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अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश,गोपालगंज लूट केस में मुंबई तक जुड़े तार

 गोपालगंज बिहार के गोपालगंज जिले में दीपक ज्वेलर्स में हुई सनसनीखेज लूट और हत्याकांड मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। गिरफ्तार अपराधी के बयान से पता चला है कि इस पूरी वारदात की साजिश गुजरात के एक होटल में रची गई थी और इसमें अंतरराज्यीय गिरोह शामिल था, जिसके तार मुंबई तक जुड़े हैं। गुजरात के होटल में बनी थी साजिश भोरे थाना क्षेत्र के लाला छापर स्थित दीपक ज्वेलर्स में हुई इस वारदात को लेकर गिरफ्तार अपराधी सुमित सिंह उर्फ रोहित ने पुलिस को बताया कि करीब 20 दिन पहले गुजरात के उमरगांव स्थित होटल ‘दर्शन’ में गिरोह के सभी सदस्य इकट्ठा हुए थे। यहीं पर कुख्यात मनिंदर मिश्रा उर्फ बड़का भैया और गोलू मिश्रा ने लूट की पूरी योजना बनाई थी। लूट के लिए करोड़ों का लालच, 10-10 लाख का वादा अपराधियों को बताया गया था कि ज्वेलर्स की दुकान में करोड़ों के जेवरात हैं। लूट के बाद मिलने वाले हिस्से से सभी मुंबई में आराम की जिंदगी जी सकते हैं। गिरोह के हर सदस्य को काम के बदले 10-10 लाख रुपये देने का वादा किया गया था। मुंबई से मंगाए गए थे आधुनिक हथियार वारदात को अंजाम देने के लिए हथियारों का बड़ा जखीरा मुंबई से मंगाया गया था। सुमित ने बताया कि गोलू मिश्रा खुद मुंबई गया था और वहां से हथियार लेकर आया। इसके बाद विशाल यादव और सुमित को मुंबई बुलाया गया, जहां उन्हें एक बैग दिया गया, जिसमें 7 पिस्टल और 200 जिंदा कारतूस थे। इसके बाद सभी ट्रेन से वलसाड से गोरखपुर पहुंचे और फिर गोपालगंज पहुंचे। विरोध करने पर गोली मारने का था आदेश अपराधियों को साफ निर्देश दिया गया था कि लूट के दौरान अगर कोई विरोध करे, तो उसे सीधे गोली मार दी जाए। इसी वजह से दुकान में घुसते ही अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस गिरोह में विशाल यादव, शत्रुघ्न राम, रोहित राम, फरमान और गोल्डन जैसे अपराधी शामिल थे। सभी दो बाइक और एक बोलेरो से वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे। झाड़ियों से बरामद हुए जेवरात और हथियार पुलिस ने गिरफ्तार सुमित की निशानदेही पर करमासी गांव के एक बगीचे से लूटे गए सोने-चांदी के जेवरात और घटना में इस्तेमाल पिस्टल बरामद कर लिए हैं। सुमित ने बताया कि घटना के बाद जब भीड़ ने उनका पीछा किया, तो वह डर गया और जेवरात व हथियार झाड़ियों में छिपाकर भागने की कोशिश की। पुलिस इस मामले में बाकी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।  

जमीन कब्जा केस में जेडीयू विधायक अमरेंद्र पांडेय को कोर्ट से अंतरिम सुरक्षा

 गोपालगंज गोपालगंज से जेडीयू विधायक अमरेंद्र पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय को बड़ी राहत मिली है। जमीन कब्जे और भू-माफियाओं को संरक्षण देने के एक गंभीर मामले में कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर 7 मई तक रोक लगा दी है। विधायक के साथ उनके सहयोगी राहुल तिवारी को भी गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की गई है। इस फैसले के बाद गोपालगंज की सियासत में हलचल तेज हो गई है। क्या है पूरा मामला? यह पूरा विवाद गोपालगंज के मीरगंज थाना क्षेत्र के बेलहिया से जुड़ा है। आरोप है कि विधायक अमरेंद्र पांडेय और उनके करीबियों ने फर्जी कागजातों के जरिए सरकारी और निजी जमीनों पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की। इस मामले में उन पर भू-माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण देने का भी गंभीर आरोप है। किरण सिन्हा नामक महिला की शिकायत के बाद मीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पिछले दिनों विधायक और उनके सहयोगियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। कोर्ट में हुई जोरदार बहस सोमवार को इस मामले पर कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। विधायक की ओर से राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन मिश्र ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के सामने दलील दी कि विधायक को राजनीतिक द्वेष के चलते फंसाया जा रहा है। उन्होंने पुलिस डायरी और एलसीआर रिकॉर्ड की मांग की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुलिस को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक विधायक के खिलाफ कोई भी सख्त कदम न उठाया जाए। 7 मई को होगी अगली सुनवाई कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 मई को तय की है। तब तक पुलिस डायरी और अन्य संबंधित दस्तावेजों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। विधायक पप्पू पांडेय के समर्थकों के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। विधायक ने हमेशा इन आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार और शासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

