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प्रिंसिपल अनिल कुमार को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न’ पुरस्कार, चंडीगढ़ का बढ़ाया गौरव

चंडीगढ़. सेक्टर-31 स्थित राजकीय बौद्धिक दिव्यांग पुनर्वास संस्थान (जीआरआईआईडी) के प्रिंसिपल अनिल कुमार को विशेष शिक्षा और बौद्धिक दिव्यांगजनों के पुनर्वास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली स्थित इंडियन सोसाइटी ऑफ इंटरनेशनल लॉ, सुप्रीम कोर्ट कॉम्प्लेक्स में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। अंतरराष्ट्रीय समरसता मंच की ओर से आयोजित इस समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, गणमान्य व्यक्तियों और सहभागी देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। समारोह में शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया। इस दौरान विभिन्न राज्यों के कुल 51 शिक्षकों को ‘वैश्विक शिक्षक रत्न पुरस्कार’ और ‘शिक्षक गौरव पुरस्कार’ प्रदान किए गए। जीआरआईआईडी में बौद्धिक दिव्यांगजनों के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जाता है। ऐसे में संस्थान के प्रधानाचार्य को मिला यह सम्मान चंडीगढ़ के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

यूपी में शिक्षक भर्ती का बड़ा मौका, 15,000 से अधिक पदों पर जल्द होगी नियुक्ति

प्रयागराज  नौकरी के इंतजार में बैठे अभ्यर्थियों को लिए राहत भरी खबर है। यूपी में जल्द ही शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 15,000 से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती की घोषणा की है। आयोग ने मंगलवार शाम भर्ती से जुड़े दो विज्ञापन जारी किए। इसके साथ ही सहायक अध्यापक और प्रवक्ता (पीजीटी) के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सहायक अध्यापक भर्ती के तहत कुल 12,405 पदों पर ऑनलाइन भर्ती की जाएगी। इसमें माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (अशासकीय सहायता प्राप्त) के 897 पद और जहां बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (शहरी) के 11,508 पद शामिल हैं। वहीं, प्रवक्ता संवर्ग भर्ती के तहत प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 2,607 रिक्त पदों पर विज्ञापन जारी किया गया है। तीन और चार दिसंबर को होगी परीक्षा सहायक अध्यापक भर्ती भी ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन बुधवार से शुरू हो जायेंगे। वहीं शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर रहेगी और आवेदन में संशोधन करने की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर तक रहेगी और परीक्षा तिथि तीन और चार दिसंबर होंगी और पीजीटी की ऑनलाइन पंजीकरण 18 सितंबर से शुरू होगा और शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर रहेगी। आवेदन में संशोधन 21 अक्टूबर तक किया जाएगा और परीक्षा तिथि: 15 और 16 दिसंबर रहेगी। अभ्यर्थियों के लिए आरटीआर व्यवस्था लागू आयोग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन करने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन (आटीआर) व्यवस्था लागू की गई है। यह प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। विस्तृत विज्ञापन और निर्देश पुस्तिका के लिए अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा की इस भर्ती में प्रदेश के शिक्षामित्रों को कोई वेटेज या वरीयता का जिक्र नहीं है। जबकि, 25 जुलाई 2017 को उच्चतम न्यायालय के निर्णय में शिक्षामित्रों को समान्य शिक्षक भर्तियों में वरीयता देने के निर्देश हैं। राज्य सरकार को विचार करते हुए 26 सालों से सेवा दे रहे शिक्षामित्रों को इस भर्ती में वेटेज देना चाहिए।

