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मंजू जायसवाल का अनोखा तरीका: चित्रों के जरिए गणित सिखाकर जबलपुर में बच्चों का 95% रिजल्ट

जबलपुर  शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर रेगवा नाम का एक बड़ा गांव है. इस गांव में सरकारी माध्यमिक शाला स्कूल है, इसमें छठवीं से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई होती है. कुल मिलाकर तीन क्लासों में 120 से ज्यादा बच्चों का एडमिशन है. इसी स्कूल में मंजू जायसवाल गणित की शिक्षिका है. मंजू जायसवाल का पढ़ाई का तरीका बिलकुल अलग है. दरअसल उन्होंने मैथ्स की पढ़ाने के लिए एक अनोखा प्रयोग किया है. बच्चों के मन से गणित का निकाला डर मंजू जायसवाल का कहना है कि, ''उन्होंने बच्चों को पढ़ाने के दौरान पाया कि बच्चों को गणित बहुत कठिन लगती है और गणित की वजह से कई बार बच्चे स्कूल तक नहीं आते हैं. इन बच्चों को घर में भी कोई पढ़ाने वाला नहीं होता ना ही ये ट्यूशन पढ़ते हैं. ऐसी स्थिति में इनकी गणित बहुत कमजोरी रहती है. इसलिए हमने एक नया प्रयोग शुरू किया और गणित को रंगों और चित्रों के माध्यम से पढ़ाना शुरू किया.'' बच्चों की पढ़ाई में हुआ सुधार  मंजू जायसवाल का कहना है कि, ''पढ़ने में बच्चा कितना भी कमजोर हो लेकिन चित्रों और रंगों के प्रति बच्चों का आकर्षण रहता है. इसलिए जैसे ही हमने यह प्रयोग शुरू किया तो बच्चों ने गणित में भी इंटरेस्ट लेना शुरू कर दिया.हमारी टीम जब स्कूल में पहुंची तो उस समय स्कूल में 15 बच्चे थे. दरअसल अभी नए साल की क्लास शुरू हुई है, इसलिए स्कूल में उपस्थिति की संख्या कम है और ज्यादातर बच्चे नए हैं. लेकिन इसके बावजूद मंजू जायसवाल ने बच्चों को एक चित्र बनाने के लिए कहां और उन्होंने बच्चों से पूल बनवाया. 95 प्रतिशत हुआ स्कूल का रिजल्ट बच्चों ने तुरंत फूल बनाना शुरू कर दिया फिर स्कूल के भीतर उन्होंने गणित की संख्या रखी और बच्चों से भी कहा कि इस गणित की संख्या से जुड़े हुए सवाल को हल करें. लगभग सभी बच्चों ने इसकी कोशिश की, कुछ बच्चे इसमें सफल भी रहे. मंजू जायसवाल ने बताया कि, पिछले सालों में हमारे स्कूल का रिजल्ट लगभग 95% रहा है जिसमें गणित विषय में सभी को फर्स्ट डिवीजन के मार्क्स मिले हैं. बच्चों का लग रहा पढ़ाई में मन राधिका इसी स्कूल में 2 सालों से पढ़ रही है. उनका कहना है, ''उसका मन भी शुरू में गणित में नहीं लगता था लेकिन चित्रों के जरिए जब से गणित पढ़ना शुरू किया है तब से उनकी गणित अच्छी हो गई है और अब भी चित्रों के माध्यम से ही गणित को समझती हैं.'' स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र दुबे का कहना है कि ''हमारी कोशिश होती है कि हम ज्यादातर सामान्य शिक्षा को रुचि कर बनाकर पेश करें. पहले चित्रों का उपयोग केवल सामाजिक विज्ञान पर्यावरण जैसे विषयों में ही होता था लेकिन हमने गणित में भी इसका प्रयोग शुरू किया तो अच्छे परिणाम मिले.'' सरकारी स्कूलों के शिक्षक शिक्षा को नौकरी की तरह करते हैं बहुत हद तक उनकी कोशिश बच्चों को सिखाने की नहीं होती. यदि सरकारी माध्यम के स्कूलों में शिक्षक पूरी जिम्मेदारी के साथ छात्रों को पढ़ाना शुरू करें तो सरकारी स्कूल से भी होनहार बच्चे निकल सकते हैं. मंजू जायसवाल की कोशिश कुछ ऐसी ही है.

