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लोकायुक्त ने महिला एवं बाल विकास अधिकारी को दबोचा, नौकरी बचाने के लिए मांगी रिश्वत

देवास 

कम्प्यूटर ऑपरेटर को नौकरी पर बरकरार रखने के एवज में रिश्वत मांगना महिला व बाल विकास परियोजना अधिकारी को महंगा पड़ गया. बागली में लोकायुक्त की टीम ने कार्रवाई करते हुए परियोजना अधिकारी को कार में 5 हजार रु की रिश्वत लेते पकड़ा है. हालांकि, अधिकारी ने मीडिया से बातचीत में आरोपों को निराधार बताया और कहा कि उसे षड्यंत्र रचाकर फंसाया गया है.

कंप्यूटर ऑपरेटर ने लगाए थे रिश्वत मांगने के आरोप

देवास के बागली क्षेत्र के महिला व बाल विकास विभाग में आउटसोर्सिंग कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रीतेश तंवर का आरोप है कि उसे नौकरी पर कन्टिन्यू रखने के एवज में 18 हजार रू की रिश्वत मांगी गई थी. उसने उज्जैन लोकायुक्त की टीम को इस मामले की लिखित शिकायत की थी. पहले लोकायुक्त उज्जैन ने शिकायत कंफर्म करने के लिए शिकायतकर्ता को कुछ पैसे लेकर अधिकारी के पास भेजा और कंफर्मेशन के बाद ट्रैप की प्लानिंग की.

इसके बाद बुधवार को अगली किश्त के रूप में शिकायतकर्ता से 5 हजार रु रिश्वत के रूप में दिलवाए, तभी लोकायुक्त की टीम ने महिला व बाल विकास परियोजना अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ लिया. उज्जैन लोकयुक्त की टीम ने आगे की कार्रवाई देवास सर्किट हाउस में की और लोकल जमानत पर अधिकारी को छोड़ दिया है.

डीएसपी लोकायुक्त ने बताई पूरी कहानी

वहीं, मामले को लेकर लोकायुक्त डीएसपी उज्जैन दिनेशचंद्र पटेल ने कहा, '' 4 दिसंबर को शिकायतकर्ता प्रीतेश तंवर, निवासी बागली, जिला देवास ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त उज्जैन आनंद यादव को शिकायत की थी कि वह कार्यालय परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग में कम्प्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत है. उसे ऑनलाइन सेंटर वफोटोकॉपी सेंटर से प्रपत्र टाइपिंग कार्य और ईमेल आदि कार्यों के संपादन के लिए 9000 रु प्रतिमाह मिलता है. लेकिन आरोपी रामप्रवेश तिवारी, परियोजना अधिकारी ने उसी कार्यालय में लगातार उसे कार्य करने देने के लिए दो महीने के हिसाब से 18 हजार रु की मांग की थी. इसके बाद शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद ट्रैप की कार्वाई की गई.''

लोकायुक्त डीएसपी ने आगे कहा, '' 10 दिसंबर को आवेदक द्वारा आरोपी रामप्रवेश तिवारी को रेलवे स्टेशन रोड देवास पर रिश्वत की अगली किस्त दी गई, तभी टीम ने रिश्वत राशि लेते हुए आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा है.''

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