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मध्यप्रदेश में मौसम बना जानलेवा, एक साल में 537 मौतें; बढ़ती गर्मी और कंक्रीट से बढ़ी चिंता

भोपाल  आप इस बात की कल्पना कीजिए कि लगभग हर सुबह की शुरुआत किसी ना किसी प्राकृतिक आपदा की खबर से हो. कहीं भीषण गर्मी, कहीं तूफान, कहीं बाढ़ तो कहीं भूस्खलन. भारत के लिए साल 2025 में यह कल्पना नहीं, बल्कि सच्चाई बन चुकी थी. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) और पत्रिका डाउन टू अर्थ के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से नवंबर 2025 के बीच 334 में से 331 दिन ऐसे रहे, जब देश के किसी ना किसी हिस्से में अत्यधिक मौसमीय घटना (Extreme Weather Event) दर्ज की गई. यानी पूरे साल का लगभग 99 प्रतिशत समय. अगर 2024 से तुलना करें तो पिछले साल यह आंकड़ा 295 दिनों का था. इन आपदाओं में 4400 से अधिक लोगों की जान गई और करीब 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई, जो बदलते जलवायु संकट की भयावह तस्वीर पेश करती है।  साल 2025 में मौसम संबंधी घटनाओं की वजह से मध्यप्रदेश में 537 लोगों की मौत हुई। पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर काम करने वाले संगठन सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की ओर से यह रिपोर्ट जारी की गई है।कहीं गर्मी, कहीं बारिश, कहीं सूखा तो कई जगहों पर भूजल और बोरवेल का दबाव लोगों के सामने चुनौती बनकर आया है। इसका असर लोगों की आजीविका और कमाई पर भी पड़ा है।अलग-अलग इलाकों की अपनी समस्याएं हैं। ऐसे में वहां की जरूरत के हिसाब से तैयारी भी जरूरी है।इसी को समझने के लिए वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) ने मध्यप्रदेश में जलवायु जोखिमों का अध्ययन किया और उनसे निपटने के उपायों पर रिपोर्ट तैयार की है। कंक्रीट और बदलता मौसम पैटर्न WRI की रिसर्च में सबसे अहम बात यह सामने आई है। दावा किया गया है कि मध्यप्रदेश में जलवायु जोखिम एक जैसा नहीं है। शहरों में बढ़ती गर्मी और कंक्रीट का विस्तार चुनौती बन रहा है। वहीं ग्रामीण इलाकों में बारिश का बदलता पैटर्न, सूखा, पानी की उपलब्धता और खेती की बदलती परिस्थितियां बड़ा जोखिम हैं। जंगल वाले क्षेत्रों में आग, पानी और वन आधारित आजीविका पर असर पड़ रहा है। इसी वजह से WRI की रिसर्च में जगह के हिसाब से जोखिम की पहचान और उसी के अनुसार समाधान तैयार करने पर जोर दिया गया है। 5 बड़े शहरों के हाल जानें 1. भोपाल : शहर एक, अंदर 4 से 6 डिग्री तक का अंतर WRI की नई हीट रिसर्च में भोपाल का उदाहरण बताता है कि गर्मी का असर शहर के हर हिस्से में एक जैसा नहीं है। झीलों और हरित क्षेत्रों के कारण कई हिस्सों को प्राकृतिक ठंडक मिलती है, लेकिन घनी बसाहट और कम छायादार इलाकों में हालात बदल जाते हैं। यहां तापमान आसपास के रिहायशी क्षेत्रों की तुलना में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा पाया गया। यानी शहर में रहने की जगह और आसपास की हरियाली यह तय करने लगी है कि एक ही गर्मी में किस व्यक्ति को कितनी गर्मी झेलनी पड़ेगी। 2. इंदौर : कंक्रीट और कामकाजी आबादी पर दबाव इंदौर में तेजी से बढ़ता शहरी क्षेत्र, बढ़ती निर्माण गतिविधियां और घनी होती बसाहट गर्मी के जोखिम को बढ़ा रही हैं। WRI ने खास तौर पर औद्योगिक और कामकाजी क्षेत्रों में बाहर काम करने वाले लोगों के लंबे समय तक गर्मी के संपर्क में रहने को जोखिम से जोड़ा है। यानी गर्मी का असर सिर्फ तापमान के आंकड़े तक सीमित नहीं है। इसका असर काम के घंटों, उत्पादकता और परिवार की आय तक पहुंच सकता है। 3. ग्वालियर : शहर का घना हिस्सा ज्यादा गर्म ग्वालियर में WRI ने शहर के घने निर्मित हिस्से को गर्मी रोकने वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है। घनी इमारतें, सड़कें और कम खुले स्थान गर्मी को लंबे समय तक बनाए रखते हैं। इससे शहर के मध्य हिस्से में गर्मी का संपर्क ज्यादा देर तक बना रह सकता है। यहां भी जोखिम पूरे शहर में बराबर नहीं है। 4. जबलपुर : आधी आबादी को हरियाली का लाभ नहीं जबलपुर की स्थिति कुछ अलग है। यहां जंगल, खुले क्षेत्र और जलस्रोत शहर को गर्मी से प्राकृतिक राहत देते हैं। इसके बावजूद WRI के मुताबिक करीब 49 प्रतिशत आबादी के आसपास गर्मी से राहत देने वाली पर्याप्त हरियाली उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब यह है कि प्राकृतिक संसाधन मौजूद होने के बावजूद शहर के हर हिस्से तक उनका फायदा नहीं पहुंच रहा है। 5. उज्जैन : बाहर रहने वालों का जोखिम ज्यादा उज्जैन में धार्मिक पर्यटन के कारण बड़ी संख्या में लोग खुले स्थानों में समय बिताते हैं। WRI ने शिप्रा के रामघाट जैसे पर्यटन क्षेत्रों का उदाहरण दिया है, जहां छाया सीमित है। ऐसे स्थानों पर बढ़ती गर्मी का सीधा असर स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर पड़ता है। गांवों में बारिश बदली तो खेती और पानी दोनों प्रभावित WRI की ग्रामीण रिसर्च के मुताबिक किसान पानी की कमी से ही नहीं, गर्मी और अनियमित बारिश से भी परेशान हैं। बेमौसम बारिश से फसल में फूल आने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, दाना कमजोर बन सकता है और कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। वहीं मानसून में देरी से भूजल रिचार्ज कम होता है, जिससे गर्मियों में ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या बढ़ सकती है।     बड़वानी : जमीन-पानी बचाने से जुड़ी ग्रामीण आय – WRI ने बड़वानी में जलवायु जोखिम को सिर्फ खेती के नुकसान तक सीमित नहीं माना है। अध्ययन में बताया गया है कि जमीन और पानी की स्थिति सीधे ग्रामीण परिवारों की आय पर असर डालती है। इसलिए स्थानीय लोगों की भागीदारी से जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को बहाल करने पर जोर दिया गया है।     सीधी : जमीन की खराब होती स्थिति भी जलवायु जोखिम – सीधी में WRI ने जमीन, पानी और खेती को ग्रामीण आजीविका से जोड़कर देखा है। जमीन की गुणवत्ता या पानी की उपलब्धता प्रभावित होने पर खेती और परिवार की कमाई पर भी असर पड़ता है। इसलिए जलवायु से निपटने की योजना में मौसम के साथ जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को बचाना भी जरूरी बताया गया है। एक ही जिले में अलग-अलग जोखिम बैतूल WRI की रिसर्च में इस बदलाव को समझने का एक जमीनी मॉडल है। अध्ययन में जिले के दो ब्लॉकों … Read more

