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सैकड़ों शिक्षकों को स्थाईकरण के लिए 6 महीने और करना होगा इंतजार!

बांसवाड़ा. अधिकारियों के आपसी सामंजस्य के अभाव के चलते जिले के सैकड़ों शिक्षकों की सांसें अटकी हुई हैं। शिक्षक भर्ती 2022 के तहत बांसवाड़ा में लगे तृतीय श्रेणी के लेवल-2 के 220 शिक्षकों के स्थाईकरण की फाइल चार माह से प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के दफ्तर में धूल फांक रही है। वहीं पड़ोसी जिले में यह काम परीविक्षा काल पूरा होते ही पूरा कर लिया गया है और शिक्षकों को समस्त परिलाभ मिलने भी शुरू हो गए हैं। जबकि बांसवाड़ा के शिक्षक वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों से वंचित हो रहे हैं। शिक्षकों को डर सता रहा है कि यदि पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता लग जाती है तो स्थाईकरण की फाइल कम से कम छह माह और अटक सकती है। यह है मामला शिक्षक भर्ती 2022 के तहत चयनित शिक्षक प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। उनका परीविक्षा काल अक्टूबर 2025 में पूर्ण होने के बाद प्रावधानों के अनुसार स्थाईकरण होना है, लेकिन चार माह बाद भी फाइल लंबित है। ये हो रहा है नुकसान स्थायीकरण में हो रही देरी का सीधा असर शिक्षकों की वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों पर पड़ रहा है। समय पर स्वीकृति नहीं मिलने से शिक्षक आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। वहीं कई बार प्रकरण लंबित रहने पर बाद में विभाग को एरियर सहित एक साथ बड़ी राशि देनी पड़ती है। इससे विभाग का बजट भी प्रभावित होता है। 2 बार लेकर गई फाइल : डीईओ स्थायीकरण का काम हमारी तरफ से नवंबर में ही पूरा हो गया है। पहली बार 30 नवंबर और दूसरी बार 10 फरवरी को फाइल भेजी गई। पर दोनों बार कलक्ट्रेट में कहा गया कि डीईसी की बैठक होगी, तब बताएंगे। डीईओ कार्यालय ने पूरा काम कर दिया है। – शम्मे फरोजा बतुल अंजूम, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, बांसवाड़ा फाइल देंगे, तो बुला लेंगे मीटिंग : सीईओ हमारे पास स्थायीकरण की कोई फाइल नहीं आई है। फाइल आएगी तो तुरंत जिला स्थापना समिति की बैठक बुला लेंगे। फाइल मेरी टेबल पर देंगे, तो कार्रवाई करेंगे। – गोपाललाल स्वर्णकार, सीईओ, जिला परिषद, बांसवाड़ा

छत्तीसगढ़ में 5000 शिक्षक पदों के लिए भर्ती की मंजूरी, आदेश हुआ जारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ में टीचर भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जहां लंबे समय से स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। राज्य के स्कूलों में जल्द ही 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से डायरेक्टरेट ऑफ़ पब्लिक इंस्ट्रक्शन को एक आदेश जारी कर दिया गया है। यदि पिछली भर्ती आदेश की बात करें तो छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 अक्टूबर, 2025 को 4,708 शिक्षक भर्ती की अनुमति दी थी। अब, फरवरी के पहले हफ्ते ही राज्य सरकार के नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक 292 सहायक पदों के सृजन को भी मंजूरी दे दी गई है। इन पदों के साथ, कुल 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में लोकशिक्षण संचालनालय के संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। शिक्षा विभाग के इस फैसले से फैसले से न सिर्फ पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य के स्कूलों में टीचर की कमी भी पूरी होगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

69000 शिक्षक भर्ती का मामला तूल पकड़ता, आज लखनऊ में शिक्षा हितैषी करेंगे विरोध प्रदर्शन

