samacharsecretary.com

भोपाल मेट्रो की लागत आसमान छू रही, भूमिगत कॉरिडोर में देरी पर अफसरों की चुप्पी

भोपाल

राजधानी में मेट्रो के भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण को लेकर मेट्रो प्रबंधन के दावों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। एक तरफ भोपाल रेलवे स्टेशन से पुल पातरा तक ट्विन टनल के निर्माण के लिए जिस टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उद्घाटन 30 मार्च को बड़ी धूमधाम से किया गया था, वह अब तक एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकी है।

ऐसा इसलिए क्योंकि टीबीएम के पीछे लगाए जाने वाले बूस्टिंग के पार्ट अब तक इंस्टॉल नहीं हुए हैं। जबकि उद्घाटन के समय मेट्रो के अफसरों ने मशीन चालू कर फोटो खिंचवाए थे, लेकिन तकनीकी खामियों और प्रशासनिक चुप्पी ने पूरी परियोजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह देखकर कहना गलत नहीं होगा कि जब तैयारी पूरी नहीं थी, तो जल्दबाजी में उद्घाटन का दिखावा क्यों किया गया। हालांकि, इस सवाल का जवाब भी मेट्रो के अधिकारी देने से कतरा रहे हैं।

मशीन से बूस्टिंग सिस्टम गायब: 6 दिन बाद भी प्रगति शून्य

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टीबीएम को आगे धकेलने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रणाली यानी बूस्टिंग सिस्टम अब तक सक्रिय नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि इस प्रणाली से जुड़े कुछ अनिवार्य कलपुर्जे अभी तक मशीन में फिट ही नहीं किए गए हैं। उद्घाटन के समय प्रबंधन ने दावा किया था कि मशीन प्रतिदिन 5 से 7 मीटर की खुदाई करेगी, लेकिन छह दिन बीत जाने के बाद भी प्रगति शून्य है। बिना बूस्टिंग सिस्टम के मशीन का आगे बढ़ना तकनीकी रूप से संभव नहीं है, जिससे प्रोजेक्ट की समयसीमा पर असर पड़ना तय है।

जर्जर इमारतें और सुरक्षा चिंताएं बनीं रोड़ा

खुदाई शुरू न होने के पीछे तकनीकी कारणों के अलावा सुरक्षा के पहलू भी अहम हैं। हमीदिया रोड स्थित शालीमार ट्रेड सेंटर की हालत अत्यंत जर्जर है। टनल का मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरना है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुदाई के दौरान होने वाले कंपन के कारण किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए काम को आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटाई जा पा रही है। जर्जर इमारतों को सुरक्षित करना या उन्हें खाली कराना प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है।

इंदौर पर फोकस, भोपाल की रफ्तार सुस्त

परियोजना से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि एमपी मेट्रो का पूरा ध्यान फिलहाल इंदौर मेट्रो पर केंद्रित है, जहां दूसरे चरण के कॉरिडोर के उद्घाटन की जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। इस प्राथमिकता के चक्कर में भोपाल मेट्रो की रफ्तार प्रभावित हो रही है। संसाधनों और तकनीकी टीम का बड़ा हिस्सा इंदौर प्रोजेक्ट में व्यस्त होने के कारण भोपाल के भूमिगत कार्य में अपेक्षित गति नहीं आ पा रही है।

लागत में वृद्धि: सरकारी खजाने पर बढ़ेगा बोझ

पुल पातरा से सिंधी कॉलोनी तक के 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के लिए ट्विन टनल का निर्माण रीढ़ की हड्डी के समान है। अगले दो महीनों में 400 मीटर खुदाई का जो लक्ष्य रखा गया था, वह अब नामुमकिन नजर आ रहा है। प्रोजेक्ट में हो रही हर दिन की देरी से निर्माण लागत लाखों रुपये बढ़ रही है, जिसका सीधा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ेगा। देरी से न केवल बजट प्रभावित होगा बल्कि शहरवासियों को भी लंबे समय तक निर्माण जनित असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा।

टीबीएम चालू है, लेकिन बूस्टिंग का काम शुरू नहीं हुआ है। जल्द ही बूस्टिंग का काम शुरू होगा। जमीन के नीचे कितनी खुदाई हो चुकी है, इसकी जानकारी बाद में बताएंगे। – धीरज शुक्ला, पीआरओ, एमपी मेट्रो

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here