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बिल्डिंग नियमों पर बड़ा फैसला: कोर्ट की रोक के बाद पंजाब सरकार ने बायलॉज लिए वापस

लुधियाना.

पंजाब में बिल्डिंग बनाने वालों को नियमों में छूट नहीं मिलेगी जिसके तहत सरकार ने नए बाईलॉज वापस ले लिए हैं। यहां बताना उचित होगा कि शहरी विकास विभाग द्वारा पिछले साल दिसम्बर के दौरान यूनिफाइड बिल्डिंग बाईलॉज जारी किए गए थे।

जिसमें नगर निगम के एरिया में भी कमर्शियल व रिहायशी बिल्डिंग बनाने वालों को कवरेज के मामले में काफी छूट दी गई थी लेकिन यह बाईलॉज जारी होने के कुछ देर बाद ही कोर्ट द्वारा उसे लागू करने पर रोक लगा दी गई। अब भी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस चल रहा है। इसी बीच सरकार द्वारा 2025 के यूनिफाइड बिल्डिंग बाईलॉज वापस लेने का फैसला कर लिया गया है। इस संबंध में नोटिफिकेशन सोमवार को अर्बन डिवैल्पमैंट विभाग के प्रिंसीपल सैक्रेटरी के हवाले से जारी किया गया जिसके मुताबिक अगले आदेश तक पंजाब की नगर निगम में 2018 और पुडा के एरिया में 2021 के बिल्डिंग बाईलॉज लागू होंगे।

कमर्शियल व रिहायशी कैटेगरी को यह दी गई थी राहत 

  1. – टी.पी. स्कीम के एरिया में 60 फुट रोड पर नगर निगम के जरिए सरकार कमर्शियल रोड डिक्लेयर करवाने की लंबी प्रक्रिया से छूट।
  2. – कोर एरिया में 3 लाख प्रति ई.सी.एस. के हिसाब से पेड पार्किंग की शर्त पर 21 मीटर तक कवरेज की सुविधा।
  3. -ऑल अराउंड सेट बैक छोड़ने के लिए बिल्डिंग की ऊंचाई की सीमा 15 से बढ़ाकर 21 मीटर की गई थी।
  4. -किसी भी कमर्शियल बिल्डिंग में 20 फीसदी फ्रंट सैटबैक छोड़ने की शर्त को 20 मीटर अधिकतम पर किया गया था फिक्स।
  5. – 40 फुट रोड पर स्थित 200 गज के रिहायशी मकान की ग्राऊंड फ्लोर पार्किंग के छोडने के बाद 21 मीटर उंचाई तक 4 मंजिला निर्माण करने का प्रावधान।

कोर्ट केस में 93 वर्षीय याचिकाकर्त्ता द्वारा यह उठाए गए थे मुद्दे 
इस मामले को लेकर कोर्ट में चल रहे केस में याचिकाकर्त्ता 93 वर्षीय महिला हैं जिनके द्वारा मुद्दा उठाया गया है कि नए बिल्डिंग बाईलॉज इससे पहले से लागू फायर प्रिवैंशन एक्ट व नैशनल बिल्डिंग कोड के प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत हैं। इसके अलावा जिस रियल एस्टेट एडवायजरी कमेटी की सिफारिशों को आधार बनाकर नए बिल्डिंग बाईलॉज तैयार किए गए हैं, उस कमेटी में बिल्डर व डिवैल्पर शामिल हैं और उनकी सुविधा का ध्यान रखा गया है जिससे रिहायशी इलाके में बडी संख्या में कर्मिशयल बिल्डिंगों का निर्माण करने का रास्ता साफ हो गया है लेकिन यह फैसला लेने से उन इलाकों में रहने वाले लोगों को विश्वास में नही लिया गया।

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