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है. इसे लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज यानी 2 फरवरी 2026 को लखनऊ में अपनी मांगो को पूरा करवाने के लिए को धरना प्रदर्शन करेंगे. इस मामले में अभ्यर्थियों का आरोप है कि ने कोई पहल नहीं कर रही जिस कारण से मामला इतना आगे चला गया है. इस केस की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में साल 2024 में सितंबर के महीने में हुई थी. उसके बाद से लगातार के इस मामले में तारीख पर तारीख मिल रही है. इस केस को लेकर अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी. लेकिन उससे पहले आरक्षित वर्ग के लोग अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए आज प्रदर्शन करने वाले हैं.  कौन कर रहा है प्रदर्शन का नेतृत्व  ऐसे में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने इसे लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा की इस केस को सुलझाने के लिए सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है. जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट से केवल तारीखें मिल रही हैं. इस दौरान उन्होंने बताया कि वे दो फरवरी से आंदोलन करेंगे. आंदोलन के शुरुआत में बनाए गए सभी जिला कोऑर्डिनेटर से ब्लाक लेवल पर संपर्क कर आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की लिस्ट बनाने को कहा गया है.  प्रदर्शकारियों का फूटा गुस्सा  ऐसे में इस केस को लेकर प्रदर्शकारियों में गुस्सा भरा पड़ा है. उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग और लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में है. इस केस पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट डबल बेंच का फैसला सब हमारे पक्ष में है, लेकिन हमारे साथ अन्याय इसलिए हो रहा है क्योंकि हम पिछड़े और दलित समाज से आते हैं.  इतने सालों से चल रहा है संघर्ष वहीं, दूसरे प्रदर्शनकारी ने कहा कि  वो पिछले 6 सालों  से संघर्ष कर रहे हैं.सरकार से मांग करते हैं, लेकिन हमारी बातों को नहीं सुना जाता है. सुनवाई न होने के कारण सभी अभ्यर्थी आहत हैं. 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर टिप्पणी, बालाघाट के शिक्षक सुनील मेश्राम निलंबित

बालाघाट  सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी एक शिक्षक को भारी पड़ गई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी करने के आरोप में बालाघाट जिले के एक उच्च श्रेणी शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर मृणाल मीणा के निर्देश पर यह कार्रवाई आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर द्वारा की गई। खास बात यह है कि सुनील मेश्राम राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक हैं। ऐसे में निलंबन की कार्रवाई को लेकर शिक्षा विभाग और जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। परसवाड़ा के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक सुनील मेश्राम पर आरोप है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भारत सरकार और राज्य शासन के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी साझा की थी। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना। नोटिस के बाद भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब प्रशासन की ओर से चार दिसंबर को शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके जवाब में 8 दिसंबर को मेश्राम ने अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, लेकिन विभागीय स्तर पर इसे स्वीकार नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक के आचरण से शासन की छवि प्रभावित हुई है, जो सेवा नियमों के विरुद्ध है। सेवा नियमों के तहत निलंबन पूरे प्रकरण के बाद मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1966 के नियम 9 के अंतर्गत शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। शिक्षक ने दी सफाई निलंबन के बाद सुनील मेश्राम ने कहा कि संबंधित पोस्ट किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़ी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें खेद है। मेश्राम का दावा है कि वह पोस्ट उनकी नहीं थी और उसे उनके फेसबुक अकाउंट से हटा दिया गया है। 

शिक्षकों के लिए नया नियम: परीक्षा पास करना जरूरी, NIOS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं

भोपाल  बच्चों की परीक्षा लेने वाले शिक्षकों को भी अब परीक्षा देनी होगी और अगर इसमें फेल हुए तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना होगा। दरअसल प्रदेश में पांच हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। प्राइमरी स्कूलों में बतौर शिक्षक भर्ती हुए इन शिक्षकों को पहले ब्रिज कोर्स करना होगा। छह माह का यह कोर्स नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) करवाएगा। इसमें अगर फेल हो गए तो शिक्षक की नौकरी जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का है निर्देश प्रदेश में 94 हजार सरकारी स्कूल हैं। प्राइमरी कक्षा में 1.40 लाख शिक्षक हैं। इनमें से करीब पांच हजार ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति बीएड के आधार पर हुई। सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्देश में पात्रता परीक्षा पास करना शिक्षकों को अनिवार्य हो गया। दो साल में भर्ती हुए ये शिक्षक इस दायरे में आ रहे हैं। दायरे में आ रहे हैं ये शिक्षक शिक्षकों को ब्रिज कोर्स कराने लोक शिक्षण संचालनालय से निर्देश जारी हुए हैं। इसके तहत हर जिले को ऐसे शिक्षकों को एनआइओएस के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना है। इसकी आखिरी तारीख 25 दिसंबर है। 6 माह का कोर्स पूरा कर शिक्षकों को सालभर में सार्टिफिकेट जमा कराना होंगे। यह हैं निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2023 को आदेश पारित किया था। इसके मुताबिक इस तारीख के बाद प्राइमरी स्कूलों मेें बीएड के आधार पर शिक्षकों की भर्ती मान्य नहीं होगी। सेवा समाप्त हो सकती है बीएड के आधार पर भर्ती प्राइमरी शिक्षकों को ब्रिज कोर्स करना होगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन होना है। सभी जिलों को निर्देश जारी हुए हैं। एक साल में कोर्स पूरा न करने पर सेवाएं समाप्त की जा सकती है। – केके द्विवेदी, संचालक, लोक शिक्षण संस्थान

मध्यप्रदेश में नई पहल: टीचर अब डांस-ड्रामा के जरिए समझाएंगे कठिन विषय

 भोपाल  सरकारी स्कूलों में अब अगर नृत्य-नाटक करते शिक्षक दिखें तो यह मत सोचिएगा कि वे पढ़ाई छोड़कर मस्ती कर रहे हैं। दरअसल प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को प्रदर्शन कलाओं के जरिए पढ़ाने की तैयारी चल रही है। योजना है कि कठपुतली नृत्य, मुखौटा, मूर्तियों, कविता, गीत और चित्रों के जरिए गणित-विज्ञान के गूढ़ संदर्भों को समझाया जाए, ताकि कक्षा का वातावरण आनंददायक बना रहे और बच्चों को कठिन विषय आसानी से समझ आ जाए। इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) समृद्धि-2025 में शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा। प्रदेश के 30 जिलों के 65 शिक्षकों का चयन इसके लिए किया गया है। इनके बीच प्रतियोगिता भी कराई गई। ये शिक्षक अपने जिले में मुख्य प्रशिक्षक होंगे और अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। हर विषय को कला से जोड़ने का प्रयास स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम के तहत उच्च माध्यमिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एनसीईआरटी की ओर से प्रशिक्षक शिक्षकों का प्रशिक्षित कर रहे हैं। स्कूलों में इसकी अधिकारी निगरानी भी करेंगे, ताकि हर विषय को कला से जोड़ते हुए पढ़ाया जा सके। इस विषय में ये गतिविधि जीव विज्ञान – सांदीपनि विद्यालय की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने पाचन तंत्र के ऊपर नुक्कड़ नाटक तैयार किया है। इसमें उन्होंन 35 बच्चों को लिया था और उन्हें भोजन और एंजाइम बनाया था। इसमें कुछ बच्चों ने मिट्टी से पाचनतंत्र के माडल बनाकर पूरी प्रक्रिया को समझाया था। गणित – शासकीय नवीन कन्या उमावि की शिक्षिका प्रेरणा बर्डे ने गणित के कठिन प्रमेय और सूत्र को आकृति बनाकर समझाया। इसमें वह सालिड व प्लेन आकृति को थ्रीडी माडल से समझा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने त्रिशंकु व गोला को भी आकृति के माध्यम से पढ़ा रही हैं। साथ ही त्रिकोणमिति के कठिन सूत्र को भी आसान तरीके से कविता के माध्यम से बता रही हैं। कठिन विषयों को पढ़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा     एनसीईआरटी का आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत शिक्षकों को गीत-संगीत व कला के माध्यम से कठिन विषयों को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। – दिनेश शर्मा, नोडल अधिकारी, समृद्धि कार्यक्रम।  

