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गेस्ट टीचर्स के लिए निराशाजनक खबर, 900 शिक्षकों को आरक्षण से वंचित किया गया

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी आइटीआई संस्थानों में लंबे समय से कार्यरत लगभग 900 अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर परेशान हैं। विभाग ने 1120 प्रशिक्षण अधिकारी (टीओ) पदों पर भर्ती निकली है, इस सीधी नियमित भर्ती में उन्हें न आरक्षण मिला, न अनुभव का लाभ और न ही आयु सीमा में छूट दी गई है। इन शिक्षकों में कई ऐसे हैं जो 10 से 15 वर्षों से न्यूनतम मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब विभाग में नियमित स्टाफ की कमी थी, तब उन्होंने संस्थानों को संभाला। अब जब स्थायी नियुक्ति का अवसर आया, तो उन्हें सामान्य अभ्यर्थियों की तरह प्रतिस्पर्धा में खड़ा कर दिया गया है। अलग नीति अपना रही सरकार कई शिक्षक आयु सीमा पार करने की स्थिति में हैं, जिससे उनकी नौकरी की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है। अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि सरकार अन्य विभागों में अलग नीति अपना रही है। स्कूल शिक्षा विभाग में अतिथि शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जबकि उच्च शिक्षा में 25 प्रतिशत आरक्षण और अनुभव के अंक का प्रावधान है। लेकिन आईटीआई अतिथि शिक्षकों को ऐसा कोई लाभ नहीं मिला। तत्कालीन मंत्री यशोधरा राजे ङ्क्षसधिया के समय प्रस्तावित 'संविदा नीति' आज तक लागू नहीं हो सकी। वर्तमान मंत्री गौतम टेटवाल से भी संगठन कई बार मिल चुका है। उच्च शिक्षा विभाग में भी यही हाल इधर उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेज में कार्यरत अतिथि विद्वानों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। जिन कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति हो रही है उनसे अतिथि विद्वानों को बाहर कर दिया गया है। जबकि उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किसी भी अतिथि विद्वान को बाहर न करने की घोषणा की थी हरियाणा मॉडल पर नियम तैयार कर इनको नियमित करने की बात भी कही गई थी। स्थिति यह है कि अब तक 100 से अधिक अतिथि विद्वान सेवा से बाहर हो चुके हैं लेकिन अन्य कॉलेजों में नियुक्ति नहीं दी गई।

बिहार में शिक्षक भर्ती का नया नियम, अब सिर्फ CTET पास उम्मीदवारों को मिलेगा मौका

पटना  बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने फैसला लिया है कि राज्य में अब प्रारंभिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 8) के लिए 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) का आयोजन नहीं किया जाएगा। विभाग के इस निर्णय के बाद, अब बिहार के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए केवल 'केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा' (CTET) के आधार पर ही आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? शिक्षा विभाग के अनुसार, वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा आयोजित की जाने वाली सीटेट (CTET) परीक्षा हर साल नियमित रूप से होती है। राज्य सरकार का मानना है कि सीटेट उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या पर्याप्त है, जिससे शिक्षक बहाली की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने लगभग तीन साल पहले ही टीईटी के आयोजन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उस समय विभाग ने कहा था कि तत्काल प्रभाव से यह परीक्षा नहीं ली जाएगी, लेकिन भविष्य में इसके आयोजन की संभावना खुली रखी गई थी। हालांकि, अब विभाग ने पूर्ण रूप से यह तय कर लिया है कि सीटेट से ही योग्य शिक्षक मिल रहे हैं, इसलिए अलग से राज्य स्तरीय टीईटी कराने की आवश्यकता नहीं रह गई है। राज्य में टीईटी का इतिहास बिहार में अब तक केवल दो बार ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के माध्यम से टीईटी का आयोजन किया गया है। पहली बार वर्ष 2011 में और दूसरी बार वर्ष 2017 में यह परीक्षा हुई थी। इस परीक्षा के जरिए दो स्तरों पर शिक्षकों की योग्यता जांची जाती थी: प्राथमिक कक्षा (1 से 5): छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों का मूल्यांकन। उच्च प्राथमिक कक्षा (6 से 8): मध्य विद्यालयों के लिए शिक्षकों की पात्रता का निर्धारण। छात्रों और अभ्यर्थियों पर क्या होगा असर? इस फैसले का सबसे सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जो विशेष रूप से बिहार टीईटी (BTET) की तैयारी कर रहे थे। अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी और केंद्र सरकार द्वारा आयोजित होने वाली सीटेट (CTET) परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करना होगा। सरकार के इस फैसले से चयन प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और बार-बार परीक्षा आयोजित करने का प्रशासनिक बोझ भी कम होगा। शिक्षा विभाग के इस कदम से यह भी स्पष्ट हो गया है कि आने वाली शिक्षक बहालियों में केवल वही छात्र हिस्सा ले पाएंगे जिन्होंने सीटेट के पेपर-1 (कक्षा 1-5 के लिए) या पेपर-2 (कक्षा 6-8 के लिए) में सफलता हासिल की है।

सैकड़ों शिक्षकों को स्थाईकरण के लिए 6 महीने और करना होगा इंतजार!

