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ब्रिज विवाद में हाईकोर्ट का कटाक्ष, जिम्मेदारों पर सवाल: किसी का तो सिर कटेगा

जबलपुर
बलि का बकरा बाहर हो गया अब किसी न किसी का तो सर कटेगा, यह तल्ख टिप्पणी की है मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डबल बेंच ने. भोपाल के ऐशबाग में 90 डिग्री ब्रिज के मामले में कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किए जाने के आदेश को वापस लेने के निर्देश भी दिए हैं.

याचिका में कहा गया था कि भोपाल के ऐशबाग में बरखेड़ी फाटक पर रेल ओवर ब्रिज बनाने का ठेका उसे 1 मार्च 2023 को मिला था. पुल पर 90 डिग्री का कोण बनने पर पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता ने 4 जुलाई 2025 को टेंडर निरस्त कर याचिकाकर्ता को एक साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया था. याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उसे लोक निर्माण विभाग के द्वारा जो ड्राइंग और डिजाइन दी गई थी उसी के मुताबिक ही निर्माण किया गया. लेकिन इस मामले में विभाग की किरकिरी होने के बाद उसे ही ब्लैक लिस्ट कर अधिकारियों ने अपना दामन बचा लिया है.

जांच के बाद मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान मैनिट के वरिष्ठ प्रोफेसर ने अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की थी. रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि पुल का मोड़ वास्तव में 90 डिग्री का नहीं है, बल्कि 118 से 119 डिग्री के बीच का है. मैनिट प्रोफेसर की रिपोर्ट में कहा गया कि ब्रिज की ज्यामिति सोशल मीडिया में दिखाई जा रही तस्वीरों से अलग है. पुल का एंगल अधिक तीखा न होकर थोड़ा विस्तृत है. इसके बावजूद संरचना को लेकर जनसुरक्षा की आशंकाएं और तकनीकी खामियों पर सवाल बने हुए हैं.

7 इंजीनियर हुए थे सस्पेंड
विवाद गहराने के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने जांच समिति गठित की और 28 जून को पीडब्ल्यूडी के सात इंजीनियर को निलंबित किया. एक सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता पर विभागीय जांच बैठाई गई. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उस समय घोषणा की थी कि निर्माण एजेंसी और डिजाइन सलाहकार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और पुल में सुधार कार्य के लिए समिति बनाई जाएगी. वही लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि दुनिया भर में कई जगह भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए तीखे मोड़ वाले पुल बनाए जाते हैं. भोपाल के इस फ्लाईओवर के मामले में तकनीकी कठिनाई केवल एंगल की वजह से नहीं, बल्कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण भी हुई. मंत्री ने आश्वासन दिया कि विभाग की ओर से हाईकोर्ट को सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब प्रस्तुत किया जाएगा.

गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान ही हाईकोर्ट के निर्देश पर मैनिट के प्रोफेसर डॉ एमएस होरा, प्रोफेसर डॉक्टर नितिन डिंडोरकर, प्रोफेसर डॉक्टर एसके कटियार, प्रोफेसर डॉक्टर पीके अग्रवाल और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर प्रियमित्र मुनोथ ने 2 और 3 सितंबर को पीडब्ल्यूडी के आत्मराम मोरे, एसडीओ ब्रिज रंजीत सिंह और सब इंजीनियर सत्यम चौधरी के साथ पुल के विवादित हिस्से की जांच की थी.

28 अक्टूबर को होगी सुनवाई
कमेटी ने ठेकेदार पुनीत चड्ढा को क्लीन चिट देते हुए कहा था कि उसने ड्राइंग के अनुसार ही निर्माण किया. याचिका की सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए ठेकेदार की तुलना बलि के बकरे से की है. कोर्ट ने कहा है कि अब बलि का बकरा बाहर हो गया है अब किसी न किसी का सिर तो कटेगा. हाई कोर्ट ने अब पूरे मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की है.

 

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