गंदे वीडियो दिखाने वाले शिक्षक भिंड में गिरफ्तार, छात्राओं ने दी शिकायत

 भिंड  भिंड जिले में देहात थाना अंतर्गत विक्रमपुरा सरकारी स्कूल में शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शिक्षक पर कक्षा में छात्राओं को मोबाइल पर अश्लील वीडियो दिखाने और आपत्तिजनक हरकतें करने का आरोप लगा है। घटना का खुलासा तब हुआ जब तीन छात्राओं ने हिम्मत जुटाकर इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने छात्राओं की शिकायत पर आरोपित शिक्षक रामेंद्र सिंह कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ पाक्सो एक्ट, धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। छात्राओं ने पुलिस को बताया कि शिक्षक कक्षा में पढ़ाते समय मोबाइल पर अश्लील वीडियो दिखाता था और अनुचित व्यवहार करता था। जब छात्राओं ने घर जाकर शिकायत करने की बात कही तो आरोपी ने उन्हें डराया और धमकाया। डर के कारण छात्राएं कई दिनों तक स्कूल नहीं गईं। स्वजन की पूछताछ में खुला मामला बताया जाता है, कि जब छात्राओं ने स्कूल जाना बंद किया तो स्वजनों ने उनसे कारण पूछा। पूछताछ में छात्राओं ने पूरी घटना बताई। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर सर गंदे वीडियो दिखाते हैं। इसके बाद स्वजन स्कूल पहुंचे और प्राचार्य से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर वे छात्राओं को लेकर देहात थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कक्षा 8वीं की एक छात्रा को मुख्य फरियादी बनाया और अन्य छात्राओं के बयान भी दर्ज किए। डीईओ ने आरोपित शिक्षक को निलंबित किया पुलिस की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग ने देर रात आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी आरडी मित्तल ने बताया कि उच्च श्रेणी शिक्षक (उच्च पद प्रभार) मूल पद सहायक शिक्षक शासकीय माध्यमिक विद्यालय विक्रमपुरा बीटीआइ परिसर भिंड में पदस्थ रामेंद्र सिंह कुशवाह को शिक्षक की सामाजिक गरिमा को धूमिल करने पर मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में शिक्षक को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। पाक्सो एक्ट में केस दर्ज     छात्रा की शिकायत पर आरोपी शिक्षक रामेंद्र सिंह कुशवाह के खिलाफ पाक्सो एक्ट, धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।- मुकेश शाक्य, टीआई थाना देहात तुरंत निलंबन का आदेश जारी किया     शिक्षक द्वारा की गई हरकत शिक्षक समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है। पुलिस कार्रवाई के बाद विभाग ने तुरंत निलंबन आदेश जारी किया है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। – आरडी मित्तल, डीईओ भिंड  

बड़ी कार्रवाई: बुरहानपुर में आरोपी शिक्षक को निलंबित, विवादित मामला बच्चों को नमाज सिखाने का

