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गैस सिलेंडर डिलीवरी बना कमाई का जरिया, पंजाब में उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली

बरनाला.

जिले में गैस सिलेंडर की कमी के कारण जहां आम जनता पहले से ही गंभीर मानसिक और आर्थिक परेशानी से गुजर रही है, वहीं अब गैस एजेंसियों द्वारा कस्टमर्स की जेब पर सीधी लूट के गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। होम डिलीवरी और एजेंसी से ही सिलेंडर उठाने के दाम में अंतर का फायदा उठाकर भोले-भाले लोगों को लूटा जा रहा है, जिसके कारण शहरवासियों में भारी विरोध है।

दामों में अंतर और एजेंसी की चालाकी
आज अनाज मंडी बरनाला में हरजीत सिंह मान (टेंट हाउस), सोहन लाल, महा सिंह और बलविंदर सिंह समेत इकट्ठा हुए कस्टमर्स ने मीडिया से बात की और एजेंसियों की कथित मनमानी का पर्दाफाश किया। उन्होंने कहा कि उनकी गैस की कॉपी 'पनसप गैस सर्विस' ने बनाई थी। जब वे सिलेंडर लेने एजेंसी पहुंचे और रसीद कटवाई, तो उन्हें एक सिलेंडर की रसीद दी गई जिसमें 934 रुपये की कटौती की गई थी। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि 934 रुपये वह रेट है जिसमें होम डिलीवरी भी शामिल है। नियमों के मुताबिक, अगर कोई कंज्यूमर खुद एजेंसी के गोदाम या ऑफिस में आकर सिलेंडर लेता है, तो उसे होम डिलीवरी चार्ज नहीं देना पड़ता और सिलेंडर का रेट 901 रुपये हो जाता है।

विरोध करने पर रसीद बदली गई
पीड़ित कंज्यूमर्स ने कहा कि जब उन्हें इस कीमत के अंतर के बारे में पता चला और उन्होंने एजेंसी स्टाफ से बात की, तो एजेंसी स्टाफ ने अपनी गलती छिपाने के लिए तुरंत 934 रुपये की रसीदें वापस ले लीं और उन्हें 901 रुपये की नई रसीदें दे दीं। कंज्यूमर्स ने सवाल उठाया कि अगर उन्हें पता नहीं होता, तो उनके साथ लूट हो जाती। उन्होंने डर जताया कि पता नहीं पहले कितने अनजान लोगों को 33 रुपये अतिरिक्त लेकर सिलेंडर बेचे गए होंगे। यह हजारों रुपये का घोटाला लगता है।

मैसेज आए पर सिलेंडर नहीं मिला –
लूट के अलावा, कंज्यूमर्स ने डिलीवरी सिस्टम पर भी बड़े सवाल उठाए हैं। कई लोगों ने कहा कि उनके मोबाइल फोन पर 'सिलेंडर डिलीवर होने' के मैसेज आए हैं, लेकिन असल में सिलेंडर उनके घर नहीं पहुंचा। यह डिजिटल फ्रॉड का बड़ा मामला है, जिससे कंज्यूमर्स सिलेंडर न मिलने से परेशान हैं और एजेंसी कागजों में अपना कोटा पूरा दिखा रही है। कंज्यूमर्स ने अपना विरोध जताते हुए कहा कि एक तरफ महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है और दूसरी तरफ ये गैस एजेंसियां ​​खुलेआम लूट कर रही हैं। 

ये मांगे –

  • फूड सप्लाई डिपार्टमेंट तुरंत इन एजेंसियों के रिकॉर्ड चेक करे। 
  • एजेंसी के बाहर होम डिलीवरी और एजेंसी रेट में अंतर दिखाने वाला बोर्ड लगाया जाए।
  • जिन लोगों को सिलेंडर नहीं मिले हैं लेकिन मैसेज आ गए हैं, उनकी तुरंत सुनवाई हो।
  • अगर एडमिनिस्ट्रेशन ने जल्द ही इन एजेंसियों पर शिकंजा नहीं कसा तो शहरवासी बड़े लेवल पर संघर्ष करने को मजबूर होंगे।

सिस्टम और एडमिनिस्ट्रेशन से सीधे सवाल:

  • इसकी जिम्मेदारी किसकी है?: क्या फूड एंड सप्लाई डिपार्टमेंट को इस लूट की जानकारी नहीं है? अगर कस्टमर्स ने विरोध नहीं किया होता, तो क्या 33 रुपये प्रति सिलेंडर की यह लूट जारी नहीं रहती?
  • डिजिटल फ्रॉड: कस्टमर्स को सिलेंडर मिलने से पहले ही 'डिलीवर हो गया' का मैसेज कैसे आ रहा है? क्या एजेंसियां ​​कागजों में कोटा पूरा दिखाकर सिलेंडर की ब्लैक मार्केटिंग कर रही हैं?
  • ट्रांसपेरेंसी की कमी: एजेंसियों के बाहर होम डिलीवरी और वेयरहाउस रेट के बड़े बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए? क्या यह जानबूझकर लोगों को अंधेरे में रखने की कोशिश है?
  • एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन कब लिया जाएगा?: क्या डिप्टी कमिश्नर बरनाला इन एजेंसियों के रिकॉर्ड की सरप्राइज चेक करेंगे ताकि गरीब जनता की लूट रुक सके?

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