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मैनिट के वैज्ञानिकों का कमाल, चार पैरों वाला क्वाड्रेट रोबोट और एडवांस ड्रोन तैयार

भोपाल भोपाल: राजधानी का मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानि मैनिट अब सिर्फ इंजीनियरिंग केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य की रोबोटिक क्रांति की प्रयोगशाला बनता जा रहा है. यहां ऐसे स्मार्ट रोबोट और एडवांस ड्रोन तैयार किए जा रहे हैं, जो खदानों, सीवर लाइन, जहरीली गैस वाले इलाकों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के मिशन में इंसानों की जगह काम करेंगे. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस ये मशीनें उन जगहों पर भेजी जाएंगी, जहां हर कदम पर जान का खतरा होता है।  मैनिट में भविष्य की रोबोटिक टेक्नोलॉजी मैनिट स्थित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर और आईओटी एंड रोबोटिक्स लैब में कई हाईटेक प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है. यहां वैज्ञानिक और रिसर्चर्स ह्यूमनॉइड रोबोट, क्वाड्रेट रोबोट और एडवांस सर्विलांस ड्रोन विकसित कर रहे हैं. इन मशीनों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि वे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और रिस्क एरिया में बिना मानवीय हस्तक्षेप के काम कर सकें. यह तकनीक आने वाले समय में औद्योगिक सुरक्षा और सामरिक मिशनों में बड़ा बदलाव ला सकती है।  जहां इंसान नहीं पहुंच सकते, वहां जाएंगे ये रोबोट खदानों, केमिकल इंडस्ट्री और गैस रिस्क एरिया में अक्सर जहरीली गैसों के रिसाव या आक्सीजन की कमी के कारण बड़े हादसे होते हैं. ऐसे हालात में इंसानों को भेजना बेहद खतरनाक साबित होता है. मैनिट में तैयार किए जा रहे रोबोट्स को खासतौर पर ऐसे ही क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया जा रहा है. ये मशीनें खतरनाक जगहों पर जाकर डेटा जुटाएंगी, गैस लेवल की जांच करेंगी और रियल टाइम मॉनिटरिंग करेंगी. इससे रेस्क्यू ऑपरेशन ज्यादा सुरक्षित और तेज हो सकेंगे।  चार पैरों वाले क्वाड्रेट रोबोट होंगे खास आकर्षण मैनिट की लैब में विकसित किए जा रहे क्वाड्रेट रोबोट सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. चार पैरों पर चलने वाले ये रोबोट ऊबड़-खाबड़ रास्तों, पहाड़ी इलाकों और संकरी सुरंगों में आसानी से मूव कर सकते हैं. इनकी डिजाइनिंग ऐसी की जा रही है कि वे इंसानों की तरह संतुलन बनाए रखते हुए कठिन परिस्थितियों में भी लगातार काम कर सकें. भविष्य में इनका उपयोग सेना, आपदा प्रबंधन और इंडस्ट्रियल सर्विलांस में किया जा सकता है।  हाई-अल्टीट्यूड मिशन के लिए बन रहे एडवांस ड्रोन मैनिट के प्रोफेसर मितुल कुमार अहिरवार ने बताया कि "रोबोटिक्स प्रोजेक्ट के साथ-साथ मैनिट में हाई-अल्टीट्यूड ड्रोन टेक्नोलॉजी पर भी रिसर्च चल रही है. ये ड्रोन पहाड़ी क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और जटिल संरचनाओं की निगरानी कर सकेंगे. खराब मौसम या जोखिम वाले क्षेत्रों में भी इनकी मदद से सटीक सर्विलांस किया जा सकेगा. आपदा प्रबंधन के दौरान यह तकनीक राहत और बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  कम लागत में तैयार होगी स्वदेशी तकनीक दरअसल, विदेशी रोबोटिक मशीनों की कीमत काफी अधिक होती है, जिससे उनका बड़े स्तर पर उपयोग मुश्किल हो जाता है. मैनिट की टीम इन रोबोट्स और ड्रोन को कम लागत में विकसित करने पर फोकस कर रही है. रिसर्च का दावा है कि कम बजट के बावजूद इनकी एक्यूरेसी और कार्यक्षमता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इससे देश में सस्ती और भरोसेमंद रोबोटिक तकनीक उपलब्ध हो सकेगी।  पेटेंट के बाद बाजार में आएंगी तकनीकें मैनिट में चल रहे कई प्रोजेक्ट अब एडवांस रिसर्च लेवल तक पहुंच चुके हैं. इन तकनीकों के लिए पेटेंट भी फाइल किए जा चुके हैं. पेटेंट प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन रोबोट्स और ड्रोन को कमर्शियल मार्केट और पब्लिक डोमेन में उतारा जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ये तकनीकें देश की सुरक्षा, इंडस्ट्रियल मानिटरिंग और रिस्की आपरेशंस का चेहरा बदल सकती हैं। 

