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मैप अपडेट से पहले जनता की राय जरूरी: मतलौड़ा सेक्टर प्लान में संशोधन प्रस्ताव जारी

चंडीगढ़
पानीपत जिले के मतलौड़ा कस्बे में प्रस्तावित सेक्टर-1 से सेक्टर-7 की शहरी विकास योजना में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इस योजना के तहत जो मास्टर रोड पहले तय की गई थी, वह अब जमीन पर संभव नहीं है, इसलिए हरियाणा के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने सेक्टरल प्लान में संशोधन कर दिया है और अब इस बदलाव पर आम जनता की राय मांगी गई है।

अंतिम स्वीकृति से पहले स्थानीय निवासी, भूमि मालिक, किसान, डेवलपर और संस्थान इस नए प्रस्ताव को समझ सकेंगे और यदि उन्हें किसी प्रकार की आपत्ति या सुझाव है, तो वह निर्धारित समय में विभाग के संज्ञान में ला सकेंगे। इसके लिए आम लोगों को एक माह का समय दिया है। यह सेक्टोरल प्लान मतलौड़ा क्षेत्र के भविष्य के विकास की नींव माना जा रहा है। इस प्लान के लागू होने के बाद यहां सड़क नेटवर्क, रिहायशी सेक्टर, सुविधाएं और ज़मीन का उपयोग तय होगा। ऐसे में संशोधन का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका सीधा प्रभाव स्थानीय लोगों की जमीनों, भावी निर्माण, निवेश और क्षेत्रीय विकास मॉडल पर पड़ेगा।

पुराना मास्टर रोड संभव नहीं, इसलिए बदली योजना
14 जनवरी, 2025 को तैयार किए गए मूल प्लान में सेक्टर-1 में एक मास्टर रोड प्वाइंट-ए से प्वाइंट-बी तक चलाई गई थी। लेकिन विभाग की साइट जांच में पाया गया कि यह रोड जमीन पर तकनीकी और व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। इसी वजह से इस रोड की दिशा बदलकर नई अलाइनमेंट तैयार की गई है।

संशोधित ड्रॉइंग ऑनलाइन, अब नागरिकों की बारी
विभाग ने संशोधित प्लान की स्कैन कॉपी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। लोग यहां जाकर यह देख सकते हैं कि योजना में क्या बदलाव किए गए हैं और उसका असर किन हिस्सों पर पड़ेगा। जिस भी व्यक्ति या संस्था को प्रस्तावित संशोधन पर आपत्ति हो या वह कोई सुझाव देना चाहता हो, उसे 30 दिनों के भीतर लिखित रूप में अपनी प्रतिक्रिया भेजनी होगी।

आपत्तियों की जांच के बाद होगा अंतिम फैसला
सीनियर टाउन प्लानर कार्यालय प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा कर 15 दिनों में रिपोर्ट विभाग को भेजेगा, जिसके बाद इस सेक्टर प्लान पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के निदेशक अमित खत्री के अनुसार, जमीन की वास्तविक स्थिति और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह बदलाव आवश्यक था और इससे क्षेत्र का विकास अधिक योजनाबद्ध और व्यवहारिक रहेगा।

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