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क्या बदलेगा IPL 2026 का शेड्यूल? ईंधन संकट पर चेयरमैन अरुण धूमल ने तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में जारी लंबे संकट का असर अब भारत में भी साफ दिखने लगा है. ईंधन की कमी और बढ़ती चिंताओं के बीच जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की, वहीं अब देश के सबसे बड़े क्रिकेट आयोजन इंडियन2026 पर भी सवाल उठने लगे हैं. क्या आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट को जारी रखना सही है, या देशहित में इसके स्वरूप में बदलाव होना चाहिए? इसी बहस के बीच अब सरकार, व्यापार जगत और क्रिकेट प्रशासन आमने-सामने नजर आ रहे हैं।  आईपीएल 2026 के दौरान ऊर्जा खपत को लेकर सवाल उठने लगे हैं. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के प्रमुख ब्रिजेश गोयल ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर आईपीएल को पुनर्निर्धारित (reschedule) करने की मांग की है. इस पर अब लीग चेयरमैन अरुण धूमल ने प्रतिक्रिया दी है।  IPL 2026 को पुनर्निर्धारित करने की मांग एक रिपोर्ट के अनुसार, अरुण धूमल ने कहा कि यदि भारत सरकार की ओर से कोई निर्देश आता है, तो वे इस मामले पर विचार करेंगे. उन्होंने कहा, “अब तक मेरी जानकारी में BCCI को इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. अलग-अलग संस्थाओं की अपनी राय हो सकती है, लेकिन हम भारत सरकार के प्रति जवाबदेह हैं यदि सरकार की ओर से कोई निर्देश आता है, तो हम उस पर जरूर अमल करेंगे।  सरकार के निर्देश का इंतजार CTI के पत्र में मांग की गई है कि मैचों के आयोजन को सीमित स्थानों तक रखा जाए और उन्हें बिना दर्शकों के कराया जाए, ताकि ईंधन की बचत हो सके. पत्र में यह भी कहा गया है कि आईपीएल 2026 के दौरान टीमें अब तक लाखों किलोमीटर की यात्रा कर चुकी हैं. जब देश का हर सरकारी विभाग, नेता, अधिकारी और आम नागरिक प्रधानमंत्री की सलाह पर फिजूल खर्च से बचने की कोशिश कर रहा है, ऐसे समय में आईपीएल ही एक ऐसा आयोजन है, जिस पर किसी भी संकट का असर नहीं दिख रहा. गोयल ने तर्क दिया कि हवाई यात्रा को कम करना, सीमित स्थानों पर मैच कराना और बिना दर्शकों के आयोजन करने से करोड़ों लीटर पेट्रोल और डीजल की बचत हो सकती है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि महामारी के दौरान BCCI ने इसी तरह के कदम उठाए थे।  टूर्नामेंट की मौजूदा स्थिति 18 मई तक आईपीएल 2026 में कुल 62 मैच खेले जा चुके होंगे. लीग चरण के 8 मुकाबले अभी बाकी हैं, इसके बाद दो क्वालिफायर, एक एलिमिनेटर और 31 मई को फाइनल खेला जाएगा. बाकी मैच चेन्नई, जयपुर, कोलकाता, अहमदाबाद, हैदराबाद, लखनऊ, मुंबई, धर्मशाला और न्यू चंडीगढ़ जैसे शहरों में आयोजित होने हैं. यानि अभी भी 13 दिन के बचे टूर्नामेंट में टीमों को को काफी ट्रैवल करना है। 

