चंडीगढ़.
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने का मामला अब मामला राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा है। माना जा रहा है कि वह हाल ही में भाजपा में शामिल हुए 7 राज्यसभा सदस्यों के मुद्दे को लेकर अपना पक्ष रखेंगे और इस पूरे घटनाक्रम पर संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री राष्ट्रपति से यह अनुरोध कर सकते हैं कि संबंधित राज्यसभा सदस्यों को बुलाकर उनका पक्ष सुना जाए और उसके बाद नियमों के तहत उचित फैसला लिया जाए। इसके साथ ही दलबदल कानून के तहत इन सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग भी उठाई जा सकती है।सरकार का मानना है कि यह मामला लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर स्पष्ट निर्णय जरूरी है।
सीएम मान ने आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तीखा हमला करते हुए व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने 7 राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे और बीजेपी में शामिल होने पर तंज कसते हुए कहा कि अलग-अलग ये नेता ज्यादा महत्व नहीं रखते। उन्होंने एक्स पर पंजाबी में लिखा, 'अदरक, लहसुन, जीरा, मेथी पाउडर, लाल मिर्च, काली मिर्च और धनिया – ये सात चीजें मिलकर किसी खाने का स्वाद बढ़ा देती हैं, लेकिन अकेले इनमें से कोई भी पूरी डिश नहीं बन सकती।'
किन 7 नेताओं ने छोड़ा AAP का साथ
यह बयान उस घटना के एक दिन बाद आया जब राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत 7 राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का ऐलान किया है। इनके साथ अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी के नाम भी शामिल बताए गए हैं। राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है, इसलिए उन्होंने बीजेपी का दामन थामा। उन्होंने यह भी कहा कि सातों सांसद एक गुट के रूप में बीजेपी में शामिल हुए हैं।
इस घटनाक्रम के बाद भगवंत मान ने इन नेताओं को गद्दार करार दिया और बीजेपी पर AAP को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बेअदबी (धार्मिक अपमान) के खिलाफ सख्त कानून बनने के बाद से बीजेपी असहज हो गई है। मान ने यह भी कहा कि इन सातों में से कोई भी बड़ा जनाधार वाला नेता नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया, 'एक सरपंच के पास भी वोट बैंक होता है, क्या इनके पास कोई वोट बैंक है?' उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में बार-बार चुनावी हार झेलने वाली बीजेपी अब दबाव, प्रलोभन और दल-बदल के जरिए AAP सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू
उधर आम आदमी पार्टी के लिए यह घटनाक्रम बड़ा झटका माना जा रहा है। पंजाब से पार्टी के छह राज्यसभा सदस्यों का एक साथ भाजपा में शामिल होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस घटनाक्रम से भाजपा की राज्यसभा में स्थिति मजबूत हुई है। खास बात यह है कि पंजाब में केवल दो विधायक होने के बावजूद भाजपा अब राज्यसभा में सात सदस्यों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।
सीएम की मुलाकात पर टिकी नजरें
वहीं दूसरी ओर आप के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने पहले ही पार्टी का रुख साफ कर दिया है। उनका कहना है कि जब दो-तिहाई सदस्य एक साथ दल बदलते हैं तो दलबदल कानून लागू नहीं होता। इस बयान के बाद कानूनी बहस भी तेज हो गई है और विशेषज्ञ अलग-अलग राय दे रहे हैं। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री भगवंत मान की संभावित राष्ट्रपति से मुलाकात पर टिकी हैं। अगर यह मुलाकात होती है तो आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर कोई बड़ा संवैधानिक फैसला सामने आ सकता है, जो पंजाब की सियासत की दिशा तय करेगा।