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, NSA के लापरवाह इस्तेमाल पर जताई नाराजगी

भोपाल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के मनमाने और लापरवाह तरीके से इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने दो भाइयों की निवारक हिरासत को रद करते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है और चेतावनी दी है कि संविधान के इस बेहद कड़े कानून का इस्तेमाल अब सामान्य प्रक्रिया की तरह लापरवाही से किया जा रहा है। मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने राजेंद्र ठाकुर और राजेश ठाकुर नाम के दो सगे भाइयों की नजरबंदी को खारिज करते हुए उन्हें छोड़ने का आदेश दिया है। जानिए दोनों भाईयों पर क्यों लगाया गया था NSA? बता दें कि जबलपुर के जिला कलेक्टर ने सार्वजनिक शांति के लिए खतरा बताते हुए 6 जनवरी को इन दोनों भाइयों को तीन महीने के लिए हिरासत में लेने का आदेश दिया था, जिसे बाद में बढ़ा दिया गया था। हाई कोर्ट ने यह फैसला 11 सितंबर को सुनाया था, जिसे 5 अक्टूबर को सार्वजनिक किया गया। हाई कोर्ट ने क्या कहा? पहले तो अदालत ने पाया कि दोनों भाइयों पर कुल 14 मामले दर्ज थे, जिनमें से 11 मामलों में वे पहले ही बरी हो चुके थे। बाकी बचे 3 मामलों में मारपीट, अछूत हरकत और मामूली बमबाजी जैसे आरोप थे। ऐसे में अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने बिना दिमाग लगाए और बिना सही तथ्य जाने ही उन पर NSA लगा दिया। एक ही दिन में कागजी कार्रवाई पूरी होने पर सवाल दूसरी ओर बेंच ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि सिटी एसपी के प्रस्ताव से लेकर कलेक्टर के नजरबंदी आदेश तक की पूरी फाइल चार अधिकारियों से गुजरी और महज़ एक ही दिन में सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। अदालत ने कहा कि इतनी जल्दबाजी यह साबित करती है कि अधिकारियों ने स्वतंत्र रूप से सोच-समझकर फैसला नहीं लिया। संविधान के नियमों का दिया हवाला साथ ही सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 ,जो नागरिकों को मौलिक अधिकार देते हैं, के तहत मिले सुरक्षा उपायों का पालन किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी नागरिक को मनमाने ढंग से हिरासत में न रखा जाए।  