UP में शिक्षक भर्ती का बड़ा मौका, 15,012 पदों पर निकली वैकेंसी

योगी सरकार में शिक्षक बनने का सुनहरा मौका, यूपी में 15,012 पदों पर भर्ती शुरू माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक से लेकर पीजीटी तक के पदों पर विज्ञापन जारी 897 सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी, 11,508 सहायक अध्यापक शहरी और 2,607 प्रवक्ता पदों पर होगी भर्ती लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती का बड़ा अवसर उपलब्ध कराया है। आयोग ने सहायक अध्यापक और प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के कुल 15,012 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए दो महत्वपूर्ण विज्ञापन जारी किए हैं। इससे प्रदेश के हजारों शिक्षित युवाओं को शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि आयोग द्वारा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी के 897 रिक्त पदों तथा बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक, शहरी के 11,508 रिक्त पदों का विज्ञापन जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त माध्यमिक शिक्षा विभाग के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 रिक्त पदों के लिए भी विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। 15,012 पदों के लिए दो विज्ञापन, आवेदन प्रक्रिया अलग-अलग आयोग द्वारा जारी विज्ञापन के अंतर्गत सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी और सहायक अध्यापक, शहरी के पदों पर भर्ती की जाएगी। इन दोनों श्रेणियों में कुल 12,405 पद शामिल हैं। वहीं विज्ञापन संख्या-06/2026 के तहत प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 पदों पर भर्ती होगी। इस प्रकार दोनों विज्ञापनों के माध्यम से कुल 15,012 रिक्त पदों को भरा जाएगा। 12,405 सहायक अध्यापक पदों के लिए 16 सितंबर से आवेदन सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी एवं सहायक अध्यापक, शहरी के पदों के लिए विज्ञापन के तहत 15 सितंबर, 2026 को विज्ञापन जारी किया गया है। ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन की प्रक्रिया 16 सितंबर, 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर, 2026 होगी। इन पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 3 एवं 4 दिसंबर, 2026 को प्रस्तावित है। भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 897 सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी तथा बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 11,508 सहायक अध्यापक शहरी के पदों पर चयन किया जाएगा। पीजीटी के 2,607 पदों के लिए 18 सितंबर से आवेदन अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 रिक्त पदों के लिए आयोग ने विज्ञापन जारी किया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन प्रक्रिया 18 सितंबर, 2026 से प्रारम्भ होगी। पीजीटी भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 21 अक्टूबर, 2026 होगी। प्रवक्ता संवर्ग के पदों के लिए परीक्षा 15 एवं 16 दिसंबर, 2026 को आयोजित की जाएगी। वन टाइम रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए आयोग ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) व्यवस्था लागू की है। संबंधित पदों के लिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को ओटीआर प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी। इसके बाद ही वे विज्ञापित पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आयोग की ओर से अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय से पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें। विस्तृत विज्ञापन पढ़कर ही करें आवेदन आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने अभ्यर्थियों से अपील की कि आवेदन करने से पूर्व आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध विस्तृत विज्ञापन एवं निर्देश पुस्तिका का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर अपनी पात्रता सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा विज्ञापित पदों की अर्हता एवं पात्रता के संबंध में अलग से कोई परामर्श नहीं दिया जाएगा। अभ्यर्थी भर्ती से संबंधित विस्तृत विज्ञापन, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, परीक्षा कार्यक्रम एवं अन्य आवश्यक निर्देशों के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in का अवलोकन कर सकते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त डॉ. अर्चना शुक्ला ने बदली पढ़ाई की तस्वीर, कबाड़ से तैयार किए विज्ञान-गणित के मॉडल

