samacharsecretary.com

पत्रकार हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम HC से बरी

नई दिल्ली.

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शनिवार को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी कर दिया है। यह फैसला विशेष सीबीआई (CBI) अदालत द्वारा राम रहीम को दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के करीब सात साल बाद आया है।

यह अहम फैसला मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने 2019 की सजा को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई करते हुए सुनाया। अदालत ने राम रहीम की सजा को रद्द करते हुए उन्हें इस मामले के सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।

जेल में ही रहेगा गुरमीत राम रहीम
हालांकि अन्य तीन दोषियों कुलदीप, निर्मल सिंह और किशन लाल की सजा बरकरार रखी गई है। इन सभी को इस मामले में सीबीआई अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। गुरमीत राम रहीम व अन्य दोषियों ने 2019 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों पर विस्तृत विचार करते हुए डेरा प्रमुख के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित न होने के आधार पर उसे संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। वह फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा काट रहा है। यानी इस मामले में बरी होने के बावजूद, राम रहीम बलात्कार सहित अन्य मामलों में मिली सजा के कारण फिलहाल जेल में ही रहेगा।

क्या था पूरा मामला?
अक्टूबर 2002 में सिरसा में अपना स्थानीय समाचार पत्र 'पूरा सच' चलाने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी, जिससे बाद में उनकी मौत हो गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। दरअसल, पत्रकार छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा प्रमुख के खिलाफ लगे आरोपों से संबंधित खबरें प्रमुखता से छापी थीं। इन रिपोर्टों में एक ऐसा गुमनाम पत्र भी शामिल था जिसमें डेरा के भीतर साध्वियों के यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसी के बाद राम रहीम के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ा था। शुरुआती जांच के बाद यह हाई-प्रोफाइल मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। जनवरी 2019 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम और अन्य को हत्या की साजिश रचने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट के इस फैसले पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के 46 वर्षीय बेटे अंशुल छत्रपति ने गहरी निराशा व्यक्त की है और इसे एक बड़ा झटका करार दिया है। अंशुल ने स्पष्ट किया कि वे हार नहीं मानेंगे। उन्होंने कहा- हम शीर्ष अदालत का रुख करेंगे। हमारे पास कोई अन्य विकल्प नहीं है। हमारी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी और हम सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे। अदालत द्वारा अन्य आरोपियों की सजा बरकरार रखने पर अंशुल ने कहा- हमारी लड़ाई डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ थी। मेरे पिता की दुश्मनी उन शूटरों या डेरा मैनेजर से नहीं थी। उस समय मेरे पिता केवल राम रहीम की ही पोल खोल रहे थे। अगर मुख्य आरोपी को ही बरी कर दिया गया है, तो निश्चित रूप से यह हमारे लिए बहुत बड़ा झटका है।

25 साल का संघर्ष
अपनी लंबी कानूनी लड़ाई को याद करते हुए उन्होंने कहा- पिछले लगभग 25 वर्षों से मैं यह कानूनी लड़ाई लड़ रहा हूं। इतने प्रभावशाली व्यक्ति से टक्कर लेना कभी आसान नहीं होता। ट्रायल शुरू होने से पहले भी हमने ऐसे झटके सहे थे। हालांकि निचली अदालत ने हमें राहत दी थी, लेकिन अब हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ हम अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे; मेरी उम्मीदें अभी भी कायम हैं। 

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here