samacharsecretary.com

गढ़फुलझर नानकसागर बनेगा आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर 

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गढ़फुलझर के नानकसागर में आयोजित होला मोहल्ला कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने यहां पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेका तथा विशेष कीर्तन समागम और अरदास में भाग लेकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर सिख समाज की ओर से मुख्यमंत्री को सरोफा भेंट कर आत्मीय सम्मान किया गया।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि गढ़फुलझर की पावन धरती स्थित नानकसागर अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है, जहां पूज्य गुरु नानक देव जी के चरण पड़े हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ संतों की तपोभूमि रही है, जहां अनेक महान संतों ने मानवता, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया है। इस पवित्र स्थल पर आकर उन्हें अत्यंत गर्व और आत्मिक आनंद की अनुभूति हो रही है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी प्रमुख तीर्थस्थलों के संरक्षण और समुचित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में गढ़फुलझर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इसके विकास कार्यों के लिए लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है और निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जाए तथा नानकसागर क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाए, जिससे यह स्थल प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।

बसना विधायक  संपत अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि सिख समाज सदैव संगठन, सेवा और सामाजिक समरसता की भावना के साथ आगे बढ़ने वाला समाज रहा है। 
उन्होंने कहा कि गढ़फुलझर न केवल सिख समाज की आस्था का केंद्र है, बल्कि यह सर्वधर्म समभाव और सद्भावना की जीवंत मिसाल भी है। 

कार्यक्रम में कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, बसना विधायक  संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष  भूपेंद्र सिंह सवन्नी, छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष  अमरजीत छाबड़ा सहित सिख समाज के अनेक गणमान्यजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here