samacharsecretary.com

ईरान में विरोध की नई आवाज़: रजा पहलवी कौन हैं और अमेरिका से उनका क्या रिश्ता है

तेहरान
ईरान में इन दिनों आंदोलनों का दौर है। राजधानी तेहरान से लेकर सुदूर इलाकों तक में देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारेबाजी हो रही है। इन प्रदर्शनों को लेकर कहा जा रहा है कि ये महंगाई और अर्थव्यवस्था की बदहाली के खिलाफ हो रहे हैं। लेकिन ईरान की सरकार समेत दुनियावी मामलों के कई जानकार इसके पीछे अमेरिका हाथ भी मान रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इन आंदोलनों में कुछ जगहों पर ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के नाम से भी नारे लग रहे हैं। इसके बाद यह भी कयास लग रहे हैं कि क्या 46 साल से चले आ रहे ईरान में खामेनेई शासन का अब अंत होने वाला है।  

अमेरिका के डीप स्टेट को लेकर दुनिया भर में चर्चाएं रही हैं। कहा जाता है कि अमेरिका ही दुनिया के कई देशों में यह तय करने की कोशिश करता है कि कौन सत्ता में रहे और कौन नहीं। इसके लिए वह अकसर पॉलिटिकल वारफेयर भी इस्तेमाल करता है और इसकी मदद से वह अपने खिलाफ जा रही सत्ताओं के विरुद्ध आंतरिक तौर पर असंतोष पैदा करने का प्रयास करता है। इसके बाद फेरबदल की स्थिति में ऐसे किसी नेता को सत्ता पर लाने के लिए माहौल तैयार करता है, जो उसकी नीतियों का समर्थक हो। ऐसा बांग्लादेश, वेनेजुएला, अफगानिस्तान, इराक और सीरिया तक में देखा जाता रहा है।

अब ईरान में आंदोलन और रजा पहलवी के नाम के नारों को लेकर भी ऐसी ही स्थिति मानी जा रही है। रजा पहलवी के पिता मोहम्मद रजा पहलवी लंबे समय तक ईरान के शासक रहे थे। 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति की शुरुआत हुई थी और इसी दौरान बीमार अवस्था में ही वह अपने परिवार को लेकर निकल गए थे। तब से ही यह परिवार ईरान से बाहर बसा हुआ है। निर्वासित जीवन के दौरान ही रजा पहलवी को ईरान का क्राउन प्रिंस घोषित कर दिया गया था। इस परिवार के अमेरिका के साथ अच्छे रिश्ते माने जाते हैं, जबकि अयातुल्लाह खामेनेई के अमेरिकी सरकार खिलाफ रही है। रजा पहलवी फिलहाल 65 साल के हैं और अब भी ईरान से बाहर ही हैं।

रजा पहलवी का अमेरिका से क्या रहा है कनेक्शन
वह मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं और इसीलिए उन्हें उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता रहा है। रजा पहलवी के पिता को 1967 में ईरान का राजा बना गया था। वहीं रजा पहलवी ईरान की एयर फोर्स में कैडेट थे। फिर जब परिवार को ईरान से निकलना पड़ा तो उन्होंने अमेरिका में पायलट के तौर पर ट्रेनिंग ली थी। पश्चिमी मूल्यों में पला-बढ़ा यह परिवार ईरान में उदारवादी विचारों वाली सत्ता लाने का समर्थक रहा है। हालांकि बीते 45 सालों से यह परिवार ईरान से बाहर ही रहा है। अब जब रजा पहलवी के नाम के नारे लग रहे हैं तो यह सवाल उठने लगा है कि क्या करीब 5 दशक बाद ईरान में फिर से सत्ता परिवर्तन की स्थिति बन सकती है।

 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here