3-D उन्मूलन मिशन पर बड़वानी पुलिस, जनजातीय समाज में जागरूकता की नई पहल

जनजातीय अंचल में 3-D उन्मूलन के लिये बड़वानी पुलिस की पहल दारू, दहेज और डीजे मुक्त विवाह के लिये चलेगा अभियान बड़वानी जनजाति अंचल में पनप रही कुरीतियों के खिलाफ एक अनोखी पहल देखने को मिली, जब बड़वानी में पुलिस अधीक्षक स्वयं विवाह समारोह में पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने “3D” अर्थात दारू, दहेज और डीजे जैसी सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन का संकल्प दिलाया। यह विवाह केवल दो परिवारों का मिलन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की मिसाल बन गया। पुलिस प्रशासन की मौजूदगी ने लोगों को यह संदेश दिया कि समाज सुधार केवल कानून से नहीं, बल्कि जनभागीदारी और जागरूकता से संभव है। समारोह में उपस्थित लोगों ने भी 3D मुक्त विवाह का समर्थन करते हुए सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया। पुलिस अधीक्षक बडवानी पद्म विलोचन शुक्ल के नेतृत्व में विगत माह से जिला पुलिस बडवानी द्वारा जिले में विवाह समारोह में दहेज, डीजे एवं दारू का उपयोग नही करने हेतु 3-डी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस विभाग की अभिनव पहल से प्रेरित होकर गत 4 मई को ग्राम धवली में पुलिस विभाग व्दारा आयोजित जनसंवाद में ग्राम जुनापानी के रामा नरगावे द्वारा अपने तीनों बच्चो के विवाह समारोह में दहेज, डीजे एवं दारू का उपयोग नही करने का संकल्प लिया था। रामा नरगावे द्वारा 17 मई को अपने पुत्र कृष्णा नरगावे, पुत्री रंजिता नरगावे एवं दिना नरगावे का विवाह समारोह बिना दहेज, डीजे एवं दारू के संपन्न किया गया। रामा नरगावे व्दारा पुलिस अधीक्षक बडवानी पद्म विलोचन शुक्ल को अपने बच्चों के विवाह समारोह में आमंत्रित करने पर पुलिस अधीक्षक द्वारा ग्राम जुनापानी विवाह समारोह में सम्मिलित हुए। उन्‍होंने दुल्हा-दुल्हनों को शुमकामना संदेश एवं उपहार देकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। शुक्‍ल ने नरगावे दंपति को शॉल-श्रीफल देकर उनकी साहसिक पहल के लिये सम्मानित किया। विवाह समारोह में सम्मिलित जनजातीय समाज के लोगो ने भी सालों से चली आ रही सभी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने का संकल्‍प लिया। भविष्य में बिना दहेज, डीजे एवं दारू के विवाह समारोह सम्पन्न कराने तथा दहेज नही लेने व देने की कुरीति को पूर्ण रूप से बंद करने का संकल्‍प दिलाया गया। विवाह समारोह में थाना वरला का पुलिस स्टाफ तथा वन मंडल अधिकारी सेंधवा इंदुसिंह गडरिया एवं गायत्री परिवार के सदस्य खुमसिंह तथा ग्राम सरपंच पटेल भी शामिल हुए।

सनराइजर्स का धमाका, चेन्नई को हराकर प्लेऑफ में पहुंची हैदराबाद; गुजरात को भी मिला फायदा