मध्यप्रदेश में सूखे जैसे हालात से किसान परेशान, 12 जिलों में बारिश की भारी कमी; फसल सर्वे और राहत पैकेज की मांग

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश की कमी ने किसानों के सामने रबी की फसल का संकट खड़ा कर दिया है। प्रदेश में पूरे सीजन में सामान्य से 4% कम बारिश हुई, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश में यह कमी 12% तक रही। प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से 20 से 59% तक कम बारिश दर्ज की गई है। अब सरकार कम बारिश वाले क्षेत्रों में फसलों की स्थिति का आकलन करने के लिए सर्वे कराने की तैयारी कर रही है। इस बीच किसानों ने खरीफ फसलों में नुकसान, गिरते भूजल स्तर और सिंचाई के पानी की कमी का मुद्दा उठाते हुए राहत, वैकल्पिक फसलों के बीज और सिंचाई व्यवस्था की मांग की है। नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर के किसान लखन गौर के मुताबिक, क्षेत्र में कम बारिश के कारण इस बार मक्का की फसल प्रभावित हुई है। लागत बढ़ी और उत्पादन में आई कमी किसान लखन गौर के मुताबिक फसल आड़ी होने से लागत बढ़ गई और उत्पादन भी कम हुआ। अब नलकूपों का जलस्तर गिरने से आगामी रबी सीजन में गेहूं की बोनी और सिंचाई को लेकर चिंता है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास पर्याप्त पानी नहीं है, उन्हें गेहूं के बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। गौर ने पंचायत स्तर पर उन्नत बीज उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि कम सिंचाई वाले क्षेत्रों के किसानों को चने की जेजी 52, जेजी 18 और जेजी 24 जैसी किस्मों के बीज प्राथमिकता से दिए जाएं, ताकि पानी की कमी के बीच भी किसान रबी की फसल ले सकें। नेताप्रतिपक्ष ने सीएम को लिखा पत्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले को सूखा प्रभावित घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने, खरीफ फसलों का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को राहत पैकेज देने की मांग की है। सिंघार के अनुसार, धार में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 42% कम बारिश हुई है। इससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची और रबी की बोनी के लिए सिंचाई का संकट गहराने की आशंका है। सिंघार ने बाग विकासखंड में पाइपलाइन के जरिए नर्मदा नदी का पानी जलाशयों तक पहुंचाने की मांग भी की है। उमंग सिंघार ने धार के अलावा प्रदेश के दूसरे प्रभावित जिलों में भी सर्वे कराकर जरूरत के अनुसार राहत देने की मांग की है। अब चुनौती सिर्फ खरीफ फसलों में हुए नुकसान का पता लगाने की नहीं, बल्कि रबी सीजन में पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए समय पर बीज और सिंचाई के विकल्प उपलब्ध कराने की भी है।  प्रदेश का औसत सुधरा, लेकिन कई जिलों में कमी बरकरार मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, पूरे मानसून सीजन में प्रदेश की बारिश सामान्य के करीब पहुंच गई, लेकिन कई जिलों में कमी बनी रही। अगस्त की शुरुआत में प्रदेश सामान्य से 19% पीछे था। बाद में हुई बारिश से औसत में सुधार आया, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में पर्याप्त पानी नहीं बरसा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अलीराजपुर में सामान्य से करीब 50%, धार में 39%, रतलाम में 34% और इंदौर व उज्जैन में 26-26% कम बारिश दर्ज की गई। नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों में भी कमी रही, जबकि सागर, रीवा, जबलपुर और ग्वालियर-चंबल संभाग के कई जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हुई। बारिश की कमी का असर सोयाबीन, मूंग, मक्का और दूसरी खरीफ फसलों पर कितना पड़ा, यह खेतों की वास्तविक स्थिति देखने के बाद ही स्पष्ट होगा। सोयाबीन में नमी की कमी से फलियों के विकास और दाने भरने पर असर पड़ सकता है, जबकि मक्का की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, केवल बारिश के आंकड़ों के आधार पर पूरे जिले या प्रदेश में फसल नुकसान का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। सर्वे के बाद तय होगी नुकसान की स्थिति कम बारिश वाले 12 जिलों में सर्वे के जरिए फसलों की स्थिति और संभावित नुकसान का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। किसानों की मांग है कि सर्वे में देरी न हो और नुकसान के आकलन के साथ राहत, बीज तथा सिंचाई के इंतजाम भी किए जाएं। मानसून की विदाई के बाद पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में अगले तीन दिन गरज-चमक के साथ बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश में अगले पांच दिन मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने का अनुमान है। ऐसे में कम बारिश वाले पश्चिमी जिलों में रबी की बोनी से पहले मिट्टी की नमी और सिंचाई के उपलब्ध साधनों का आकलन किसानों के लिए अहम होगा। 