भोपाल  पढ़ाई के लिए हमेशा महंगे मॉडल और नई सामग्री की जरूरत नहीं होती। जरूरत है तो सिर्फ नजरिए की। भोपाल के महात्मा गांधी हायर सेकेंडरी संदीपनी स्कूल की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने स्कूल में पड़े कबाड़ को ही बच्चों की पढ़ाई का जरिया बना दिया। कहीं टूटी फॉल्स सीलिंग की टाइल्स विज्ञान के मॉडल में बदल गईं तो कहीं पुराने टायर और खाली पड़ी बेंच से गणित का ऐसा मॉडल तैयार हुआ, जो बच्चों के लिए पढ़ाई से ज्यादा खेल बन गया। डॉ. अर्चना शुक्ला को 2026 का राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान भी दिया गया है। उनका मानना है कि जब विद्यार्थी किसी चीज को सिर्फ पढ़ता नहीं, बल्कि उसे बनाता, छूता, रंगता और उसके साथ प्रयोग करता है, तो सीखना उसके लिए बोझ नहीं रहता। टूटी टाइल्स फेंकी नहीं, विज्ञान की प्रयोगशाला बना दी बारिश के दौरान एक खाली कक्षा की फॉल्स सीलिंग की टाइल्स टूट गई थीं। ये टाइल्स कबाड़ में रखी थीं। डॉ. अर्चना ने इन्हें फेंकने के बजाय बच्चों की रचनात्मकता से जोड़ दिया। हल्की और बोर्ड जैसी इन टाइल्स पर विद्यार्थियों ने रंगों के जरिए विज्ञान से जुड़े चित्र और मॉडल तैयार किए। इसका मकसद सिर्फ कबाड़ का इस्तेमाल करना नहीं था। बच्चों को परीक्षा में कॉपी पर बनाए जाने वाले चित्रों को रटने के बजाय उन्हें रंगों और रचनात्मक तरीके से तैयार करने का मौका दिया गया। इससे एक तरफ बेकार सामान का इस्तेमाल हुआ और दूसरी तरफ बच्चों की कल्पनाशक्ति भी पढ़ाई से जुड़ गई। मिट्टी और रंगों से विज्ञान, याद करने का तरीका बदला डॉ. अर्चना के अनुसार, जब बच्चा क्ले या मिट्टी से किसी वैज्ञानिक संरचना को खुद बनाता है, तो वह सिर्फ उसे देखता नहीं है। उसे छूता है, आकार देता है, रंग चुनता है और अलग-अलग हिस्सों को समझता है। यानी सीखने में कई तरह की संवेदी गतिविधियां एक साथ जुड़ती हैं। यही वजह है कि विज्ञान जैसे विषय को भी कला से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कला समेकित शिक्षा पर जोर दिए जाने के साथ स्कूल में इस तरीके को प्रयोग के रूप में अपनाया गया है। पुराने टायर और बेंच से बना 'गणित का खेल सबसे दिलचस्प प्रयोग गणित को लेकर किया गया। स्कूल में खाली पड़ी बेंच और बच्चों की ओर से लाए गए पुराने टायरों का इस्तेमाल कर ऐसा मॉडल तैयार किया गया, जिसमें जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसे सवालों को खेल से जोड़ा गया। यह मॉडल स्कूल में बाहर रखा जाता है। सुबह बच्चे आते हैं तो उस पर गणित का सवाल लगा मिलता है। बच्चे उत्सुकता से उसे हल करते हैं और अगली बार के लिए नया सवाल लगा देते हैं। यानी जिस गणित से कई बच्चों को डर लगता है, वही अब उनके लिए रोज का खेल बन गया है। छोटी कक्षाओं की समस्या खोजकर बड़े बच्चों ने बनाया समाधान डॉ. अर्चना का तरीका सिर्फ मॉडल बनाने तक सीमित नहीं है। स्कूल में परियोजना आधारित और समस्या आधारित शिक्षण पर भी काम किया जाता है। विद्यार्थियों को कहा जाता है कि वे छोटी कक्षाओं में जाकर देखें कि वहां बच्चों को किस विषय में परेशानी आती है। जब विद्यार्थियों ने पाया कि छोटी कक्षाओं के बच्चों को गणित के सवालों में दिक्कत होती है, तो उन्होंने समस्या का समाधान खोजने की कोशिश की। नतीजा पुराने टायर, खाली बेंच और दूसरे अनुपयोगी सामान से तैयार गणित का मॉडल रहा। यानी यहां बच्चे सिर्फ यह नहीं सीख रहे कि सवाल कैसे हल करना है, बल्कि यह भी सीख रहे हैं कि किसी समस्या का समाधान कैसे खोजा जाता है। अभाव को बनाया रचनात्मकता का मौका डॉ. अर्चना शुक्ला कहती हैं कि उनका उद्देश्य यही रहता है कि विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई बोझ न बने और वे चीजों को आसानी से याद कर सकें। उनके मुताबिक स्कूल में संसाधनों की कमी को भी रचनात्मकता में बदला जा सकता है। इसी सोच का नतीजा है कि कबाड़ यहां कचरा नहीं, पढ़ाई की सामग्री है; टायर खेल का हिस्सा नहीं, गणित का मॉडल हैं और टूटी टाइल्स बेकार सामान नहीं, विज्ञान समझाने का माध्यम बन गई हैं।  

Delhi Teachers Transfer Policy: शिक्षकों के तबादले को लेकर नई नीति लाएगी सरकार, जल्द हो सकती है घोषणा