चेन्नई  सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) ने सोमवार को आईपीएल 2026 में प्लेऑफ में एंट्री कर ली। एसआरएच ने चेपॉक स्टेडियम में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को पांच विकेट से हराया। पैट कमिंस की अगुवाई वाली टीम ने सीएसके की नैया डुबोकर ना सिर्फ अपना बल्कि गुजरात टाइटंस (GT) का भी प्लेऑफ टिकट कंफर्म किया। एसआरएच और जीटी के 13 मैचों में 8-8 जीत दर्ज करने के बाद 16-16 अंक हैं। बेहतर नेट रनरेट के कारण जीटी अंक तालिका में दूसरे जबकि एसआरएच तीसरे पायदान पर बरकरार है। डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) 13 मैचों में 18 अंक लेकर शीर्ष पर काबिज है और पहले ही प्लेऑफ में पहुंच चुकी। सीएसके को 13 मैचों में सातवीं हार के बाद एक स्थान का नुकसान उठाना पड़ा है। अब एक अनार और पांच बीमार प्लेऑफ में सिर्फ चार टीमों को ही जगह मिलती है। मौजूदा सीजन में अब प्लेऑफ का सिर्फ एक स्लॉट खाली रह गया है। एक स्थान के लिए सीएसके समेत पांच टीमें रेस में हैं। सीएसके आखिरी लीग मैच जीतकर 14 अंकों तक ही जा सकती है। सीएसकी हार से राजस्थान रॉयल्स (RR) तालिका में पांचवें नंबर पर आ गई है। राजस्थान को छोड़कर किसी भी टीम के पास 16 अंकों तक पहुंचने का मौका नहीं है। ऐसे में बाकी टीमों की उम्मीदें ना सिर्फ अपनी जीत बल्कि अन्य टीमों की हार पर टिकी होंगी। प्लेऑफ की रेस से अभी तक आधिकारिक तौर पर मुंबई इंडियंस (MI) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) बाहर हुई हैं। दोनों के 12 मैचों में 8-8 अंक हैं। ईशान किशन चुने गए प्लेयर ऑफ द मैच विकेटकीपर ईशान किशन के अर्धशतक की मदद से सनराइजर्स हैदराबाद ने चेन्नई सुपर किंग्स को हराया। जीत के लिए 181 रन का लक्ष्य चेपॉक की धीमी विकेट पर आसान नहीं था। ईशान ने 47 गेंद की अपनी पारी में सात चौके और तीन छक्कों के दम पर 70 रन बनाए। वह प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए। हेनरिक क्लासेन ने 26 गेंद में 47 रन बनाए। उन्होंने ईशान के साथ तीसरे विकेट के लिए 75 रन की अहम साझेदारी की। हैदराबाद ने 19 ओवर में पांच विकेट पर टारगेट चेज किया। इससे पहले कप्तान कमिंस ने अनुशासित गेंदबाजी करते हुए तीन विकेट लिए। उन्होंने चार ओवर के स्पेल में 28 रन खर्च किए। चेन्नई ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी का फैसला किया था। सीएसके ने घरेलू मैदान पर निर्धारित 20 ओवर में सात पर 180 रन जुटाए। चेन्नई की हार से कैसे मिला गुजरात-हैदराबाद को टिकट चेन्नई सुपर किंग्स की हार का मतलब है कि अब सिर्फ पंजाब, दिल्ली, कोलकाता और सीएसके 16 अंकों तक नहीं पहुंच पाएंगी. सिर्फ राजस्थान ही है जो 16 अंक तक पहुंच पाएगी. जबकि गुजरात के पहले ही 16 अंक हैं और हैदराबाद के भी अब 16 अंक हो गए हैं. ऐसे में गुजरात और हैदराबाद प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर गईं हैं।  चेन्नई और दिल्ली यहां से अधिकतम 14 अंकों तक पहुंच सकती है, जबकि पंजाब और कोलकाता 15 अंकों तक. जबकि राजस्थान के दो मैच बचे हैं और उसके 12 अंक हैं. राजस्थान अपने बचे दोनों मैच जीतकर 16 अंकों तक जा सकती है।  हैदराबाद कर सकती है टॉप पर फिनिश हैदराबाद का आखिरी मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु से है और अगर वह इसे जीत जाती है तो टॉप-2 में फिनिश कर सकती है. जबकि गुजरात ने अगर अपने आखिरी मैच में चेन्नई को हराया तो उसका टॉप स्पॉट फिक्स होगा. बेंगलुरु के भी 18 अंक हैं. अगर हैदराबाद ने बेंगलुरु को हराया और उसके बाद गुजरात ने चेन्नई को मात दी तो टॉप पर कौन रहेगा, इसको लेकर नेट रन रेट से फैसला होगा. हैदराबाद अगर बड़े अंतर से जीत दर्ज करती है तो वह टॉप पर फिनिश कर सकती है. लेकिन अगर हैदराबाद हारी तो वह तीसरे स्थान पर फिनिश करेगी, बशर्ते चेन्नई अपने आखिरी मैच में गुजरात को बुरी तरह ना रौंदे। 

मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी, 2 जून से स्वास्थ्य कर्मचारियों की बड़ी हड़ताल का ऐलान

भोपाल  मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत 32 हजार संविदा कर्मचारियों ने दो जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया है। लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे नाराज कर्मचारियों में यह निर्णय लिया है। हड़ताल की स्थिति में सरकारी अस्पतालों, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। ऑनलाइन हेल्थ मॉनिटरिंग और स्वास्थ्य योजनाओं का काम भी प्रभावित होने की आशंका है। कर्मचारियों ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस मामले में कर्मचारियों ने कहा है कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। इससे पहले सरकार की ओर से मांगों पर सहमति जताई गई थी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। इससे कर्मचारियों में आक्रोश है। 25 मई से शुरू होगा आंदोलन आंदोलन की शुरुआत 25 से 27 मई तक काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन से होगी। 28 और 29 मई को कलेक्टर, सीएमएचओ और बीएमओ को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके बाद सांसदों, विधायकों और मंत्रियों को अपनी समस्याओं से अवगत कराया जाएगा। 2 जून से काम का बहिष्कार कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गई तो 2 जून से ऑनलाइन और ऑफलाइन सभी कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। आंदोलन के अंतिम चरण में 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि हड़ताल की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि समय रहते मांगों का समाधान कर आम जनता को होने वाली असुविधा से बचाया जाए। ये हैं प्रमुख मांगें संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण, एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा लागू करने, हर साल 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि महंगाई भत्ता, वेतन विसंगतियां दूर करने, नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियां और समान काम के बदले समान वेतन की मांग उठाई है। ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें     सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित कर दिया जाए।     न्यू पेंशन स्कीम (NPS) और हेल्थ इंश्योरेंस लागू किया जाए।     अन्य राज्यों की तरह हर वर्ष 10 प्रतिशत वेतन बढ़ाया जाए।     नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता दिया जाए।     स्वास्थ्य अधिकारियों सहित अन्य पदों के वेतन में उचित संशोधन और पूर्व की तरह इंक्रीमेंट दिया जाए।     वेतन संरचना में जो विसंगतियां हैं, उन्हें सुधारकर संशोधित किया जाए।     संविदा कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश का लाभ दिया जाए।     जब तक समान काम के बदले समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिलती, तब तक यह मुद्दा प्राथमिकता से हल किया जाए।

