हा पेंच कॉरिडोर यानी दक्षिण सामान्य वन मंडल में 18 बाघ और 27 तेंदुए दर्ज हुए है. ऐसे में एमपी को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला हुआ है. लेकिन जितनी तेजी से बाघों की संख्या बढ़ रही है उतनी ही तेजी से बाघों और मानव के बीच संघर्ष भी बढ़ रहा है।  दक्षिण बालाघाट बना बाघों का आशियाना डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग की नई रिपोर्ट में एक जानकारी सामने आई है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर और दक्षिण बालाघाट के वन मंडलों में बड़े मांसाहारी वन्य जीवों की संख्या में इजाफा हुआ है. ऐसे में जिस इलाके को कान्हा नेशनल पार्क और पेंच नेशनल पार्क के बीच बाघों के गूजरने का गलियारा नहीं माना जाता है. वह अब सिर्फ एक रास्ता नहीं बल्कि बाघ, तेंदुआ और दूसरे वन्य प्राणियों का अहम इलाका भी बन गया  है.  दूसरी तरफ बाघों की बढ़ती आबादी और सिकुड़ता जंगल कई चिंताएं पैदा कर रहा है. इसमें सड़क निर्माण, माइनिंग, मानव-वन्य संघर्ष और बाघों की टेरिटोरियल फाइट भी शामिल है।  जानिए कितने बाघ और कितने तेंदुआ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और मध्य प्रदेश वन विभाग की नवंबर 2021 में दक्षिण बालाघाट के लालबर्रा और कटंगी वन क्षेत्रों में 71 कैमरा ट्रैप लगाए गए. इसमें कैमरों की मदद से 215 वर्ग किलोमीटर इलाके में 25 दिनों तक निगरानी रखी गई. इस दौरान बाघों के 262 और 154 फोटो मिले. इसी के आधार पर 18 अलग-अलग बाघ और 27 तेंदुए की पहचान हुई. इसके अलावा कैमरे ने 24 स्तनधारी प्रजातियों को भी कैद किया. इसमें भेड़िया, सियार, रीछ या स्लॉथ बेयर, गौर, सांभर, चीतल, नीलगाय, बार्किंग डियर और साही जैसी कई प्रजातियां शामिल है।  क्यों भा रहा बाघों को यह ठिकाना  बालाघाट को दो नेशनल पार्कों (कान्हा और पेंच) का कॉरिडोर कहा जाता है. दरअसल, जब बाघों की आबादी कम हुआ करती थी तब यहीं से बाघ गुजरते थे. बालाघाट सीसीएफ गौरव चौधरी ने बताया कि यह इलाका बाघों  के प्रजनन के लिए अनुकूल वातारण मिलता गया. ऐसे में यहाँ पर आबादी भी बढ़ती गई. दूसरी तरफ यह पर बाघों के लिए शिकार और आराम की भी पर्याप्त व्यवस्था है. इसके अलावा जंगल और गांव पास-पास ही है. ऐसे में बाघों को आसान शिकार मिलते हैं. ऐसे में कॉरिडोर ही अब बाघों का ठिकाना बनता गया। 

Global Investors Summit 2027 से पहले MP की बड़ी तैयारी, मुंबई में उद्योग समूहों से मिलेंगे CM यादव

भोपाल मध्यप्रदेश में निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों और औद्योगिक संभावनाओं को देश के प्रमुख उद्योग समूहों तक सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज  8 अक्टूबर को मुंबई में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। द सेंट रेजिस, लोअर परेल में आयोजित होने वाले मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर संवादात्मक सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें करेंगे और प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा भी करेंगे। मुंबई देश के प्रमुख औद्योगिक, वित्तीय और कारोबारी समूहों का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उद्योग जगत के साथ सीधा संवाद मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को लेकर चल रहे संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण चरण होगा। संवाद के दौरान प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के लिए उपलब्ध अवसरों तथा विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक आधार से उद्योग समूहों को अवगत कराया जाएगा। निवेशकों से सीधे संवाद पर होगा फोकस मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रमुख उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठक करेंगे । इसके बाद मध्यप्रदेश में निवेश अवसरों पर केंद्रित प्रस्तुतिकरण और विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मुख्य संबोधन भी निवेशकों के साथ संवाद का प्रमुख केंद्र रहेगा। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, निवेश अनुकूल नीतिगत वातावरण और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक अवसरों को विस्तार से सामने रखा जाएगा। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मध्यप्रदेश में निवेश के अवसरों पर प्रस्तुतीकरण देंगे। संवाद में विशेष रूप से यह रेखांकित किया जाएगा कि मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित होने के कारण बड़े बाजारों से जुड़ाव, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक अधोसंरचना और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स के माध्यम से निवेशकों के लिए व्यापक संभावनाएं उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है। जनवरी 2027 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले बढ़ाया जा रहा सीधा संपर्क मध्यप्रदेश सरकार ने जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की तैयारियों के साथ देश और विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों से सीधे संपर्क की प्रक्रिया तेज की है। इसी क्रम में मुंबई का यह संवाद महत्वपूर्ण है। सरकार का प्रयास है कि समिट से पहले विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग समूहों के साथ उनकी आवश्यकताओं, निवेश योजनाओं और प्रदेश में उपलब्ध अवसरों पर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित हो। मुंबई संवाद में प्रमुख उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। इससे प्रदेश में निवेश के इच्छुक उद्योग समूहों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप अवसरों और औद्योगिक क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ संभावित निवेश प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए सीधा संवाद स्थापित करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उद्योगपतियों के साथ वन टू वन बैठकें इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं कि इनमें निवेशकों के प्रस्तावों और उनकी व्यावसायिक आवश्यकताओं को सीधे समझने का अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार की ओर से निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने, आवश्यक अनुमतियों और सुविधाओं को सुगम बनाने तथा उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की जाएगी। मुंबई में होने वाला यह निवेश संवाद मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति देने और देश के प्रमुख उद्योग समूहों के साथ प्रदेश के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में आयोजित यह संवाद निवेश प्रस्तावों तक सीमित न रहकर उद्योगों की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें मध्यप्रदेश में उपलब्ध अवसरों से जोड़ने पर विशेष रूप से केंद्रित रहेगा।  