भोपाल के हज यात्रियों के लिए खुशखबरी, मक्का में मुफ्त ठहर सकेंगे हाजी; 4 साल बाद लौटी सुविधा

भोपाल  भोपाल के आजमीन-ए-हज के लिए राहत की खबर है। करीब चार साल बाद मक्का मुकर्रमा स्थित ऐतिहासिक भोपाल रुबात में हज यात्रियों के ठहरने की सुविधा फिर बहाल हो गई है। हज 2027 के लिए रुबात में ठहरने वाले हाजियों का कुर्रा शनिवार, 17 अक्टूबर को सुबह 10 बजे मोती मस्जिद में निकाला जाएगा। औकाफ-ए-शाही, भोपाल की कार्यकारी-सह-सलाहकार कमेटी की बैठक में हज 2027 की तैयारियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। कमेटी के अनुसार सऊदी सरकार के नए दिशा-निर्देशों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत रुबात में हाजियों के ठहरने से संबंधित आवश्यक औपचारिकताएं और व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। रुबात की सुविधा बहाल होने की जानकारी अधिकारिक रूप से सिकंदर हाफिज ने वीडियो जारी कर भी दी। अफवाहों से दूर रहने की सलाह हाफिज ने बताया कि आजमीन-ए-हज को मुबारकबाद देते हुए कहा कि शहर में रुबात को लेकर कुछ लोगों द्वारा गलत अफवाहें फैलाई जा रही थीं, जबकि ऐसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि मदीना मुनव्वरा की रुबात का मामला वहां की अदालत में है और जल्द ही इसके भी सुलझने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही वे भोपाल, सीहोर और रायसेन के लोगों को वहां निशुल्क ठहरने की व्यवस्था की जानकारी देंगे। वर्षभर मिले सुविधा हाजी इमरान रुबात खुलने के फैसले का स्वागत करते हुए कौमी खिदमतगार भोपाल के हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने मांग की है कि वक्फ रुबात की सुविधा केवल हज के दिनों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सराहनीय पहल उन्होंने कहा कि उमरा सहित पूरे वर्ष मक्का-मदीना जाने वाले भोपाल के यात्रियों को भी पूर्व की तरह रुबात में ठहरने की सुविधा मिलनी चाहिए। हाजी इमरान हारून ने कहा कि भोपाल के हज यात्रियों और अन्य यात्रियों के लिए रुबात में लंबे समय से ठहरने की सुविधा पहले उपलब्ध रही है। करीब चार वर्ष बाद हज यात्रियों के लिए इसे दोबारा खोला जाना सराहनीय पहल है। औकाफ-ए-शाही ने जनता और हाजियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। कमेटी ने कहा कि हाजियों की सुविधा और कल्याण के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं और सभी व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों एवं प्रक्रिया के अनुसार पूरी की जा रही हैं।  

PF निकालना होगा आसान! EPFO ला रहा UPI सुविधा, खाते में 25% बैलेंस रखना होगा जरूरी

