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कोर्ट में राहुल गांधी का बड़ा आरोप—हाइलाइट होने के लिए केस दर्ज, सबूतों से छेड़छाड़

नई दिल्ली
गृह मंत्री अमित शाह को लेकर दिए गए बयान और मानहानि के मुकदमे में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को अपने पक्ष रखने के लिए यूपी की सुल्तानपुर कोर्ट में पेश हुए। राहुल गांधी ने कोर्ट में कहा कि राजनीतिक द्वेष की भावना से मेरी और मेरी पार्टी की छवि धूमिल करने के लिए सत्ता पक्ष की तरफ से यह साजिश रची गई है। राहुल ने कहा कि सीडी सत्यापित नहीं है, इसमें छेड़छाड़ की गई है। मेरे ऊपर लगाए गए सारे आरोप गलत और बेबुनियाद हैं। मेरे बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया है। कहा कि मेरा आशय किसी का अपमान करने का नहीं था। कहा कि हमारी छवि खराब करने के लिए दुर्भावना वश केवल हाईलाइट होने के लिए मेरे खिलाफ यह मुकदमा दायर किया गया है।

राहुल गांधी के साथ इस दौरान कोर्ट में अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल के अलावा राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी, यूपी प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश महासचिव विवेकानंद पाठक व अन्य लोग भी मौजूद रहे। राहुल गांधी पर करीब 8 वर्ष पहले मानहानि का मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में दाखिल किया गया था। मामला कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है।

भाजपा नेता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ परिवाद दायर किया था। पिछली सुनवाई में अदालत ने उन्हे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने का अंतिम मौका दिया था। फिलहाल राहुल गांधी इस मामले में जमानत पर हैं। राहुल की पेशी को देखते हुए कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल की पहले से तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता भी इस दौरान कोर्ट के बाहर पहुंचे। राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ल ने बताया कि उनका बयान कोर्ट नंबर 19 में हुई है। अब अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।

वहीं, राहुल गांधी पर परिवाद दाखिल कराने वाले विजय मिश्रा के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कहा कि 2018 में राहुल गांधी ने बंगलुरु की प्रेस कांफ्रेंस में अमित शाह को हत्या का अभियुक्त बताया था। इसी से क्षुब्ध होकर विजय मिश्रा ने परिवाद दाखिल किया था। प्रथमदृष्टया कोर्ट ने केस को स्वीकार किया था। 313 के मामले में स्वयं उपस्थित होना था। आज वह खुद उपस्थित हुए और कहा कि इस बारे में हम साक्ष्य उपलब्ध कराएंगे। राहुल गांधी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। अपने पक्ष में बयान और सफाई साक्ष्य उन्हें उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए जो भी दस्तावेज हों वह दाखिल कर सकते हैं। यह भी कहा कि मेरा केस बहुत मजबूत है। इस मामले में दो साल तक की सजा का प्रावधान है।

 

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