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अब टैंकर नहीं, सीधे गंगाजल से बुझेगी फरीदाबाद की प्यास

फरीदाबाद

औद्योगिक नगरी से गंगाजल केवल 35 किलोमीटर दूर है। जिले को गंगाजल हापुड़ जिले के डेहरा गांव के पास से गुजर रही अपर गंगा कैनाल से मिलेगा। वहां से पाइप लाइन यमुना नदी को पार करते हुए जिले के अमीपुर गांव तक बिछाई जाएगी। यहीं पर इस पानी को साफ करने का प्लांट भी लगाया जाएगा। इसके बाद यह पानी शहर में भेजा जाएगा।

सिंचाई विभाग ने इसका पूरा रूट तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दिया है। अब प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जल्द जलशक्ति मंत्री और उत्तर प्रदेश के मंत्री से मुलाकात करेंगे

पता चला है कि इसी सप्ताह में दिल्ली में यह मुलाकात हो सकती है। इसके बाद योजना को सिरे चढ़ाया जाएगा। याद रहे गंगाजल को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी काफी गंभीर हैं। इसलिए अधिकारियाें को जल्द योजना का खाका तैयार करने के आदेश दिए गए थे।

3500 एमएम मोटाई की होगी पाइप लाइन
दिनभर में अधिक गंगाजल आ सके, इसलिए 3500 एमएम मोटाई वाली पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इसमें एक दिन में 500 एमएलडी पानी शहर में आ सकेगा। इतना पानी आने वाले 25 साल के लिए काफी होगा। इस लाइन को डालने में कहीं कोई अड़चन भी नहीं होगी, क्योंकि जहां से लाइन आएगी, वह पूरी जमीन उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की है।

इसके बाद यमुना नदी और फिर अमीपुर गांव, यहां हरियाणा सिंचाई विभाग की जमीन है। बाकी प्लांट लगाने के लिए जमीन भी आसानी से मिल जाएगी। शहर तक लाइनें पहले से ही बिछी हुई हैं और योजना स्वीकृत होने के बाद नए सिरे से लाइन बिछा दी जाएंगी।

मांग-आपूर्ति में बड़ा अंतर
शहर की आबादी 30 लाख से अधिक है। शहर में पेयजल आपूर्ति की मांग 450 एमएलडी और आपूर्ति 330 एमएलडी हो रही है। यमुना नदी किनारे 22 रेनीवेल लगे हुए हैं। 12 और लगाने शुरू कर दिए हैं। फिलहाल शहर में पेजयल किल्लत है।

मांग व आपूर्ति में अधिक अंतर होने की वजह से शहर की काफी आबादी टैंकरों के पानी पर निर्भर है। नगर निगम द्वारा टैंकर मुहैया नहीं कराए जाते। लोगों को अपने स्तर पर इंतजाम करना होता है।

सबसे अधिक दिक्कत अरावली पहाड़ी के आसपास व एनआइटी क्षेत्र में है। पेयजल मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधि भी आमने-सामने हो जाते हैं। पेयजल सप्लाई को लेकर भेदभाव के आरोप लगते हैं।

हांफने लगे हैं रेनीवेल
मानसून में ही यमुना नदी में पानी होता है, बाकी महीनों में यह नाले के रूप में बहती है। इसलिए नदी किनारे लगे हुए रेनीवेल का भूजल लगातार खिसक रहा है। इसलिए चिंता बढ़ गई है। अब एफएमडीए और रेनीवेल लगा तो रहा है लेकिन अगले 20 से 30 साल के लिए अभी से पूरा इंतजाम करना जरूरी हो गया है।

यमुना नदी किनारे लगे हुए रेनीवेल का भूजल स्तर हर साल खिसक रहा है। इसलिए आने वाले कुछ साल में और दिक्कत हो सकती है। इसलिए गंगा जल लाने की योजना पर काम किया जा रहा है। यह योजना स्वीकृत हो जाती है तो कई दशक तक पानी की दिक्कत नहीं होगी।
    – विशाल बंसल, मुख्य अभियंता, एफएमडीए

    हमारी ओर से पूरी तैयारी है। योजना का पूरा खाका तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय भिजवा दिया है। स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
    – गौरव लांबा, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग

 

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