samacharsecretary.com

RSS चीफ मोहन भागवत की नसीहत- ‘घर से ही लव जिहाद रोकना शुरू करें’

नई दिल्ली.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख ने शनिवार को कहा कि ‘लव जिहाद’ को रोकने के प्रयास परिवार से ही शुरू होने चाहिए। उन्होंने इसके लिए परिवारों में संवाद, महिलाओं में जागरूकता और सामूहिक सामाजिक प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया। आरएसएस की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि संगठन की ओर से यहां आयोजित ‘स्त्री शक्ति संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने महिलाओं की सामाजिक भूमिका पर चर्चा के दौरान ‘लव जिहाद’ के मुद्दे का उल्लेख किया।

‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी संगठन मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदू महिलाओं का कथित तौर पर प्रेम संबंध या शादी के जाल में फंसाकर इस्लाम धर्म में धर्मांतरण कराने के संदर्भ में करते हैं। भागवत ने कहा कि परिवारों को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि किसी परिवार की लड़की किसी अजनबी के प्रभाव में कैसे आ जाती है। उन्होंने इसे परिवारों में संवाद की कमी का परिणाम बताया।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इस दिशा में तीन स्तरों पर प्रयास जरूरी हैं, जिनमें परिवारों के भीतर निरंतर संवाद, लड़कियों में जागरूकता पैदा करना और स्वयं की रक्षा के लिए उन्हें सक्षम बनाना तथा ऐसे अपराध करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई शामिल है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों को भी सतर्क रहना चाहिए और समाज को सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया देनी चाहिए, ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके।

भागवत ने कहा कि धर्म, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था महिलाओं के कारण सुरक्षित है। उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण, वैचारिक दिशा और पारिवारिक व सामाजिक जीवन में उनकी सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ‘वह समय बीत चुका है जब सुरक्षा के नाम पर महिलाओं को घरों तक सीमित रखा जाता था।’ उन्होंने कहा कि परिवार और समाज पुरुषों और महिलाओं के संयुक्त प्रयासों से आगे बढ़ते हैं, इसलिए दोनों का ‘प्रबोधन’ आवश्यक है।

कार्यक्रम में आरएसएस के मध्य भारत प्रांत के प्रांत संघचालक अशोक पांडे और विभाग संघचालक सोमकांत उमलाकर भी मंच पर मौजूद थे। भागवत ने कहा कि महिलाएं परिवार में देखभाल करने वाली की केंद्रीय भूमिका निभाती हैं और संतुलन, संवेदनशीलता एवं व्यवस्था बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि देश की आबादी में महिलाओं की संख्या लगभग आधी है और सामाजिक तथा राष्ट्रीय कार्यों में अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है।

मानसिक स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि यह जरूरी है कि परिवार में कोई भी स्वयं को अकेला महसूस न करे। उन्होंने बच्चों पर वास्तविकता से परे अपेक्षाएं थोपने से बचने की सलाह दी और कहा कि सफलता से अधिक महत्वपूर्ण जीवन का अर्थ है। भागवत ने कहा कि भारत ‘मानसिक गुलामी’ से बाहर निकल रहा है और दुनिया उम्मीदों के साथ देश की ओर देख रही है।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here