नई दिल्ली कभी बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए, कभी घर में किसी की तबीयत खराब हो जाती है, तो कभी शादी या मकान बनाने के लिए अचानक रकम की जरूरत पड़ जाती है. ऐसी स्थिति में नौकरीपेशा लोगों के लिए भविष्य निधि (PF) का पैसा बड़ी मदद बनता है. लेकिन जरूरत के वक्त PF खाते से पैसा निकालने और रकम बैंक खाते में आने तक इंतजार करना पड़ता है. अब इस परेशानी को कम करने की तैयारी है।  कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने अंशधारकों को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए PF की रकम निकालने की सुविधा देने पर काम कर रहा है. EPFO इसके लिए UAN पोर्टल को अंशधारकों के UPI खातों से जोड़ने की तैयारी कर रहा है. इसके लिए एक नया मोबाइल ऐप भी लाए जाने की बात कही जा रही है. प्रस्तावित व्यवस्था में बैंक खातों के साथ BHIM, फोनपे और गूगल पे जैसे UPI ऐप का इस्तेमाल किया जा सकेगा।  रिपोर्ट के मुताबिक, इस सुविधा के तहत पात्र अंशधारक अपने खाते में जमा रकम का 75% तक हिस्सा निकाल सकेंगे. इसके औपचारिक लॉन्च की उम्मीद दिसंबर 2026 के अंत तक जताई जा रही है।  अब UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा? अभी PF से पैसा निकालने के लिए अंशधारकों को UAN पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन क्लेम करना पड़ता है. इसके बाद ईपीएफओ की ओर से क्लेम वेरिफाई की जाती है और रकम बैंक खाते में भेजी जाती है. इस पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है. नई व्यवस्था का मकसद इसी इंतजार को कम करना है. इसके लिए EPFO बैंकों के साथ मिलकर UPI के जरिए पीएफ निकासी की सुविधा देने का प्रयास कर रहा है. फिलहाल यह ट्रायल फेज में है।  खाते में जमा पूरे पैसे नहीं निकाल सकेंगे नई व्यवस्था में PF खाते से निकासी की एक सीमा रखी जाएगी. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, तय शर्तें पूरी करने वाले अंशधारक अपने EPF बैलेंस का 75% तक हिस्सा UPI के जरिए निकाल सकेंगे. इसका मतलब है कि खाते में जमा पूरी रकम एक साथ निकालने की सुविधा नहीं होगी. मौजूदा नियमों के मुताबिक, खाते में कम से कम 25% रकम बनाए रखने की व्यवस्था रहेगी. यानी जरूरत पड़ने पर भी PF की पूरी बचत निकाल पाना संभव नहीं होगा।  पढ़ाई, शादी और बीमारी में मिलेगी मदद PF की रकम अक्सर लोगों के लिए मुश्किल समय में सहारा बनती है. बच्चों की शिक्षा, शादी, बीमारी या घर बनाने जैसी जरूरतों में यह पैसा काम आ सकता है. नई व्यवस्था का मकसद पात्र अंशधारकों के लिए ऐसी जरूरतों के समय रकम तक पहुंच आसान बनाना है. अगर UPI से निकासी की सुविधा शुरू होती है, तो पात्र रकम पाने के लिए लंबी दावा प्रक्रिया का इंतजार कम हो सकता है. हालांकि, निकासी किन शर्तों और पात्रता के आधार पर होगी, इसकी पूरी जानकारी सुविधा लॉन्च होने पर ही स्पष्ट होगी।  रिपोर्ट के मुताबिक, EPFO का कुल कोष करीब 26 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. संगठन के पास 30 करोड़ से ज्यादा अंशधारक हैं, जिनमें करीब 7.5 करोड़ सक्रिय योगदानकर्ता बताए जाते हैं. UPI के जरिए PF निकासी की सुविधा शुरू होने पर इन सक्रिय अंशधारकों को खास तौर पर फायदा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सुविधा किन लोगों के लिए उपलब्ध होती है और इसके तहत निकासी के नियम क्या तय किए जाते हैं। 

MP के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में उमड़ी पर्यटकों की भीड़, 8 दिन में 4598 लोगों ने देखा जंगल