MP के सरकारी स्कूलों में जल्द होगी गेस्ट टीचर्स की एंट्री, छुट्टियों के बाद शुरू होगा जॉइनिंग अभियान

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के बाद 16 जून से स्कूल खुलते ही रिक्त पदों पर ज्वाइनिंग दी जाएगी। इसके लिए विभाग द्वारा विषयवार खाली पदों की सूची भी जारी कर दी गई है। इसके अनुसार माध्यमिक शिक्षक वर्ग में सबसे अधिक रिक्तियां अंग्रेजी, गणित और संस्कृत विषय में सामने आई हैं। इन विषयों में नियमित शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। ऐसे में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले ही अतिथि शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने की तैयारी की जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिलेवार और विषयवार रिक्त पदों के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित स्कूलों में आवश्यकता के अनुसार अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति एक जुलाई से की जाएगी। इससे स्कूलों में पढ़ाई सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी। 70 हजार पद पर अतिथि शिक्षक पदस्थ प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में हर वर्ष बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है। इस बार भी 70 हजार पदों पर अतिथि शिक्षकों को अवसर मिलने की संभावना है। इनकी सेवाएं 30 अप्रैल को समाप्त हुई है। अब एक जुलाई से इनकी पदस्थापना की जाएगी। अतिथि शिक्षकों से आनलाइन पोर्टल पर स्कोर कार्ड जनरेट किए जा रहे हैं।

बढ़ते पेट्रोल-डीजल दामों के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे टैक्सी चालक, दिल्ली में 3 दिन चक्का जाम की चेतावनी

 नई दिल्ली ईंधन बढ़ते दामों के बीच दिल्ली के टैक्सी और ऑटो चालकों ने फेयर (किराया) बढ़ाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है. दिल्ली के कमर्शियल वाहन चालकों की विभिन्न यूनियनों ने 21 से 23 मई तक तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर अपनी मांगें रखी हैं।  समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार चालक शक्ति यूनियन के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने कहा, 'सीएनजी, पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण मिडिल क्लास के चालक अपने परिवारों का भरण-पोषण करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इसलिए दिल्ली के अन्य संगठनों के समन्वय से 'चालक शक्ति यूनियन' ने 21, 22 और 23 मई को चक्का जाम (हड़ताल) का आह्वान किया है और लोगों से इन दिनों वाहन न चलाने की अपील की है।  ड्राइवरों की प्रमुख मांग दिल्ली में टैक्सी, ऑटो और अन्य कमर्शियल वाहनों के चालक लंबे वक्त से फेयर हाइक (किराया बढ़ोतरी) की मांग कर रहे थे. ईंधन की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद यह मांग और तेज हो गई है. यूनियनों का कहना है कि टैक्सी-ऑटो किराया बढ़ाया जाए, बढ़ते ईंधन दामों को देखते हुए किराए के रेट लिस्ट की समीक्षा की जाए. साथ ही चालकों की आय में वृद्धि हो।  इस तीन दिवसीय चक्का जाम को सफल बनाने के लिए ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने प्रशासनिक स्तर पर अपनी मांगें पहुंचा दी हैं. उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र भेजकर चालकों की समस्याओं से अवगत कराया गया है. यूनियनों ने दिल्ली के सभी चालकों से अपील की है कि वे 21, 22 और 23 मई को अपने वाहन सड़क पर न उतारें। 

ग्रामीणों तक पहुंचीं शासकीय योजनाएं, शिविर में ही हुआ समस्याओं का समाधान

रायपुर सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड स्थित ग्राम पंचायत एर्राबोर में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर ग्रामीणों के लिए राहत और खुशियों का केंद्र बन गया। कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त किया। शिविर का उद्देश्य शासन की योजनाओं और सेवाओं को सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाना था। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर उपस्थित रहकर लोगों की समस्याएं सुनीं और त्वरित समाधान की प्रक्रिया शुरू की। शिविर में विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र वितरित किए गए। वहीं गर्भवती महिलाओं की गोद भराई और 6 माह के बच्चों का अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इससे कार्यक्रम में सामाजिक और मानवीय जुड़ाव का वातावरण देखने को मिला। ग्रामीणों की सुविधा के लिए शिविर में राशन कार्ड ई-केवाईसी, महतारी वंदन योजना ई-केवाईसी, नया आधार कार्ड पंजीयन एवं अपडेट, बी-1 और किसान किताब वितरण तथा एग्री स्टेक पंजीयन जैसी जरूरी सेवाएं भी मौके पर उपलब्ध कराई गईं। शिविर के दौरान विभिन्न विभागों को कुल 250 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें पंचायत विभाग के 165, कृषि विभाग के 22, विद्युत विभाग के 14 तथा राजस्व और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 11-11 आवेदन शामिल रहे। सभी आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। कार्यक्रम में स्थानीय सरपंच मती लक्ष्मी कट्टम, पूर्व सरपंच, पंचगण, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास और सहभागिता को नई मजबूती मिली है।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, उम्रदराज और कम पढ़े-लिखे होने पर नंबरदार को नहीं हटाया जा सकता

