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ट्रैफिक से छुटकारा! भारत में एयर टैक्सी की एंट्री, AI समिट में दिखा फ्यूचर ट्रांसपोर्ट

नई दिल्ली
माना जा रहा है कि भविष्य में भारत को एयर टैक्सी की सुविधा जल्दी ही मिल सकती है। चर्चा है कि जल्दी ही भारत को यह मिलेगी और यह स्वदेशी तकनीक और लोगों द्वारा ही तैयार की गई है। इसे ईप्लेन नाम की कंपनी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर तैयार किया है।

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI समिट में कई अलग-अलग चीजें दुनिया को देखने को मिली हैं। यहां चीनी रोबोडॉग को अपना बताने के चलते गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर सवाल उठे तो वहीं कुछ ऐसे प्रयोग भी सामने आए हैं, जिनकी काफी सराहना हो रही है। इनमें से ही एक AI संचालित एयर टैक्सी का एक मॉडल है। इसे लेकर माना जा रहा है कि भविष्य में भारत को एयर टैक्सी की सुविधा जल्दी ही मिल सकती है। चर्चा है कि जल्दी ही भारत को यह मिलेगी और यह स्वदेशी तकनीक और लोगों द्वारा ही तैयार की गई है। इसे ईप्लेन नाम की कंपनी ने आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर तैयार किया है।

इसे लेकर कंपनी का कहना है कि भारी जाम वाले शहरों में इसके इस्तेमाल से राहत मिल सकेगी। दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए किसी तरह के रनवे की भी जरूरत नहीं होगी। कंपनी का दावा है कि 8 मिनट में यह टैक्सी 36 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है। हालांकि इसका किराया थोड़ा अधिक रहेगा। कंपनी ने उदाहरण देते हुए बताया है कि यदि बेंगलुरु के केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यूबी सिटी जाना हो तो दो घंटे का वक्त लगता है। सड़क से जाने पर कैन का किराया 1000 रुपये देना होता है। लेकिन इस एयरटैक्सी से यह सफर महज 8 मिनट में ही पूरा होगा। इसके लिए 1700 रुपये किराये के तौर पर चुकाने होंगे।

एक बार की चार्जिंग पर लगा सकेगी कई राउंड
इसके अलावा एक बड़ा फीचर यह भी बताया जा रहा है कि एक बार चार्ज करने के बाद यह कई ट्रिप मार सकती है। इसका नाम कंपनी ने (e-VTOL) रखा है, जिसका अर्थ है- इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ ऐंड लैंडिंग। आमतौर पर एयरप्लेन और हेलिकॉप्टर जब उड़ान भरते हैं तो काफी आवाज आती है, लेकिन इसमें ऐसा नहीं होगा। इसकी आवाज 120 डेसिबल से कम ही होगी। यहां तक कि नीचे चल रहे लोगों को यह भी अहसास नहीं होगा कि ऊपर कोई एयर टैक्सी उड़ रही है। इसका उड़ान भरना बेहद आसान होगा और उसकी लैंडिंग में भी कोई समस्या नहीं होगी।

बैटरी से ही चलेगी यह टैक्सी, खर्च भी काफी कम; डिजाइन मंजूर
कंपनी के फाउंडर विकल्प मित्तल का कहना है कि इसका संचालन बैटरी से ही होगा। इसके चलते इसकी परिवहन लागत भी कम होगी। हेलिकॉप्टर्स का संचालन काफी महंगा होता है क्योंकि उनमें तेल काफी खर्च होता है। मित्तल के अनुसार इस एयरटैक्सी को पूरी तरह भारत में ही मद्रास आईआईटी में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि चिप्स और मोटर जैसी जरूरी चीजों को भारत में ही डिजाइन किया गया है। बस उनकी मैन्युफैक्चरिंग बाहर हुई थी। मित्तल ने कहा कि उड्डयन महानिदेशालय से इसके डिजाइन के लिए अप्रूवल लिया था और उसके बाद ही इसे तैयार करने का प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा कि पहला प्रोडक्शन मॉडल जब तैयार हो जाएगा तो इसकी टेस्टिंग की जाएगी।

 

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