बैंकिंग सेक्टर में TVS Motor की एंट्री, जन स्मॉल फाइनेंस बैंक में निवेश से शेयरों पर नजर

 नई दिल्ली  टीवीएस मोटर कंपनी लिमिटेड 193.32 करोड़ रुपये में जन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड में 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी। टीवीएस मोटर कंपनी लिमिटेड ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि यह अधिग्रहण ‘टीवीएस वेणु’ के एक सौदे का हिस्सा है इसके तहत वॉरंट जारी करने और द्वितीयक बाजार से खरीद के जरिये जन स्मॉल फाइनेंस बैंक में पूर्ण रूप से चुकता आधार पर 9.9 प्रतिशत तक की अल्पांश हिस्सेदारी हासिल की जाएगी। इसमें से 4.9 प्रतिशत हिस्सेदारी टीवीएस मोटर कंपनी के पास होगी। हो गया शेयर खरीद समझौता टीवीएस मोटर कंपनी के निदेशक मंडल ने सोमवार को हुई बैठक में जन होल्डिंग्स लिमिटेड के साथ शेयर खरीद समझौते (एसपीए) को मंजूरी दी। इसके तहत कंपनी 51,60,903 इक्विटी शेयरों की खरीद करेगी, जो 18 मई, 2026 तक जन स्मॉल फाइनेंस बैंक की चुकता पूंजी का 4.90 प्रतिशत है। कितने में हुई है डील? टीवीएस मोटर ने बताया कि इस सौदे की कुल लागत 193.32 करोड़ रुपये होगी। टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन सुदर्शन वेंकटरमन ने कहा कि जन में यह निवेश टीवीएस वेंचर्स की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है, जिसके तहत भारत की बढ़ती वित्तीय जरूरतों को पूरा करने वाली उच्च गुणवत्ता वाली इकाइयों का समर्थन किया जाता है। कितने पर हैं शेयर? आज सवा 3 बजे जन स्मॉल फाइनेंस बैंक का शेयर 5.53 फीसदी की गिरावट के साथ 462 रुपये पर है। वहीं टीवीएस मोटर कंपनी का शेयर भी 5.32 फीसदी गिरकर 3,282.55 रुपये पर है।

2029 की जंग से पहले दक्षिण में कांग्रेस मजबूत, क्या BJP की राह होगी मुश्किल?