कोर्ट ने पीएम की मिमिक्री करने वाले शिक्षक के सस्पेंशन पर लगाई रोक, अधिकारियों को दी चेतावनी

शिवपुरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमक्री करने वाले वीडियो पर निलंबित किए मध्यप्रदेश के एक शासकीय शिक्षक को ग्वालियर हाई कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने शिक्षक के निलंबन पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की है कि किसी अधिकारी द्वारा बिना सोचे-समझे या बाहरी दबाव में आकर इस तरह की कार्रवाई सिर्फ इसलिए नहीं की जानी चाहिए की वह उसके अधिकार क्षेत्र में है। बीते 12 मार्च को शिवपुरी के पोहरी विकासखंड में पदस्थ शिक्षक साकेत पुरोहित द्वारा एलपीजी संकट के दौर में चल रहे हालात पर पीएम मोदी की मिमक्री करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था इसके अगले ही दिन शिवपुरी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश में तर्क दिया गया था कि, उनके इस कृत्य से विभाग की छवि धूमिल हुई है। शिक्षक साकेत पुरोहित ने इस निलंबन आदेश को ग्वालियर हाईकोर्ट में चैलेंज किया जिस पर गुरुवार को हाईकोर्ट ने फैसला देते हुए निलंबन पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ अधिकार में है इसलिए नहीं कर सकते सस्पेंड साकेत पुरोहित की और से ग्वालियर हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे वकील कृष्ण कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि, "साकेत पुरोहित के निलंबन पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि निलंबन कार्रवाई कोई अधिकारी किसी भी स्थिति में सिर्फ इसलिए नहीं कर सकता की उसके पास ऐसा करने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने कहा है कि अधिकारी को निलंबन की कार्रवाई करने से पहले ये सोच विचार करना पड़ेगा कि क्या वाकई समबंधित विषय निलंबन का आधार है आपको देखना होगा की सस्पेंशन जरूरी भी है या नहीं। कोर्ट ने माना कि यह कार्रवाई जल्दबाजी और किसी दबाव में की गई है। कोर्ट ने माना जल्दबाजी और बाहरी दबाव में की गई कार्रवाई एडवोकेट शर्मा के मुताबिक साकेत पुरोहित के मामले में शिकायतकर्ता पिछोर विधायक प्रीतम लोधी थे जिनकी शिकायत पर यह निलंबन की कार्रवाई की गई। याचिकाकर्ता ने 12 मार्च को वीडियो अपलोड किया था और 13 मार्च को ही डीईओ द्वारा उन्हें निलंबन आदेश जारी कर दिया गया था। इस पर कोर्ट ने भी टिप्पणी कि है कि आप बाहरी दबाव में नहीं बल्कि सस्पेंड करने से पहले आपको तथ्य देखने होंगे। सिर्फ इसलिए कि एक विधायक ने शिकायत की और आपने अगले ही दिन कर्मचारी को निलंबित कर दिया। ये अधिकारी का स्वविवेक होना चाहिए। विधायक ने शिक्षक को बताया कांग्रेसी मानसिकता वाला व्यक्ति वकील कृष्ण कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि विधायक प्रीतम लोधी ने जो शिकायत की वह भी एक तरह से राजनीतिक एजेंडा आधारित थी। उन्होंने अपनी शिकायत में याचिकाकर्ता साकेत पुरोहित को कांग्रेसी मानसिकता वाला व्यक्ति बताया था। ये शिकायत भी कोर्ट दस्तावेजों में लगाई गई थी और ये बात हाईकोर्ट के संज्ञान में थी जिसका उल्लेख भी किया था। सावधानी और तर्क के साथ होना चाहिए सस्पेंशन वकील के मुताबिक याचिका पर फैसला देते हुए हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह दोहराया कि अधिकारियों के पास कर्मचारियों को सस्पेंड करने की शक्ति होती है, लेकिन इस शक्ति का इस्तेमाल पूरी सावधानी और तर्क के साथ किया जाना चाहिए बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि सस्पेंशन का सहारा आमतौर पर तभी लिया जाना चाहिए जब कोई गंभीर आरोप हों, जिनके लिए बड़ी सजा की जरूरत हो, या जब कर्मचारी की मौजूदगी से जांच प्रक्रिया में बाधा पड़ने की संभावना हो। कोर्ट ने कहा कि रूटीन या बिना सोचे-समझे किया गया सस्पेंशन स्वीकार्य नहीं।

