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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में छत्तीसगढ़ का बड़ा सुधार, भूमि उपयोग नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और शहरी विकास को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार किया है। भारत सरकार द्वारा डीरिगुलेशन (Deregulation) और अनुपालन बोझ कम करने (Compliance Burden Reduction) के लिए सुझाए गए सुधारों के अनुरूप राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस बदलाव से भूमि उपयोग संबंधी प्रावधान अधिक सरल, स्पष्ट और लचीले होंगे तथा आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री  ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में किए गए इन सुधारों का उद्देश्य शहरी नियोजन व्यवस्था को बदलती आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक व्यावहारिक बनाना है। नई व्यवस्था में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए नेगेटिव लिस्ट (Negative List) आधारित मॉडल अपनाया गया है। इससे भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं में अनावश्यक जटिलताएं कम होंगी और नागरिकों, उद्यमियों तथा निवेशकों को अधिक सुविधा मिलेगी। शहरी नियोजन सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ को मिली 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता भारत सरकार की विशेष सहायता योजना (Special Assistance to States for Capital Investment-SASCI) के अंतर्गत शहरी नियोजन सुधारों को अपनाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय पहल की है। इन सुधारों के लिए राज्य को वित्तीय वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ रुपये तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 85 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हुई है। इस प्रकार दो वर्षों में कुल 885 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिली है। इसी सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने अब भूमि उपयोग नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यह पहल केंद्र सरकार की उस व्यापक नीति के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत राज्यों में नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनावश्यक प्रतिबंधों को कम करने और निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। नेगेटिव लिस्ट मॉडल से भूमि उपयोग में आएगा अधिक लचीलापन संशोधित भूमि विकास नियमों में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए नेगेटिव लिस्ट आधारित व्यवस्था लागू की गई है। इस मॉडल के अंतर्गत प्रत्येक भूमि उपयोग श्रेणी में उन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है, जो संबंधित क्षेत्र के लिए अनुपयुक्त हैं। वहीं, अन्य अनुमत्य गतिविधियों के संचालन के लिए अधिक व्यापक अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। इस व्यवस्था का प्रमुख लाभ यह होगा कि भूमि उपयोग से संबंधित नियम अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनेंगे। बदलती आर्थिक परिस्थितियों, नई व्यावसायिक गतिविधियों और नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा। भारत सरकार द्वारा सुझाए गए सुधारों के अनुरूप त्रिपुरा, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों ने भी अपने विकास नियंत्रण विनियमों (Development Control Regulations-DCR) में नेगेटिव लिस्ट मॉडल अपनाया है। छत्तीसगढ़ ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए भूमि उपयोग नियमन को अधिक आधुनिक, लचीला और विकासोन्मुख बनाया है। आवासीय क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और कार्यालयों को मिलेगी अनुमति संशोधित नियमों की एक महत्वपूर्ण विशेषता विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के बीच अनुमत्य गतिविधियों का विस्तार है। आम नागरिकों की दैनिक जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए मिश्रित भूमि उपयोग (Mixed Use) को प्रोत्साहित किया गया है। नई व्यवस्था के अंतर्गत अस्पताल और स्कूल जैसी जन-आवश्यक सुविधाओं को आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमत्य किया गया है। इसी प्रकार कार्यालयों को भी आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग में अनुमति दी गई है। इस बदलाव से नागरिकों को अपने निवास स्थान के आसपास ही शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही, आवासीय और कार्यस्थलों के बीच की दूरी कम होने से आवागमन में लगने वाले समय और यातायात के दबाव को कम करने में भी मदद मिल सकेगी। औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी और श्रमिक आवास की सुविधा राज्य सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों की आवश्यकताओं को भी भूमि उपयोग सुधारों में विशेष महत्व दिया है। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी तथा संबंधित श्रमिकों के लिए आवास जैसी सुविधाओं को अनुमत्य गतिविधियों में शामिल किया गया है। इससे औद्योगिक इकाइयों के आसपास कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाएं विकसित करने में मदद मिलेगी। श्रमिकों को कार्यस्थल के निकट रहने की सुविधा उपलब्ध होने से उनके दैनिक आवागमन में आसानी होगी और औद्योगिक क्षेत्रों में आवश्यक सामाजिक अधोसंरचना के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अतिरिक्त मनोरंजन भूमि उपयोग श्रेणी में श्मशान एवं कब्रिस्तान से संबंधित आवश्यक गतिविधियों को भी अनुमत्य किया गया है। इस प्रकार संशोधित व्यवस्था में नागरिक सुविधाओं, सामाजिक आवश्यकताओं और आर्थिक गतिविधियों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया गया है। निवेश, रोजगार और शहरी विकास को मिलेगी नई गति तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ भूमि उपयोग की आवश्यकताएं भी लगातार बदल रही हैं। आवासीय क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता, व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुविधाओं का विकास आधुनिक शहरी नियोजन के महत्वपूर्ण पहलू हैं। राज्य सरकार द्वारा किए गए इन सुधारों से भूमि उपयोग संबंधी नियम अधिक व्यावहारिक होंगे और विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा मिलेगी। नियमों में स्पष्टता और अनुपालन संबंधी बोझ कम होने से उद्यमियों तथा निवेशकों को भी लाभ मिलने की अपेक्षा है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य में निवेश के नए अवसर विकसित करने, आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और नागरिकों के लिए बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को मिलेगी मजबूती मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और निवेश अनुकूल वातावरण के निर्माण को प्राथमिकता दे रही है। भूमि उपयोग नियमों में किया गया यह संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। भारत सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने संबंधी सुधारों के अनुरूप लागू की गई नई व्यवस्था से छत्तीसगढ़ में शहरी नियोजन को अधिक आधुनिक और विकासोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह सुधार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर छत्तीसगढ़ की गूंज, देश-दुनिया के सामने खुली पर्यटन संभावनाओं की नई राह

रायपुर  छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक खूबसूरती, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं ने एक बार फिर राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर अपनी अलग पहचान दर्ज कराई है। विशाखापट्टनम में आयोजित 41वें इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (IATO) के वार्षिक सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की संभावनाओं और भविष्य की दिशा पर विस्तार से चर्चा हुई। देशभर से जुटे पर्यटन विभागों, यात्रा संचालकों और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच छत्तीसगढ़ की विविधतापूर्ण पर्यटन क्षमता को सामने रखने का अवसर मिला। सम्मेलन के दौरान प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए जाने के साथ छत्तीसगढ़ को ‘Best Emerging Tourist Destination’ के प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा गया। विशाखापट्टनम स्थित नोवोटेल  वरुण बीच में 10 से 13 सितंबर तक आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन की मुख्य विषय-वस्तु  ‘भारत—विश्व के पर्यटन अवसरों का अगला बड़ा केंद्र’ रही। सम्मेलन में देश में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने, नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने तथा पर्यटन कारोबार को बढ़ावा देने से जुड़े विभिन्न विषयों पर मंथन किया गया। इस राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ ने अपनी पर्यटन विविधता और संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित किया। पर्यटन विकास के विजन को मिला राष्ट्रीय मंच सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा, प्रदेश की विशेषताओं और यहां मौजूद पर्यटन अवसरों को प्रमुखता से रखा गया। प्राकृतिक सौंदर्य से लेकर इतिहास, धर्म, संस्कृति और जनजातीय जीवन तक छत्तीसगढ़ की विविध पहचान को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया। प्रदेश की पर्यटन संपदा को प्रभावशाली वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से देशभर से आए ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स के सामने प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, आदिवासी संस्कृति, वन्यजीव, जलप्रपात, पुरातात्विक धरोहर और साहसिक पर्यटन स्थलों की आकर्षक झलक दिखाई गई। प्रस्तुति के दौरान देशभर से आए ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स को छत्तीसगढ़ को अपनी नई यात्रा इटिनरी में शामिल करने तथा इसे एक उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने के लिए आमंत्रित किया गया। साथ ही पर्यटन बोर्ड द्वारा प्रदेश में पर्यटन विकास के लिए की जा रही पहलों और नई पर्यटन संभावनाओं की जानकारी भी साझा की गई। प्रदेश के पर्यटन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों तक पहुंचाने, नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने तथा स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़कर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। केंद्रीय मंत्री सहित देशभर के पर्यटन प्रतिनिधि हुए शामिल सम्मेलन में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री * किंजरापु राम मोहन नायडू, आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं छायांकन मंत्री  कंदुला दुर्गेश, आंध्र प्रदेश सरकार के विशेष मुख्य सचिव  शमशेर सिंह रावत सहित पर्यटन और यात्रा उद्योग से जुड़े अनेक प्रमुख प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष  नीलू शर्मा ने भी सम्मेलन में सहभागिता की। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर हुए संवाद में उन्होंने प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा। सम्मेलन के दौरान  नीलू शर्मा को सम्मानित भी किया गया। झरनों, जंगलों और जनजातीय संस्कृति से समृद्ध है छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। प्रदेश में प्रकृति के साथ इतिहास, अध्यात्म, संस्कृति और जनजातीय जीवन का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। बस्तर के मनमोहक जलप्रपात और घने वन, सिरपुर की प्राचीन ऐतिहासिक विरासत, दंतेवाड़ा की धार्मिक आस्था और प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं लोक परंपराएं छत्तीसगढ़ को देश के अन्य पर्यटन राज्यों से अलग पहचान देती हैं। इसी विविधता को पर्यटन विकास की बड़ी ताकत के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रकृति आधारित पर्यटन के साथ धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनजातीय पर्यटन को एक साथ विकसित करने की व्यापक संभावनाओं पर चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ की विविध पर्यटन संपदा को एक समग्र अनुभव के रूप में देशभर के पर्यटकों के सामने प्रस्तुत करने और स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाओं को भी महत्वपूर्ण माना गया। पर्यटन कारोबार के लिए बना संवाद और संपर्क का मंच सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के पवेलियन में ट्रैवल ट्रेड की उल्लेखनीय उत्सुकता देखने को मिली। बड़ी संख्या में ट्रैवल एजेंट्स एवं टूर ऑपरेटर्स ने पवेलियन पहुंचकर पंजीकृत स्टेकहोल्डर्स और पर्यटन प्रतिनिधियों के साथ बी-टू-बी बैठकें कीं तथा प्रदेश के पर्यटन पैकेज, डेस्टिनेशन और इटिनरी पर विस्तार से चर्चा की। इन बैठकों के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों को नए साझेदारी अवसर तलाशने, पर्यटन स्थलों की जानकारी साझा करने और पर्यटकों को आकर्षित करने की नई योजनाओं पर विचार करने का अवसर मिला। सम्मेलन के साथ 11 और 12 सितंबर को भारतीय पर्यटन मेला भी आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न राज्यों के पर्यटन विभागों, यात्रा संचालकों और पर्यटन कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच प्रत्यक्ष व्यावसायिक बैठकें तथा संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस आयोजन ने विभिन्न राज्यों के पर्यटन प्रतिनिधियों और ट्रैवल ट्रेड के बीच संवाद को मजबूत करने तथा पर्यटन कारोबार के नए अवसर तलाशने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। ‘Best Emerging Tourist Destination’ सम्मान से बढ़ा छत्तीसगढ़ का गौरव सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि भी सामने आई। 13 सितंबर को आयोजित सम्मान समारोह में छत्तीसगढ़ को “Best Emerging Tourist Destination” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रतिनिधियों ने मंच पर यह प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किया। यह सम्मान राज्य की समृद्ध प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन क्षेत्र में हो रहे नवाचार, सतत विकास और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान का प्रमाण है। यह सम्मान छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। देशभर के ट्रैवल एजेंट्स, टूर ऑपरेटर्स और पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच प्रदेश के पर्यटन स्थलों की बढ़ती चर्चा से छत्तीसगढ़ के लिए नए पर्यटन अवसरों के द्वार खुलने की उम्मीद है। इससे प्रदेश में पर्यटन निवेश को आकर्षित करने, पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के प्रयासों को भी बल मिल सकता है। पर्यटन मानचित्र पर छत्तीसगढ़ को और मजबूत पहचान दिलाने की दिशा 41वें इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के वार्षिक सम्मेलन में छत्तीसगढ़ की भागीदारी को प्रदेश के पर्यटन को राष्ट्रीय स्तर … Read more

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के चेन्नई रोड शो में टूर ऑपरेटर्स से सीधा संवाद, छत्तीसगढ़ भ्रमण के लिए पर्यटकों को जोड़ने पर जोर