नई दिल्ली केरल की सत्ता में वापसी के साथ कांग्रेस पार्टी के अरमानों को नए फंख लग गए हैं. इसके साथ ही कांग्रेस दक्षिण के पांच में से तीन राज्यों में सीधे और एक में परोक्ष रूप से सत्ता में भागीदार हो गई है. केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में उसकी हालत ठीक है. वहीं उत्तर में पार्टी की एक मात्र राज्य हिमाचल प्रदेश में सरकार है. लेकिन, दक्षिण में मिली सफलता के बाद राजनीतिक पंडितों का एक धड़ा इस बात की चर्चा करने लगा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी कहां खड़ी होती दिख रही है।  दरअसल, उत्तर और दक्षिण भारत का राजनीतिक मिजाज पूरी तरह अलग है. हर एक मानक पर देश के दोनों क्षेत्र बिल्कुल अलग है. देश भर में एकछत्र सफलता हासिल कर चुकी भाजपा दक्षिण की ओर बढ़ते-बढ़ते अपनी रफ्तार खो देती है. मौजूदा वक्त में केवल आंध्र प्रदेश में वह चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी सरकार में वह भागीदार है. हालांकि पुड्डुचेरी में भी उसी सरकार है. मगर पांचों बड़ों राज्यों यानी तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में से केवल कर्नाटक में ही पार्टी अपना एक ठोस जनाधार बना पाई है. वह कर्नाटक की सत्ता तक पहुंची है लेकिन बाकी के चारों राज्यों में उसकी मौजूदगी काफी कम है।  पूरे दक्षिण की बात करें तो यहां लोकसभा की कुल 130 सीटें हैं. इसमें से 39 तमिलनाडु, 28 कर्नाटक, 25 आंध्र प्रदेश, 20 केरल, 17 तेलंगाना और एक सीट पुड्डुचेरी में हैं. इसमें आंध्र प्रदेश को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर कांग्रेस की स्थिति अच्छी है. यानी कुल 106 सीटों पर कांग्रेस सीधी टक्कर में है. कांग्रेस ने बीते 2024 के लोकसभा चुनाव में दक्षिणी राज्यों में भी इंडिया गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ा. ऐसे में गठबंधन को कुल 74 और भाजपा की एनडीए को 49 सीटों पर जीत मिली थी. केवल कांग्रेस की बात करें तो उसने अपने दम पर तमिलनाडु में नौ, कर्नाटक में नौ, आंध्र प्रदेश में शून्य, तेलंगाना में आठ और केरल में 14 सीटों पर जीत हासिल की. इस तरह उसे कुल 40 सीटों पर जीत मिली. वहीं भाजपा को अपने दम पर तमिलनाडु में शून्य, कर्नाटक में 17, आंध्र प्रदेश में तीन, तेलंगाना में आठ और केरल में एक सीट पर जीत मिली. उसे कुल 29 सीटें मिलीं. इस तरह पूरे इलाके में अकेले और बतौर गठबंधन दोनों स्थितियों में कांग्रेस का पलड़ा भारी है।  तमिलनाडु में बदल चुकी है स्थिति तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिति बदल चुकी है. कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ चली गई है. ऐसे में लोकसभा चुनाव में उसको इसका और अधिक फायदा मिल सकता है. दूसरी तरफ पार्टी केरलम में वापस सत्ता में आई है. तेलंगाना और कर्नाटक में उसकी सरकार है और वहां भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. ऐसी स्थिति में दक्षिण में भाजपा के लिए चुनौती देखी जा रही है।  थोड़ी बात उत्तर की अब थोड़ी उत्तर भारत की भी बात कर लेते हैं. उत्तर भारत में वैसे तो कांग्रेस करीब-करीब पूरी तरह सत्ता से बाहर है लेकिन कुछ राज्यों में उसके मजबूत मौजूदगी को खारिज नहीं किया जा सकता. इसमें सबसे पहला नाम पंजाब का है. पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं. इसमें से सात पर कांग्रेस और तीन पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी. यहां आम आदमी पार्टी की सरकार है. राज्य में आम आदमी पार्टी दोफाड़ हो चुकी है. ऐसे में यहां पर भी कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है. इस राज्य में भाजपा की शून्य सीटें मिली थी।  इस कड़ी में दूसरा राज्य हरियाणा है. यहां लोकसभा की 10 सीटें हैं. भाजपा और कांग्रेस यहां बराबरी पर हैं और दोनों को पांच-पांच सीटों पर जीत मिली थी. उत्तर भारत में तीसरा सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है जहां कांग्रेस अभी भी मजबूत स्थिति में है. राज्य में लोकसभा की 26 सीटें हैं और बीते चुनाव में वह आठ सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई थी. भाजपा को यहां 14 सीटों पर जीत मिली थी. कहने का मतलब है कि इन कुछ राज्यों से कांग्रेस को उम्मीद है. राजनीति के जानकार और आंकड़ों भी बताते हैं कि यहां अपने दम पर कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. इस तरह से देखें तो दक्षिण की 130 और उत्तर भारत की 49 सीटों पर वह सीधे टक्कर में है. यानी कुल 179 सीटों पर वह टक्कर में है. इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस की ठीकठाक मौजूदगी है। 

इंदौर के चर्चित मर्डर केस की कहानी अब बड़े पर्दे पर, फर्स्ट लुक ने बढ़ाई उत्सुकता

