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सांस्कृतिक भारत निर्माण पर परिसंवाद, नाट्य मंचन बना आकर्षण का केंद्र

लखनऊ. 
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित तीन दिवसीय रश्मिरथी पर्व के दूसरे दिन शनिवार को स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचारों और सांस्कृतिक भारत निर्माण में उनके योगदान पर आधारित विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में युवाओं, साहित्य प्रेमियों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। परिसर भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। नाट्य मंचन की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के प्रेरक वाक्य ‘ उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए ’ से हुई। 

करीब 90 मिनट तक चला नाट्य मंचन 
द्वितीय दिवस का मुख्य आकर्षण स्वामी विवेकानंद के सांस्कृतिक भारत निर्माण में योगदान विषय पर आयोजित परिसंवाद रहा। नाट्य मंचन शुरू होने से पहले वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, आत्मगौरव और आध्यात्मिक चेतना को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास, राष्ट्रसेवा और चरित्र निर्माण का संदेश दिया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। करीब 90 मिनट तक स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने उनके संघर्ष, तपस्या और शिकागो धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक उद्बोधन को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। सांस्कृतिक संध्या में प्रस्तुति ने सभी को भावविभोर कर दिया।

पानी पंचायत पुस्तक का हुआ विमोचन 
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की उपस्थिति में पानी पंचायत पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और समाज की सहभागिता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद आज भी युवाओं के लिए आदर्श हैं। उनके विचार संकल्प शक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं। इस दौरान कृषि मंत्री एवं संयोजक सूर्य प्रताप शाही, पूर्व मंत्री व विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, पूर्व विधायक डॉ. सिद्धार्थ शंकर, भाजपा नेता डॉ. नीरज सिंह, राजेंद्र सिंह तथा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी सहित अनेक गणमान्य मौजूद रहे।

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