नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने छह वर्षीय सौतेली बेटी की हत्या के आरोपी व्यक्ति की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने 'जांच में गड़बड़ी' और अभियोजन पक्ष द्वारा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी सीरीज स्थापित करने में विफलता का हवाला देते हुए यह आदेश सुनाया। न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली वकील अंकिता शर्मा की तारीफ की। कोर्ट ने 'सटीक तैयारी' और जांच में आई बड़ी बाधाओं के बावजूद "कुशलतापूर्वक और उत्साह के साथ" मामले की पैरवी करने के लिए प्रशंसा की।
वकील की तारीफ
पीठ ने कहा, 'हम सरकारी वकील की सराहना करना चाहेंगे, जिन्होंने हमारे अवलोकन के लिए संपूर्ण अभिलेखों-मूल भाषा और उनके अनुवाद सहित का संकलन तैयार करने का प्रयास किया।'
पुलिस पर उठाए सवाल
हालांकि, शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ पुलिस की 'गड़बड़ जांच' की कड़ी आलोचना की। जिसके कारण छह साल की बच्ची की हत्या के मामले में कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाए, जहां असली अपराधी बिना सजा के बच गए और उसके सौतेले पिता को 'महज अनुमानों' के आधार पर जेल में डाल दिया गया।
फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा, 'हम इस बात से चकित हैं कि यदि जांच वकील की तैयारी के आधे स्तर की भी होती, तो उस बेचारी बच्ची के लापता होने और मृत्यु को लेकर रहस्य सुलझ सकता था। हम अपीलकर्ता के वरिष्ठ वकील द्वारा जांच के लचर रुख को प्रभावी ढंग से उजागर करने के प्रयासों की भी सराहना करते हैं।'
अपील को किया स्वीकार
फैसले में रोहित जांगड़े की अपील को स्वीकार कर लिया गया, जिन्हें छत्तीसगढ़ की एक निचली अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में डाल दिया गया था। निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। यह मामला छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में अक्टूबर 2018 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पांच अक्टूबर 2018 को रोहित जांगड़े और उनकी दूसरी पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। इसके बाद पत्नी अपने माता-पिता के घर चली गई।
क्या था मामला
आरोप था कि जांगडे अपनी सौतेली बेटी को मोटरसाइकिल पर बिठाकर ले गया। बच्ची लापता हो गई, लेकिन औपचारिक शिकायत 11 अक्टूबर को दर्ज कराई गई। उच्चतम न्यायालय ने मामले की पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी को 13 अक्टूबर, 2018 को गिरफ्तार किया गया था।





