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घर में आग से फटे सिलेंडर व एसी कंप्रेसर से महिला की मौत

ग्वालियर.

ग्वालियर के दौलतगंज स्थित बालाबाई के बाजार की संकरी गली में रविवार दोपहर एक मकान में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि घर में मौजूद परिवार के लोग बाहर नहीं निकल पाए और लपटों के बीच फंस गए। फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों की मदद से खिड़कियां व कांच तोड़कर पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन परिवार की बहू अंकिता अग्रवाल की दम घुटने से मौत हो गई।

आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की 40 से अधिक गाड़ियों से पानी डाला गया, इसके बावजूद देर रात तक मकान में आग धधकती रही। घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। जानकारी के मुताबिक बालाबाई के बाजार में कुंजबिहारी प्लाइवुड से जुड़े दिनेश अग्रवाल, गिर्राज अग्रवाल और हरिओम अग्रवाल का पुराना मकान है। तीनों भाइयों का परिवार इसी मकान में एक साथ रहता है। रविवार दोपहर अचानक घर में लगे विंडो एसी में शॉर्ट सर्किट हो गया और आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने ऊपरी मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने के समय घर में परिवार के छह से अधिक सदस्य मौजूद थे। अचानक फैली आग और धुएं के कारण सभी लोग घबरा गए और बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल पाया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सभी लोग घर के अंदर ही फंस गए।

बाथरूम में बंद हो गई थी महिला
परिवार के अधिकांश सदस्य किसी तरह छत की ओर पहुंच गए, लेकिन घर की बहू अंकिता अग्रवाल पत्नी सचिन अग्रवाल आग और धुएं से बचने के लिए बाथरूम में जाकर बंद हो गईं। आग और धुएं के कारण उनका दम घुट गया। इस दौरान फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों ने खिड़कियां और कांच तोड़कर घर में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। पांच लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि अंकिता को गंभीर हालत में बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सिलिंडर और एसी कंप्रेसर फटने से भड़की आग
स्थानीय लोगों के मुताबिक आग लगने के दौरान घर में रखे सिलिंडर और एसी के कंप्रेसर भी फट गए। इन धमाकों के कारण आग और तेजी से फैल गई। इससे आसपास के लोगों में भी भय का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, विधायक सतीश सिकरवार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह और नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय भी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्य का जायजा लिया।

संकरी गली के कारण राहत कार्य में आई परेशानी
दौलतगंज के बालाबाई बाजार की गलियां बेहद संकरी हैं। यहां अधिकांश जगहों पर गोदाम और दुकानें हैं और सड़कों पर दोपहिया वाहनों की भीड़ रहती है। ऐसे में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां एक बार में एक या दो की संख्या में ही अंदर पहुंच सकीं। आग पर काबू पाने में देरी होने पर प्रशासन को एयरफोर्स, बीएसएफ, एसडीआरएफ और मुरैना से भी दमकल वाहन बुलाने पड़े।

आधुनिक उपकरणों की कमी भी आई सामने
इस घटना के दौरान फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों के पास आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की कमी भी सामने आई। कर्मचारियों को केवल पानी, रस्सी और सीढ़ियों जैसे पारंपरिक साधनों के सहारे राहत कार्य करते देखा गया। कई कर्मचारियों के पास हेलमेट, दस्ताने और मास्क तक नहीं थे। जानकारी के अनुसार विभाग के पास चार फायर सेफ्टी सूट मौजूद हैं, लेकिन उनका उपयोग नियमित रूप से नहीं किया जाता। इन्हें अधिकतर मॉक ड्रिल के समय इस्तेमाल कर बाद में अलमारी में बंद कर दिया जाता है।

संकरे बाजारों में बढ़ा खतरा
ग्वालियर शहर के कई प्रमुख बाजार संकरी गलियों में बसे हुए हैं, जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आसानी से नहीं पहुंच पातीं। इनमें महाराज बाड़ा, टोपी बाजार, नजरबाग मार्केट, दही मंडी और माधौगंज जैसे इलाके शामिल हैं। मुरार क्षेत्र में भी कई ऐसे बाजार हैं जहां दमकल वाहन पहुंचना मुश्किल होता है। ऐसे क्षेत्रों में हाइड्रेंट की व्यवस्था जरूरी मानी जाती है, ताकि आग लगने की स्थिति में तेज प्रेशर से पानी लेकर तुरंत राहत कार्य किया जा सके। हालांकि नगर निगम की ओर से बजट में इसकी घोषणा की गई है, लेकिन इसे जमीन पर लागू करना अभी बाकी है।

पहले भी हो चुकी हैं बड़ी आग की घटनाएं
ग्वालियर में पिछले डेढ़ दशक में कई बड़ी आग की घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2010 में महाराज बाड़ा स्थित विक्टोरिया मार्केट में आग लगने से पूरा बाजार तहस-नहस हो गया था। 2015 में मुरार क्षेत्र में एक मकान में आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद 2020 में मोची ओली में आग लगने से बुजुर्ग दंपत्ति की मौत हुई। उसी वर्ष रोशनीघर मार्ग पर गोयल पेंट हाउस में लगी आग में परिवार के सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके अलावा 2022 में कांचमिल क्षेत्र की जूता फैक्ट्री में आग लगने से कर्मचारी जान बचाने के लिए इमारत से कूदने पर मजबूर हो गए थे। 2024 में संगम वाटिका और रंगलमहल गार्डन में आग लगने से पूरा परिसर जलकर खाक हो गया था। दौलतगंज की यह घटना एक बार फिर शहर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और संकरी गलियों में आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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