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मध्यप्रदेश को विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाने के संबंध में विधानसभा में चर्चा

मध्यप्रदेश के विकास में आलोचनाओं को नहीं, सुझाव को दें प्राथमिकता
नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय का वक्तव्य

भोपाल 
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को विधानसभा में एक दिन के विशेष सत्र में अपने वक्तव्य में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत-2047 के विकास का विजन दिया है। हमें विकसित मध्यप्रदेश @2047 को ध्यान में रखकर आलोचनाओं से हटकर प्रगति के सुझाव को प्राथमिकता देनी होगी। इसमें सदन के प्रत्येक सदस्य का सुझाव महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब भारत 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरा करेगा, तब इतिहास पूछेगा मध्यप्रदेश ने अपने हिस्से की जिम्मेदारी किस तरह से निभाई है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट, सिंहस्थ-2028 की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश को आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये राम वन पथ गमन और श्रीकृष्ण पाथेय का विकास किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ने आर्थिक विकास, पर्यटन, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, नवाचार, सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक गौरव के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

मध्यप्रदेश गठन का इतिहास
मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश का जन्म एक विशिष्ट और असामान्य ऐतिहासिक संयोग का परिणाम था। इस क्षेत्र के निवासियों द्वारा कभी किसी पृथक मध्यप्रदेश राज्य की मांग नहीं की गई थी। स्वतंत्रता के बाद गठित राज्य पुनर्गठन आयोग मूलत: भाषायी आधार पर राज्यों के गठन की प्रक्रिया का कार्य कर रहा था, किन्तु मध्यप्रदेश का निर्माण भाषायी नहीं, बल्कि प्रशासनिक और भौगोलिक स्थिति के आधार पर हुआ है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि विंध्य प्रदेश, मध्य भारत, भोपाल रियासत और महाकौशल क्षेत्र का विलय हुआ। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से अवश्य पिछड़ा था, किन्तु केन्द्रीय स्तर पर राजनीतिक भागीदारी जरा भी कम नहीं थी। स्व. डॉ. शंकरदयाल शर्मा उप राष्ट्रपति और बाद में राष्ट्रपति बने।

विकास यात्रा
नगरीय विकास मंत्री श्री विजयवर्गीय ने प्रदेश की विकास यात्रा की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 1956 में प्रति व्यक्ति आय मात्र 261 रुपये थी, जो आज बढ़कर एक लाख 50 हजार रुपये से अधिक हो चुकी है। राज्य का बजट 1956 में 493 करोड़ रुपये का था, जो आज बढ़कर 4.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है। साक्षरता दर भी काफी बढ़ी है। यह आँकड़े हमारी विकास यात्रा को बताते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 के बाद मध्यप्रदेश के विकास को न केवल गति मिली, बल्कि उसे स्पष्ट दिशा और ठोस परिणाम भी प्राप्त हुए। आज राज्य में 5 लाख किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क है। इस मामले में मध्यप्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। बिजली के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस राज्य बन चुका है। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में रीवा और ओंकारेश्वर जैसे प्रकल्पों ने सौर ऊर्जा में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलायी है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि कृषि क्षेत्र में मध्यप्रदेश को 7 बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त हुआ है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने पं. रविशंकर शुक्ल से लेकर अब तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में हुए उल्लेखनीय कार्यों की जानकारी सदन को दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उल्लेखनीय कार्यों का ‍जिक्र करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन हुआ है। इस परियोजना में 3 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा, 6 लाख कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वर्ष 2025 में उद्योग वर्ष के दौरान ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव, राष्ट्रीय इंटरेक्टिव सेशन और विदेश यात्राओं के माध्यम से मध्यप्रदेश को 32 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्राप्त हुए हैं। इन निवेशों से 23 लाख से अधिक रोजगार का सृजन होगा।

विकास के अन्य कार्य
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना केन-बेतवा का भूमि-पूजन किया गया है। दो मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में इंदौर-उज्जैन और भोपाल क्षेत्र का विकास किया जायेगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की उपलब्धि की चर्चा करते हुए मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि पिछले 2 वर्षों में प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना में एक लाख 64 हजार से अधिक आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। नागरिकों को 24 घंटे पेयजल आपूर्ति की दिशा में ठोस कदम उठाये गये हैं। उन्होंने इंदौर को लगातार स्वच्छ शहर के रूप में देश में पहचान दिलाने का जिक्र भी किया। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने बताया कि 32 वर्ष पुराने विवाद हुकुमचंद मिल के प्रकरण का समाधान किया गया। मिल के 6 हजार से अधिक मजदूर परिवारों को 250 करोड़ रुपये बकाया भुगतान किया गया। इंदौर शहर के मध्य 43 एकड़ भूमि का विकास कर निवेश को आकर्षित किया जायेगा। 

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