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भोपाल के गोमांस तस्करी मामले में असलम चमड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत

भोपाल 
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गोमांस तस्करी केस में 70 दिन बाद बड़ा अपडेट सामने आया है। ट्रक भरकर मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट की तरफ से जांच में कई कमियों का हवाला दिया गया है। बताया जा रहा है कि, असलम कुरैशी की तरफ से कोर्ट में साबित किया गया कि, उसके ट्रक में गोमांस नहीं, बल्कि भैंस का मास था। इसप कोर्ट ने उन्हें 35 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत मिली है।

असलम चमड़ा के अधिवक्ता ने भोपाल जिला अदालत में कहा कि, जो मांस सैंपल के लिए हैदराबाद भेजा गया था। उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें, लेकिन पुलिस ऐसा नहीं कर सकी। सत्र न्यायालय में द्वितीय जमानत आवेदन का हिंदू संगठन ने कड़ा विरोध किया था। भानु हिंदू ने न्यायमूर्ति पंकज कुमार जैन की कोर्ट में उपस्थित होकर आपत्ति दर्ज कराई थी। मथुरा लैब की रिपोर्ट में गोमांस होने की पुष्टि हुई थी, लेकिन हैदराबाद की लैब की रिपोर्ट पेश ही नहीं हुई।.
क्या है मामला?

हिंदू संगठनों ने पुलिस मुख्यालय के सामने दिसंबर 2025 में एक ट्रोक रोका, जिसमें 26 टन मांस भरा था तो उसमें 26 टन गोमांस होने का दावा किया गया था। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर सैंपल जांच के लिए भेज दिए। इसके बाद प्रशासन ने भोपाल का स्लॉटर हाउस भी बंद करवा दिया। असलम कुरैशी पर आरोप लगा कि, स्लॉटर हाउस में गोवंश का अवैध कत्ल कर मांस मुंबई भेजा जा रहा था। फॉरेंसिक रिपोर्ट में गोमांस की पुष्टि के बाद आरोपी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस मामले में एसआईटी पहले ही 500 पन्नों का चालान अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर चुकी है।

जमानत के बाद हिंदू संगठनों का विरोध

हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने सेशन कोर्ट से असलम चमड़े को कोर्ट से जमानत मिलने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, असलम चमड़े जैसे हत्यारे को इतनी आसानी से जमानत दे दी गई। ये एक सोचने वाला विषय है कि, सीट की रिपोर्ट किस प्रकार प्रस्तुत की गई? सिर्फ ड्राइवर और असलम चमड़े को मुजरिम बनाया गया, बाकी सहयोगियों को छोड़ दिया गया। इसमें सही तरीके से शासन ने अपना पक्ष नहीं रखा। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ये मांग करता है कि, असलम पर तुरंत रासुका की कार्रवाई हो, वरना हम जन आंदोलन करेंगे।

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