पलामू प्रमंडल में हड़कंप,झारखंड पुलिस ने जमीन माफियाओं के खिलाफ कसी कमर

गढ़वा गढ़वा समेत पूरे पलामू प्रमंडल में जमीन के काले कारोबार के जरिए खूनी खेल खेलने वाले माफियाओं और सफेदपोशों की अब खैर नहीं. पलामू प्रमंडल के डीआईजी किशोर कौशल ने भू-माफियाओं के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े ‘मिशन मोड’ ऑपरेशन का बिगुल फूंक दिया है. डीआईजी ने प्रमंडल के तीनों जिलों गढ़वा, पलामू और लातेहार के पुलिस कप्तानों को एक सप्ताह के भीतर सक्रिय भू-माफियाओं की रिपोर्ट सौंपने को कहा है. सिंडिकेट के मास्टरमाइंड पर होगी सीधी कार्रवाई मिली जानकारी के अनुसार, इस निर्देश के मिलते ही गढ़वा पुलिस ने जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है. पुलिस अब केवल छोटे दलालों को नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे से सिंडिकेट चलाने वाले ‘मास्टरमाइंड’ को सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी में है.  पलामू प्रमंडल में जमीन माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी. डीआईजी ने गढ़वा, पलामू और लातेहार पुलिस से एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है. बड़े आरोपियों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे बढ़ती घटनाओं ने बढ़ाई पुलिस की चिंता हाल के दिनों में गढ़वा जिले में जमीन विवाद के कारण फायरिंग और हत्या जैसी घटनाओं ने पुलिस की चिंता बढ़ाई है. जांच में सामने आया है कि कई रसूखदार लोग अपराधियों को फंडिंग कर रहे हैं. पुलिस अब इनके मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही है. पुलिस की रणनीति इस बार माफियाओं को भागने का मौका नहीं देने की है. कहा गया कि तीनों जिलों की पुलिस संयुक्त समन्वय के साथ छापेमारी करेगी. सूची फाइनल होते ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी. तीन श्रेणियों में बंटेंगे माफिया पुलिस की ओर से तैयार की जा रही लिस्ट में माफियाओं को उनके अपराध की गंभीरता के आधार पर तीन श्रेणियों (ए, बी और सी) में बांटा जा रहा है. श्रेणी-ए (हाई रिस्क):- वैसे बड़े खिलाड़ी जिनका सीधा कनेक्शन संगठित आपराधिक गिरोहों से है. श्रेणी-बी (मिड लेवल):- सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी करने वाले और बिचौलिये. श्रेणी-सी (एजेंट): -जमीन चिह्नित करने वाले छोटे मददगार. इन पर पुलिस की पैनी नजर फर्जी खतियान और डीड बनाकर सरकारी या निजी जमीन हड़पने वाले. जमीन विवाद को जानबूझकर खूनी संघर्ष में तब्दील करने वाले तत्व. जमीन के धंधे में अपराधियों को पैसा लगाने वाले पर्दे के पीछे के फाइनेंसर. क्या कहते हैं डीआईजी? पलामू प्रक्षेत्र के डीआईजी, किशोर कौशल ने कहा कि प्रमंडल के तीनों जिलों से एक सप्ताह के भीतर सूची मांगी गई है. रिपोर्ट मिलते ही चिह्नित माफियाओं के विरुद्ध सीसीए और गैंगस्टर एक्ट जैसी कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जाएगी. जमीन विवाद के नाम पर रंगदारी और हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी. 