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पटियाला जिले के एक गांव में पिछले 10 वर्षों से कार्यरत 7वीं पास नंबरदार (गांव के मुखिया) की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस हर्ष बुंगर की पीठ ने स्पष्ट किया कि पंजाब भूमि राजस्व नियमों के तहत नंबरदार के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय नहीं है, इसलिए केवल कम पढ़े-लिखे होने के आधार पर किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने बदलते दौर में नंबरदार की जिम्मेदारियों को देखते हुए पंजाब सरकार से नियमों में संशोधन कर न्यूनतम योग्यता 'मैट्रिक' (10वीं) तय करने पर विचार करने का अनुरोध किया है। योग्यता और उम्र की तुलना पर कोर्ट का रुख याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि वह 12वीं पास है और वर्तमान नंबरदार से अधिक युवा व शिक्षित है, इसलिए वह इस पद के लिए बेहतर विकल्प है। इस पर जस्टिस हर्ष बुंगर ने कहा कि जब नियमों में कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित ही नहीं है, तो केवल कम शैक्षणिक योग्यता के आधार पर चुने गए उम्मीदवार को अयोग्य नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने उम्र के तर्क को भी खारिज करते हुए कहा कि आयु का महत्व केवल व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और कर्तव्यों के निर्वहन के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया है जिससे यह साबित हो कि वर्तमान नंबरदार अपनी उम्र के कारण काम करने में असमर्थ हैं। इसके अलावा, पिछले 10 वर्षों से उनकी कार्यकुशलता को लेकर कोई शिकायत भी दर्ज नहीं है। पड़ोसी राज्य हरियाणा का दिया हवाला सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि नंबरदार के कर्तव्यों को देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि उस व्यक्ति को पंजाबी, हिंदी और अंग्रेजी भाषा की बुनियादी समझ हो। उन्होंने पड़ोसी राज्य हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नंबरदार के पद के लिए न्यूनतम योग्यता 'मिडिल पास' (8वीं) तय है, जबकि पंजाब में ऐसा कोई नियम नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा  " यह अदालत इस विचार पर है कि एक नंबरदार द्वारा निभाए जाने वाले कर्तव्यों की प्रकृति को देखते हुए यह वांछनीय होगा कि ऐसे व्यक्ति के पास कम से कम मैट्रिक स्तर की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता हो।" अदालत ने इस आदेश की प्रति राज्य के वकील को भेजने का निर्देश दिया है ताकि इसे संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जा सके और पंजाब सरकार इस पद के लिए नियम पुस्तिका में बदलाव करने पर गंभीरता से विचार कर सके।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 से पहले भोपाल अलर्ट मोड पर, 40 जगहों पर बनीं आकर्षक स्वच्छता पेंटिंग्स