बुरहानपुर  बुरहानपुर जिले में सूर्य नमस्कार से पहले स्कूली बच्चों को नमाज कराने का मामला सामने आया है. शिकायत मिलने पर शनिवार को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) संतोष सिंह सोलंकी खुद स्कूल पहुंचे थे. उन्होंने बच्चों से पूरे मामले की जानकारी ली. मामला देवरी के एक सरकारी स्कूल का है. 5वीं की छात्राओं ने बताया कि उन्हें सूर्य नमस्कार से पहले नमाज की स्टेप्स कराई जाती थी. उन्होंने स्टेप्स करके भी दिखाए.  शुक्रवार को हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष अजीत परदेसी भी स्कूल पहुंचे थे. वहां छात्राओं ने टीचर पर नमाज के स्टेप कराने के आरोप लगाए थे. वहीं इसे लेकर पालकों ने भी आक्रोश जताते हुए कार्रवाई की मांग की थी. पंचनामा बनाया गया था बताया गया है कि दीपावली के अवकाश के दौरान कुछ बच्चों ने जब घर में वह प्रक्रिया दोहराई तो माता-पिता ने पूछा। बच्चों ने बताया कि जबूर अहमद रोजाना योगासन से पहले उन्हें इसका अभ्यास कराता है। इसके बाद करीब दो दर्जन अभिभावक स्कूल पहुंच गए और विरोध दर्ज कराया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी संतोष सिंह सोलंकी को सूचना दी। मामला गंभीर होने से डीईओ स्कूल पहुंचे और पंचनामा बनाया। एक पालक ने कहा, ''मेरे बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं. दीपावली की छुट्टी के दौरान बच्चों ने यह बात घर पर बताई. इसके बाद स्कूल में आकर शिकायत की. इसके बाद जनशिक्षक स्कूल पहुंचे और डीईओ को मामले की जानकारी दी. अपर कलेक्टर बुरहानपुर वीर सिंह चौहान ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बच्चों के बयानों के बाद डीईओ ने आरोपी शिक्षक जबूर अहमद तड़वी को निलंबित कर दिया है.  शिक्षक ने क्या कहा इस बीच जानकारी लगने पर हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष अजीत परदेसी, बजरंग दल के दीपक पवार सहित अन्य पदाधिकारी भी स्कूल पहुंचे और विरोध दर्ज कराया था। इधर, शिक्षक जुबेर अहमद तड़वी का कहना था कि मुझ पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।

14 साल तक सैलरी लेते रहे चार अस्थायी शिक्षक, अधिकारियों ने हटाने में की गलती — मध्य प्रदेश में मामला

 शिवपुरी  मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों की बेहोशी का आलम एक बार फिर सामने आया है। शिवपुरी के करैरा में चार संविदा अस्थायी शिक्षक 14 साल से अवैधानिक रूप से स्कूलों में सेवाएं देते रहे और शिक्षा विभाग से वेतन लेते रहे। इन्हें 2009 में जिस योजना के तहत भर्ती किया गया था, वो 2012 में बंद हो गई। सितम्बर 2025 में चूक पकड़ी गई और अब आनन फानन में नियुक्ति समाप्त कर उन्हें भारमुक्त किया गया। दरअसल, वर्ष 2009 अभिकरण स्तरीय चयन समिति के अनुमोदन एवं पंचायत से प्रस्तावों के परीक्षण उपरांत सहरिया जनजाति के अतिरिक्त संविदा शिक्षक वर्ग-3 की नियुक्ति 2500 रुपये प्रतिमाह की गई थी। नियुक्ति अस्थाई रूप से 12 माह के लिए थी। हर 12 माह पश्चात सेवा वृद्धि के लिए प्रधानाध्यापक द्वारा जनपद पंचायत को शिक्षकों के कार्य एवं व्यवहार के संबंध में संतोषजनक मतांकन भेजे जाने थे। 2012 में योजना समाप्त कर दी गई थी वर्ष 2012 में योजना समाप्त कर दी गई और जिलेभर से इस तरह के सभी शिक्षकों को हटा दिया गया, परंतु करैरा के शाप्रावि उड़वाहा में पदस्थ काशीराम आदिवासी, मोहर सिंह आदिवासी, एकीकृत कन्या शाला अमोला क्रमांक-1 में पदस्थ अनिल आदिवासी, शाप्रावि राजगढ़ में पदस्थ शिवचरण आदिवासी को अधिकारी हटाना भूल गए। यह शिक्षक हर साल बिना नवीनीकरण आदेश के अपनी-अपनी शालाओं में नौकरी करते रहे। उन्हें 2012 से 5000 रुपये वेतन भी मिल रहा था। यानी वे करीब 8 लाख से ज्यादा सैलरी ले चुके थे। अब अचानक आदेश जारी कर चारों शिक्षकों को यह कहते हुए हटा दिया गया है कि जुलाई 2025 में संकुल पर जानकारी प्राप्त हुई कि आप 2012 से बिना सेवा वृद्धि के ही शाला पर शैक्षणिक कार्य करते रहे। ऐसे पकड़ में आई गलती जब चारों शिक्षकों की संविलियन संबंधी फाइल जिला पंचायत सीईओ के पास पहुंची तो उन्होंने आदेश पढ़ा। आदेश में शिक्षकों की नियुक्ति अस्थायी पाई गई। उन्होंने संकुल प्राचार्य से पत्राचार किया। पाया गया कि 2012 में कलेक्टर के यहां से योजना समाप्त होने के संबंध में पत्र भेजा गया था, परंतु जनपद से यह जानकारी शिक्षा विभाग को दी गई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो पाया। उचित कार्रवाई की जा चुकी है     शिक्षकों ने वर्ष 2011 के बाद सेवा वृद्धि के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं दिया है, यह मामला संज्ञान में आया तो इस संबंध में वरिष्ठ कार्यालय से मार्गदर्शन मांगते हुए, जो उचित कार्रवाई हो सकती है, वह कर दी है। – अरविंद यादव, संकुल प्राचार्य शिक्षक क्यों नहीं हटाए गए, इसकी जानकारी नहीं     हमारे यहां से नियुक्ति 2009 में हुई थी, 2012 में योजना समाप्त हो गई थी। इसके बाद जिले भर में शिक्षकों को हटा दिया था। यह चारों शिक्षक क्यों नहीं हटाए गए, इसकी जानकारी नहीं है। आदिम जाति कल्याण विभाग का लेना-देना सिर्फ नियुक्ति तक था। – राजकुमार सिंह, जिला समन्वयक, आदिम जाति कल्याण विभाग  