11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू, पूजा से पहले घर से बाहर करें टूटी मूर्तियां, खराब सामान और ये चीजें

शारदीय नवरात्रि: शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होने वाला है। पूरे 9 दिन चलने वाले इस त्योहार में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। वैसे नवरात्रि की तैयारियां कई दिनों पहले ही शुरू हो जाती हैं। खासकर घर की साफ-सफाई का काम तो जल्दी से जल्दी शुरू हो जाता है। इस दौरान सिर्फ धूल-मिट्टी साफ करना ही काफी नहीं है, बल्कि ऐसी चीजों को भी हटाना भी जरूरी है जिनका इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं हुआ है। कई बार हम पुरानी और बेकार चीजों को ये सोचकर संभालकर रखते जाते हैं कि ये बाद में काम आएंगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं होता और घर में बेकार की चीजें बढ़ती जाती हैं। ऐसे में नवरात्रि के लिए आप भी घर की सफाई करने वाले हैं तो ये चीजें हटाना ना भूलें। रसोई से निकालें टूटे हुए बर्तन और सामान रसोई में रखे टूटे-फूटे बर्तन, चटके हुए कप-प्लेट, खराब डिब्बे और लंबे समय तक इस्तेमाल ना हुए सामान को अलग कर दें। इनकी वजह से रसोई साफ करने के बाद भी भरी-भरी और अव्यवस्थित नजर आती है। हो सके तो त्योहरों से पहले पुराने डिब्बे बदलकर नए और मजबूत डिब्बों से रिप्लेस कर दें। खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान पुराने और बेकार चार्जर, खराब इयरफोन, केबल और काम ना करने वाले इलेक्ट्रिक गैजेट्स या दूसरे सामान को यूं ही घर में इक्कठा करने से कोई फायदा नहीं है। ये दोबारा काम भी नहीं आते हैं और फालतू की जगह घेरकर रखते हैं। इसलिए सफाई के दौरान इन्हें भी घर से निकालने का इंतजाम करें। पुराने कपड़े और जूते-चप्पल अलमारी में कई ऐसे कपड़ों का ढेर लगा हुआ रहता है, जिन्हें कोई पहनता भी नहीं है और वो दोबारा इस्तेमाल भी नहीं होते। ऐसे ही जूते-चप्पल के ढेर भी रखे रहते हैं। सफाई के दौरान इन्हें भी निकालकर अलग करें। इसमें से ठीक सामान को किसी जरूरतमंद को डोनेट किया जा सकता है। मंदिर से हटाएं टूटी हुई मूर्तियां घर के मंदिर में रखी हुई खंडित मूर्तियों और तस्वीरों को भी अलग कर दें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी मूर्तियों को घर में रखना शुभ नहीं माना जाता है। इन्हें किसी मंदिर, धार्मिक स्थान या उचित व्यवस्था के अनुसार विसर्जित कर दें। बंद घड़ी और टूटा हुआ सामान घर में बंद और टूटी हुई घड़ी रखना अशुभ माना जाता है। साथ ही ये फालतू की जगह भी घेरकर रखती है। इसके अलावा टूटे हुए शोपीस, चटका हुआ शीशा और खराब सामान को भी अलग निकालकर रख दें। इससे घर की सफाई के साथ-साथ अनावश्यक सामान भी कम होगा। सूखे हुए खराब पौधे अगर आपके घर में पूरी तरह सूख चुके या खराब हो चुके पौधे रखे हैं तो उन्हें भी नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से अलग कर दें। इसके अलावा सूखे हुए फूल या फूलों की माला को उचित व्यवस्था के साथ घर से हटा दें। नवरात्रि से पहले हटाएं तामसिक चीजें नवरात्रि की सफाई के दौरान घर से तामसिक चीजें भी हटा देनी चाहिए। अगर आपके घर पुरानी शराब की बोतल इक्कठा हैं, तो उन्हें कबाड़ में दे दें। इसके अलावा रसोई और फ्रिज से मांस, अंडे और प्याज-लहसुन भी निकाल दें।

