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अब डुप्लीकेट वोटिंग पर लगेगी लगाम, AI से होगी मतदाताओं की पहचान

 लखनऊ

पंचायत चुनाव की तारीखें भले ही अभी घोषित न हुईं हों लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारियों में जुटा हुआ है। इस बार के चुनाव में बड़ा तकनीकी बदलाव भी देखने को मिलेगा। फर्जी वोटिंग रोकने व कोई भी मतदाता दोबारा वोट न डाल सकें, इसके लिए आयोग ने ''फेशियल रिकाग्निशन सिस्टम'' (एफआरएस) बनवाया है। इस नई व्यवस्था के तहत मतदान केंद्रों पर वोट डालने आने वाले मतदाताओं के फोटो पहचान पत्र व उनकी फोटो खींची जाएगी। यह फोटो सीधे सर्वर पर अपलोड होगी। अगर कोई भी दोबारा वोट डालने आया तो सिस्टम सतर्क कर देगा।

राज्य निर्वाचन आयुक्त आरपी सिंह ने बताया कि इस तकनीक के लागू होने से किसी भी व्यक्ति द्वारा दूसरे के नाम पर वोट डालने की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। यदि कोई मतदाता फर्जी तरीके से मतदान करने का प्रयास करता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा और मौके पर मौजूद पीठासीन अधिकारी उसे पकड़ सकेंगे।

इसके लिए आयोग एक विशेष मोबाइल एप तैयार करवाया है। पीठासीन अधिकारियों के मोबाइल फोन में यह एप इंस्टाल किया जाएगा, जिसमें मतदाता पहचान पत्र और लाइव फोटो अपलोड कर एआइ से सत्यापन किया जाएगा। चुनाव ड्यूटी के दौरान पीठासीन अधिकारी के फोन पर न तो कोई काल आ सकेगी और न वे इससे कोई काल कर सकेंगे। आयोग पीठासीन अधिकारियों को मोबाइल डाटा के लिए 200 रुपये भी देगा।

मतदान के दौरान जैसे ही मतदाता की फोटो ली जाएगी, एप तुरंत एआइ का इस्तेमाल कर जांच करेगा कि वह पहले कहीं और वोट तो नहीं डाल चुके है। इससे डुप्लीकेट वोटिंग पर पूरी तरह अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। इस पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण मंगलवार को शाहजहांपुर की नगर पंचायत कटरा व कुशीनगर की नगर पंचायत फाजिलनगर के अध्यक्ष पद के उपचुनाव में करीब 50 हजार मतदाताओं पर सफलतापूर्वक किया गया।

अब इसे पंचायत चुनावों में 2.20 लाख पोलिंग बूथों पर व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी है। वर्तमान में पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का कार्य चल रहा है। आयोग का दावा है कि इस नई तकनीक से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी, साथ ही फर्जी मतदान पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।

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