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करोड़ों की डिमांड और ब्लैकमेलिंग का खेल, भोपाल से पकड़ी गई ‘हनी गर्ल’ श्वेता की कहानी

 भोपाल

रात करीब सवा ग्यारह बजे का वक्त. इंदौर का सुपर कॉरिडोर, जहां आमतौर पर देर रात गाड़ियों की रफ्तार और सुनसान सड़कें ही दिखाई देती हैं. एक कारोबारी अपनी कार रोककर फोन पर बात कर रहा था. तभी पीछे से एक दूसरी कार आकर रुकती है. कुछ लोग उतरते हैं. पहले बात होती है, फिर आवाज ऊंची होती है, और अगले ही पल कथित तौर पर मारपीट शुरू हो जाती है. इसके बाद जो कहा गया, वही इस पूरी कहानी का सबसे सनसनीखेज हिस्सा बन गया- 'हमारे साथ पार्टनर बनो… नहीं तो एक करोड़ रुपये दो। 

इस कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब पुलिस ने जांच करते-करते भोपाल से एक महिला को हिरासत में लिया, जिसका नाम है श्वेता जैन… वही श्वेता, जिसका नाम मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप केस में पहले भी सामने आ चुका है. पूरा मामला हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत से शुरू हुआ. हितेंद्र इंदौर में प्रॉपर्टी डीलिंग और शराब कारोबार से जुड़े हैं। 

पीड़ित हितेंद्र ने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले उनकी मुलाकात अलका दीक्षित नाम की महिला से हुई थी. इसी पहचान के जरिए उनकी मुलाकात लाखन चौधरी नाम के व्यक्ति से कराई गई. लाखन ने खुद को इंदौर, देवास, धार और आसपास के इलाकों में प्रभावशाली बताते हुए रियल एस्टेट कारोबार में पार्टनर बनने का प्रपोजल दिया। 

शुरुआत में यह सामान्य बिजनेस ऑफर लगा. कहा गया कि साथ मिलकर काम करेंगे तो बड़ा फायदा होगा. लेकिन शिकायत के मुताबिक, जब हितेंद्र ने इसमें रुचि नहीं दिखाई, तो कथित तौर पर दबाव बढ़ने लगा. उनसे कहा गया कि उन्हें अलका दीक्षित के साथ 50 फीसदी हिस्सेदारी का एग्रीमेंट करना होगा. हितेंद्र ने इनकार कर दिया. यहीं से कहानी का टोन बदल गया। 

28 अप्रैल की रात, इंदौर में हितेंद्र अपनी कार से सुपर कॉरिडोर से लवकुश चौराहे की तरफ जा रहे थे. फोन पर बात करने के लिए उन्होंने कार सर्विस रोड पर रोक दी. तभी पीछे से एक दूसरी कार आकर रुकी. शिकायत में कहा गया कि उस कार से अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और कुछ अन्य लोग उतरे. आते ही धक्का-मुक्की शुरू हुई. फिर कथित तौर पर धमकी दी गई- या तो साझेदारी करो, या एक करोड़ रुपये दो। 

पीड़ित का आरोप है कि बात सिर्फ पैसों की मांग तक नहीं रुकी. आरोपियों ने कहा कि उनके परिवार की पूरी जानकारी उनके पास है. अगर पैसे नहीं दिए, तो परिवार को खत्म कर दिया जाएगा. फोटो और वीडियो वायरल कर बदनाम करने की भी धमकी दी गई। 

यहीं से पुलिस की एंट्री होती है. शिकायत के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज किया. कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ. फिर जांच का दायरा बढ़ा. कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, आर्थिक लेनदेन और सोशल मीडिया कनेक्शन खंगाले जाने लगे. इसी दौरान एक नाम सामने आया- श्वेता जैन। 

श्वेता स्वप्निल जैन मध्य प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल रही है. वर्ष 2019 में सामने आए इस हाई-प्रोफाइल मामले में नेताओं, अफसरों और कारोबारियों को कथित रूप से वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोप लगे थे. श्वेता का नाम उस समय सबसे ज्यादा चर्चा में आया था. पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था और लंबे समय तक मामला सुर्खियों में रहा था. बाद में मानव तस्करी जैसे कुछ मामलों में कोर्ट से राहत भी मिली थी. श्वेता मूल रूप से मध्य प्रदेश से जुड़ी है। 

अब कई साल बाद वही नाम फिर सामने आया है. इस बार आरोप सीधे तौर पर एक कारोबारी से रंगदारी और कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़े हैं. इंदौर पुलिस की टीम ने भोपाल के मिनाल इलाके में दबिश देकर श्वेता को हिरासत में लिया. फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है. पुलिस को शक है कि यह मामला सिर्फ कुछ लोगों की रंगदारी तक सीमित नहीं, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है। 

इस केस में एक दिलचस्प पैटर्न भी सामने आता है. शुरुआत एक जान-पहचान से होती है. फिर बिजनेस पार्टनरशिप का ऑफर. उसके बाद दबाव. फिर धमकी. और आखिर में कथित तौर पर फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेल का डर. पुलिस इसे सामान्य मारपीट या वसूली का मामला नहीं मान रही। 

थाना अयोध्या नगर थाना प्रभारी महेश लिल्हारे का कहना है कि इंदौर पुलिस की टीम ने भोपाल पहुंचकर मिनाल इलाके से श्वेता जैन को हिरासत में लिया. पुलिस अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका रही. क्राइम ब्रांच का मानना है कि मामले में कई और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है. पुलिस मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया कनेक्शन और आर्थिक लेनदेन की जांच कर रही है। 

 

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