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ABCDE नहीं, QWERTY क्यों? कीबोर्ड लेआउट का पूरा इतिहास और साइंस

नई दिल्ली

क्या आपको पता है कि कीबोर्ड पर अक्षर एक पंक्ति में क्यों नहीं होते? ज्यादातर लोग कहेंगे कि ऐसा टाइपिंग की स्पीड बढ़ाने के लिए होता है। जबकि असर वजह इससे ठीक उलट है। कीबोर्ड पर अक्षर ABCDE की तरह एक पंक्ति में इसलिए नहीं होते ताकि टाइपिंग की स्पीड को कम किया जा सके।

टाइपराइटर की समस्या
1870 के दशक में पहले टाइपराइटर के बटन ABCDE के क्रम में ही थे। उस समय मशीनें मकैनिकल थीं और इस वजह से तेजी से टाइप करने के चलते टाइपराइटर जाम हो जाया करते थे। इस वजह से काम बार-बार रुकता था और देरी भी होती थी।

फिर आया QWERTY फॉर्मुला
इस समस्या से निपटने के लिए QWERTY फॉर्मुला पेश किया गया। इसे लाने वाले शख्स का नाम क्रिस्टोफर लैथम शोल्स था। इसने कीबोर्ड पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले अक्षरों जैसे E, I, T, A एक-दूसरे से दूर रख दिया। इससे टाइप करने वाले की उंगलियों को ज्यादा दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे टाइपिंग की स्पीड थोड़ी कम हो गई और मशीनें जाम होना बंद हो गईं। कीबोर्ड के इस लेआउट का नाम बाद में QWERTY पड़ा।

समय के साथ क्यों नहीं बदला गया?
सवाल उठता है कि समय के साथ टेक्नोलॉजी के बेहतर होने पर कीबोर्ड के ले आउट को बदला क्यों नहीं गया। दरअसल ऐसा मसल मेमोरी के चलते किया गया। प्रैक्टिकली कीबोर्ड की टेक्नोलॉजी उन्नत होने के बाद ABCDE वाले फॉर्मेट पर वापिस जाया जा सकता था लेकिन दुनिया भर के लोगों को क्वर्टी (QWERTY) की आदत पड़ चुकी थी। आज भी अगर इसे बदला जाए, तो पूरी दुनिया की टाइपिंग स्पीड जीरो हो जाएगी।

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