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भारत की ऊर्जा नीति: रूस से तेल खरीद जारी, सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता

वाशिंगटन 
अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ में बढ़ोतरी के बावजूद भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऊर्जा सुरक्षा के अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगा। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने साफ कहा है कि भारत तेल वहीं से खरीदेगा जहां से "सर्वश्रेष्ठ सौदा" मिलेगा, चाहे वह रूस हो या कोई और देश। रूसी समाचार एजेंसी TASS को दिए एक इंटरव्यू में राजदूत विनय कुमार ने अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह कदम "निष्पक्ष व्यापार के सिद्धांतों को कमजोर करता है।" उन्होंने कहा कि अमेरिका का यह फैसला "अनुचित, अविवेकपूर्ण और अनुचित" है। राजदूत की यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के कुछ ही हफ्तों बाद आई है।

"भारत की प्राथमिकता है ऊर्जा सुरक्षा"
कुमार ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति का केंद्रबिंदु देश की 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने दोहराया कि भारत रूस सहित कई देशों से सहयोग के जरिए वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लाने में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा, "भारत सरकार ऐसे सभी कदम उठाएगी जो देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करें। व्यापार एक वाणिज्यिक प्रक्रिया है और भारतीय कंपनियां वहीं से तेल खरीदेंगी जहां से उन्हें सबसे लाभकारी सौदा मिलेगा।"

रूस से बढ़ा तेल आयात, अमेरिका-यूरोप भी कर रहे व्यापार
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, ने 2022 के बाद से रूस से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है, वह भी रियायती दरों पर। कुमार ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देश भी रूस से व्यापार कर रहे हैं, इसलिए भारत की नीतियों पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा व्यापार पूरी तरह बाजार आधारित है और उद्देश्य भारत के नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।"
 
जयशंकर ने भी जताई नाराजगी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इससे पहले अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने अमेरिका के फैसले को "अनुचित और पक्षपातपूर्ण" बताया था और कहा था कि भारत किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।

रुपया-रूबल में व्यापार से बढ़ा द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार
भारत और रूस के बीच वित्तीय लेनदेन को लेकर भी बड़ी बात सामने आई है। कुमार ने कहा कि दोनों देशों ने रुपया-रूबल में व्यापार के लिए एक स्थिर प्रणाली स्थापित की है। इससे अब तेल भुगतान में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि "राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार की यह व्यवस्था रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद विकसित की गई है और इसने द्विपक्षीय ऊर्जा व्यापार को तेजी से आगे बढ़ाया है।" हालांकि रूस से भारत का तेल आयात काफी बढ़ा है, लेकिन रूसी बाजार में भारत का निर्यात अभी भी अपेक्षाकृत सीमित है। सरकार इस असंतुलन को भी दूर करने की दिशा में काम कर रही है।

 

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