नई दिल्ली दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार 17 सितंबर से शुरू होने वाले 'सेवा पखवाड़े' के दौरान सरकारी स्कूलों के टीचर्स के नई ट्रांसफर पॉलिसी की घोषणा कर सकती है। सरकार इसके लिए एक अलग पोर्टल भी बना सकती है, जिसमें पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम को शामिल किया जा सकता है। अधिकारियों ने शुक्रवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की योजना इस प्रस्तावित पॉलिसी के जरिये सरकारी स्कूलों में टीचर्स के ट्रांसफर की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और टेक्नोलॉजी पर आधारित बनाना है। एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में टीचर्स के लिए पहले से ही ट्रांसफर पॉलिसी मौजूद है, लेकिन इसे सही ढंग से और पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि नई पॉलिसी के जरिये पूरे प्रोसेस को एक सेंट्रलाइज्ड ऑनलाइन प्लैटफॉर्म बनाकर इन खामियों को दूर किया जाएगा। टीचर्स को मिलेगी यूनिक आईडी प्रस्तावित पॉलिसी में सभी टीचर्स को एक यूनिक आईडी देने पर विचार किया जा सकता है, जिसके जरिये उनके सर्विस रिकॉर्ड, पोस्टिंग हिस्ट्री, टेन्योर और दूसरी जरूरी जानकारियां एक सेंट्रल डेटाबेस में रखी जा सकेंगी। अधिकारियों ने बताया कि टीचर अपनी जानकारी देख सकेंगे और जब ट्रांसफर विंडो खुलेगी तो पोर्टल के जरिये इस प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे। एक अधिकारी ने कहा कि अभी ट्रांसफर का ऑनलाइन प्रोसेस शिक्षा निदेशालय के पोर्टल के जरिये किया जाता है, लेकिन नई पॉलिसी को लागू करने के लिए सरकार एक अलग पोर्टल बनाया सकता है। ट्रांसफर में इन बातों का रखा जाएगा ध्यान इस प्रस्तावित पॉलिसी की एक मुख्य विशेषता पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम होने की उम्मीद है। अधिकारी ने बताया कि टीचर्स को अलग-अलग कैटेगरी में पॉइंट्स दिए जाएंगे और उनके कुल स्कोर के आधार पर और खाली जगहों के हिसाब से ट्रांसफर की प्राथमिकता तय होगी।इसमें सर्विस की अवधि, मौजूदा स्कूल में कार्यकाल और व्यक्तिगत या पारिवारिक परिस्थितियों जैसी बातों को भी ध्यान में रखा जाएगा। दिल्ली ने टीचर्स ट्रांसफर पॉलिसी बनाते समय हरियाणा के ऑनलाइन ट्रांसफर मॉडल के कुछ पहलुओं का भी ध्यान रखा है। हरियाणा में उम्र के हिसाब से पॉइंट और महिला कर्मचारियों के लिए अलग से प्रावधान शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली सरकार हरियाणा के ट्रांसफर फॉर्मूले को हूबहू अपनाने के बजाय इस सिस्टम के कुछ हिस्सों को अपना सकती है। दिल्ली का सिस्टम उन टीचर्स को अतिरिक्त वेटेज दे सकता है, जिन्होंने एक ही स्कूल में लंबा समय बिताया है। साथ ही इसमें महिला टीचर, सिंगल पेरेंट, विधवा या विधुर, दिव्यांग टीचर और गंभीर बीमारी या परिवार से जुड़ी मुश्किल स्थितियों का सामना कर रहे टीचर्स को भी ध्यान में रखा जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे जोड़ों को भी अतिरिक्त पॉइंट देने पर विचार किया जा सकता है, जिनमें पति-पत्नी दोनों सरकारी कर्मचारी हों।

