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2 अप्रैल की सुनवाई से पहले हाईकोर्ट जजों ने भोजशाला की जमीनी हकीकत परखी

धार
शहर की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े प्रकरण में मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शनिवार को दोपहर में आकस्मिक रूप से स्थल का निरीक्षण किया। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच धार पहुंचे और लगभग एक घंटे तक भोजशाला परिसर का बारीकी से अवलोकन किया

बाहरी और आंतरिक परिसर का लिया जायजा
इस दौरान न्यायमूर्तिगण ने भोजशाला के बाहरी एवं आंतरिक दोनों परिसरों की स्थिति और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सर्वे की सारी प्रक्रिया के बारे में सूक्ष्मता से जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर, एसपी सहित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

आयोजनों और सर्वे की ली जानकारी
मिली जानकारी के अनुसार न्यायमूर्तिगण ने परिसर में होने वाले मंगलवार और शुक्रवार के आयोजनों की जानकारी भी ली, कहां और किस प्रकार आयोजन होते हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अधिकारियों से प्राप्त की। इंदौर खंडपीठ न्यायमूर्तिगण ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए सर्वे के संबंध में भी अधिकारियों से स्थानीय जानकारी ली। एएसआइ के अधिकारी ने मौके पर उपस्थित रहकर पूरी स्थिति से अवगत कराया।

16 मार्च को कहा था विवादित स्थल खुद देखेंगे
बता दें कि ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका पर इंदौर हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट किया जाना है। प्रकरण में गत 16 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान इंदौर खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के दौरान विवादित स्थल का स्वयं निरीक्षण करने की बात कही थी। इसी क्रम में करीब 12 दिन बाद न्यायाधीशों ने भोजशाला का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। शनिवार दोपहर लगभग 1:52 बजे न्यायाधीशों का वाहनों का काफिला भोजशाला परिसर पहुंचा और करीब 2:50 बजे तक निरीक्षण जारी रहा। इसके बाद वाहनों का काफिला वापस रवाना हो गया। इस मौके पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा व एसपी मयंक अवस्थी मौजूद रहे।

आगे होगी नियमित सुनवाई
गौरतलब है कि आगामी 2 अप्रैल से इस मामले में नियमित सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में न्यायमूर्तिगण का यह स्थल निरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मौके का प्रत्यक्ष अवलोकन उन्हें वास्तविक स्थिति समझने में सहायक होगा और आगे की सुनवाई में यह एक मजबूत आधार बन सकता है।

पहले क्या हुआ था
धार स्थित भोजशाला में 22 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर सर्वे कार्य शुरू किया गया। यह सर्वे लगातार 98 दिनों तक चला। जुलाई 2024 में सर्वे रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के कारण आगे की कार्रवाई लंबित रही। वर्ष 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उक्त रोक हटाए जाने के बाद अब मामले में आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

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