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संतों का संवाद, विवाद नहीं: ऋतेश्वर महाराज ने योगी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

सतना
 प्रसिद्ध कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु संत ऋतेश्वर धारकुंडी आश्रम जाने से पूर्व सतना जिले की धर्मनगरी चित्रकूट पहुंचे है। उनके साथ भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी मौजूद रहे। चित्रकूट प्रवास के दौरान उन्होंने मीडिया से खुलकर बातचीत की और उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, संतों के बीच चल रहे वैचारिक मतभेदों और देश के सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। वे यहां से सतना जिले के धारकुंडी आश्रम के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने ब्रह्मलीन परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

जमकर की CM योगी की तारीफ
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बोलते हुए ऋतेश्वर महाराज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा योगी आदित्यनाथ एक संत-महंत भी हैं और एक कुशल प्रशासक भी। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को भयमुक्त वातावरण मिला है, इस सच से कोई इनकार नहीं कर सकता। एक सन्यासी जब सत्ता संभालता है, तो वह राजधर्म का पालन पूरी निष्ठा से करता है।

'वादे वादे जायते बोध:'
हाल के दिनों में संतों के बीच विभिन्न मुद्दों पर चल रही बयानबाजी और मतभिन्नता पर ऋतेश्वर महाराज ने बहुत ही संतुलित और शास्त्र सम्मत जवाब दिया। उन्होंने संस्कृत के सूत्र 'वादे वादे जायते बोध:' का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं इसे विवाद के रूप में नहीं, बल्कि वाद के रूप में देखता हूं। संवाद और चर्चा से ही तत्व का बोध होता है। अगर संतों के बीच किसी बात को लेकर मतभिन्नता है, तो उस मंथन से सनातन धर्म के लिए सुखद और सकारात्मक परिणाम ही निकलेंगे।

यूजीसी को क्या बोले संत रितेश्वर
यूजीसी के संदर्भ में पूछे गए सवाल और सामाजिक कानूनों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश का बहुसंख्यक समाज शांतिप्रिय है और एक गांव की तरह मिलजुल कर रहना चाहता है। उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि अगर कोई गलत फैसला आता है, तो समाज सामूहिक रूप से उसका विरोध करता है। मुझे विश्वास है कि जो लोग नीति-निर्धारक हैं, वे पुनर्विचार करेंगे। देश में ऐसा कोई कानून नहीं बनना चाहिए, जिससे समाज में विद्वेष पैदा हो या आपसी भाईचारा खंडित हो।

धारकुंडी पहुंचकर दी श्रद्धांजलि
चित्रकूट में अल्प प्रवास और दर्शन-पूजन के बाद संत ऋतेश्वर महाराज और बृजभूषण शरण सिंह का काफिला सतना के धारकुंडी आश्रम के लिए रवाना हो गया। वहां वे आश्रम के संस्थापक परमहंस स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज के अंतिम दर्शन कर उनकी समाधि स्थल पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

 

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