Private School Teachers: समान वेतन और पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली  देश के प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों के लिए एक समान वेतन, पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ की मांग से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले पर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। आपको बता दें कि गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चार सप्ताह के भीतर में जवाब दायर करने के लिए कहा है। इस याचिका में प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट के बाद सुरक्षा के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की गई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) को भी नोटिस जारी किया। इस मामले पर अब चार सप्ताह बाद सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका ऑल-इंडिया टीचर्स फेडरेशन की नेशनल कोऑर्डिनेटर लिगीमोल जॉर्ज ने अपने वकील दीपक प्रकाश के जरिए दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि वह एक तय समय-सीमा के भीतर प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने पर विचार करे। संवैधानिक आदेश को आगे बढ़ाने का काम करते हैं शिक्षक याचिकाकर्ता का कहना है कि प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक आर्टिकल 21A के तहत संवैधानिक आदेश को आगे बढ़ाने में एक जरूरी सार्वजनिक काम करते हैं, लेकिन उनके लिए अभी भी कोई व्यापक और समान कानूनी ढांचा नहीं है। वर्तमान में राज्य के कानूनों, संस्थानों के तौर-तरीकों और नौकरी की शर्तों पर निर्भर है। यही कारण है कि एक रैंक के शिक्षकों को अलग-अलग लाभ मिल रहे हैं। मेडिकल और इंश्योरेंस की भी मांग याचिका में नेशनल प्राइवेट स्कूल टीचर्स वेलफेयर बोर्ड, रिटायरमेंट के बाद पेंशन जैसी सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, बीमा और परिवार के लिए लाभ सुनिश्चित करने के लिए एक सरकारी तंत्र बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इसकी कमी से देश भर के लाखों शिक्षक बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। बिना किसी लाभ के रिटायर हो रहे हैं शिक्षक याचिका में कहा गया है कि बड़ी संख्या में प्राइवेट स्कूलों के शिक्षक बिना पर्याप्त पेंशन लाभ, चिकित्सा सहायता, बीमा सुरक्षा, विकलांग होने पर मिलने वाली सहायता के रिटायर हो जाते हैं। इन कमियों के कारण शिक्षक बुढ़ापे और अन्य आपातकालीन स्थितियों में कठिनाई का सामना करते हैं। याचिका में प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों की स्थिति की तुलना उन नौकरीपेशा वालों से की गई है जिनके लिए खास कल्याणकारी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। जैसे कि भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों, बीड़ी श्रमिकों, सिनेमा श्रमिकों, मछुआरों, पत्रकारों, असंगठित श्रमिकों और अन्य कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी व्यवस्थाओं का जिक्र किया गया है। याचिका में अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 38, 39, 41, 42 और 43 का भी हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता ने आधिकारिक UDISE+ 2023–24 डेटा का सहारा लिया है। याचिका में कहा गया है कि भारत में लगभग 14.72 लाख स्कूल, 98 लाख से अधिक शिक्षक और लगभग 24.8 करोड़ छात्र हैं। इनमें से 37,30,047 शिक्षक मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में कार्यरत हैं।

शिक्षा में नवाचार का कमाल, पंजाब-चंडीगढ़ के 2 टीचरों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार

चंडीगढ़ शिक्षक दिवस के मौके पर देशभर के 48 चुनिंदा शिक्षकों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। इनमें पंजाब और चंडीगढ़ के दो शिक्षक भी शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई को किताबों से आगे निकला।  चंडीगढ़ के रवि जयसवाल ने स्कूल में 3D गुंबद थिएटर और मौसम केंद्र बनाकर बच्चों को अंतरिक्ष और विज्ञान का सीधा अनुभव दिया। वहीं, पटियाला के डॉ. दिनेश कुमार ने वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल तैयार कर छात्रों के मन से फिजिक्स का डर दूर किया। दोनों शिक्षकों की ये पहल अब पूरे देश के लिए मिसाल बन गई है। अब दोनों टीचरों के बारे में विस्तार से पढ़िए… स्कूल में एक 3D गुंबद थिएटर बनाया रवि जयसवाल चंडीगढ़ के मलोया कॉलोनी के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल में साइंस टीचर हैं। उन्होंने विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों को बच्चों के लिए आसान और रोचक बनाने के लिए स्कूल में एक 3D गुंबद थिएटर बनाया है। इसके लिए उन्होंने स्कूल के हॉल में टिन और थर्मोकोल जैसी बेकार चीजों का इस्तेमाल किया। इस गुंबद पर छात्रों को अंतरिक्ष और विज्ञान से जुड़े वीडियो और तस्वीरें दिखाई जाती हैं। इससे बच्चे विषयों को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय देखकर और समझकर सीखते हैं। कपूरथला की साइंस सिटी से आया आइडिया जायसवाल ने बताया कि स्कूल के स्टूडेंट्स अकसर उनसे कपूरथला की साइंस सिटी घूमने की इच्छा जताते थे। इसी से उन्हें स्कूल में ही बच्चों को ऐसा अनुभव देने का विचार आया। उन्होंने सबसे पहले अपने स्कूल में गुंबद थिएटर तैयार कराया। बाद में उनके इस प्रयोग को चंडीगढ़ के छह अलग-अलग सरकारी स्कूलों में भी शुरू किया गया। स्कूल के हॉल में टिन और थर्मोकोल की मदद से गुंबदनुमा ढांचा बनाया गया। इस पर अंतरिक्ष और दूसरे वैज्ञानिक विषयों से जुड़े वीडियो और तस्वीरें दिखाई जाती हैं। इससे स्टूडेंट्स विज्ञान के कठिन विषयों को भी आसानी से समझ पाते हैं। 20 छात्रों ने राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनियों में लिया हिस्सा जायसवाल ने मालोया स्कूल में स्टूडेंट्स के लिए एक मौसम केंद्र भी बनाया है। यहां बच्चे मौसम से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। इसके अलावा वे वर्षामापी यंत्र की मदद से बारिश की मात्रा भी मापते हैं। इस तरह स्टूडेंट विज्ञान को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उसे अपने आसपास की चीजों से जोड़कर समझते हैं। जायसवाल के स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रदर्शनियों में भी हिस्सा लिया है। उनके अनुसार करीब 20 स्टूडेंट्स ने राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल का नाम रोशन किया है। जरूरतमंद विद्यार्थियों की आर्थिक मदद भी करते हैं जायसवाल खुद चंडीगढ़ में पढ़ाई कर चुके हैं। जरूरत पड़ने पर उन्होंने अपने स्टूडेंट्स को आर्थिक मदद भी दी है, ताकि पैसे की कमी के कारण उनकी पढ़ाई न रुके। उन्होंने बताया कि उनके दो पूर्व स्टूडेंट्स इस समय पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में पीएचडी कर रहे हैं। खुद की अधूरी पढ़ाई को छात्रों के सपनों से जोड़ते हैं जायसवाल ने बताया कि उनके पढ़ाने का तरीका उनके खुद के छात्र जीवन से भी जुड़ा है। उनका मानना है कि पढ़ाई के दौरान जो अवसर उन्हें नहीं मिल सके, वे अवसर आज के स्टूडेंट्स को उपलब्ध होने चाहिए। सहकर्मी से मिली पुरस्कार की जानकारी जायसवाल ने बताया कि उन्हें अपने चयन की जानकारी एक सहकर्मी से मिली। उनके सहकर्मी ने शुक्रवार को पुरस्कार के लिए चुने गए शिक्षकों की सूची देखी थी। इसके बाद जायसवाल को ईमेल मिला, जिसमें उनके चयन की पुष्टि की गई। आधिकारिक सूची में उनका नाम चंडीगढ़ के मालोया कॉलोनी स्थित गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल के शिक्षक के रूप में शामिल है। पंजाब से अकेले शिक्षक, राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित पटियाला के सरकारी विक्टोरिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल के फिजिक्स लेक्चरर डॉ. दिनेश कुमार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए चुना गया है। वे पूरे पंजाब से इस सम्मान के लिए चयनित होने वाले एकमात्र शिक्षक हैं। करीब 25 वर्षों से शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय डॉ. कुमार पिछले 10 से अधिक वर्षों से इसी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। वर्चुअल फिजिक्स लैब और 100 से ज्यादा मॉडल डॉ. दिनेश कुमार ने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की मदद से वर्चुअल फिजिक्स लैब तैयार की है। इसके जरिए छात्र बिना महंगे लैब उपकरणों के डिजिटल माध्यम से फिजिक्स के प्रयोगों को समझ सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने रोजमर्रा की बेकार और कम लागत वाली वस्तुओं से 100 से ज्यादा जीरो-कॉस्ट मॉडल तैयार किए हैं। इनका इस्तेमाल कठिन वैज्ञानिक अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए किया जाता है। सरकारी स्कूलों की छात्राओं को सीधा फायदा वर्चुअल लैब का सबसे बड़ा फायदा उन सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को होता है, जहां पर्याप्त प्रयोगशाला उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। इंटरैक्टिव विजुअल्स और डिजिटल प्रयोगों के जरिए छात्र फिजिक्स की अवधारणाओं को आसानी से समझ पाते हैं। डॉ. कुमार का प्रयास है कि स्टूडेंट्स के मन से फिजिक्स का डर दूर हो और वे इसे प्रयोग करके सीखें। पीएचडी की, 2020 में मिला स्टेट अवॉर्ड 52 वर्षीय डॉ. दिनेश कुमार ने फिजिक्स में पीएचडी की है। उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पटियाला के सरकारी मोहिंद्रा कॉलेज और एमएससी पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से की। शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें 2020 में पंजाब सरकार के स्टेट टीचर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. कुमार स्कूल समय के बाद और छुट्टियों में जरूरतमंद छात्राओं को मुफ्त अतिरिक्त कक्षाएं और मार्गदर्शन देते हैं।