रायपुर छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दक्षिण भारत के प्रमुख पर्यटन बाजार से जोड़ने और राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने चेन्नई में “छत्तीसगढ़ टूरिज्म रोड शो” का भव्य आयोजन किया। फिक्की के सहयोग से आयोजित इस रोड शो में चेन्नई के 130 से अधिक ट्रैवल एजेंट एवं टूर ऑपरेटरों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकों में छत्तीसगढ़ और चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों के बीच सार्थक संवाद हुआ, जिससे भविष्य में पर्यटक समूहों को छत्तीसगढ़ भ्रमण पर भेजने तथा कारोबारी साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुईं।  दक्षिण भारत के पर्यटन बाजार से छत्तीसगढ़ को जोड़ने की पहल चेन्नई में आयोजित यह रोड शो छत्तीसगढ़ को दक्षिण भारत के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने की रणनीतिक पहल के रूप में सामने आया। रोड शो में छत्तीसगढ़ के पर्यटन उत्पादों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और निवेश की संभावनाओं को चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। B2B बैठकों के माध्यम से दोनों राज्यों के स्टेकहोल्डर्स को सीधे संवाद और संभावित व्यावसायिक सहयोग का अवसर मिला। कार्यक्रम में हुई चर्चा में पर्यटन व्यवसायियों की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।  कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष  श्री नीलू शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। उनके संबोधन ने चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों को छत्तीसगढ़ के पर्यटन से जोड़ने और राज्य की पर्यटन संभावनाओं के प्रति प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन (IAS) तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे (IAS) भी उपस्थित रहे। श्री चौबे ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों, पर्यटन उत्पादों तथा राज्य में उपलब्ध निवेश संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।  तमिल भाषा में पहली बार छत्तीसगढ़ पर्यटन का प्रस्तुतीकरण रोड शो का सबसे खास आकर्षण रहा—छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों और संभावनाओं को पहली बार तमिल भाषा में स्थानीय स्टेकहोल्डर्स के समक्ष प्रस्तुत किया जाना। इस पहल ने चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों और स्थानीय पर्यटकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने अपने संबोधन में तमिल और अंग्रेजी भाषा में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं विरासत संपदा की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने राज्य की पर्यटन संपदा को देश के प्रमुख पर्यटन बाजारों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।  तमिलनाडु के पर्यटन क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों की मौजूदगी रोड शो में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की सहायक निदेशक सुश्री एस. पद्मावती, फिक्की छत्तीसगढ़ टूरिज्म कमेटी के चेयरपर्सन एवं फिक्की छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री जसप्रीत सिंह भाटिया, फिक्की तमिलनाडु स्टेट काउंसिल के को-कन्वीनर श्री श्रीहरन बालन तथा तमिलनाडु पर्यटन के निदेशक डॉ. वी.पी. जयसीलन (IAS) सहित पर्यटन क्षेत्र के अनेक प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।  चेन्नई में पदस्थ छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ अधिकारियों ने साझा किया आत्मीय जुड़ाव रोड शो की एक विशेष उपलब्धि यह भी रही कि छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी श्री के.सी. देवासेनापति एवं श्री एलेक्स पॉल मेनन, जो वर्तमान में चेन्नई में पदस्थ हैं, विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल हुए। दोनों अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ से अपने आत्मीय जुड़ाव और राज्य की पर्यटन संभावनाओं पर सारगर्भित विचार साझा किए। उनकी सहभागिता ने कार्यक्रम को एक अलग भावनात्मक आयाम प्रदान किया।  व्यापारिक साझेदारी के साथ दिखी सांस्कृतिक निकटता चेन्नई रोड शो में छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु के बीच पर्यटन क्षेत्र में व्यावसायिक साझेदारी के साथ-साथ आत्मीय जुड़ाव और सांस्कृतिक निकटता भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। एक ही मंच पर छत्तीसगढ़ से जुड़े वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़ के पर्यटन कारोबारियों और चेन्नई के पर्यटन व्यवसायियों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बनाया। B2B बैठकों ने दोनों राज्यों के पर्यटन स्टेकहोल्डर्स को संभावित व्यापारिक सहयोग, पर्यटक समूहों के आवागमन और पर्यटन उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्यक्ष संवाद का मंच दिया। इससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दक्षिण भारतीय बाजार में नई पहचान और नए कारोबारी अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ी है।  इस प्रकार चेन्नई का “छत्तीसगढ़ टूरिज्म रोड शो” केवल पर्यटन प्रचार का आयोजन नहीं रहा, बल्कि दक्षिण भारत के पर्यटन बाजार के साथ छत्तीसगढ़ के मजबूत व्यावसायिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनकर सामने आया।