भारत में टॉप 5 सुरक्षित 7-सीटर कारों की पूरी लिस्ट

  देश में पिछले कुछ सालों के दौरान 7-सीटर कार सेगमेंट में सबसे ज्यादा तरक्की देखने को मिली है। वहीं, इन कारों में अब सेफ्टी भी काफी बेहतर मिलने लगी है। इस सेगमेंट में सस्ते मॉडल से लेकर कई प्रीमियम मॉडल शामिल हैं। हाल के दिनों में ग्राहकों के बीच एक और ट्रेंड देखने को मिला है। दरअसल, 7-सीटर कारों की बिक्री बढ़ने की वजह यह है कि ये कारें बड़े भारतीय परिवारों के लिए काफी प्रैक्टिकल होती है। वहीं, अब ये अफॉर्डेबल कीमत पर मिल जाती हैं। हम यहां पर ऐसी ही 5 7-सीटर कारों के बारे में बता रहे हैं, जो सेफ्टी के हिसाब से काफी शानदार भी हैं। पसंदीदा मॉडल्स पर सीमित समय की शानदार डील 1. टाटा सफारी पिछले कुछ सालों में टाटा भारत की सबसे पॉपुलर और लीटिंग कार कंपनियों में से एक बन गई है। उनकी गाड़ियों की लाइनअप में कई गाड़ियां शामिल हैं, जिनमें ज्यादातर SUV हैं। उनकी मौजूदा फ्लैगशिप गाड़ी सफारी है। यह एक 7-सीटर SUV है, जो अपने लुक्स और फीचर्स की वजह से ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय है। भारत NCAP क्रैश टेस्ट इसे 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में इसे 32 में से 30.08 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 44.54 पॉइंट मिले। सफारी दो इंजन ऑप्शन में उपलब्ध है। इसमें 1.5-लीटर टर्बो पेट्रोल इंजन, जो 170 PS की पावर और 280 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। वहीं, 2.0-लीटर टर्बो डीजल इंजन, जो 170 PS की पावर और 350 Nm का टॉर्क जनरेट करता है। पेट्रोल और डीजल, दोनों ही वर्जन मैनुअल और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ऑप्शन के साथ उपलब्ध हैं। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 13.29 लाख रुपए है। 2. टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस टोयोटा ने भी भारत की सबसे सुरक्षित 7-सीटर कारों की लिस्ट में अपनी जगह बना ली है। कंपनी इनोवा हाईक्रॉस को पेट्रोल और 'स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड' दोनों ही वर्जन में पेश करती है। इनोवा और इनोवा क्रिस्टा के बाद, यह देश की सबसे पॉपुलर MPV में से एक है। उम्मीद है कि अगले साल इनोवा हाईक्रॉस, क्रिस्टा की जगह पूरी तरह से ले लेगी। इसके अलावा, टोयोटा फ्लीट मार्केट के लिए इनोवा हाईक्रॉस का एक और भी ज्यादा अफॉर्डेबल स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वर्जन लाने की योजना भी बना रही है। इनोवा हाईक्रॉस की शुरुआती एक्स-शोरूम 18.70 लाख रुपए है। सेफ्टी के लिए इसे भी 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली। एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में इसे 32 में से 30.47 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 45 पॉइंट मिले। 3. मारुति सुजुकी इनविक्टो मारुति इनविक्टो असल में इनोवा हाईक्रॉस का ही एक रीबैज्ड वर्जन है। यह थोड़ी ज्यादा अफॉर्डेबल है क्योंकि मारुति इसमें हाईक्रॉस में मिलने वाले सभी फीचर्स नहीं देती है। इनविक्टो की एक्स-शोरूम कीमत 24.97 लाख रुपए से शरू होती है। हाईक्रॉस की तरह ही, इनविक्टो को भी भारत NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार रेटिंग मिली। एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में इसे 32 में से 30.43 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 45 पॉइंट मिले। 4. महिंद्रा स्कॉर्पियो N महिंद्रा अपनी मजबूत SUVs के लिए जानी जाती है और स्कॉर्पियो N भी इससे अलग नहीं है। यह एक लैडर-फ्रेम SUV है जो काफी हद तक ऑफ-रोडिंग कर सकती है और सड़क पर भी अच्छा परफॉर्म करती है। यह पेट्रोल और डीजल दोनों इंजन ऑप्शन में उपलब्ध है। सिर्फ कुछ चुनिंदा डीजल वैरिएंट में ही 4×4 मिलता है। महिंद्रा स्कॉर्पियो N के फेसलिफ्ट पर भी काम कर रही है और इसे टेस्टिंग के दौरान देखा भी गया है। स्कॉर्पियो N की शुरुआती कीमत 13.49 लाख रुपए से शुरू होती है। ये 7-सीटर SUV भी एक मजबूत गाड़ी है। इसे ग्लोबल NCAP में 5-स्टार रेटिंग मिली है। इसे एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 34 में से 29.25 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 28.93 पॉइंट मिले। 5 महिंद्रा XUV 7XO महिंद्रा की XUV 7XO भी देश की सबसे सुरक्षित 7-सीटर मानी जाती है। हालांकि, 7XO के लिए कोई ऑफिशियल क्रैश टेस्ट स्कोर उपलब्ध नहीं है, क्योंकि अभी तक इसका टेस्ट नहीं किया गया है। यह असल में XUV700 का ही एक अपडेटेड वर्जन है, जिसका टेस्ट ग्लोबल NCAP ने पहले किया था। दोनों गाड़ियां मैकेनिकल और बनावट के हिसाब से एक जैसी हैं। इनमें मुख्य अंतर सिर्फ कॉस्मेटिक अपडेट और कुछ एक्स्ट्रा फीचर्स का है। इसकी एक्स-शोरूम कीमत 13.66 लाख रुपए से शुरू है। बता दें कि ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में महिंद्रा XUV700 को एडल्ट ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 17 में से 16.03 पॉइंट और चाइल्ड ऑक्यूपेंट सेफ्टी में 49 में से 41.66 पॉइंट मिले।