बांसवाड़ा. अधिकारियों के आपसी सामंजस्य के अभाव के चलते जिले के सैकड़ों शिक्षकों की सांसें अटकी हुई हैं। शिक्षक भर्ती 2022 के तहत बांसवाड़ा में लगे तृतीय श्रेणी के लेवल-2 के 220 शिक्षकों के स्थाईकरण की फाइल चार माह से प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के दफ्तर में धूल फांक रही है। वहीं पड़ोसी जिले में यह काम परीविक्षा काल पूरा होते ही पूरा कर लिया गया है और शिक्षकों को समस्त परिलाभ मिलने भी शुरू हो गए हैं। जबकि बांसवाड़ा के शिक्षक वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों से वंचित हो रहे हैं। शिक्षकों को डर सता रहा है कि यदि पंचायती राज चुनाव की आचार संहिता लग जाती है तो स्थाईकरण की फाइल कम से कम छह माह और अटक सकती है। यह है मामला शिक्षक भर्ती 2022 के तहत चयनित शिक्षक प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। उनका परीविक्षा काल अक्टूबर 2025 में पूर्ण होने के बाद प्रावधानों के अनुसार स्थाईकरण होना है, लेकिन चार माह बाद भी फाइल लंबित है। ये हो रहा है नुकसान स्थायीकरण में हो रही देरी का सीधा असर शिक्षकों की वेतन वृद्धि, एरियर और अन्य सेवा लाभों पर पड़ रहा है। समय पर स्वीकृति नहीं मिलने से शिक्षक आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। वहीं कई बार प्रकरण लंबित रहने पर बाद में विभाग को एरियर सहित एक साथ बड़ी राशि देनी पड़ती है। इससे विभाग का बजट भी प्रभावित होता है। 2 बार लेकर गई फाइल : डीईओ स्थायीकरण का काम हमारी तरफ से नवंबर में ही पूरा हो गया है। पहली बार 30 नवंबर और दूसरी बार 10 फरवरी को फाइल भेजी गई। पर दोनों बार कलक्ट्रेट में कहा गया कि डीईसी की बैठक होगी, तब बताएंगे। डीईओ कार्यालय ने पूरा काम कर दिया है। – शम्मे फरोजा बतुल अंजूम, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक, बांसवाड़ा फाइल देंगे, तो बुला लेंगे मीटिंग : सीईओ हमारे पास स्थायीकरण की कोई फाइल नहीं आई है। फाइल आएगी तो तुरंत जिला स्थापना समिति की बैठक बुला लेंगे। फाइल मेरी टेबल पर देंगे, तो कार्रवाई करेंगे। – गोपाललाल स्वर्णकार, सीईओ, जिला परिषद, बांसवाड़ा

छत्तीसगढ़ में 5000 शिक्षक पदों के लिए भर्ती की मंजूरी, आदेश हुआ जारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ में टीचर भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जहां लंबे समय से स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। राज्य के स्कूलों में जल्द ही 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से डायरेक्टरेट ऑफ़ पब्लिक इंस्ट्रक्शन को एक आदेश जारी कर दिया गया है। यदि पिछली भर्ती आदेश की बात करें तो छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 अक्टूबर, 2025 को 4,708 शिक्षक भर्ती की अनुमति दी थी। अब, फरवरी के पहले हफ्ते ही राज्य सरकार के नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक 292 सहायक पदों के सृजन को भी मंजूरी दे दी गई है। इन पदों के साथ, कुल 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में लोकशिक्षण संचालनालय के संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। शिक्षा विभाग के इस फैसले से फैसले से न सिर्फ पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य के स्कूलों में टीचर की कमी भी पूरी होगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

69000 शिक्षक भर्ती का मामला तूल पकड़ता, आज लखनऊ में शिक्षा हितैषी करेंगे विरोध प्रदर्शन