MP में शिक्षक भर्ती का बड़ा अपडेट, 18 हजार से ज्यादा पदों पर नई वैकेंसी; पुरानी भर्ती में पद नहीं बढ़ेंगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए नई भर्ती को लेकर बड़ी खबर है। स्कूल शिक्षा विभाग ने उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के 18,088 रिक्त पदों पर नई भर्ती की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग जुलाई 2027 तक रिक्तियों की गणना कर रहा है। इसके बाद नई भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा। नई भर्ती की तैयारी के बीच वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 की मौजूदा भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर भोपाल में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन लगातार 15वें दिन जारी है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी वर्तमान भर्ती में अतिरिक्त पद जोड़ने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा परिणाम आने के बाद विज्ञापित पदों की संख्या बढ़ाई या घटाई नहीं जा सकती। यानी मौजूदा भर्ती में नए पद जोड़ने के बजाय उन्हें अगली भर्ती में शामिल किया जाएगा। 18 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती, वर्ग-1 से 3 तक मौका उच्च माध्यमिक शिक्षक: 4,769 पद 3,219 बैकलॉग,1,530 नए पद माध्यमिक शिक्षक: 5,504 पद 2,504 बैकलॉग, 3,000 नए पद प्राथमिक शिक्षक: 7,815 पद, 2,315 बैकलॉग, 5,500 नए पद इन पदों के अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग के 13 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े 3,990 पद भी रोके गए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक नई भर्ती के लिए कुल 18,088 रिक्त पद चिन्हित किए गए हैं। इनमें बैकलॉग और नए रिक्त पद दोनों शामिल हैं। विभाग में 72,901 पद खाली स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों और अन्य पदों को मिलाकर बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं। विभाग में कुल 3,38,787 स्वीकृत पद हैं। इनमें 2,65,886 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 72,901 पद खाली हैं। इनमें से 59,073 पद पदोन्नति से और 13,828 पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं। विभाग का कहना है कि पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उपलब्ध होने वाले पदों पर भी भर्ती की जाएगी। पुरानी भर्ती में अब नहीं बढ़ेंगे पद पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ा झटका है। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि भर्ती का परिणाम जारी होने के बाद विज्ञापित पदों की संख्या में बदलाव नहीं किया जा सकता। इसलिए नए रिक्त पदों को वर्तमान भर्ती में जोड़ने के बजाय नई भर्ती में शामिल किया जाएगा। आरक्षित पदों पर भी विभाग ने स्थिति साफ की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पदों पर संबंधित वर्ग के अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें अनारक्षित या अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों से नहीं भरा जाएगा। ऐसे पदों को अगली भर्ती में फिर शामिल किया जाएगा। वर्तमान भर्ती में उच्च माध्यमिक शिक्षक के 3,436, माध्यमिक शिक्षक के 2,463 और प्राथमिक शिक्षक के 1,199 आरक्षित पदों पर संबंधित वर्ग के अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने की जानकारी विभाग ने दी है।  पदोन्नति अटकी, टीईटी का पेंच विभाग में बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद पदोन्नति की प्रक्रिया भी लंबित है। विभाग के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के क्रम में राय ली गई है और इसमें शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण शिक्षकों की ही पदोन्नति किए जाने की बात कही गई है। इसी वजह से पदोन्नति की कार्रवाई फिलहाल लंबित है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को अब नई भर्ती का इंतजार वर्ग-1, वर्ग-2 और वर्ग-3 की मौजूदा भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। अब विभाग के स्पष्टीकरण के बाद वर्तमान भर्ती में पद बढ़ने की उम्मीद कम हो गई है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया बंद नहीं की जा रही, बल्कि नए रिक्त पदों को अगली भर्ती में शामिल किया जाएगा। 