वड़ा पाव गर्ल चंद्रिका दीक्षित का पति युगम गेरा संग पैचअप

'वड़ा पाव गर्ल' के नाम से मशहूर चंद्रिका दीक्षित का पति युगम गेरा संग पैचअप हो गया है. दोनों अपने रिश्ते में आई दूरियों को मिटाकर फिर से एक हो गए हैं. कुछ दिनों पहले तक चंद्रिका जहां पति पर धोखा देने का आरोप लगा रही थीं, वो अब पति संग रोमांटिक होती हुई नजर आईं. पति संग चंद्रिका का बेडरूम रोमांस चंद्रिका ने पति युगम संग एक रोमांटिक बेडरूम वीडियो शेयर किया है. युगम चंद्रिका की मांग में सिंदूर भरते हुए दिखाई दे रहे हैं. वो चंद्रिका को कीमती तोहफा भी देते दिखे. युगम ने चंद्रिका को प्यार से माथे पर KISS भी किया. फिर दोनों एक दूसरे को प्यार से गले लगाते नजर आए. चंद्रिका और युगम ने अपने रोमांटिक वीडियो के कैप्शन में लिखा- हम बस तेरे हैं. इसके साथ उन्होंने हार्ट और ईविल आई इमोजी भी बनाई. पति संग अनबन भूलीं चंद्रिका चंद्रिका और युगम को रोमांस करता देखकर फैंस का सिर चकारने लगा है, क्योंकि कुछ वक्त पहले तक चंद्रिका रो-रोकर पति के धोखा देने के दावे कर रही थीं. चंद्रिका ने कहा था कि उनके पति का 2 लड़कियों के साथ अफेयर चल रहा है. अब वो पति संग रोमांस कर रही हैं. ट्रोल हो रहीं चंद्रिका चंद्रिका को पति संग रोमांटिक होता देखकर लोग दोनों को ही खरी-खोटी सुना रहे हैं. एक यूजर ने लिखा- भाई कोई बताएगा ये सब क्या हो रहा है. दूसरे ने लिख- इतना ड्रामा क्यों करती हो? चंद्रिका को कोई ड्रामेबाज बता रहा है तो किसी का कहना है कि वो सबकुछ पब्लिसिटी के लिए करती हैं. बता दें कि पति संग अनबन के बाद चंद्रिका मुस्लिम मिस्ट्री मैन सैफ संग रोमांस फरमाती नजर आ रही थीं. वो सैफी संग कई रोमांटिक वीडियो शेयर करती थीं, जिसपर उन्हें काफी ट्रोलिंग भी झेलनी पड़ी. लेकिन पति संग पैचअप होने के बाद उन्होंने सैफी संग वीडियो बनाने पर माफी मांगी थी. चंद्रिका अब पति संग खुशी-खुशी रह रही हैं.