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन सीजन 2026-27 की शुरुआत पर्यटकों के लिए खास उत्साह लेकर आई है. कोर क्षेत्र के पर्यटन द्वार खुलने के बाद जंगल सफारी के लिए देश-विदेश से पर्यटक बड़ी संख्या में बांधवगढ़ पहुंच रहे हैं. पर्यटन सीजन के शुरुआती 8 दिनों से ही 4598 पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया है।  गेट खुलते ही बांधवगढ़ पहुंच रहे पर्यटक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के पर्यटन द्वारा 1 अक्टूबर 2026 से नए पर्यटन सीजन के लिए खोल दिए गए थे. इसके पहले करीब तीन माह तक केवल बफर क्षेत्र के पर्यटन द्वारों से ही पर्यटकों को जंगल सफारी की अनुमति थी. कोर और बफर क्षेत्र एक साथ शुरू होने के बाद पर्यटकों की संख्या उत्साह जनक रुझान देखने को मिली है।  4598 पर्यटकों ने की जंगल सफारी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि, ''1 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक कुल 926 वाहनों से 4598 पर्यटकों ने बांधवगढ़ के जंगलों का भ्रमण किया. इसमें 4461 भारतीय पर्यटक शामिल रहे, जबकि 137 विदेशी पर्यटकों ने भी बांधवगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव लिया।  पर्यटकों को हो रहे बाघों के दीदार बांधवगढ़ की पहचान बाघों की शानदार दीदार के लिए देश-विदेश में है. पर्यटन सीजन की शुरुआत के साथ कोर क्षेत्र के विभिन्न जोन के साथ बफर क्षेत्र में भी पर्यटकों को बाघों के दीदार हो रहे हैं. जंगल सफारी के दौरान बाघ नजर आने से पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. कई पर्यटक बांधवगढ़ के प्राकृतिक वातावरण वन्य जीवों और जंगल की खूबसूरती को अपने कैमरे में कैद कर रहे हैं।     पर्यटकों की सुविधा का ख्याल रख रहा वन विभाग बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि, ''पर्यटन गतिविधियों का संचालन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है. कोर और बफर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के साथ वन्य जीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा पर भी ध्यान दिया जा रहा है।  शुरुआती 8 दिनों में 4598 पर्यटकों का बांधवगढ़ पहुंचना आगामी पर्यटन सीजन को लेकर पर्यटकों की रुचि को दर्शाता है. आने वाले दिनों में छुट्टियों और पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने के साथ पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है. बांधवगढ़ का जंगल बाघों की मौजूदगी और प्राकृतिक वातावरण एक बार फिर देशी विदेशी सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। 

उज्ज्वला योजना के तहत फ्री मिलेंगे 2 गैस सिलेंडर, जानें कब से कब तक मिलेगा लाभ

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलेंगे दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल पहले चरण में अक्टूबर-दिसंबर 2026 तक और दूसरे चरण में जनवरी-मार्च 2027 तक निःशुल्क रिफिल लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को वित्तीय वर्ष 2026-27 में दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत योगी सरकार पिछले वित्तीय वर्षों में दो चरणों में (होली व दीपावली पर) उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को निःशुल्क सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराती रही है। इस कदम से लाभार्थियों में स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल की प्रवृत्ति बढ़ी है। इससे पर्यावरण के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर धुएं से पड़ने वाले हानिकारक प्रभाव को कम करने में भी मदद मिली है। विगत वर्ष की तरह चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े लाभार्थियों को दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर रिफिल दिए जाएंगे। पहले चरण में अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक और दूसरे चरण में जनवरी से मार्च 2027 तक निःशुल्क रिफिल उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर राज्य सरकार के ऊपर कुल 2,142.78 करोड़ रुपये का अनुमानित व्यय भार आएगा। योजना का लाभ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के ऐसे एसीटीसी लाभार्थियों को मिलेगा, जिनके बैंक खाते आधार से लिंक होंगे और आधार प्रमाणित होगा। ऐसे लाभार्थी ही निःशुल्क एलपीजी रिफिल के लिए पात्र होंगे। सरकार के इस निर्णय से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से आच्छादित लाभार्थियों का जीवन-यापन सुविधाजनक होगा।

IT Jobs में बूम! 1.23 लाख नौकरियां उपलब्ध, लेकिन 55% वैकेंसी सिर्फ अनुभवी उम्मीदवारों के लिए