यूपी के शिक्षकों को बड़ी सौगात! चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा फैसला, लाखों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश के करीब 12 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और उनके आश्रितों के लिए बड़ी राहत की खबर है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को सुबह 10 बजे वाराणसी से मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ करेंगे. इस योजना के शुरू होते ही सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने लगेगी।  इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इलाज के समय शिक्षकों और उनके परिवारों को अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा. तय अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी, जिससे आर्थिक बोझ काफी कम होगा. लंबे समय से शिक्षक इस तरह की स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की मांग कर रहे थे।  इसके साथ ही प्रदेश के करीब 1.10 करोड़ परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 1,200 रुपये भी भेजे जाएंगे. यह राशि यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग, स्वेटर और अन्य जरूरी शैक्षणिक सामग्री के लिए दी जाएगी. इसके अलावा करीब 10 लाख शिक्षकों और संविदा कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के साथ सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अन्य लाभ भी दिए जाएंगे, जिससे भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और मजबूत होगी।  वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को दोपहर 2 बजे चित्रकूट और मानिकपुर में 951 करोड़ रुपये की लागत वाली 124 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे. इन परियोजनाओं के जरिए सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाया जाएगा। 

रिटायर्ड शिक्षकों को बड़ी राहत, इंदौर हाईकोर्ट ने 50 दिन की सीमा हटाई; 300 दिन के अर्जित अवकाश का दावा मजबूत

इंदौर   मध्यप्रदेश में टीचर्स के लिए अर्जित अवकाश पर इंदौर हाईकोर्ट नया फैसला आया है। हाईकोर्ट ने रिटायर्ड सहायक शिक्षकों को 300 दिन की अर्जित अवकाश (लीव एनकैशमेंट) का लाभ न देने के मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार के सिर्फ 50 दिन की लीव एनकैशमेंट देने संबंधी आदेशों को रद्द कर नए सिरे से विचार के लिए अफसरों को भेज दिया। इसी के साथ रिटायर्ड टीचर्स के लिए 300 दिन के अर्जित अवकाश का रास्ता खुल गया है। जस्टिस दीपक खोट की एकलपीठ ने 11 याचिकाओं पर ये फैसला सुनाया। खास बात यह है कि वित्त विभाग ने भी हाल ही में प्रदेश में कर्मचारी के लिए अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का लाभ देने के निर्देश जारी किए हैं। अभिभाषक अभिनव धानोतकर ने बताया, इंदौर हाईकोर्ट ने आदेश में लिखा है, अफसरों ने वित्त विभाग के 1991 और 2008 के परिपत्रों के आधार पर शिक्षकों को सिर्फ 50 दिन की लीव एनकैशमेंट का लाभ दिया, जबकि 28 जुलाई 2018 को मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम, में संशोधन व 8 मार्च 2019 के प्रपत्र पर विचार नहीं किया। कोर्ट की टिप्पणी… कोर्ट ने टिप्पणी की, विवादित आदेशों में यह भी नहीं बताया गया कि वर्ष वार अवकाश की गणना कैसे की गई और 50 दिन कैसे तय किए। इसलिए आदेश विधिसम्मत नहीं माने जा सकते। कोर्ट ने कहा, सिविल सेवा के नियमानुसार कर्मचारियों के अवकाश का पूरा रिकॉर्ड संधारित करना विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि अवकाश की गणना ही वर्ष वार उपलब्ध नहीं कराई गई, तो कर्मचारी के अधिकारों का सही निर्धारण नहीं किया जा सकता। संशोधन व 8 मार्च 2019 के नवीनतम परिपत्र पर विचार नहीं किया। कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अर्जित अवकाश के नकदीकरण का प्रावधान बता दें कि प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय अर्जित अवकाश के नकदीकरण का प्रावधान है। इसको लेकर वित्त विभाग ने हाल ही में सभी विभागों को निर्देश जारी कर कर्मचारी के पूरे सेवाकाल में अधिकतम 300 दिनों के अर्जित अवकाश के नकदीकरण का लाभ देने को कहा है। अधिक अवकाश होने पर उसका कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा। विभिन्न विभागों में लंबे समय से अर्जित अवकाशों पर भ्रम की स्थिति प्रदेश के विभिन्न विभागों में लंबे समय से अर्जित अवकाशों पर भ्रम की स्थिति बनी है। वित्त विभाग के नए निर्देश से इसकी समाप्ति के साथ ही बड़ी स्पष्टता भी मिल गई है। वित्त विभाग ने पूर्णत: स्पष्ट कर दी प्रक्रिया सेवानिवृत्ति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, असमर्थता पेंशन अथवा सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में अवकाश नकदीकरण की गणना की प्रक्रिया भी वित्त विभाग ने पूर्णत: स्पष्ट कर दी है।