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निर्यात पर मंडराया खतरा: पंजाब के बासमती कारोबारियों को भारी नुकसान की आशंका

चंडीगढ़
भारत से बासमती यूरोपीय संघ, तुर्की और यूके को भी भेजा जाता है। ईरान की बंदरगाह का अफगानिस्तान भी इस्तेमाल करता है जिस कारण वहां के लिए भी बासमती के निर्यात पर असर पड़ेगा। ईरान संकट के बीच पंजाब में बासमती निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि युद्ध के हालात के बीच बासमती के निर्यात पर संकट के बादल छा गए हैं।

ईरान व बाकी देशों से 10 लाख टन बासमती के आर्डर हैं जिसमें से अकेले पंजाब से ही तीन लाख टन बासमती का निर्यात लटक गया है। बासमती निर्यातकों का कहना है कि अगर स्थिति सामान्य जल्द न हुई तो घरेलू बाजार में बासमती के दाम गिर जाएंगे जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अमेरिका-इस्राइल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है जहां से बासमती का निर्यात होता है। यह सिर्फ ईरान ही नहीं बल्कि सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों को भी निर्यात के लिए जोड़ता है लेकिन अब इसके बंद होने से गुजरात और ईरान बंदरगाह पर ही माल अटका हुआ है। इससे बासमती के खराब होने का भी डर है।

देश से हर साल 20 लाख टन का निर्यात होता है जिसमें से 25 प्रतिशत कुल बासमती का निर्यात ईरान को होता है जबकि 20 प्रतिशत निर्यात इराक को होता है। अकेले पंजाब की निर्यात में 25 से 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसमें से भी सबसे ज्यादा निर्यात ईरान को होता है। बाकी मध्य पूर्वी देशों को भी निर्यात किया जाता है।

दोनों बंदरगाह और मिलों में पड़ा बासमती
पंजाब बासमती मिलर्स एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के वित्त सचिव नरेश गोयल ने बताया कि मौजूदा हालात के कारण दोनों बंदरगाह पर पंजाब का बासमती अटक गया है। इसके अलावा मिलों में भी भारी मात्रा में बासमती पड़ा है। अगर जल्द निर्यात शुरू न हुआ तो इसके खराब होने का भी डर है। अदायगी भी रुकने से निर्यातकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिस तरह के हालात बने हैं उससे यह जल्द सामान्य होते दिखाई नहीं दे रहे हैं जिससे आगे संकट और गहरा सकता है।

आगे ऑर्डर देने से डर रहे व्यापारी
एसोसिएशन के प्रधान बाल कृष्ण बाली ने बताया कि रोज औसत 10 हजार टन बासमती का निर्यात अकेले पंजाब से ही होता है लेकिन मौजूदा हालात में अब ईरान में व्यापारी आगे ऑर्डर देने से डर रहे हैं। वह लगातार उनके संपर्क में हैं लेकिन पोर्ट बंद होने से फिलहाल वह पहले से फंसे माल की अनलोडिंग नहीं कर पा रहे हैं। पिछले साल भी उनके 2 हजार करोड़ रुपये फंस गए थे और अब दोबारा हालात पहले से भी अधिक खराब हो गए हैं। आगे गेहूं की खरीद भी शुरू होनी है लेकिन पहले ही मिलों में चावल का भंडारण किया हुआ है। इससे आगे स्टोरेज संकट का भी सामना करना पड़ सकता है क्योंकि गेहूं के लिए सरकार जगह बनाने की तैयारी कर रही थी।

 

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