भोपाल भोपाल में स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए टीम अगले 2 दिन के अंदर आ सकती है। टीम के आने से पहले नगर निगम वह सभी कवायदें कर रहा है, जो उसे बेहतर अंक दिला सके। सोमवार को जोन-9 के पंजाबी बाग में एक गली में समुद्र की आकृति की उकेर दी गई। दूसरी ओर, लोगों को बेहतर फीडबैक के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। हालांकि, इस बार भोपाल को कागजों के साथ जमीन पर भी सफाई साबित करनी होगी। 85 वार्ड, 40 स्कूल और हर कोना होगा स्कैन इस बार सर्वेक्षण टीम का दायरा पहले से कहीं बड़ा है। टीम भोपाल के सभी 85 वार्डों में जाएगी और सफाई व्यवस्था का ग्राउंड लेवल पर निरीक्षण करेगी। इसके अलावा लगभग 40 स्कूलों में भी स्वच्छता की स्थिति जांची जाएगी। बच्चों के आसपास का वातावरण, कचरा प्रबंधन और जागरूकता स्तर भी रैंकिंग का हिस्सा होगा। नगर निगम ने दिए सख्त निर्देश स्वच्छ सर्वेक्षण को देखते हुए नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कचरा ट्रांसफर स्टेशनों की स्थिति सुधारने और मिश्रित कचरा संग्रहण पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। निगम प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे गीला और सूखा कचरा अलग-अलग दें, ताकि शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग मिल सके। शहर को चमकाने की कोशिश जारी  नगर निगम ने शहर को आकर्षक दिखाने के लिए कई जगहों पर पेंटिंग, 3D आर्ट और स्क्रैप से बनी कलाकृतियां लगाई हैं। लगभग 60 हजार वर्गफीट क्षेत्र को इस तरह सजाया गया है।  इसी वजह से सड़कों की सफाई, नालों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई, बैक लेन में पेंटिंग और बाजारों में टाइल्स लगाने का काम शुरू किया गया है। न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, पुराना शहर, करोंद, कोलार, बैरागढ़ जैसे बड़े बाजारों में सौंदर्यीकरण और कचरा उठाने के काम को प्राथमिकता दी जा रही है। ये बड़ी चुनौती हालांकि, जमीन पर अब भी कई जगह गंदगी, टूटे डस्टबिन, उखड़ी सड़कें और खुले नाले जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में विजिबल क्लीनलीनेस के लिए तय 1500 अंक भोपाल के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। स्वच्छता रैंकिंग कैसे तय होगी? इस बार सिस्टम पूरी तरह डेटा और ग्राउंड रियलिटी पर आधारित है। रैंकिंग ऑन-ग्राउंड असेसमेंट, सिटीजन फीडबैक, विजिबल क्लीनलीनेस (1500 अंक), ODF/ODF++ और वॉटर प्लस (1000 अंक) और गारबेज फ्री सिटी रेटिंग (1000 अंक) जैसे पैरामीटर्स पर तय होगी। बाजारों में सबसे बड़ी चुनौती  भोपाल के न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, पुराना शहर, कोलार, करोंद और बैरागढ़ जैसे बड़े बाजारों में भी सफाई एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। नियम के अनुसार रिहायशी इलाकों में रोज एक बार सफाई, बाजार और स्टेशन और फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी है, लेकिन कई जगह यह सिस्टम अभी भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। बैक लेन और गलियों पर खास फोकस शहर की बैक लेन यानी पीछे की गलियां भी इस बार स्कोरिंग का बड़ा हिस्सा हैं। यहां सफाई और रखरखाव के लिए 200 अंक तय किए गए हैं। कई जगहों पर इन गलियों में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान चल रहे हैं, लेकिन स्थायी सुधार अभी बाकी है। दीवारें साफ, लेकिन नीचे कचरा 150 अंकों वाले इस पैरामीटर में सार्वजनिक जगहों को साफ रखना जरूरी है खासतौर पर पान-गुटखे के निशान और खुले में गंदगी से मुक्त रखना। लेकिन हकीकत यह है कि कई जगह बैरिकेड्स और दीवारें खुद अनचाही गंदगी पॉइंट बन चुकी हैं। 3 करोड़ की पेंटिंग का काम  शहर में वॉल पेंटिंग, म्यूरल्स और आर्टवर्क पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके साथ गड्ढामुक्त सड़क और ग्रीनरी बढ़ाने की कोशिश भी हो रही है। शहर में कुछ जोन में सफाई पूरी हो चुकी है। भानपुर में 50 करोड़ रुपए की लागत से एसटीपी प्रोजेक्ट भी चल रहा है, जो भविष्य की दिशा तय करेगा। आदमपुर कचरा खंती- बड़ी चुनौती भोपाल के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द आदमपुर कचरा खंती है। यहां जमा पुराना कचरा (legacy waste) आज भी वैसा ही है। कचरे का पहाड़, गंदा पानी का रिसाव और बार-बार आग लगने की घटनाएं। यह सब मिलकर शहर की रैंकिंग को हर साल नीचे खींचते हैं। अंतिम दौर में इन कामों पर फोकस जानकारी के अनुसार, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में विजिबल क्लीनलीनेस यानी जमीन पर दिखने वाली सफाई पर विशेष फोकस किया है। नई गाइडलाइंस के तहत शहरों की रैंकिंग 10 मुख्य इंडिकेटर्स के आधार पर तय होगी। इसी वजह से निगम बैक लेन से लेकर नालों और कचरा पॉइंट तक सुधार कार्यों में जुटा है। सोमवार को पंजाबी बाग की बैक लेन का काम पूरा किया गया। मंगलवार को भी कई जगहों पर पेंटिंग को अंतिम रूप दिया जाएगा। ऐसे तय होगी रैंकिंग     ऑन-ग्राउंड असेसमेंट और 10,500     सिटीजन फीडबैक     विजिबल क्लीनलीनेस 1,500     ODF/ODF++/वाटर प्लस 1,000     कचरा मुक्त शहर स्टार रेटिंग 1,000 ये कारण- सर्वेक्षण और चुनौती बाजारों में कचरा बड़ी चुनौती आवासीय क्षेत्रों और पार्कों में रोज एक बार, जबकि व्यावसायिक स्थलों, बस-रेलवे स्टेशनों, पर्यटन स्थलों और स्ट्रीट फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी होगी। इस पैरामीटर के लिए सबसे ज्यादा 300 अंक हैं। कई मार्केट में अब भी कचरा और गंदगी बड़ी समस्या बनी हुई है। गंदगी पर कट सकते हैं नंबर घरों और दुकानों के पीछे की गलियों यानी बैक लेन की सफाई और रखरखाव के लिए 200 अंक तय हैं। शहर के कई इलाकों में बैक लेन में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान जारी है। बैरिकेड्स बिगाड़ रहे सफाई स्कोर सार्वजनिक स्थलों और दीवारों को पान-गुटखे के धब्बों और खुले में पेशाब के निशानों से मुक्त रखने पर 150 अंक मिलेंगे। निर्माण कार्यों के दौरान लगाए गए बैरिकेड्स पीकदान बन चुके हैं। निगम ने एजेंसियों को इन्हें साफ करने की चेतावनी दी है, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं।