 नई द‍िल्ली भारत के टेक्नोलॉजी जॉब मार्केट से एक बहुप्रतीक्षित और राहत भरी खबर आई है. देश में टेक नौकरियों की संख्या पिछले 18 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. अक्टूबर में एक्टिव जॉब्स का आंकड़ा 1.23 लाख के पार हो गया है. लेकिन, अगर आप कॉलेज पासआउट हैं और यह सोच रहे हैं कि बाजार खुलने का सीधा फायदा आपको मिलेगा, तो ठहरिए—आंकड़ों की इस चमक के पीछे एक बड़ा कैच (पेच) छुपा है।  स्टाफिंग फर्म 'Xpheno' की ताजा 'एक्टिव टेक जॉब्स आउटलुक' रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2026 में नौकरियों की मांग सितंबर के मुकाबले 5% और पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 17% बढ़ी है. हालांकि, रिकवरी की यह बयार सबके लिए एक जैसी नहीं है, इस बाजार पर पूरी तरह से अनुभवी पेशेवरों का कब्जा दिख रहा है।  1.23 लाख नौकरियां… आखिर किसे मिल रहा है मौका? आंकड़ों का हिसाब-किताब देखें तो मिड-सीनियर (अनुभवी) रोल्स की मांग सबसे ज्यादा है. अकेले इस सेगमेंट में 68,000 वेकेंसी हैं, जो कुल ओपनिंग्स का 55% हिस्सा हैं. इसमें सालाना आधार पर 19% का उछाल दर्ज किया गया है।  दूसरी तरफ, फ्रेशर्स या एंट्री-लेवल नौकरियों की संख्या महज 15,000 पर सिमट कर रह गई है. हालांकि यह आंकड़ा पिछले साल से 15% ज्यादा है, लेकिन सितंबर के मुकाबले इसमें 6% की गिरावट दर्ज की गई है. साफ संदेश है कि बाजार तो बड़ा हो रहा है, लेकिन मलाई अनुभवी हाथों के हिस्से ही आ रही है।  हायरिंग लेवल का पूरा गणित मिड-सीनियर: 68,000 (कुल का 55%, YoY +19%) एंट्री-लेवल: 15,000 (YoY +15%, लेकिन MoM -6%) मिड-जूनियर: 7,000 (MoM +40%, YoY +17%) सीनियर रोल्स: 2,000 (मांग का छोटा हिस्सा) अन्य/अपरिभाषित पद: 31,000 कंपनियों को कैसी स्किल्स की तलाश है? इस रिकवरी को सबसे ज्यादा सहारा आईटी सर्विसेज से मिल रहा है, जहां 66,000 एक्टिव नौकरियां हैं जो पिछले साल अक्टूबर से 57% ज्यादा हैं।  कंपनियां अब सिर्फ डिग्री देखकर नौकरियां नहीं बांट रहीं. Xpheno के मुताबिक, एआई इंजीनियरिंग (AI Engineering), डेटा एनालिस्ट और टेक्निकल लीडरशिप जैसे रोल्स की जबरदस्त डिमांड है. टॉप 6 आईटी कंपनियों के डेटा से पता चलता है कि इन खास रोल्स में टैलेंट पूल पिछले दो तिमाहियों में 14% से 22% तक बढ़ा है।  कोर टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग रोल्स 61,000 नौकरियों के साथ सबसे आगे हैं. इसके बाद टेक बिजनेस डेवलपमेंट व सेल्स (14,000), टेक कंसल्टिंग (5,000) और आईटी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (3,000) का नंबर आता है।  वर्क-फ्रॉम-होम का जमाना खत्म, ऑफिस वापसी का दौर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में 18,000 वेकेंसी हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 64% ज्यादा हैं. लेकिन सबसे बड़ा बदलाव काम करने के तरीके में आया है.  वर्क-फ्रॉम-ऑफिस (WFO): 1 लाख नौकरियां (कुल मांग का 81%) पूरी तरह ऑफिस से काम करने वाली हैं. रिमोट और हाइब्रिड: वर्क-फ्रॉम-होम (रिमोट) नौकरियों में 23% और हाइब्रिड रोल्स में 19% की भारी गिरावट आई है. बेंगलुरु का दबदबा कायम, लेकिन टियर-2 और 3 शहरों ने चौकाया टेक जॉब्स के मामले में 31,000 नौकरियों के साथ बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा हब बना हुआ है. इसके बाद हैदराबाद (14,000) और दिल्ली-एनसीआर (9,000) का नंबर आता है. लेकिन असली चौंकाने वाला आंकड़ा टियर-2 और टियर-3 शहरों से आया है. छोटे शहरों में एक्टिव टेक नौकरियों की संख्या बढ़कर 40,000 पहुंच गई है, जिसमें सालाना आधार पर 67% की रिकॉर्ड तेजी देखी गई है। 

मध्यप्रदेश में रेल कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार, 500 किमी रेल लाइन का सर्वे जल्द पूरा होने की उम्मीद

