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औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों को राहत, 1000–1500 रुपये में मिलेगा आवास

नोएडा

 उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी समस्या हमेशा सस्ते और सुरक्षित आवास की रही है। बढ़ते किराए, लंबी दूरी और सीमित आय के बीच जीवन यापन करना उनके लिए चुनौती बना हुआ है। अब इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार और प्राधिकरण स्तर पर बड़े फैसले लिए गए हैं। नोएडा में जहां श्रमिकों के लिए चार बड़े हॉस्टल बनाए जाएंगे, वहीं पूरे राज्य में किफायती किराया आवास नीति को औद्योगिक क्षेत्रों में लागू करने की तैयारी है, जिससे मजदूरों को उनके कार्यस्थल के पास ही सस्ती और सुविधाजनक रहने की व्यवस्था मिल सकेगी।

नोएडा में बनेंगे 4 श्रमिक हॉस्टल
नोएडा प्राधिकरण श्रमिकों के लिए चार आधुनिक हॉस्टल बनाने जा रहा है। इनमें से दो हॉस्टल प्राधिकरण स्वयं बनाएगा, जबकि दो का निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) में किया जाएगा।

चारों हॉस्टल एक-एक एकड़ जमीन पर विकसित होंगे और प्रत्येक हॉस्टल में लगभग 1000 श्रमिकों के रहने की क्षमता होगी। इन हॉस्टल्स को औद्योगिक सेक्टरों के पास बनाया जाएगा, जिससे श्रमिकों को कार्यस्थल तक पहुंचने में अतिरिक्त परिवहन खर्च नहीं करना पड़ेगा।

औद्योगिक क्षेत्रों में बनेंगे श्रमिक आवास
राज्य स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया है कि औद्योगिक क्षेत्रों की 30 प्रतिशत भूमि पर श्रमिकों के लिए आवास विकसित किए जाएंगे। इस निर्णय में आवास, औद्योगिक विकास, नगर विकास और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग शामिल रहे, जिन्होंने श्रमिकों को कार्यस्थल के नजदीक रहने की सुविधा देने पर सहमति जताई।

सरकारी एजेंसियों के साथ निजी डेवलपर्स भी होंगे शामिल
इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी डेवलपर्स को भी जोड़ा जाएगा। निजी बिल्डरों को अपनी परियोजनाओं में श्रमिकों के लिए किराए के मकान बनाने की अनुमति दी जाएगी। इसके बदले उन्हें भू-उपयोग में छूट, मानचित्र स्वीकृति में तेजी और विकास शुल्क में राहत जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके।

1000 से 1500 रुपये तक होगा किराया
इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण इसका किफायती किराया है। सूत्रों के अनुसार, इन श्रमिक आवासों का मासिक किराया लगभग 1000 से 1500 रुपये के बीच रखा जा सकता है। मौजूदा समय में बड़े शहरों में एक कमरे का किराया 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच चुका है, ऐसे में यह योजना कम आय वाले श्रमिकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

कुशल और अकुशल दोनों श्रमिकों को मिलेगा लाभ
यह योजना केवल फैक्ट्री मजदूरों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वेंडर, पेंटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कुशल व अकुशल श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलेगा। आवास का आवंटन इस तरह किया जाएगा कि यदि कोई श्रमिक शहर छोड़ता है तो उसी मकान को दूसरे जरूरतमंद को दे दिया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
प्रधानमंत्री आवास योजना का विस्तार
राज्य सरकार पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किफायती किराया आवास (ARH) नीति को मंजूरी दे चुकी है। अब इस नीति को औद्योगिक विकास विभाग में लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे इसका दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।

क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
हाल के वर्षों में नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों ने महंगे किराए, बच्चों की फीस और बढ़ती महंगाई को लेकर विरोध जताया था। कोविड-19 महामारी के दौरान भी श्रमिकों के सामने आवास की गंभीर समस्या सामने आई थी, जिसने इस दिशा में ठोस नीति बनाने की आवश्यकता को और स्पष्ट किया।

 

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