इंदौर इंदौर से जुड़े चर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस (Raja Raghuvanshi Case) की गूंज अब बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया तक पहुंच गई है। इस हाई प्रोफाइल केस से प्रेरित बताई जा रही फिल्म सुंदर पूनम का फर्स्ट लुक सामने आ चुका है। खास बात ये है कि यह फिल्म देश की बड़ी प्रोडक्शन कंपनी Tips Industries के बैनर तले बनाई जा रही है। फिल्म का निर्देशन जाने माने डायरेक्टर पुलकित कर रहे हैं, जो पहले भी सच्ची घटनाओं पर आधारित एक गंभीर फिल्म 'भक्षक' का निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म (Sundar Poonam) के फर्स्ट लुक सामने आने के बाद कहानी की शुरुआती डीटेल्स ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। उनके बीच चर्चा है कि सुंदर पूनम फिल्म इंदौर के रौंगटे खड़े कर देने वाले राजा रघुवंशी केस (Raja Raghuvanshi Case) जैसी सच्ची घटनाओं पर आधारित है। फिल्म में दिखेगी ये कहानी अब तक मिल रही जानकारी के मुताबिक फिल्म सुंदर पूनम में बताया गया है कि एक नवविवाहित कपल कश्मीर में हनीमून मनाने गया था, जो रहस्यमयी तरीके से अचानक लापता हो जाता है। इसके बाद दुल्हन पूनम से जुड़ा एक खौफनाक सच सामने आने लगता है, जो हर किसी को चौंकाकर रख देता (Raja Raghuvanshi Case) है। कहानी में उसके जुनूनी प्रेम, धोखा और अतीत के राज और हत्या जैसे कई सस्पेंस भरे मोड़ दिखाई देंगे, जो उसके आसपास के हर व्यक्ति को एक जानलेवा भंवर में खींच लेते हैं। इंदौर का खौफनाक राजा रघुवंशी केस सुंदर-पूनम फिल्म का प्लॉट सामने आने के बाद चर्चा है कि यह फिल्म इंदौर के खौफनाक राजा रघुवंशी केस पर आधारित है। वह केस जिसने देशभर में सनसनी मचाकर रख दी थी। पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ मेघालय के शिलॉन्ग में हनीमून ट्रिप पर गए इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की संदिग्ध मौत (Raja Raghuvanshi Case) और उसके बाद सामने आए रिश्तों के उलझे सच ने देशभर के लोगों को झकझोर कर रख दिया था। सूत्रों का कहना है कि उसी तरह की घटनाओं से प्रेरणा लेकर इस फिल्म की कहानी तैयार की गई है। बता दें कि राजा रघुवंशी की तरह ही एमपी में अब तक ऐसे नये और कई केस भी सामने आ चुके हैं, जो बार-बार राजा रघुवंशी मर्डर केस से मिलते-जुलते रहे और इसी केस की यादें ताजा करते रहे हैं। क्राइम थ्रिलर और रियल लाइफ केस पर मिलता है जबरदस्त रेस्पॉन्स क्राइम थ्रिलर और रियल लाइफ केस पर आधारित कंटेट को ओटीटी पर लगातार जबरदस्त रेस्पॉन्स मिल रहा है। यही वजह है कि सुंदर पूनम को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। चूंकि अब इसका फर्स्ट लुक सामने आ चुका है, तो सोशल मीडिया पर लोग इसकी रिलीज डेट और स्टारकास्ट के साथ ही ट्रेलर को लेकर भी सवाल करते नजर आ रहे हैं। कब रिलीज होगी फिल्म? हालांकि डायरेक्टर ने अभी सिर्फ इस कहानी की झलक ही शेयर की है। फिल्म (Raja Raghuvanshi Case) कब रिलीज होगी, ओटीटी पर आएगी या डायरेक्ट थियेटर में इस पर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है। लेकिन इतना तय है कि फिल्म आने वाले समय की सबसे चर्चित क्राइम थ्रिलर प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकती है। सुंदर पूनम स्टार कास्ट में सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में सुंदर पूनम फिल्म के स्टार कास्ट की बात करें तो दमदार अभिनय के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा मुख्य भूमिका में नजर आ रही हैं। उनके साथ अभिनेता आदित्य रावल और विक्रम मल्होत्रा भी फिल्म में अहम भूमिका निभाते फिल्म में नजर आएंगे। बता दें कि डायरेक्टर पुलकित को ट्रू या रियल लाइफ स्टोरी बेस्ड और सेंसिटिव आपराधिक मामलों को पर्दे पर बारीकी और गहराई के साथ उतारने के लिए जाना जाता है। ऐसे में क्राइम थ्रिलर जॉनर के शौकीनों के लिए यह फिल्म (Raja Raghuvanshi Case) बेहद खास होने वाली है। हनीमून इन शिलॉन्ग भी रही थी चर्चा में बता दें कि इससे पहले भी एक फिल्म हनीमून इन शिलॉन्ग (Raja Raghuvanshi Case) बनाए जाने की खबरें भी सामने आ चुकी हैं। बताया गया था कि राजा रघुवंशी के परिवार ने इस प्रोजेक्ट को सहमति भी दी थी। बता दें कि तब राजा रघुवंशी के बड़े भाई सचिन का बयान भी सामने आया था, उन्होंने कहा था कि हमने हत्या के इस मामले पर बनने वाली आगामी फिल्म के लिए अपनी सहमति दे दी है। हमारा मानना ​​है कि अगर हम अपने भाई की हत्या की कहानी बड़े पर्दे पर नहीं लाते, तो लोगों को यह पता नहीं चल पाएगा कि कौन सही था और कौन गलत? इसके बाद सामने यह भी आया था कि फिल्म के ज्यादातर हिस्से की शूटिंग इंदौर और मेघालय में की गई थी। हालांकि अब इस बारे में कोई अपडेट नहीं है। अब लोगों को सुंदर पूनम का इंतजार अब चर्चा सुंदर पूनम को लेकर है। Amazon Prime Video पर इसका (Sundar Poonam)फर्स्ट लुक जारी किया गया है।लोगों को इस फिल्म की आधिकारिक घोषणा, रिलीज डेट और ट्रेलर का बेसब्री से इंतजार है। लेकिन इतना तय है कि फिल्म बड़े पर्दे पर भी चर्चा का विषय बनेगी।