भोपाल  पश्चिम मध्य रेलवे में लगातार बढ़ते रेल यातायात के दबाव से निपटने के लिए तीसरी रेल लाइन के विस्तार पर काम किया जा रहा है। रेलवे 500 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन बिछाने की तैयारी है। बताया जाता है कि परियोजना का सर्वे अंतिम चरण में है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद काम शुरु किया जाएगा। करीब तीन साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तीसरी लाइन बनने के बाद यात्री और मालगाड़ियों के लिए नया रेल पाथ उपलब्ध होगा। इससे ट्रेनों को रोकने और लाइन क्लियर होने के इंतजार की समस्या कम होगी। ट्रेनों की गति बढ़ाने के साथ परिचालन को भी व्यवस्थित किया जा सकेगा। कार्य अंतिम स्तर पर थर्ड लाइन को लेकर सर्वे का कार्य अंतिम स्तर पर है। इसके तैयार होने से न केवल ट्रेनों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि पंक्चुअलिटी भी बेहतर होगी। इससे औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा। – डॉ. मधुर वर्मा, सीपीआरओ, पमरे रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का दबाव पश्चिम मध्य रेलवे का इटारसी जंक्शन प्रमुख रेल केंद्रों में शामिल है। यहां से रोजाना 450 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है। यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी इस नेटवर्क से गुजरती हैं। मौजूदा दो लाइनों पर बढ़ते यातायात के कारण कई बार ट्रेनों को लाइन क्लियरेंस के लिए रोकना पड़ता है। तीसरी लाइन बनने के बाद परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। 7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान सूत्रों के अनुसार, तीसरी लाइन परियोजना पर करीब 7 हजार करोड़ खर्च होने का अनुमान है। रेलवे के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, एक किलोमीटर रेल लाइन बिछाने में करीब 12 से 15 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकता है। यह खर्च भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करेगा। इसमें ट्रैक निर्माण के साथ सिग्नलिंग, विद्युतीकरण और अन्य जरूरी रेल अधोसंरचना के काम भी शामिल होंगे। जबलपुर को भी मिलेगा फायदा इस रेलखंड से जबलपुर होकर कई लंबी दूरी की ट्रेनें संचालित होती हैं। यह रेलखंड माल परिवहन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। तीसरी लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन में सुधार का लाभ बड़ी संख्या में यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। यात्री ट्रेनों के कारण मालगाड़ियों को लंबे समय तक रोकने की जरूरत कम होगी। इससे माल परिवहन की गति बढ़ने के साथ औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है। यह है स्थिति 500 किलोमीटर लंबी रेल लाइन। 07 हजार करोड़ रुपए अनुमानित लागत। 450 से अधिक ट्रेनों का होता है आवागमन। 300 यात्री ट्रेनें, और 150 मालगाड़ियों की आवाजाही यह होगा फायदा ट्रैक मेंटेनेंस के लिए समय मिलेगा। ट्रैक का रखरखाव आसान होगा। ट्रेनों की गति बढ़ेगी। परिचालन व्यवस्था बेहतर होगी। कोचिंग ट्रेनों की संख्या बढ़ सकेगी।

नवरात्रि के पहले दिन करें ये 5 काम, कलश स्थापना से कन्या भोज तक मिलेगा मां दुर्गा का आशीर्वाद

Navratr 2026 नवरात्रि का पावन पर्व 11 अक्टूबर, रविवार से आरंभ हो रहा है। देवी आराधना के लिए समर्पित इन नौ दिनों में भक्त श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि नवरात्रि में विधि-विधान से की गई साधना मन को शांति देने के साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ाती है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन यानी आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से कुछ विशेष कार्य करना शुभ माना जाता है। 1. कलश स्थापना करें नवरात्रि के प्रथम दिन घर में विधि-विधान से कलश स्थापित करना शुभ माना जाता है। कलश को शक्ति, समृद्धि और जीवन का प्रतीक माना जाता है। देवी पूजा की शुरुआत कलश स्थापना और मां दुर्गा के आह्वान से की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक कलश की स्थापना भक्त को नियमित पूजा, जप और साधना से जोड़े रखती है। 2. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष महत्व रखता है। संभव हो तो प्रतिदिन इसका पाठ करें। यदि समय कम हो तो देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र का नियमित पाठ किया जा सकता है। सुविधा के अनुसार दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों को नौ दिनों में बांटकर भी पढ़ा जा सकता है। मान्यता है कि देवी की महिमा का पाठ करने से मनोबल बढ़ता है और मां की कृपा प्राप्त होती है। 3. नवार्ण मंत्र का जाप करें नवरात्रि में नवार्ण मंत्र का जाप देवी उपासना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। मंत्र है- 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे'। मान्यता के अनुसार इस मंत्र के जाप से मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और मां काली की आराधना का फल प्राप्त होता है। इसे रुद्राक्ष की माला से जप सकते हैं। समय कम हो तो रोज कम से कम एक माला यानी 108 बार जाप करें। 4. कन्याओं को भोजन कराएं नवरात्रि में कन्या पूजन और कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में कन्याओं को देवी स्वरूप माना गया है। सामर्थ्य हो तो प्रतिपदा से महानवमी तक कन्याओं को भोजन कराया जा सकता है। किसी अनाथालय में बच्चियों को भोजन कराना भी सेवा का अच्छा माध्यम हो सकता है। 5. जरूरतमंदों की सहायता करें नवरात्रि केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि सेवा और दान-पुण्य का भी अवसर है। इस दौरान जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल, दवाएं, जूते-चप्पल जैसी उपयोगी वस्तुएं दान करें। सामर्थ्य रखने वाले लोग बच्चों की शिक्षा और पालन-पोषण में सहयोग करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकते हैं। सच्चे मन से की गई सेवा को देवी आराधना का ही एक रूप माना जाता है।