सुशासन तिहार और जनगणना के लिए प्रशासन ने पूरी की तैयारियां

सुशासन तिहार और जनगणना को लेकर प्रशासन पूरी तरह तैयार  30 अप्रैल तक लंबित प्रकरण निपटाने के निर्देश 1 मई से दो बड़े अभियान शुरू : 73 शिविरों के साथ सुशासन तिहार टीएल बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल की समीक्षा, प्रशासनिक तैयारियों को दिया अंतिम रूप बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने टीएल बैठक लेकर आगामी 1 मई से शुरू हो रहे सुशासन तिहार और जनगणना कार्य की तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को 30 अप्रैल तक सभी लंबित मामलों के निराकरण के निर्देश देते हुए दोनों महत्वपूर्ण अभियानों को सफल बनाने के लिए पूरी मुस्तैदी से कार्य करने को कहा।       कलेक्टर संजय अग्रवाल ने मंगलवार को आयोजित टीएल बैठक में जिले में शुरू होने जा रहे दो बड़े अभियानों—सुशासन तिहार और जनगणना—की तैयारियों को अंतिम रूप दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सुशासन तिहार प्रारंभ होने से पहले सभी लंबित प्रकरणों का निराकरण कर लिया जाए, ताकि शिविरों में आमजन को त्वरित राहत मिल सके। कलेक्टर ने बताया कि जिले में सुशासन तिहार के दौरान कुल 73 शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 31 शिविर ग्रामीण क्षेत्रों और 42 शिविर शहरी क्षेत्रों में लगाए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में शिविरों के संचालन की जिम्मेदारी जनपद पंचायत के सीईओ तथा शहरी क्षेत्रों में निगम आयुक्त एवं संबंधित सीएमओ को सौंपी गई है। शिविर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित स्थलों पर आयोजित होंगे। उन्होंने अधिकारियों को समय पर उपस्थित रहने तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर शिविरों की जानकारी देने के निर्देश दिए।           बैठक में 1 मई से शुरू हो रही जनगणना की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कलेक्टर ने नागरिकों से 30 अप्रैल तक स्व-गणना फॉर्म भरने की अपील करते हुए कहा कि जनगणना में जानकारी देना प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य है। जानकारी न देने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना से प्राप्त जानकारी का उपयोग केवल नीति निर्माण के लिए किया जाएगा तथा जनगणना अधिनियम 1948 के तहत डेटा की गोपनीयता पूर्णतः सुरक्षित रखी जाएगी। 1 मई से प्रगणक घर-घर जाकर 34 बिंदुओं पर जानकारी एकत्रित करेंगे। कलेक्टर ने जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद के अंतर्गत आगामी 5 वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों से 30 अप्रैल तक ऑनलाइन माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा। ऐसे कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया, जिनसे अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिल सके और जिनके लिए अन्य स्रोतों से पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है।           प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने शेष पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जिले में वर्तमान में 1.02 लाख किसान इस योजना का लाभ ले रहे हैं, जबकि लगभग 25 हजार और किसानों को इससे जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा, खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए खाद और बीज की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अग्रिस्टेक पोर्टल में पंजीकृत किसानों को ही खाद उपलब्ध कराया जाएगा और 1 मई से सॉफ्टवेयर शुरू होने पर वितरण प्रक्रिया प्रारंभ होगी। बैठक में आगामी 9 मई को आयोजित होने वाली लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरण प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने टीएल, जनदर्शन, मुख्यमंत्री घोषणाओं, पीएम पोर्टल तथा उच्च न्यायालय से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

कांग्रेस ने किया बड़ा कदम, पदस्थ बड़े नेता को सस्पेंड किया, गंभीर आरोप लगे; पूरी कहानी जानें

