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एशियाई खेलों की उलटी गिनती शुरू, मिशन ओलंपिक सेल ने ताइक्वांडो और कराटे के लिए बनाई खास रणनीति

नई दिल्ली
एशियाई खेल 2026 को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपने कॉम्बैट खेलों के खिलाड़ियों की तैयारियों को और धार देने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मिशन ओलंपिक सेल (एमओसी) ने ताइक्वांडो और कराटे खिलाड़ियों के लिए विशेष अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ की सुविधाओं को मंजूरी दी है। यह निर्णय एमओसी की 168वीं बैठक में लिया गया, जिसमें खिलाड़ियों के हालिया प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं का आकलन किया गया। कुल मिलाकर विभिन्न प्रस्तावों पर लगभग 1.70 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।

ताइक्वांडो खिलाड़ी रोडाली बरुआ को यूरोप और ओशिनिया में होने वाली कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। इनमें बुल्गारिया, स्लोवेनिया और डच ओपन जैसे जी2 स्तर के टूर्नामेंट शामिल हैं, साथ ही नेपाल में जी1 स्तर की चैंपियनशिप भी उनके कार्यक्रम का हिस्सा है। इन प्रतियोगिताओं के लिए लगभग 21 लाख रुपये से अधिक की सहायता स्वीकृत की गई है। बरुआ ने पिछले वर्ष ओशिनिया क्षेत्र के प्रेसिडेंट्स कप में कांस्य पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की थी।

दूसरी ओर रूपा बायोर को नौ महीने तक फिजियोथेरेपी, मसाज और स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कार्यक्रम का समर्थन मिलेगा। वह फिलहाल विश्व रैंकिंग में शीर्ष खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं और एशिया में नंबर एक स्थान पर हैं। एमओसी का मानना है कि यह सहयोग उन्हें निरंतर उच्च स्तर का प्रदर्शन बनाए रखने में मदद करेगा।

कराटे में भुवनेश्वरी जाधव को तीन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ एक संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए सहायता दी गई है। उनका प्रशिक्षण उज्बेकिस्तान में विदेशी कोच की देखरेख में होगा। इस पूरे कार्यक्रम पर करीब 20 लाख रुपये खर्च होंगे, जिसमें उनके कोच और स्पैरिंग पार्टनर का सहयोग भी शामिल है। वहीं कराटे खिलाड़ी अलीशा और उनके कोच को भी दो अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए आर्थिक समर्थन मिला है। भुवनेश्वरी और अलीशा दोनों ने हालिया एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीते थे।

बैठक में अन्य खेलों से जुड़े प्रस्ताव भी मंजूर किए गए। स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह के लिए स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच, नीरज चोपड़ा के विदेशी प्रशिक्षण शिविर के विस्तार और पैरा-एथलीटों के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी हरी झंडी दी गई।

खेल विशेषज्ञों का मानना है कि लक्षित अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र से खिलाड़ियों को उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा, जो एशियाई खेल जैसे बड़े मंच पर पदक की संभावनाएं बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

 

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