क्या आने वाला है नया ऑयल क्राइसिस? तेजी से खत्म हो रहे भंडार ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

 नई दिल्ली ईरान जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से दुनिया में तेल खत्म होने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. तीन महीने पहले तक यह संभावना बेहद कम लग रही थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. होर्मुज स्ट्रेट लगभग पूरी तरह बंद रहने के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की भारी कमी का खतरा बढ़ता जा रहा है।  विश्लेषकों को अब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद नहीं है. इसके बजाय उनका कहना है कि युद्ध लंबे समय तक चल सकता है जिससे एनर्जी सप्लाई लंबे समय तक बाधित रह सकती है. उनके अनुसार, तेल आपूर्ति की तस्वीर बिल्कुल अच्छी नहीं दिख रही।  डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से 8 मई तक मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति में कुल 78.2 करोड़ बैरल की कमी आ चुकी थी और इस महीने के अंत तक यह आंकड़ा 1 अरब बैरल तक पहुंच सकता है।  दैनिक उत्पादन के हिसाब से भी हालात गंभीर हैं. सऊदी अरब रोजाना 30 लाख बैरल से ज्यादा तेल उत्पादन गंवा रहा है. इराक का तेल उत्पादन 28.8 लाख बैरल प्रतिदिन कम हो गया है, जबकि ईरान का उत्पादन 16.9 लाख बैरल प्रतिदिन घटा है. कुवैत में भी रोजाना 17.5 लाख बैरल की गिरावट दर्ज की गई है।  तेल उत्पादन घटा, दुनिया रिजर्व रखे तेल पर चल रही इतने बड़े स्तर पर तेल उत्पादन बंद होने के बाद दुनिया पहले से निकाले गए तेल के भंडार को इस्तेमाल कर रही है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) पहले कह चुकी थी कि दुनिया के तेल भंडार रिकॉर्ड स्तर पर हैं और इसी वजह से बाजार में भारी अतिरिक्त सप्लाई की संभावना थी. लेकिन यह अनुमान युद्ध शुरू होने से पहले का था. अब IEA चेतावनी दे रही है कि इस साल तेल की मांग सप्लाई से ज्यादा हो जाएगी।  'द ऑयल प्राइस' की रिपोर्ट के मुताबिक, IEA की ताजा मासिक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में रोजाना करीब 39 लाख बैरल की गिरावट आ सकती है. हालांकि, यह आंकड़ा भी मध्य पूर्व में मौजूदा वास्तविक नुकसान से काफी कम है. एजेंसी का अनुमान है कि मध्य पूर्व में आपूर्ति में 1.05 करोड़ बैरल प्रतिदिन की कमी हो चुकी है. दूसरी ओर, मांग में सिर्फ 4.2 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट आने का अनुमान है।  अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल एनर्जी सेंटर की वरिष्ठ फेलो एलेन वाल्ड ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा, 'खपत को एक सीमा तक ही कम किया जा सकता है. जब भंडार खत्म होंगे तो वे सचमुच खत्म हो जाएंगे. एक वक्त आएगा जब तेल की मांग और सप्लाई के बीच बड़ी खाई पैदा होगी और बाजार बुरी तरह हिल जाएगा. कीमतें तेजी से ऊपर जाएंगी।  सऊदी अरामको के सीईओ ने भी दी है वॉर्निंग यह चेतावनी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमीन नासिर के बयान से भी मेल खाती है. उन्होंने कहा था कि दुनिया में जमीन पर मौजूद ईंधन भंडार रिकॉर्ड गति से घट रहे हैं. उनके मुताबिक, जमीन पर मौजूद तेल भंडार इस समय बाजार के लिए 'एकमात्र सुरक्षा कवच' हैं, लेकिन अब वे भी तेजी से कम हो रहे हैं।  जमीन पर मौजूद तेल भंडार का मतलब उस तेल से होता है जो पहले ही जमीन से निकाल लिया गया है और बाद में इस्तेमाल के लिए बड़े टैंकरों, स्टोरेज फैसिलिटीज या रिजर्व में रखा गया हो. इस तेल को जरूरत की स्थिति, जैसे युद्ध, सप्लाई रुकना या कीमतें बढ़ना, में इस्तेमाल किया जाता है।  जेपी मॉर्गन के कमोडिटी विश्लेषकों ने भी चेतावनी दी है कि अगले महीने तक विकसित देशों में व्यावसायिक तेल भंडार 'ऑपरेशनल तनाव' के स्तर तक पहुंच सकते हैं. इसका मतलब है कि तेल आपूर्ति में आई कमी को संभालना और मुश्किल हो जाएगा।  तेल की कमी इतनी होगी कि होर्मुज खोलना ही होगा जेपी मॉर्गन की वैश्विक कमोडिटी रणनीति प्रमुख नताशा कानेवा ने कहा, 'हमारा निष्कर्ष है कि किसी न किसी तरह जून में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना ही होगा.' उनके अनुसार, दुनिया तेल संकट से तभी बच सकती है जब युद्ध खत्म हो. अगर ऐसा नहीं हुआ तो अगला चरण सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिफाइनिंग और अंतिम उपभोक्ता तक ईंधन पहुंचाने का संकट बन सकता है।  अमीन नासिर ने यह भी कहा कि बाजार में तेल भंडार की उपलब्धता को बढ़ा-चढ़ाकर आंका जा रहा है. उन्होंने बताया कि स्टोरेज में मौजूद सारा तेल वास्तव में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं होता. उसका बड़ा हिस्सा पाइपलाइन, न्यूनतम टैंक स्तर और अन्य परिचालन जरूरतों में फंसा रहता है. उन्होंने कहा, 'यूरोप और अमेरिका में स्टोरेज से रोजाना अधिकतम 20 लाख बैरल तेल ही निकाला जा सकता है।  केप्लर के अनुसार, फिलहाल भंडार से तेल निकासी सीमित स्तर पर है. मार्च के आखिर से अब तक जमीन पर मौजूद भंडार से करीब 6 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है. इसके बावजूद अभी करीब 3 अरब बैरल तेल स्टोरेज में मौजूद है, हालांकि उसमें से कितना वास्तव में उपलब्ध है, यह साफ नहीं है।  कमजोर होता दुनिया का सुरक्षा कवच विश्लेषकों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में आपूर्ति संकट लंबा खिंचता है तो भंडार तेजी से घटेंगे और उन्हें दोबारा भरने के लिए पर्याप्त नई सप्लाई उपलब्ध नहीं होगी. यानी युद्ध जितना लंबा चलेगा, दुनिया का सुरक्षा कवच उतना कमजोर होता जाएगा।  हालांकि, कुछ राहत की खबर भी है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, बाजार अब इस स्थिति का आदी होने लगा है. भंडार से तेल निकालने की वजह से तत्काल घबराहट कम हुई है और अब बाजार कमी को मैनेज करना सीख रहा है जिसका मतलब है कि तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।  कैपिटल इकोनॉमिक्स के कमोडिटी अर्थशास्त्री हमाद हुसैन ने कहा, 'तेल कार्गो की तत्काल खरीद की होड़ अब कम हो गई है. लेकिन हम तेजी से भंडार खाली कर रहे हैं और इसका सीधा असर कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई देगा। 