4 अप्रैल को दिल्ली में TET अनिवार्यता के खिलाफ होगा बड़ा प्रदर्शन, छत्तीसगढ़ से 25 हजार शिक्षक हिस्सा लेंगे

रायपुर  टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में देशभर के शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का निर्णय लिया है। इस क्रम में चार अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसमें छत्तीसगढ़ से 25 हजार से अधिक शिक्षक भाग लेंगे। आंदोलन की तैयारियों के लिए रायपुर में शिक्षक संगठनों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शिक्षक नेता केदार जैन, मनीष मिश्रा, रविंद्र राठौर और जाकेश साहू सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले हुई बैठक टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के बैनर तले सभी संगठनों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया। बैठक में बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार सभी शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। यदि कोई शिक्षक दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण नहीं करता है, तो उसकी नौकरी पर संकट आ सकता है। इस निर्णय को लेकर देशभर के शिक्षकों में असंतोष है। करीब 82हजार शिक्षक टीईटी पास नहीं बैठक में आंदोलन की तैयारियों को मजबूत करने के लिए 21 मार्च को राज्य के सभी जिलों में और 24 मार्च को सभी 146 विकासखंडों में समन्वय बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। छत्तीसगढ़ में करीब 82 हजार शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी क्वालिफाइड नहीं हैं, जिनमें से अधिकांश की नियुक्ति उस समय हुई थी जब टीईटी अनिवार्य नहीं था। नियम वर्ष 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर लागू होगा सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह नियम वर्ष 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों पर लागू होगा। ऐसे शिक्षक जिनकी नियुक्ति 2010 के बाद हुई है, उन्हें नियुक्ति के दो सालों के भीतर टीईटी पास करना होगा। कोर्ट ने साफ किया है कि संपूर्ण देश के सभी राज्यों को इस आदेश का पालन करना अनिवार्य है। एक याचिका छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर में भी लंबित उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के समान ही एक याचिका छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट, बिलासपुर में भी लंबित है। इसमें शिक्षकों ने टीईटी को पदोन्नति में अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।

