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झारखंड के जामताड़ा में आम बगान के बीच में गेंदा फूल की खेती

रामगढ़.

कुंडहित प्रखंड के बरमसिया गांव की महिला किसान ने आम बागवानी के साथ अंतरवर्तीय‎ फसल के रूप में गेंदा फूल की खेती कर एक नई मिसाल पेश की है। आठ किसानों के समूह ने मिलकर 25 एकड़‎ बंजर भूमि पर बिरसा मुंडा आम बागवानी योजना के तहत बागवानी की है।

आम के पौधों के बीच खाली जगह देखकर विष्णुप्रिया मंडल ने उसमें अंतरवर्तीय फसल लगाने का‎ निर्णय लिया। गेंदा कम समय में तैयार होने वाली और अधिक मुनाफा देने वाली फसल है। इससे खरपतवार भी‎ कम होता है और बाग का वातावरण सुंदर बना रहता है। खेती शुरू करने से पहले उन्होंने कृषि विभाग व कृषक‎ मित्रों से सलाह ली।

जैविक खाद, सिंचाई और बीज चयन पर विशेष ध्यान

जैविक खाद, सिंचाई और बीज चयन पर विशेष ध्यान दिया। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही‎ महीनों में बागान गेंदे के सुनहरे फूलों से महक उठा। इतना ही नहीं, गेंदे के पौधों से कीट-पतंग भी नियंत्रित रहते हैं‎ और आम के पौधों को कोई नुकसान नहीं हुआ। गेंदे के फूलों की मांग शादी-विवाह, पूजा-अर्चना और कार्यक्रमों में‎ काफी रहती है। प्रतिदिन ग्राहक सीधे बगीचे से फूल खरीदने पहुंचते हैं। इससे गांव में रोजगार भी बढ़ा है। एक‎ अनुमान के मुताबिक दो एकड़ में हर सीजन लाखों रुपए की आमदनी संभव है। किसान बताती हैं कि पिछले वर्ष‎ भी गेंदा फूल से अच्छी आमदनी हुई थी। इस बार उन्होंने नर्सरी भी तैयार की है, जिससे अलग से कमाई हो रही है।‎ विष्णु प्रिया के साथ शेफाली मरांडी, बीरबल मरांडी, संतोष मरांडी, सुहागिनी मरांडी, आनंद मरांडी, अनिता मरांडी‎ और यशोमती मरांडी भी खेती कर रहे हैं।बरमसिया सहित आसपास के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ‎ विविध खेती की ओर बढ़ रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक भी अंतरवर्ती खेती को आय बढ़ाने का सफल मॉडल मानते हैं।‎

अनुभव, सामूहिक प्रयास व समूह शक्ति से मिला हौसला‎

कुल आठ किसानों ने डेढ़ लाख खर्च किए। इसमें दो एकड़ इंटरक्रॉपिंग में खर्च में बीज, खाद, मजदूरी शामिल है।‎ हर सीजन 50 हजार की आमदनी संभव हो रही है। फूलों की नर्सरी से भी अतिरिक्त कमाई होती है। फूलों की‎ बिक्री से साल भर तीस हजार आय होती है। कृषि विभाग की सलाह लिया।अन्य सफल किसानों के‎ अनुभव,सामूहिक प्रयास और समूह शक्ति से हौसला मिला। कहा कि भविष्य में गुलाब, रजनीगंधा की खेती,फूल‎ प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना है।‎

कौन हैं शेफाली मरांडी‎

शेफाली मरांडी के दो संतान है 17 साल का एक पुत्र एवं 14 साल की एक पुत्री वर्तमान में दोनों पढ़ाई कर रहे हैं।‎ उनके पति भी खेती-बागवानी में सहयोग देते हैं। जब से आम की बागवानी के बीच में सीजन में गेंदा फूल की‎ व्यवसायिक खेती शुरू की, आमदनी बहुत बढ़ी है। वे क्षेत्र की दूसरे किसान और महिला कृषकों को बागवानी के‎ फायदे के बाद में बताती रहती हैं। उनके बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी मां से खेती में प्रयोग करना सीख‎ रही हैं। उनका मानना है कि मेहनत व सलाह देने वाले अच्छे हो तो काम आसान हो जाता है।‎

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