ईरान की अर्थव्यवस्था पर महाघात! महंगाई ने तोड़ी कमर, दुनिया में मची हलचल

तेहरान  अमेरिका के साथ ईरान के सीजफायर के बावजूद तनाव बरकरार है, होर्मुज को लेकर घमासान जारी है और इसके साथ ही तेल-गैस को लेकर दुनिया की टेंशन भी हाई बनी हुई है. लेकिन एक ओर जहां मिडिल ईस्ट युद्ध ने अमेरिका में तेल की कीमतों में इजाफा किया है, तो वहीं तेल पर निर्भर खुद ईरान की इकोनॉमी को भी तगड़ा झटका लगा है. वर्ल्ड ऑफ स्टेटिस्टिक्स के मुताबिक, दुनिया के सबसे ज्यादा महंगाई दर वाले देशों की लिस्ट में ईरान वेनेजुएला के बाद दूसरे नंबर पर आ गया है।  तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में भी आंकड़ों के साथ बीते कुछ दिनों में ईरान की गंभीर स्थिति को दर्शाया गया है कि युद्ध के बीच आसमान छूती महंगाई में ईरान के लोगों की खाद्य सुरक्षा पर बड़ा संकट आ गया है. अब दुनिया में महंगाई से सबसे ज्यादा त्रस्त देशों की लिस्ट में भी ईरान ऊपर चढ़ता जा रहा है।  वेनेजुएला के बाद ईरान का नंबर वर्ल्ड ऑफ स्टेटिस्टिक्स के सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर डालें, तो ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई दर वेनेजुएला में 612% है और इसके बाद अर्जेंटीना के बजाय अब ईरान का नाम शामिल है, जहां सालाना महंगाई दर 50% हो चुकी है।  बीते सप्ताह आई एक रिपोर्ट में ईरान में महंगाई की मार की तस्वीर पेश करते हुए कहा गया था कि Iran Inflation की रफ्तार हालिया कुछ समय में सबसे ज्यादा रही है और ये लगातार ईरानियों को गरीब बना रही है. तेहरान की एक निवासी के हवाले से अल जजीरा की रिपोर्ट में कहा गया कि हम अब उन कुछ चीजों को खरीदने का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं, जो कुछ महीने पहले तक खरीद सकते थे. इसके पीछे वजह है कि युद्धग्रस्त ईरान में खासतौर पर खाद्य महंगाई (Iran Food Inflation) में आए उछाल के कारण लोगों की कमाई का बड़ा हिस्सा बुनियादी जरूरत के सामनों पर खर्च हो रहा है।  इसमें आंकड़े देते हुए बताया गया था कि वनस्पति तेल की कीमतों में सबसे अधिक 350% से ज्यादा, आयातित चावल की कीमतों में 200%, ईरानी चावल की कीमतों में 175% प्रतिशत और चिकन की कीमतों में 190%  की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।  इन 10 देशों में महंगाई का कोहराम दुनिया के तमाम देशों में सालाना महंगाई दर के आंकड़ों पर नजर डालें, तो जिन देशों में महंगाई सबसे ज्यादा कोहराम मचा रही है, उनकी टॉप-10 लिस्ट में पहले नंबर पर वेनेजुएला, जबकि दूसरे नंबर पर ईरान का नाम है. वहीं अन्य देशों की बात करें, तो अर्जेंटीना (32.4%), तुर्किए (32.37%), लेबनान (17.3%), नाइजीरिया (15.69%), इजिप्ट (14.9%), पाकिस्तान (10.9%), कजाखिस्तान (10.6%) और बांग्लादेश (9.05%) शामिल हैं। 