रायपुर  छत्तीसगढ़ के इस जिले में कांग्रेस ने बड़ी कार्रवाई की है। पार्टी ने अपने ही नेता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू पर चोरी का पैसा छिपाने का आरोप लगा है। मामले की जानकारी पर जिला कांग्रेस कमेटी रायपुर ने उन्हें पार्टी से बाहर निकाला है। कहा- कानून से ऊपर कोई नहीं है।   जानकारी के अनुसार, एक कारोबारी से करीब 50 लाख रुपये की लूट हुई थी। आरोपी चालक कृष्णा साहू कारोबारी से लाखों रूपए लेकर फरार हो गया था। मामले में कारोबारी ने पुलिस को शिकायत सौंपी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी चालक कृष्णा साहू द्वारा चोरी के पैसों को छिपाने में ओम प्रकाश साहू की भूमिका सामने आई है। ओम प्रकाश साहू की पहचान बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद के रूप में हुई है। जिसके बाद पार्टी ने सख्त कार्रवाई करते हुए पार्षद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिरगांव के अध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर जिला अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने यह कार्रवाई की। वहीं, पुलिस ने बिरगांव के कांग्रेसी पार्षद ओम प्रकाश साहू को चोरी का पैसा छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। ऐसे में मामला केवल आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। इधर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस पूरे मामले की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री (संगठन) मलकीत सिंह गेंदू को भेज दी गई है, ताकि आगे जरूरी कार्रवाई की जा सके। इससे साफ है कि पार्टी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इसमें कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।

MSME टेक्नोलॉजी सेंटर से बिहार को नई रफ्तार, मांझी ने विपक्ष को घेरा

बिहटा/पटना. बिहटा के सिकंदरपुर में मंगलवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME), भारत सरकार के नए प्रौद्योगिकी केंद्र का शुभारंभ किया गया। मुख्‍यमंत्री सम्राट चौधरी और विभागीय मंत्री जीतन राम मांझी ने दीप प्रज्‍जवलन के बाद श‍िलापट का अनावरण किया। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा और मुंगेर में एक्सटेंशन सेंटर भी खोले गए।  बिहार के लाेगों के लिए होगा फायदेमंद उद्धाटन समारोह स्‍थल पर कई स्‍टॉल लगाए गए। सीएम और केंद्रीय मंत्री ने इनका निरीक्षण किया। इस केंद्र के बारे में बताया गया कि बिहार के युवाओं को रोजगार से जोड़ने में मदद मिलेगी। खासकर एससी एवं एसटी वर्ग के लोगाें को अपने कारोबार को शुरू करने एवं बढ़ावा देने में इससे मदद मिलेगी। उन्‍हें सरकारी लाभ के बारे में भी जानकारी मिलेगी।  विपक्ष पर मांझी ने क‍िया जोरदार हमला  एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री मांझी ने इसकी सूचना साझा करते हुए विपक्ष पर तंज कसा था। अपने एक्‍स हैंडल पर उन्‍होंने लिखा, हमेशा अपने गया जी के लिए ख़ुशख़बरी सुनाते थे तो विरोधिया सब पूछता था बिहार को का मिला? लिजिए भाई अब बिहार के लिए भी खुशखबरी सुन लीजिए। 28 अप्रैल को दिन के 11 बजे, मतलब परसों सुबह 11 बजे पटना के बिहटा(सिकंदरपुर) में अपने मंत्रालय द्वारा अरबों की लागत से टेक्नॉलॉजी सेंटर का उदघाटन किया जा रहा है। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर, दरभंगा, रोहतास और सीएम के विशेष आग्रह पर मुंगेर में बना एक्सटेंशन सेंटर का उद्घाटन किया जा रहा है। मांझी ने आम जन से अपील की क‍ि आप सब भी आईए आउर दोनों हाथ उठाकर कहिए, नरेंद्र मोदी संग चल पड़ा बिहार,जय हो मोदी सरकार।  

