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स्व आधारित मानसिकता की नींव है स्वबोध – प्रवीण गुप्त

स्व आधारित मानसिकता का आधार है स्वबोध – प्रवीण गुप्त 

नव वर्ष गुड़ी पड़वा के अवसर पर दो दिवसीय डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला      में भारत पुनरुत्थान का आधार स्वबोध विषय पर हुआ व्याख्यान 

बड़वानी
देश में 1947 को जो घटना घटी उसे समाज याद कर स्वाधीनता दिवस, स्वतंत्रता दिवस के रूप में याद करता है ओर 75 वर्ष होने पर अमृत महोत्सव कह रहे हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने संविधान लिखा व कहा कि यह संविधान ने आर्थिक व राजनीतिक स्वतंत्रता दी मगर सामाजिक स्वतंत्रता नहीं मिली। अंग्रेजो से स्वाधीन हुए, स्वतंत्रता नहीं मिली। कृत्रिम विकास अपने राष्ट्र के आधार पर उत्तम नहीं हो सकता, स्व आधारित मानसिकता का आधार स्वबोध है। स्व के आधार पर ध्यान देने से भारत दुनिया के प्रारंभिक देशों में अग्रणी हो सकता है। 
उक्त विचार नगर के साखी रिसॉर्ट में नव वर्ष गुड़ी पड़वा के अवसर पर आयोजित स्वामी अमूर्तनंदगिरी सेवा न्यास द्वारा आयोजित डॉ. हेडगेवार व्याख्यानमाला के प्रथम दिवस पर वक्ता श्री प्रवीण गुप्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र संपर्क प्रमुख द्वारा भारत पुनरुत्थान का आधार स्वबोध विषय पर अपना उद्बोधन दिया।

श्री गुप्त ने रवींद्रनाथ टैगोर जी की पुस्तक स्वराज भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि पाश्चात्य की नकल के बजाय हमें अपने स्व के आधार पर ध्यान देना चाहिए। फ्रांस, इज़राइल व जर्मनी का अपनी मातृभाषा के प्रति विशेष लगाव के कारण आज वह विश्व में अग्रणी देश है। हम भारत देश को भी चार सूत्रीय भाषा को महत्व देते हुए मातृभाषा, जिस प्रांत में रहते है वहां की बोली, संपर्क भाषा हिंदी व व्यापार की भाषा होनी चाहिए। ऐसे ही स्व की अभिव्यक्ति परिवार से प्रारंभ होती है। देश में जो गलत नारेटिव बनाया गया है उसे ठीक करना होगा। कार्यक्रम का प्रारंभ मां भारत माता के चित्र पर श्री गुप्त, अध्यक्षता कर रहे प्रसिद्ध मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल पाटीदार व समिति अध्यक्ष डॉ. चक्रेश पहाड़िया ने  दीप प्रज्वलित कर हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, मातृशक्ति उपस्थित रहे। संचालन डॉ. नितिन पाटीदार व आभार सीए गरीमेश निमाड़े ने व्यक्त किया। समापन वंदे मातरम गायन से हुआ। 

देशभक्ति प्रतिफल प्रदर्शित होना चाहिए

क्षणिक देशभक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि देशभक्ति 15 अगस्त, 26 जनवरी ओर क्रिकेट मैच जीत पर ही झलकती है जबकि देशभक्ति तो प्रतिफल प्रदर्शित होना चाहिए।

जन्मभूमि स्वर्ग से महान है 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. राहुल पाटीदार ने प्रभु श्री राम के द्वारा रावण का वध करने के बाद भाई लक्ष्मण के द्वारा स्वर्ण लंका का सुख लेने का उदाहरण देते हुए अपनी जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर बताया। अपनी संस्कृति, परंपरा, धर्म के प्रति स्वबोध को अपनाने का आह्वान किया। वर्तमान में विश्व में वैश्विक युद्ध व पाश्चात्य की अंधी दौड़ के बजाय भारत के सनातन धर्म के सर्वे भवन्तु सुखिन के मार्ग को अपनाने से  विश्व शांति प्राप्त होगी।

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