स्कूल में बेटियों की टॉपिंग पर प्रिंसिपल ने अपनी जेब से कराई हेलिकॉप्टर की सवारी

  डीडवाना-कुचामन राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के केराप गांव स्थित महात्मा गांधी राजकीय स्कूल में एक अनोखी और प्रेरणादायक घटना घटी है, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है. यहां के प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली तीन छात्राओं खुशी मेघवाल, रंजना नायक और ज्योति के सबसे बड़े सपने को पूरा कर दिया. ये तीनों छात्राएं आठवीं कक्षा की हैं और बोर्ड परीक्षा से पहले स्कूल में आयोजित एक विशेष टेस्ट में उन्होंने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल किया था। 'सर, हमें हेलिकॉप्टर से  उड़ान भरनी है' प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने टेस्ट के बाद इन मेधावी छात्राओं से बातचीत की और पूछा कि वे इनाम में क्या चाहती हैं. ग्रामीण परिवेश से आने वाली इन बच्चियों ने शायद मजाक-मजाक या सपने की तरह कहा, 'सर, हमें हेलिकॉप्टर में बैठकर उड़ान भरनी है.' यह सुनकर अधिकांश लोग इसे हल्के में ले लेते, लेकिन प्रिंसिपल ढाका ने इसे गंभीर चुनौती के रूप में लिया. उन्होंने छात्राओं से वादा किया कि यदि वे परीक्षा में अच्छे अंक लाती हैं, तो उनका यह सपना जरूर पूरा होगा। छात्राओं ने भी इस वादे को चुनौती मानकर पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई की. नतीजा यह निकला कि परीक्षा में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. अपने वादे को निभाते हुए प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने अपने निजी खर्च पर करीब एक लाख रुपये में तीनों छात्राओं को हेलिकॉप्टर राइड की व्यवस्था की. पहले नागौर में अनुमति नहीं मिलने पर जयपुर के पास चौमू में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। छात्राओं ने क्या कहा? शुक्रवार को चौमू हेलीपैड पर तीनों छात्राएं हेलिकॉप्टर में सवार हुईं. लगभग 30 मिनट की इस यादगार उड़ान में उन्होंने आसमान से जयपुर और आसपास के इलाकों को देखा. हेलिकॉप्टर के खिड़की से नीचे की दुनिया को देखते हुए उनके चेहरों पर खुशी, उत्साह और आश्चर्य साफ झलक रहा था. पहली बार आसमान की सैर करने वाली इन ग्रामीण बेटियों के लिए यह पल जीवन भर याद रहने वाला बन गया. छात्राओं ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'यह सपना सच होने जैसा लग रहा है. सर ने हमारा इतना बड़ा ख्वाब पूरा कर दिया। प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका ने बताया कि इस पहल का मकसद सिर्फ इनाम देना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की बच्चियों में पढ़ाई के प्रति उत्साह जगाना और उन्हें बड़े सपने देखने की हिम्मत देना है. उन्होंने कहा, 'अगर बच्चे मेहनत करें और सपने देखें, तो उन्हें पूरा करने का रास्ता निकल आता है. यह 'सपनों की उड़ान' पहल अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बनेगी.' इस अनूठी पहल का पूरा खर्च और प्रबंधन उन्होंने खुद संभाला, जिससे यह और भी खास हो गया। क्या बोले ग्रामीण? पूरे क्षेत्र में इस घटना की जोरदार सराहना हो रही है. लोग कह रहे हैं कि ऐसे शिक्षक ही समाज को बदल सकते हैं. ग्रामीण इलाकों में जहां संसाधन सीमित होते हैं, वहां शिक्षकों का ऐसा व्यक्तिगत योगदान बच्चों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है. यह कहानी न केवल तीन छात्राओं की है, बल्कि मेहनत, लगन और प्रोत्साहन से सपनों को हकीकत में बदलने की मिसाल है। ऐसी पहलें शिक्षा व्यवस्था में नई जान फूंक सकती हैं, जहां बच्चे सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि बड़े सपने भी देखें और उन्हें हासिल करने की हिम्मत रखें. प्रिंसिपल राजेंद्र ढाका जैसे शिक्षकों की बदौलत ग्रामीण भारत की बेटियां भी आसमान छूने की तैयारी कर रही हैं।

पंचायत शिक्षकों को मिलेगा सरकारी कर्मचारियों जैसा वेतनमान, बड़ी राहत की खबर

इंदौर  इंदौर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। युगलपीठ ने सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए पंचायत शिक्षकों को अन्य सरकारी कर्मचारियों समान वेतनमान देने के फैसले को बरकरार रखा है। सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कोर्ट ने पंचायत शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतनमान देने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सरकार के 29 दिसंबर 2017 के आदेश को खारिज करते हुए पंचायत शिक्षकों को भी छठे वेतन आयोग का लाभ 1 जनवरी 2006 से देने का आदेश दिया था और साथ ही बकाया राशि पर 6 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट की युगलपीठ में सरकार ने अपील दायर करते हुए चुनौती दी थी। तर्क दिया था कि एकलपीठ ने गलत तरीके से 1 जनवरी 2006 से लाभ देने का आदेश दिया। राज्य सरकार का कहना था कि छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से ही मिलना था। इसमें भी सरकार हार गई थी। इसके बाद पुनर्विचार याचिका दायर की थी। भेदभाव नहीं कर सकते हाई कोर्ट जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने साफ किया कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतनमान देने का मामला पहले भी कई फैसलों में हल हो चुका है। जिनमें स्पष्ट किया है कि पंचायत कर्मचारियों को समान वेतन व सरकारी कर्मचारियों समान सभी लाभ मिलें। जब राज्य सरकार ने पंचायतकर्मियों को सरकारी कर्मचारियों के समान वेतन देने का फैसला लिया है, तो उनसे भेदभाव नहीं किया जा सकता। क्या है मामला सरकार ने 7 जुलाई 2017 व 29 दिसंबर 2017 को आदेश जारी किया था कि पंचायत शिक्षकों को छठे वेतन आयोग का लाभ 1 अप्रैल 2007 से दिया जाए, बजाय उनकी नियुक्ति तारीख के। फैसले के खिलाफ पंचायत शिक्षकों ने याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि उन्हें छठे वेतन आयोग के लाभउनकी प्रारंभिक नियुक्ति तारीख से दिए जाएं।