15 साल बाद उसलापुर रेलवे साइडिंग फिर शुरू, ट्रक मालिकों में उत्साह

15 साल बाद उसलापुर रेलवे साइडिंग फिर शुरू, ट्रक मालिकों में उत्साह आंधी-तूफान के बीच सैकड़ों ट्रक मालिकों की ऐतिहासिक बैठक, संचालन तत्काल शुरू करने का निर्णय वरिष्ठ नेताओं ने संभाला संरक्षक दायित्व, 1 मई को श्रमिक दिवस भव्य रूप से मनाने का ऐलान बिलासपुर  उसलापुर गुड्स शेड वेलफेयर ट्रक ओनर एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक उसलापुर रेलवे साइडिंग में आयोजित हुई, जिसमें खराब मौसम और धूल भरी आंधी के बावजूद सैकड़ों ट्रक मालिकों एवं श्रमिकों ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया। बैठक में 15 वर्षों से बंद पड़ी रेलवे साइडिंग को पुनः शुरू करने का सर्वसम्मति से ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। बैठक में वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल, गुलशन ऋषि, प्रशांत नारंग एवं अशोक श्रीवास्तव ने एसोसिएशन के संरक्षक का दायित्व स्वीकार करते हुए संगठन को मजबूती प्रदान करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि ट्रक मालिकों और श्रमिकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। निर्णय अनुसार, उसलापुर रेलवे साइडिंग पर कार्य तत्काल प्रभाव से प्रारंभ किया जाएगा। सभी ट्रक मालिक एवं श्रमिक अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए नियमित संचालन शुरू करेंगे। यह पहल क्षेत्र के व्यापार और परिवहन व्यवस्था को नई गति देने वाली मानी जा रही है। बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ट्रक मालिक, ड्राइवर और श्रमिक देश की आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ हैं, जो दिन-रात सेवाएं देकर अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। इसके साथ ही, एसोसिएशन द्वारा आगामी 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस को भव्य रूप से मनाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर श्रमिकों के योगदान को सम्मानित करते हुए एकजुटता का प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में नरेश अग्रवाल, गुलशन ऋषि, प्रशांत नारंग, अशोक श्रीवास्तव, ईश्वर सिंह चंदेल, तेजिंदर सिंह बाली, राशिद अली, जीत सिंह, शाहनवाज, इस्माइल, महावीर सिंह, हरजिंदर सिंह, गुरमीत सिंह राणा, समीम, गुड्डू झा, बलजीत सिंह, विनोद पांडे, धीरज यादव, मनजीत सिंह, शिवकुमार, गुरजीत सिंह बाली एवं लेबर अध्यक्ष राजेश टंडन सहित बड़ी संख्या में ट्रक मालिक एवं श्रमिक उपस्थित रहे।

गेटमैन की कमी बनी चुनौती, सरपंच रोज संभालते हैं रेलवे फाटक और देते हैं हरी झंडी

होशियारपुर. पंजाब के होशियारपुर जिले के गांव बसियाला में रेलवे फाटक पर कोई कर्मचारी नहीं है। लेकिन दिन में दो बार जब ट्रेन आती है, वहां एक शख्स मौजूद होता है- गांव का सरपंच गुरदेव सिंह। गढ़शंकर तहसील के बसियाला गांव से गुजरने वाली रेलवे लाइन से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं। यह रास्ता राहों से जैजों दोआबा को जोड़ता है। इस क्रॉसिंग पर फाटक है, पर उसे चलाने वाला सिस्टम नहीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रेलवे ने पहले इस रास्ते को बंद कर दिया था। विरोध के बाद रास्ता खोल दिया गया, लेकिन रेलवे ने फाटक नहीं लगाया। तब गांव वालों ने चंदा कर फाटक लगवाया। ग्रामीणों ने रेल अधिकारियों को फाटक पर कर्मचारी तैनात करने के आवेदन दिए, नेताओं से भी मांग की। लेकिन कोई नियुक्ति नहीं हुई। इसलिए अब सरपंच गुरदेव सिंह रोज ट्रेन के समय से पहले फाटक पर पहुंचते हैं। उसे बंद करते हैं और हाथ में हरी झंडी लेकर ट्रेन को गुजरने का संकेत देते हैं। यह उनकी आधिकारिक ड्यूटी नहीं है, लेकिन वे इसे नैतिक ड्यूटी मानते हैं। कोई तैयार नहीं हुआ- सरपंच डर लगता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। मैं अपनी दुकान छोड़कर दिन में दो बार यहां आता हूं। आने से पहले फोन पर मुबारकपुर के रेलवे स्टाफ से ट्रेन के आने का पता करता हूं। हम गांव वालों ने एक व्यक्ति को 10 हजार रुपए महीने पर रखा था। वह काम छोड़ गया। उसके बाद से यह जिम्मेदारी मैंने खुद ले ली।