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भिखारी ठाकुर के नाम पर संग्रहालय की तैयारी, बिहार की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा

पटना

बिहार में राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित करने की तैयारी सरकार के स्तर पर चल रही है। साथ ही भोजपुरी के शेक्सपीयर भिखारी ठाकुर के नाम से संग्रहालय भी बनाने की तैयारी है। सम्राट चौधरी सरकार के कला संस्कृति विभाग ने दोनों ही प्रस्तावों को जमीन पर उतारने का मन बना लिया है। कला विश्वविद्यालय की योजना जमीन पर उतरी तो बिहार इस उपलब्धि को पाने वाला देश का 17वां राज्य बन जाएगा। दिल्ली, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे कला उन्नत प्रदेशों में पहले से ही इस तरह के कला विषयक विश्वविद्यालय हैं।

गौरतलब है कि बिहार में चाक्षुष कला (फाइन आटर्स) की पढ़ाई तो पटना आर्ट कॉलेज में स्नातक स्तर तक की होती है, लेकिन प्रदर्श (मंचीय कला) आटर्स के शिक्षण के लिए कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं है। शहनाई के जादूगर को समर्पित बिस्मिल्लाह खान महाविद्यालय भी अभी जमीन पर उतरना बाकी है। ऐसे में कला संस्कृति विभाग ने राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय खोलने का सैद्धांतिक निर्णय ले लिया है। जल्द ही विभाग प्रस्ताव बनाकर शीर्षस्तर पर इसकी मंजूरी लेने की पहल करेगा।

कला संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने सोमवार को हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय में सभी संबंधित विषयों और कलाओं के विशेषज्ञ और शिक्षक होंगे, ताकि यहां पर कलाकार रंगमंच, नृत्य और संगीत तथा इनकी उपविधाओं में विधिवत प्रशिक्षित होकर डिग्री पा सकें । उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर का होगा, जिससे विभिन्न राज्यों के विद्यार्थी भी यहां आकर उच्च कोटि की शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। बिहार में कला के क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। ऐसे में यहां विश्वविद्यालय स्थापित होने से यहां की प्रतिभाओं को उचित सम्मान और पहचान मिलेगी।

चुनौतियां भी कम नहीं
राष्ट्रीय कला विवि खोलने की राह में कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। खासतौर से सुयोग्य प्रशिक्षक और कला की समझ रखने वाले प्रशासक की तलाश आसान नहीं होगी।

कला विश्वविद्यालय के फायदे
कला संस्कृति मंत्री डॉक्टर प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय स्थापित होने से कलाकारों का पलायन थमेगा। राज्य की कला प्रतिभा अपने यहां ही विकसित होगी। हमारी कलाओं का संरक्षण होगा। दूसरे राज्य से भी कला विद्यार्थी प्रदेश में शिक्षा ग्रहण करने आएंगे तो बिहार की ब्रांडिंग भी होगी। रंगमंच, नृत्य और संगीत में उच्चशिक्षा के लिए फिलहाल बिहार के कलाकार दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों पर आश्रित हैं।

केवल संगीत और नृत्य में हर साल हजारों बच्चे यूपी और हरियाणा समेत अन्य राज्यों के बोर्ड से परीक्षा देते हैं और राज्य का अच्छा-खासा पैसा बाहर जाता है। रंगमंच में भी लम्बे समय से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की तर्ज पर ड्रामा स्कूल खोलने की मांग उठती रही है। नए विश्वविद्यालय के खुलने से रंगमंच समेत तीनों विधाओं में कलाकारों का विस्थापन रुकेगा।

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