पंजाब में सड़क हादसे में मारे गए टीचरों के परिवार को मिलेंगे 1 करोड़: शिक्षा मंत्री

चंडीगढ़. पंजाब सरकार सड़क हादसों में जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए नई योजना बनाने पर विचार कर रही है। पंजाब विधानसभा में इस विषय पर चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि सरकार ऐसी रणनीति तैयार कर रही है, जिसके तहत दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को करीब एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा सके। विधानसभा में यह मुद्दा शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने उठाया। उन्होंने ब्लॉक समिति चुनावों के दौरान सड़क हादसों में मारे गए दो शिक्षकों का मामला सदन में रखा और सरकार से उनके परिवारों के लिए विशेष सहायता की मांग की। शिक्षा मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि ब्लॉक समिति चुनावों के दौरान जिन दो शिक्षकों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई थी, उस मामले में विभाग की ओर से जो भी आर्थिक सहायता दी जानी है, वह नियमों के अनुसार दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी ओर से दोनों परिवारों को दस-दस लाख रुपये की सहायता पहले ही प्रदान की है। उन्होंने कहा कि मृतक शिक्षकों के परिवार के सदस्यों को नौकरी देने का मामला भी सरकार के विचाराधीन है। यह नियुक्ति पर्सोनल विभाग की गाइडलाइन के अनुसार की जाएगी। इस पर विधायक मनप्रीत अयाली ने कहा कि जिन शिक्षकों की मौत हुई है, उनके परिवार की स्थिति बेहद कठिन है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसे मामलों में परिवारों को दो करोड़ रुपये तक की सहायता देने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार के पास ऐसी कोई योजना है जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में बेहतर आर्थिक सहायता दी जा सके। सरकार आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कर रही काम इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग बहुत बड़ा है और बड़ी संख्या में कर्मचारी विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं। ऐसे में सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार बैंकों के साथ बातचीत कर रही है, ताकि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा सके जिसके तहत सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले शिक्षकों के परिवारों को एक करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में राज्य का बजट पेश किया गया है और सरकार कर्मचारियों की सुरक्षा तथा उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

MP में 70 हजार अतिथि शिक्षकों को तगड़ा झटका, ये कदम नहीं उठाया तो नौकरी पर बन सकती है खतरे की तलवार

भोपाल  लोक शिक्षण संचालनालय ने मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए आदेश के मुताबिक यदि कोई अतिथि शिक्षक लगातार सात दिनों तक ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं करता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है। यह व्यवस्था स्कूलों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है। ई-अटेंडेंस से जुड़े नए नियम प्रदेश के जिन शासकीय स्कूलों में स्थायी शिक्षकों की कमी है, वहां पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) की नियुक्ति की गई है। इन शिक्षकों को ई-अटेंडेंस (e-attendance) प्रणाली के माध्यम से अपनी दैनिक उपस्थिति दर्ज करनी होती है। वेतन भी इसी आधार पर जारी किया जाता है। विभाग के अनुसार तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या या अन्य कारण बताकर बड़ी संख्या में शिक्षक अनुपस्थित पाए गए हैं। इसी को देखते हुए सख्ती बढ़ाई गई है। शिक्षकों का विरोध, बताया तुगलकी फरमान इस आदेश का अतिथि शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने इसे ‘तुगलकी फरमान’ करार दिया है। उनका कहना है कि जो शिक्षक जानबूझकर गैरहाजिर रहते हैं, उन पर कार्रवाई उचित है, लेकिन बीमारी, दुर्घटना या अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में अनुपस्थित रहने वालों के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं है। आदेश में संशोधन की मांग संगठन की मांग है कि आदेश में “कारण बताओ” का प्रावधान जोड़ा जाए, ताकि वास्तविक कारणों पर विचार किया जा सके। यदि नियमों में संशोधन नहीं किया गया तो अतिथि शिक्षकों ने लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि विभाग इस मांग पर क्या निर्णय लेता है। 

