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अंबाला की सुशीला देवी ने रिटायरमेंट के बाद खेल के मैदान में जीता गोल्ड और सिल्वर

हरियाणा
हरियाणा को खेलों की जननी कहा जाता है और यहां की मिट्टी से निकले खिलाड़ी दुनिया भर में प्रदेश का नाम रोशन करते हैं. इसी परंपरा को अंबाला शहर के बलदेव नगर की रहने वाली 65 साल की सुशीला देवी आगे बढ़ा रही हैं. उन्होंने हाल ही में चंडीगढ़ में हुए ‘5वें खेलों मास्टर नेशनल गेम 2026’ में अपनी शानदार प्रतिभा का प्रदर्शन किया है. सुशीला देवी ने इस उम्र में एक या दो नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग मेडल जीतकर यह संदेश दिया है कि फिटनेस और खेल के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती.

तीन अलग-अलग खेलों में दिखाया दम
सुशीला देवी ने बताया कि चंडीगढ़ में आयोजित इस नेशनल प्रतियोगिता में देशभर से 35 साल से ज्यादा उम्र के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था. 65 साल के आयु वर्ग में खेलते हुए सुशीला देवी ने जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) और डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल जीता. वहीं, शॉट पुट (गोला फेंक) में उन्होंने अपनी ताकत दिखाते हुए गोल्ड मेडल झटका. सुशीला देवी बताती हैं कि खेलों के प्रति उनका यह लगाव बचपन से ही है, जो नौकरी के दौरान भी बना रहा.

नौकरी के साथ भी जारी रखा खेलों का सफर
सुशीला देवी पहले यमुनानगर के एक अस्पताल में सीनियर ऑफिसर के पद पर तैनात थीं. व्यस्त शेड्यूल के बावजूद वह समय निकालकर खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेती रहती थीं. उनके परिवार में दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है. सुशीला देवी गर्व से बताती हैं कि जब वह मेडल जीतकर घर लौटती हैं, तो उनका नाती सबसे ज्यादा खुश होता है. उनके पति भी उन्हें हमेशा मैदान में उतरने और बेहतर करने के लिए प्रेरित करते रहते हैं.

कैबिनेट मंत्री ने दी बधाई
सुशीला देवी की इस उपलब्धि पर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने भी उन्हें बधाई दी है. अपनी सफलता से उत्साहित सुशीला देवी ने अन्य महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि महिलाओं को अपनी फिटनेस और पहचान के लिए खेलों से जरूर जुड़ना चाहिए. वह खुद रोजाना घर के पास के मैदान में 2 से 3 घंटे कड़ी प्रैक्टिस करती हैं. इससे पहले वह अजमेर में हुई नेशनल प्रतियोगिता में भी मेडल जीत चुकी हैं.

पासपोर्ट की कमी से रह गई विदेश जाने की हसरत
सुशीला देवी ने बताया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती थीं, लेकिन पासपोर्ट न बना होने के कारण वह विदेश में होने वाले गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाईं. हालांकि, उनकी हिम्मत अभी भी कम नहीं हुई है. वह लगातार प्रैक्टिस कर रही हैं और उनका लक्ष्य अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा फहराना है.

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