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ट्रेड डील के बाद भारत आएंगे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, द्विपक्षीय संबंधों पर होगा फोकस

नई दिल्ली

अगले महीने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर भारत का दौरा कर सकते हैं. यह दौरा 7 से 9 अक्टूबर तक मुंबई में होने वाले ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान होगा. भारत दौरे के दौरान कीर स्टारमर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे. यह यूके के पीएम बनने के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा. दिलचस्प बात यह है कि यह दौरा भारत और ब्रिटेन के बीच FTA पर हस्ताक्षर होने के लगभग दो महीने बाद हो रहा है, जिससे दोनों देशों के व्यापार और आर्थिक संबंधों में और मजबूती आने की उम्मीद है.

इस यात्रा से पहले ब्रिटेन ने फिलिस्तीन को मान्यता दी है. वहीं भारत और अमेरिका के बीच में टैरिफ को लेकर तनाव देखा जा रहा है. साथ ही भारत और ब्रिटेन ने जुलाई 2025 में ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता इसलिए अहम है क्योंकि यह किसी पश्चिमी देश के साथ भारत का पहला बड़ा व्यापारिक समझौता है. इस FTA के तहत ब्रिटेन भारतीय उत्पादों पर लगने वाले औसत 15% टैरिफ को घटाकर लगभग 3% तक लाएगा. इससे कृषि, समुद्री उत्पाद, प्लास्टिक, केमिकल और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सेक्टर्स के भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा. अनुमान है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार हर साल 33 अरब डॉलर तक बढ़ेगा.
इन क्षेत्रों में भी साथ होंगे भारत-यूके

इसके साथ ही, दोनों देशों ने डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन पर भी सहमति जताई है. इससे भारतीय कर्मचारियों और नियोक्ताओं को ब्रिटेन में तीन साल तक सोशल सिक्योरिटी योगदान से छूट मिलेगी. भारतीय कंपनियों के लिए यह समझौता करीब 4,000 करोड़ रुपये की बचत कराएगा. भारत-यूके रिश्तों में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी भी अहम है. जुलाई 2024 में दोनों देशों ने टेक्नोलॉजी सिक्योरिटी इनिशिएटिव (TSI) की घोषणा की थी. इसका मकसद क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्रिटिकल मिनरल्स, एडवांस्ड मटीरियल्स और सेमीकंडक्टर्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना है.

यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर तनाव बना हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कई सेक्टरों में 50% तक टैरिफ लगा दिया है. साथ ही, नए H-1B वीजा पर 88 लाख रुपये की फीस और ईरान के चाबहार बंदरगाह पर छूट हटाने जैसे फैसलों ने भारतीय चिंताएं बढ़ा दी हैं.

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