वैश्विक तनाव का पंजाब पर असर, कच्चा माल महंगा होने से अमृतसर में ठप पड़ रही मशरूम खेती

अमृतसर  ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज में बाधा का असर अब पंजाब के मशरूम उद्योग पर भी साफ दिखने लगा है। हर वर्ष मई में शुरू होने वाली मिल्की मशरूम की खेती इस बार संकट में है। उर्वरक, कंपोस्ट और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से अधिकांश उत्पादकों ने खेती शुरू ही नहीं की। हालात यह हैं कि अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु, मानांवाला, वेरका और अजनाला जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में केवल 20 प्रतिशत किसानों ने ही इस बार मशरूम उत्पादन का जोखिम उठाया है। मशरूम उत्पादक जागीर सिंह का कहना है कि युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों, कंपोस्ट और परिवहन लागत पर पड़ा है। उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़े पिछले कुछ सप्ताह में उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। जिन किसानों को पहले एक ट्राली कंपोस्ट 12 से 15 हजार रुपये में मिल जाती थी, उन्हें अब इसके लिए 35 से 40 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। उधर, जंडियाला गुरु के मशरूम उत्पादक सरबजीत सिंह का कहना है कि मिल्की मशरूम की खेती नियंत्रित वातावरण पर निर्भर करती है। इसमें तापमान, नमी और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन डीजल और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च अत्यधिक बढ़ गया है। उस पर प्लास्टिक पैकेजिंग और परिवहन भी महंगा हो चुका है। ऐसे में छोटे उत्पादकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से मानांवाला क्षेत्र में उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई कंपनियों ने समय पर माल पहुंचाने में असमर्थता जताई है, जबकि कुछ ने सीधे दाम बढ़ा दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो आने वाले महीनों में मशरूम उत्पादन और घट सकता है। उल्लेखनीय है कि अमृतसर से उत्पादित मशरूम देश सहित विदेश में भी भेजा जाता है। अमृतसर का जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल है। यही कारण है कि अमृतसर स्थित खालसा कालेज में मशरूम उत्पादन के लिए एक वर्षीय डिप्लोमा भी शुरू किया गया है। मांग के मुकाबले उत्पादन बेहद कम रहेगा इस बार इस बार मांग के मुकाबले उत्पादन कम होगा। पंजाब में होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड कारोबार और घरों में मशरूम की मांग अधिक है। वेजीटेरियन लोगों के लिए मशरूम पहली पसंद है। खासकर मिल्की व बटन मशरूम की मांग गर्मियों में अधिक रहती है। लेकिन इस बार उत्पादन कम होने से बाजार में भारी कमी देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में मशरूम के दाम में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। पहले स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन होने से आपूर्ति सामान्य बनी रहती थी, लेकिन इस बार कई यूनिट बंद पड़े हैं। जिन किसानों ने उत्पादन शुरू भी किया है, वे सीमित मात्रा में मशरूम तैयार कर रहे हैं ताकि नुकसान का जोखिम कम रहे। मशरूम उद्योग पूरी तरह आयात आधारित कच्चे माल पर निर्भर नहीं है, लेकिन उर्वरक, रसायन और ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा असर इसकी लागत पर पड़ता है। निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को महंगे मशरूम खरीदने पड़ सकते हैं। होटल और कैटरिंग व्यवसाय में यदि आपूर्ति कम रही तो मेन्यू की लागत बढ़ाना मजबूरी बन जाएगी। वास्तविक स्थिति यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब आम लोगों की थाली तक पहुंचने लगा है। कभी सस्ती और पौष्टिक मानी जाने वाली मशरूम जल्द ही उपभोक्ता की पहुंच से दूर होने की संभावना है।  