रिजल्ट कमजोर तो अब अलग से पढ़ाई! राजधानी में स्कूलों को स्पेशल क्लास चलाने के निर्देश

भोपाल  पढ़ाई में कमजोर बच्चों को अलग से क्लास लगाकर होशियार बनाया जाएगा। राजधानी के स्कूलों में त्योहार के बाद यह शुरूआत होने जा रही है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। यह क्लास दसवीं और बारहवीं कक्षा के लिए होगी। दसवीं और बारहवीं की परीक्षा फरवरी में होगी। पढ़ाई के तीन माह माह बाकी है। ऐसे में राजधानी के स्कूलों में स्पेशल क्लासेस के निर्देश जारी हुए हैं। इन क्लास में उन बच्चों को अलग से पढ़ाया जाना है जिनका रिजल्ट टेस्ट परीक्षा के दौरान कमजोर है। इसके लिए शिक्षकों की अतिरिक्त ड्यूटी होगी। पढ़ाई की तैयारी के लिए आनन फानन में जारी निर्देश पर शिक्षकों ने आपत्ति जताई। उनका कहना है अधिकांश की ड्यूटी बीएलओ में हैं। पढ़ाने स्टाफ नहीं। राजधानी में 20 और हायर सेकण्डरी स्कूल राजधानी में 20 हाई और हायर सेकण्डरी स्कूल हैं। यहां दोनों कक्षाओं में बीस हजार से ज्यादा बच्चे दर्ज हैं। हाल में इनके मासिक टेस्ट कराए गए हैं। ये स्कूल स्तर पर हुए हैं। इनके परिणाम तय करेंगे कितने बच्चों की स्पेशल क्लास होना है। परीक्षा की तैयारी के बीच बहुत से शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कामों में लगी है। इनमें से कुछ बीएलओ बनाए गए हैं। अध्यापन प्रभावित हो रहा है। रिजल्ट पर असर होगा।- उपेन्द्र कौशल, अध्यक्ष शिक्षक संगठन