हाईरिस्क प्रेग्नेंसी के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई टेंशन, शुगर और समयपूर्व प्रसव के केस भी बढ़े

भोपाल भोपाल में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राजधानी के सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों से यह तथ्य सामने आया है। डॉक्टरों के मुताबिक हाल ये है कि पहले जहां कुल गर्भवतियों में 20 से 25 प्रतिशत मामले हाई रिस्क श्रेणी में आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत तक पहुंच गया है। गंभीर एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और समय पर जांच नहीं होने से मां और नवजात दोनों की जान पर खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कम उम्र में गर्भधारण से मुश्किलें बढ़ रहीं हैं। एनीमिया इसकी सबसे बड़ी वजह है। विशेषज्ञों के अनुसार कोविड के बाद हाई रिस्क प्रेग्नेंसी मामलों में तेजी आई है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हर महीने करीब 3 हजार प्रसव हो रहे हैं, जिनमें 900 से 1200 महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में पाई जा रही हैं। इनमें गंभीर एनीमिया, हाई बीपी, शुगर, समय से पहले प्रसव और कम उम्र में गर्भधारण जैसे मामले प्रमुख हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही भोपाल के अस्पतालों में सीहोर, रायसेन, विदिशा, राजगढ़ और नर्मदापुरम सहित कई जिलों से गंभीर गर्भवतियों को रेफर किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, पोषण और नियमित इलाज नहीं मिलने से महिलाएं गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के अधिकांश मामलों को गंभीर होने से रोका जा सकता है। यदि गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में नियमित जांच, आयरन-फोलिक एसिड सेवन और हाई बीपी-शुगर की मॉनिटरिंग हो तो इसकी आशंका कम हो जाती है। प्रदेश में एनीमिया सबसे बड़ी वजह राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार मध्यप्रदेश में 52 प्रतिशत से ज्यादा गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीडि़त हैं। वहीं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 54 प्रतिशत से अधिक महिलाओं में खून की कमी दर्ज की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि यही स्थिति हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का सबसे बड़ा कारण बन रही है। बता दें कि राजधानी भोपाल के सरकारी अस्पतालों में आने वाली लगभग हर दूसरी गर्भवती महिला में हीमोग्लोबिन सामान्य से कम पाया जा रहा है। कई मामलों में यह स्तर 7 ग्राम से नीचे पहुंच जाता है। प्रमुख बिंदु भोपाल में बढ़े हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस हर तीसरी गर्भवती जटिल श्रेणी में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केस में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी शुगर के कारण बढ़ी मुश्किलें समय से पहले प्रसव भी अहम वजह कम उम्र में गर्भधारण मुख्य कारण एनीमिया सबसे बड़ी वजह