आज दवा संकट नहीं! हड़ताल के बावजूद इन जगहों पर खुली रहेंगी मेडिकल सुविधाएं और दवा दुकानें

भोपाल  मध्य प्रदेश में आज  यानी 20 मई को दवा दुकानों की हड़ताल रहेगी। भोपाल में 3 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में यह बंद बुलाया है। भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि जिले के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायी इस बंद का समर्थन करेंगे और 20 मई को अपनी दुकानें बंद रखेंगे। एसोसिएशन का कहना है कि यह मुद्दा सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। घर-घर पहुंच रही ऑनलाइन दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर अभी स्पष्ट सिस्टम नहीं है, जो गंभीर चिंता का विषय है। अस्पतालों के मेडिकल बंद से मुक्त एसोसिएशन के अध्यक्ष धाकड़ ने बताया कि ऑनलाइन दवा व्यापार की आड़ में नकली, एक्सपायरी एवं गलत दवाओं के वितरण की संभावनाएं बढ़ रही हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने भोपाल की जनता से इस बंद के कारण होने वाली असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है तथा नागरिकों से अपील की है कि वे 20 मई से पूर्व ही अपनी नियमित उपयोग की आवश्यक दवाओं का संग्रह कर लें। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को इस बंद से मुक्त रखा गया है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट व ड्रगिस्ट और मध्य प्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर सभी प्राइवेट मेडिकल दुकानें  आज बंद रहेंगी । हड़ताल की वजह से मरीजों को जरूरी दवाइयों के लिए परेशान होना पड़ सकता है, ऐसे में एक दिन पहले पर्याप्त डोज लेकर रख सकते हैं। दवा बाजार की हड़ताल में यहां मिलेगी दवाइयां इस हड़ताल में इमरजेंसी के लिए प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों की मेडिकल खुली रहेंगी। प्रदेशभर में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर भी दवाइयां मिलेंगी। जयारोग्य अस्पताल, जिला अस्पताल, प्राइवेट अस्पतालों की मेडिकल दुकानों को हड़ताल से दूर रखा गया है। देशभर में ऑनलाइन और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर दवा बिक्री के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने 20 मई को देशव्यापी बंद का ऐलान किया है। संगठन का दावा है कि इस दौरान दिल्ली में करीब 15 हजार और देशभर में लगभग 7 से 8 लाख मेडिकल स्टोर बंद रह सकते हैं। हालांकि, आपातकालीन दवा सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है। कारोबार हो रहा प्रभावित केंद्रीय औषधि मानक संगठन नियंत्रण (CDSCO) के सूत्रों का कहना है कि कई राज्य स्तरीय रिटेल फार्मेसी एसोसिएशनों ने इस हड़ताल से दूरी बना ली है और दवाओं की उपलब्धता सामान्य बनाए रखने का भरोसा दिया है। दिल्ली रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट अलायंस (RDCA) के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट और तेज डिलीवरी देकर छोटे मेडिकल स्टोर्स के कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं। दवा दुकानों की हड़ताल से कौन-कौन बाहर? हालांकि, सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि इस हड़ताल का असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि कई राज्य स्तरीय फार्मेसी एसोसिएशनों ने इसका समर्थन नहीं किया है. सूत्रों के मुताबिक, सभी बड़े फार्मेसी चेन, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और AMRIT फार्मेसी स्टोर मंगलवार को खुले रहेंगे।  सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, केरल, छत्तीसगढ़, सिक्किम और लद्दाख समेत कई राज्यों के फार्मेसी संगठनों ने लिखित रूप से भरोसा दिया है कि वे हड़ताल में शामिल नहीं होंगे और दवाओं की सप्लाई सामान्य बनी रहेगी।  ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर बिक रही नकली दवाएं कोरोना काल में अधिसूचना जीआरएस 220 ई के जरिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा है, जिसे तुरंत वापस ली जाए। अवैध रूप से ई-कॉर्पोरेट्स द्वारा बाजार में कब्जा किया जा रहा है। यह मूल्य निर्धारण में मनमानी कर रहे हैं, जिसे रोका जाना चाहिए। ऑनलाइन फार्मेसियों और प्लेटफार्मों पर मिलावटी या नकली दवाएं बेची जा रही हैं। इन्होंने हड़ताल से बनाई दूरी कई केमिस्ट असोसिएशन की ओर से 20 मई को प्रस्तावित भारत बंद और हड़ताल को लेकर दवा कारोबारियों के संगठन ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन (AICDF) ने खुद को इससे अलग कर लिया है। संगठन ने कहा कि इस बंद का समर्थन नहीं करेंगे। दावा है कि इससे अव्यवस्था बढ़ेगी और व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। AICDF के अध्यक्ष कैलाश गुप्ता ने बताया कि बंद बुलाने वाले ने संगठनों का उद्देश्य व्यापारियों के हितों की रक्षा से ज्यादा बाजार में दबाव बनाना प्रतीत होता है।