BPSC TRE-4 शिक्षक भर्ती 2026 में आवेदन से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

पटना. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने चौथी चरण की शिक्षक भर्ती TRE-4 2026 का कार्यक्रम घोषित कर दिया है, जिसमें कुल 46,595 रिक्तियों पर शिक्षकों की बहाली की योजना है। यह भर्ती कक्षा 1 से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों में शिक्षक पदों के लिए होगी। बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा का शेड्यूल भी जारी किया गया है। परीक्षा 22 से 27 सितंबर 2026 के बीच आयोजित होने की संभावना है। आधिकारिक नोटिफिकेशन जल्द जारी होगा, जिसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। वेदन से पहले उम्मीदवारों के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल खोला जाएगा। आवेदन से पहले रजिस्ट्रेशन अनिवार्य बीपीएससी ने इस बार आवेदन प्रक्रिया में एक अहम बदलाव किया है। आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को आयोग के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके बाद ही वे मुख्य आवेदन फॉर्म भर पाएंगे। इस बदलाव का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित करना है। पिछली भर्तियों की तरह इस बार भी लाखों उम्मीदवारों के आवेदन करने की उम्मीद है। उम्मीदवारों को सलाह दी जा रही है कि वे सभी डाक्यूमेंट तैयार रखें। तीन प्रमुख बदलाव भर्ती प्रक्रिया में बीपीएससी TRE-4 में इस बार तीन महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहला बदलाव यह है कि डोमिसाइल नीति लागू की जाएगी, जिसमें अधिकांश सीटें बिहार के मूल निवासियों के लिए आरक्षित होंगी। दूसरा बदलाव-महिलाओं को 35% आरक्षण मिलेगा, जो राज्य के मूल निवासियों के हित में है। तीसरा और बड़ा बदलाव यह है कि एक अभ्यर्थी को सिर्फ एक ही रिजल्ट मिलेगा। इसका मतलब है कि एक उम्मीदवार को एक से अधिक पदों के लिए अलग-अलग मेरिट सूची में नाम नहीं मिलेगा। यह नया नियम लंबे समय से चर्चा में रहा है और उम्मीदवारों को एक साफ-सुथरा रिजल्ट देगा। परीक्षा तिथि और कार्यक्रम बीपीएससी TRE-4 परीक्षा 22 से 27 सितंबर 2026 तक आयोजित होने की घोषणा कर दी गई है। इस परीक्षा में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक शिक्षक पदों का चयन होगा। परीक्षा के बाद परिणाम नवंबर 2026 में जारी होने के संकेत हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक नोटिफिकेशन और पात्रता नियमों का ध्यानपूर्वक पालन करें। आवेदन प्रक्रिया के फॉर्म और तिथियों की घोषणा आयोग की वेबसाइट पर अपडेट होगी। आधिकारिक नोटिफिकेशन के बाद ही आवेदन शुल्क, आयु सीमा और परीक्षा पैटर्न भी स्पष्ट होंगे। लाखों युवाओं के लिए सुनहरा अवसर TRE-4 भर्ती बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को काफी हद तक पूरा करने में मदद करेगी। पिछले तीन चरणों में पहले से लाखों शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी है। इस भर्ती के माध्यम से करोड़ों युवा अपने सपने की सरकारी नौकरी पा सकते हैं।

