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भोपाल में IAS अफसर के घर में घुसकर 40 गुंडों ने की तोड़फोड़, अफसर बोलीं – खुलेआम बैठकर दे रहे थे धमकी

भोपाल 

भोपाल में शिक्षा विभाग में उप सचिव आईएएस मंजूषा राय के घर में शुक्रवार को कुछ लोग जेसीबी लेकर पहुंच गए। इस दौरान बाउंड्रीवॉल और सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए। महिला अफसर ने कहा कि 40 गुंडे बाहर खड़े कर दिए। प्रॉपर्टी का विवाद है तो सिविल कोर्ट में आओ।

मामला दानिशकुंज कॉलोनी में शुक्रवार का है। विवाद 1800 स्क्वायर फीट जमीन पर बने मकान के एग्रीमेंट, नामांतरण और रजिस्ट्री से जुड़ा है। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अफसर भी मौके पर पहुंचे। दोनों पक्षों को समझाइश दी गई। लेकिन उनके हटने के बाद में उन्होंने जेसीबी लगाकर मकान को तोड़ना शुरू कर दिया।

पुलिस से नहीं मिल रहा सहयोग

41 लाख रुपए में किया था एग्रीमेंट महिला अफसर राय ने बताया कि 2010 में मकान का 41 लाख रुपए एग्रीमेंट किया था। पूरा पेमेंट बैंक अकाउंट से किया। इसके बाद भी जब-जब जरूरत पड़ी, लाखों रुपए लिए। संबंधित के नाम नामांतरण नहीं होने की वजह से रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे थे। वहीं, साल 2011 से परिवार समेत मकान में रह रहे हैं। जरूरत पड़ने पर यहां दो कमरे भी बनवाए।

दूसरे के नाम पर करा दी रजिस्ट्री महिला ने बताया कि इसी बीच हितेश बटेजा नामक व्यक्ति के जरिए 17 मार्च-2025 में नामांतरण करा दिया। 10 जून में रजिस्ट्री करा दी। इस बारे में हमें कोई जानकारी नहीं दी गई। शुक्रवार को 40 से ज्यादा गुंडे घर पहुंचे और घर में तोड़फोड़ की। गुंडे घर के बाहर ही बैठ गए।

पति के नाम से कराया था एग्रीमेंट आईएएस राय ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से भी शिकायत की है। इसमें कहा है कि मकान नंबर-595 दानिश कुंज में रंजना अहमद से पति विक्रांत प्रवीण राय ने 16 दिसंबर-10 में 41 लाख रु में विक्रय अनुबंध कर क्रय किया था। यह डुप्लेक्स मकान है। रंजना अहमद की मृत्यु के बाद उसके पुत्र सईद फरीद अहमद परिवर्तित नाम रिदित अरोड़ा को शेष बची हुई राशि मकान के एवज में अपने स्वयं के खाते से एवं मेरे पति के बचत खाते से भुगतान की गई।

दो बार नामांतरण आवेदन खारिज 2021 में रिदित अरोड़ा द्वारा नायब तहसीलदार न्यायालय में नामांतरण के लिए दो बार आवेदन लगाए गए थे। जिन्हें दस्तावेज के अभाव में खारिज कर दिया था। रिदित अरोड़ा की सहमति से पारिवारिक आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए हमारे द्वारा उक्त संपत्ति में अतिरिक्त निर्माण कार्य भी कराया था। इसका भुगतान मैंने अपने स्वयं के खाते से किया था।

कोर्ट में विचाराधीन है प्रकरण बाद में 17 मार्च 2025 में उक्त संपत्ति पर रंजना अहमद के पुत्र रिदित अरोड़ा का नामांतरण अतिरिक्त तहसीलदार कोलार ने किया और 10 जून में उक्त संपत्ति का विक्रय अरोड़ा ने मोना बटेजा पति हितेश बटेजा को कर दिया। हमारे संज्ञान में उक्त रजिस्ट्री और नामांतरण के आने के पश्चात कोलार एसडीएम कोर्ट में नामांतरण के विरुद्ध अपील की गई। तहसीलदार कोर्ट में मोना बटेजा के पक्ष में नामांतरण न हो, इस संबंध में आपत्ति भी लगाई गई। प्रकरण राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है।

एसडीएम-तहसीलदार के यहां आपत्ति लगाई उन्होंने कहा कि हमारे सभी रिकॉर्ड में इसी मकान का नाम दर्ज है। इस संबंध में एसडीएम और तहसीलदार के यहां आपत्ति लगाई गई है। इस मामले में प्रशासनिक अफसर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। वहीं, बटेजा से चर्चा नहीं हो पाई।

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