UP की अर्थव्यवस्था पर मंत्री जयवीर सिंह का बड़ा दावा, बोले- GDP ग्रोथ 11% से ऊपर

सूरज की रोशनी से बदली जिंदगी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना बनी सोनसाय बाकड़े के लिए राहत और बचत का माध्यम 4-5 हजार रुपए का मासिक बिजली बिल घटकर 120 से 500 रुपए तक पहुंचा, केंद्र एवं राज्य सरकार से मिली 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी रायपुर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना ग्रामीण परिवारों तथा आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण बीजापुर जिले के मांझीगुड़ा निवासी सोनसाय बाकड़े हैं, जिनके जीवन में इस योजना ने नई रोशनी और आर्थिक राहत लेकर आई है। कभी हर महीने भारी-भरकम बिजली बिल की चिंता से परेशान रहने वाले बाकड़े आज सौर ऊर्जा के माध्यम से न केवल बिजली खर्च में बड़ी बचत कर रहे हैं, बल्कि निर्बाध बिजली सुविधा का लाभ भी उठा रहे हैं। सोनसाय बाकड़े बताते हैं कि पहले उनके घर का बिजली बिल प्रतिमाह लगभग 4 से 5 हजार रुपए तक पहुंच जाता था। बढ़ते बिजली खर्च के कारण परिवार का मासिक बजट प्रभावित होता था और कई बार बिजली बिल जमा करना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता था। लगातार बढ़ते खर्च के बीच उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना की जानकारी मिली। योजना के लाभ और सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के बारे में जानने के बाद उन्होंने अपने घर में सोलर पैनल लगाने का निर्णय लिया। योजना के तहत बाकड़े को केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से कुल 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई। इस सहायता से उनके घर में सोलर पैनल स्थापित किए गए। लगभग तीन माह पूर्व लगाए गए इन सोलर पैनलों से अब उनके घर में नियमित और पर्याप्त बिजली की आपूर्ति हो रही है। सबसे बड़ी राहत यह रही कि जहां पहले हर महीने हजारों रुपए का बिजली बिल आता था, वहीं अब यह घटकर केवल 120 रुपए से 500 रुपए तक सीमित हो गया है। इससे परिवार को आर्थिक रूप से काफी सहारा मिला है। अब घरेलू जरूरतों के लिए बिजली उपयोग करते समय अतिरिक्त खर्च की चिंता नहीं रहती। बाकड़े का कहना है कि सौर ऊर्जा अपनाने से न केवल आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति जैसी समस्याओं से भी काफी हद तक छुटकारा मिला है। अब उनका परिवार पंखा, टीवी, मोटर और अन्य घरेलू उपकरणों का उपयोग बिना किसी परेशानी के कर पा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त योजना को आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण परिवारों के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए जिलेवासियों से अधिक से अधिक संख्या में इस योजना का लाभ लेने की अपील की। उनका मानना है कि यह योजना सिर्फ बिजली बिल कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सोनसाय बाकड़े ने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह पहल आम लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई ऊर्जा भर रही है।

जनभागीदारी का नया अध्याय शुरू, ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान आज से आरंभ

आज से आरंभ हुआ जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले अभियान जनजातीय वर्ग के लिए 25 सेवाओं के “लाभार्थी संतृप्ति” शिविर होंगे आयोजित भोपाल  जनजातीय वर्ग के लिए शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार तथा योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 18 से 25 मई तक राष्ट्रव्यापी सूचना, शिक्षा एवं संचार अभियान “जन भागीदारी – सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान संचालित किया जा रहा है। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने विभाग के सभी मैदानी अधिकारियों को सफलतापूर्वक शिविर लगाने एवं लक्षित समूह को लाभ पहुँचाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त सह संचालक जनजातीय क्षेत्रीय विकास योजना डॉ. सतेन्द्र सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान जनजातीय समुदाय के हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों की सभी जनपद पंचायतों के चयनित ग्रामों में लाभार्थी संतृप्ति शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें योजनाओं से लाभान्वित भी किया जाएगा। अभियान के तहत आयोजित शिविरों में 18 विभागों की कुल 25 सेवाओं का लाभ जनजातीय वर्ग के ग्रामीणों को उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र हितग्राही अनुसार शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। अभियान को सफल बनाने के लिये जिले के कलेक्टर्स को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। शिविरों के आयोजन के लिये अपर संचालक श्रीमती रीता सिंह को राज्‍य स्‍तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। जबकि जिला स्‍तर पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्‍त/जिला संयोजक जनजातीय कार्य विभाग को नोडल अधिकारी बनाया गया है। मध्‍यप्रदेश में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष अभियान के तहत कुल 267 विकासखंडों के 11 हजार 377 ग्राम लाभान्वित होंगे। वहीं पीएम जनमन योजना के तहत कुल 122 विकासखंडों के 5 हजार 113 ग्राम लाभान्वित होंगे।