गेस्ट टीचर्स के लिए निराशाजनक खबर, 900 शिक्षकों को आरक्षण से वंचित किया गया

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी आइटीआई संस्थानों में लंबे समय से कार्यरत लगभग 900 अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं। विभाग ने 1120 प्रशिक्षण अधिकारी (टीओ) पदों पर भर्ती निकली है, इस सीधी नियमित भर्ती में उन्हें न आरक्षण मिला, न अनुभव का लाभ और न ही आयु सीमा में छूट दी गई है। इन शिक्षकों में कई ऐसे हैं जो 10 से 15 वर्षों से न्यूनतम मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब विभाग में नियमित स्टाफ की कमी थी, तब उन्होंने संस्थानों को संभाला। अब जब स्थायी नियुक्ति का अवसर आया, तो उन्हें सामान्य अभ्यर्थियों की तरह प्रतिस्पर्धा में खड़ा कर दिया गया है। अलग नीति अपना रही सरकार कई शिक्षक आयु सीमा पार करने की स्थिति में हैं, जिससे उनकी नौकरी की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है। अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि सरकार अन्य विभागों में अलग नीति अपना रही है। स्कूल शिक्षा विभाग में अतिथि शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जबकि उच्च शिक्षा में 25 प्रतिशत आरक्षण और अनुभव के अंक का प्रावधान है। लेकिन आईटीआई अतिथि शिक्षकों को ऐसा कोई लाभ नहीं मिला। तत्कालीन मंत्री यशोधरा राजे ङ्क्षसधिया के समय प्रस्तावित 'संविदा नीति' आज तक लागू नहीं हो सकी। वर्तमान मंत्री गौतम टेटवाल से भी संगठन कई बार मिल चुका है। उच्च शिक्षा विभाग में भी यही हाल इधर उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेज में कार्यरत अतिथि विद्वानों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। जिन कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति हो रही है उनसे अतिथि विद्वानों को बाहर कर दिया गया है। जबकि उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किसी भी अतिथि विद्वान को बाहर न करने की घोषणा की थी हरियाणा मॉडल पर नियम तैयार कर इनको नियमित करने की बात भी कही गई थी। स्थिति यह है कि अब तक 100 से अधिक अतिथि विद्वान सेवा से बाहर हो चुके हैं लेकिन अन्य कॉलेजों में नियुक्ति नहीं दी गई।

बिहार में शिक्षक भर्ती का नया नियम, अब सिर्फ CTET पास उम्मीदवारों को मिलेगा मौका

पटना  बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने फैसला लिया है कि राज्य में अब प्रारंभिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 8) के लिए 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) का आयोजन नहीं किया जाएगा। विभाग के इस निर्णय के बाद, अब बिहार के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए केवल 'केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा' (CTET) के आधार पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली सीटेट (CTET) परीक्षा हर साल नियमित रूप से होती है। राज्य सरकार का मानना है कि सीटेट उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या पर्याप्त है, जिससे शिक्षक बहाली की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने लगभग तीन साल पहले ही टीईटी के आयोजन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उस समय विभाग ने कहा था कि तत्काल प्रभाव से यह परीक्षा नहीं ली जाएगी, लेकिन भविष्य में इसके आयोजन की संभावना खुली रखी गई थी। हालांकि, अब विभाग ने पूर्ण रूप से यह तय कर लिया है कि सीटेट से ही योग्य शिक्षक मिल रहे हैं, इसलिए अलग से राज्य स्तरीय टीईटी कराने की आवश्यकता नहीं रह गई है। राज्य में टीईटी का इतिहास बिहार में अब तक केवल दो बार ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के माध्यम से टीईटी का आयोजन किया गया है। पहली बार वर्ष 2011 में और दूसरी बार वर्ष 2017 में यह परीक्षा हुई थी। इस परीक्षा के जरिए दो स्तरों पर शिक्षकों की योग्यता जांची जाती थी: प्राथमिक कक्षा (1 से 5): छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों का मूल्यांकन। उच्च प्राथमिक कक्षा (6 से 8): मध्य विद्यालयों के लिए शिक्षकों की पात्रता का निर्धारण। छात्रों और अभ्यर्थियों पर क्या होगा असर? इस फैसले का सबसे सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जो विशेष रूप से बिहार टीईटी (BTET) की तैयारी कर रहे थे। अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी और केंद्र सरकार द्वारा आयोजित होने वाली सीटेट (CTET) परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सरकार के इस फैसले से चयन प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और बार-बार परीक्षा आयोजित करने का प्रशासनिक बोझ भी कम होगा। शिक्षा विभाग के इस कदम से यह भी स्पष्ट हो गया है कि आने वाली शिक्षक बहालियों में केवल वही छात्र हिस्सा ले पाएंगे जिन्होंने सीटेट के पेपर-1 (कक्षा 1-5 के लिए) या पेपर-2 (कक्षा 6-8 के लिए) में सफलता हासिल की है।