पटना
बिहार में पथ निर्माण विभाग की सड़क निर्माण योजना में 25 लाख से 50 करोड़ रुपये तक के काम के टेंडर में बिहार के ठेकेदारों को प्राथमिकता देने का राज्य सरकार ने नीतिगत फैसला कर लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार की शाम बिहार कैबिनेट की बैठक में सरकार ने 25 लाख से ऊपर और 50 करोड़ तक के सिविल कार्य के लिए राज्य स्तरीय संवेदकों को तरजीह देगी। इस फैसले को अमल में लाने के लिए मंत्रिमंडल ने बिहार लोक निर्माण संहिता में जरूरी बदलाव करने को मंजूरी दी है। सरकार के फैसले से स्थानीय ठेकेदारों को मिलने वाले काम की संख्या में बढ़ोतरी होगी। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और नेता भी बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर ठेकेदारी का काम करते हैं।
पूर्व सीएम नीतीश कुमार की सरकार के दौरान बिहार सरकार ने 2026-27 का बजट पेश किया था। उस बजट में पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 18716 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। बजट मांगों पर चर्चा के दौरान विधानसभा में तत्काली पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा था कि सरकार 'विकसित बिहार' के विजन को गति देने के लिए निरंतर समर्पित है। जायसवाल ने सदन में कहा था कि राज्य में सुगम कनेक्टिविटी के लिए जेपी गंगा पथ के विस्तार सहित 16,465 करोड़ से अधिक की नई योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई है। बेहतरीन सड़कें और आधुनिक सेतु सशक्त बिहार की पहचान बनेंगे।
दिलीप जायसवाल ने बताया था कि राज्य में सड़कों के निर्माण के लिए बजटीय प्रावधान की ज्यादा जरूरत नहीं है। सड़क निर्माण के लिए एडीबी, विश्व बैंक, नाबार्ड सहित विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से राशि ली जाती है। एनएच का निर्माण केंद्र सरकार करती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा का जिक्र करते हुए जायसवाल ने कहा था कि इस दौरान 23,974.97 करोड़ रुपये की लागत वाली 137 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। उसमें 111 योजनाओं का काम ठेकेदारों को आवंटित किया जा चुका है और सभी योजनाओं में कार्य प्रगति पर है। पिछले एक साल में 14,757 करोड़ रुपये की 129 अन्य परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई, जो क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में प्रक्रियाधीन है। सम्राट चौधरी कैबिनेट की आज की बैठक के महत्वपूर्ण फैसले आगे पढ़ें।