वंदे भारत या अमृत भारत, कौन सी ट्रेन है बेहतर? किराये से सुविधाओं तक 5 बड़े फर्क

नई दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस दोनों ही भारतीय रेलवे की नई पीढ़ी की ट्रेनें हैं, जिन्हें यात्रा के समय को कम करने और यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देने के लिए डिजाइन किया गया है।  दरअसल, पटरियों पर 'वंदे भारत एक्सप्रेस' की सफलता के बाद अब 'अमृत भारत एक्सप्रेस' भी देश के प्रमुख रेल मार्गों पर रफ्तार भर रही है. हालांकि ये दोनों ही ट्रेनें भारतीय रेल के आधुनिक दौर की मिसाल हैं, लेकिन अपनी तकनीक, किराये और सुविधाओं के मामले में एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं. आइए दोनों ट्रेनों के बीच 5 बड़े अंतर जानते हैं. दोनों ट्रेनों की टेक्नोलॉजी, क्लास और लक्षित यात्रियों में बड़ा अंतर है।  1. एसी बनाम नॉन-एसी वंदे भारत एक्सप्रेस: यह पूरी तरह से एक एयर-कंडीशनर (AC) ट्रेन है. इसमें यात्रियों के लिए केवल 'एसी चेयर कार', 'एक्सीक्यूटिव क्लास' और नए वेरिएंट्स में 'एसी स्लीपर' की सुविधा दी गई है।  अमृत भारत एक्सप्रेस: यह एक पूरी तरह से नॉन-एसी ट्रेन है. इसे विशेष रूप से मध्यम वर्ग और आम यात्रियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसमें केवल 'स्लीपर क्लास' और 'अनारक्षित जनरल डिब्बे' शामिल हैं।  2. दोनों के इंजन में भी अंतर  वंदे भारत: यह भारत की पहली बिना इंजन वाली (Self-Propelled) ट्रेनसेट है. मेट्रो की तर्ज पर इसके डिब्बों के नीचे ही मोटर लगे होते हैं, जिससे यह सेकंडों में बेहद तेज रफ्तार पकड़ लेती है।  अमृत भारत: इस ट्रेन में आगे और पीछे दो शक्तिशाली लोकोमोटिव 'WAP-5' इंजन लगाए गए हैं, जो 'पुश-पुल तकनीक' पर काम करते हैं. आगे वाला इंजन ट्रेन को खींचता है और पीछे वाला धक्का देता है, इस तकनीक से ट्रेन बिना झटके के तेजी से स्पीड पकड़ती है और समय की बचत करती है।  3. रफ्तार और किराया वंदे भारत: 160 से 180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम यह ट्रेन प्रीमियम श्रेणी में आती है. इसका किराया राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस के समकक्ष या उससे थोड़ा अधिक है. वंदे भारत मुख्य रूप से इंटरसिटी (200 से 600 किमी) और लंबी दूरी के रूटों को कवर करती है।  अमृत भारत: 130 किमी/घंटा की अधिकतम गति से चलने वाली यह ट्रेन किफायती सफर का बेहतरीन विकल्प है. इसका किराया सामान्य एक्सप्रेस ट्रेनों जितना ही रखा गया है, ताकि आम आदमी भी कम खर्च में आरामदायक लंबी दूरी तय कर सकें. अमृत भारत मुख्य रूप से 800 से 1500+ किमी की लंबी दूरी वाले राज्यों/शहरों को जोड़ती है।  4. यात्री सेगमेंट अलग-अलग जहां वंदे भारत का मुख्य ध्यान बिजनेस ट्रैवलर्स, कॉर्पोरेट पेशेवरों और कम समय में सफर पूरा करने वाले यात्रियों पर है, वहीं अमृत भारत एक्सप्रेस को मुख्य रूप से देश के प्रवासियों, मजदूरों और आम बजट यात्रियों की लंबी दूरी की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है।  5. खान-पान और बाकी सुविधाएं वंदे भारत में ट्रेन खान-पान के लिए ऑन-बोर्ड कैटरिंग/पेंट्री कार सुविधा उपलब्ध है. जबकि अमृत भारत में कैटरिंग शामिल नहीं है, हालांकि बोतल होल्डर, चार्जिंग पॉइंट और पैक्ड स्नैक टेबल उपलब्ध है. वंदे भारत में ऑटोमैटिक दरवाजे हैं, वहीं अमृत भारत में मैन्युअल दरवाजे हैं।  भारतीय रेलवे की मानें तो 'वंदे भारत' जहां देश में हाई-स्पीड प्रीमियम सफर का चेहरा है, वहीं 'अमृत भारत एक्सप्रेस' आम नागरिक के लिए बजट-फ्रेंडली, सुरक्षित और आधुनिक सुविधाओं का नया पर्याय बनकर उभरी है।