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है. इसे लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी आज यानी 2 फरवरी 2026 को लखनऊ में अपनी मांगो को पूरा करवाने के लिए को धरना प्रदर्शन करेंगे. इस मामले में अभ्यर्थियों का आरोप है कि ने कोई पहल नहीं कर रही जिस कारण से मामला इतना आगे चला गया है. इस केस की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में साल 2024 में सितंबर के महीने में हुई थी. उसके बाद से लगातार के इस मामले में तारीख पर तारीख मिल रही है. इस केस को लेकर अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी. लेकिन उससे पहले आरक्षित वर्ग के लोग अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए आज प्रदर्शन करने वाले हैं.  कौन कर रहा है प्रदर्शन का नेतृत्व  ऐसे में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने इसे लेकर बयान दिया है. उन्होंने कहा की इस केस को सुलझाने के लिए सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है. जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट से केवल तारीखें मिल रही हैं. इस दौरान उन्होंने बताया कि वे दो फरवरी से आंदोलन करेंगे. आंदोलन के शुरुआत में बनाए गए सभी जिला कोऑर्डिनेटर से ब्लाक लेवल पर संपर्क कर आने वाले अभ्यर्थियों और उनके परिजनों की लिस्ट बनाने को कहा गया है.  प्रदर्शकारियों का फूटा गुस्सा  ऐसे में इस केस को लेकर प्रदर्शकारियों में गुस्सा भरा पड़ा है. उन्होंने कहा कि ओबीसी आयोग और लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में है. इस केस पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट डबल बेंच का फैसला सब हमारे पक्ष में है, लेकिन हमारे साथ अन्याय इसलिए हो रहा है क्योंकि हम पिछड़े और दलित समाज से आते हैं.  इतने सालों से चल रहा है संघर्ष वहीं, दूसरे प्रदर्शनकारी ने कहा कि  वो पिछले 6 सालों  से संघर्ष कर रहे हैं.सरकार से मांग करते हैं, लेकिन हमारी बातों को नहीं सुना जाता है. सुनवाई न होने के कारण सभी अभ्यर्थी आहत हैं. 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर टिप्पणी, बालाघाट के शिक्षक सुनील मेश्राम निलंबित

बालाघाट  सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी एक शिक्षक को भारी पड़ गई। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी करने के आरोप में बालाघाट जिले के एक उच्च श्रेणी शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है। कलेक्टर मृणाल मीणा के निर्देश पर यह कार्रवाई आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर द्वारा की गई। खास बात यह है कि सुनील मेश्राम राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक हैं। ऐसे में निलंबन की कार्रवाई को लेकर शिक्षा विभाग और जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। परसवाड़ा के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक सुनील मेश्राम पर आरोप है कि उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भारत सरकार और राज्य शासन के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी साझा की थी। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना। नोटिस के बाद भी नहीं मिला संतोषजनक जवाब प्रशासन की ओर से चार दिसंबर को शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके जवाब में 8 दिसंबर को मेश्राम ने अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया, लेकिन विभागीय स्तर पर इसे स्वीकार नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक के आचरण से शासन की छवि प्रभावित हुई है, जो सेवा नियमों के विरुद्ध है। सेवा नियमों के तहत निलंबन पूरे प्रकरण के बाद मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम 1966 के नियम 9 के अंतर्गत शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। शिक्षक ने दी सफाई निलंबन के बाद सुनील मेश्राम ने कहा कि संबंधित पोस्ट किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़ी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें खेद है। मेश्राम का दावा है कि वह पोस्ट उनकी नहीं थी और उसे उनके फेसबुक अकाउंट से हटा दिया गया है। 

शिक्षकों के लिए नया नियम: परीक्षा पास करना जरूरी, NIOS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं

भोपाल  बच्चों की परीक्षा लेने वाले शिक्षकों को भी अब परीक्षा देनी होगी और अगर इसमें फेल हुए तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना होगा। दरअसल प्रदेश में पांच हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। प्राइमरी स्कूलों में बतौर शिक्षक भर्ती हुए इन शिक्षकों को पहले ब्रिज कोर्स करना होगा। छह माह का यह कोर्स नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) करवाएगा। इसमें अगर फेल हो गए तो शिक्षक की नौकरी जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का है निर्देश प्रदेश में 94 हजार सरकारी स्कूल हैं। प्राइमरी कक्षा में 1.40 लाख शिक्षक हैं। इनमें से करीब पांच हजार ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति बीएड के आधार पर हुई। सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्देश में पात्रता परीक्षा पास करना शिक्षकों को अनिवार्य हो गया। दो साल में भर्ती हुए ये शिक्षक इस दायरे में आ रहे हैं। दायरे में आ रहे हैं ये शिक्षक शिक्षकों को ब्रिज कोर्स कराने लोक शिक्षण संचालनालय से निर्देश जारी हुए हैं। इसके तहत हर जिले को ऐसे शिक्षकों को एनआइओएस के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना है। इसकी आखिरी तारीख 25 दिसंबर है। 6 माह का कोर्स पूरा कर शिक्षकों को सालभर में सार्टिफिकेट जमा कराना होंगे। यह हैं निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2023 को आदेश पारित किया था। इसके मुताबिक इस तारीख के बाद प्राइमरी स्कूलों मेें बीएड के आधार पर शिक्षकों की भर्ती मान्य नहीं होगी। सेवा समाप्त हो सकती है बीएड के आधार पर भर्ती प्राइमरी शिक्षकों को ब्रिज कोर्स करना होगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन होना है। सभी जिलों को निर्देश जारी हुए हैं। एक साल में कोर्स पूरा न करने पर सेवाएं समाप्त की जा सकती है। – केके द्विवेदी, संचालक, लोक शिक्षण संस्थान

मध्यप्रदेश में नई पहल: टीचर अब डांस-ड्रामा के जरिए समझाएंगे कठिन विषय

 भोपाल  सरकारी स्कूलों में अब अगर नृत्य-नाटक करते शिक्षक दिखें तो यह मत सोचिएगा कि वे पढ़ाई छोड़कर मस्ती कर रहे हैं। दरअसल प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को प्रदर्शन कलाओं के जरिए पढ़ाने की तैयारी चल रही है। योजना है कि कठपुतली नृत्य, मुखौटा, मूर्तियों, कविता, गीत और चित्रों के जरिए गणित-विज्ञान के गूढ़ संदर्भों को समझाया जाए, ताकि कक्षा का वातावरण आनंददायक बना रहे और बच्चों को कठिन विषय आसानी से समझ आ जाए। इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद(एनसीईआरटी) समृद्धि-2025 में शिक्षकों को प्रशिक्षित करेगा। प्रदेश के 30 जिलों के 65 शिक्षकों का चयन इसके लिए किया गया है। इनके बीच प्रतियोगिता भी कराई गई। ये शिक्षक अपने जिले में मुख्य प्रशिक्षक होंगे और अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। हर विषय को कला से जोड़ने का प्रयास स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम के तहत उच्च माध्यमिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें एनसीईआरटी की ओर से प्रशिक्षक शिक्षकों का प्रशिक्षित कर रहे हैं। स्कूलों में इसकी अधिकारी निगरानी भी करेंगे, ताकि हर विषय को कला से जोड़ते हुए पढ़ाया जा सके। इस विषय में ये गतिविधि जीव विज्ञान – सांदीपनि विद्यालय की शिक्षिका डॉ. अर्चना शुक्ला ने पाचन तंत्र के ऊपर नुक्कड़ नाटक तैयार किया है। इसमें उन्होंन 35 बच्चों को लिया था और उन्हें भोजन और एंजाइम बनाया था। इसमें कुछ बच्चों ने मिट्टी से पाचनतंत्र के माडल बनाकर पूरी प्रक्रिया को समझाया था। गणित – शासकीय नवीन कन्या उमावि की शिक्षिका प्रेरणा बर्डे ने गणित के कठिन प्रमेय और सूत्र को आकृति बनाकर समझाया। इसमें वह सालिड व प्लेन आकृति को थ्रीडी माडल से समझा रही हैं। इसके अलावा उन्होंने त्रिशंकु व गोला को भी आकृति के माध्यम से पढ़ा रही हैं। साथ ही त्रिकोणमिति के कठिन सूत्र को भी आसान तरीके से कविता के माध्यम से बता रही हैं। कठिन विषयों को पढ़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा     एनसीईआरटी का आर्ट इंटीग्रेटेड लर्निंग के तहत समृद्धि कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके तहत शिक्षकों को गीत-संगीत व कला के माध्यम से कठिन विषयों को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। – दिनेश शर्मा, नोडल अधिकारी, समृद्धि कार्यक्रम।  

गंदे वीडियो दिखाने वाले शिक्षक भिंड में गिरफ्तार, छात्राओं ने दी शिकायत

 भिंड  भिंड जिले में देहात थाना अंतर्गत विक्रमपुरा सरकारी स्कूल में शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शिक्षक पर कक्षा में छात्राओं को मोबाइल पर अश्लील वीडियो दिखाने और आपत्तिजनक हरकतें करने का आरोप लगा है। घटना का खुलासा तब हुआ जब तीन छात्राओं ने हिम्मत जुटाकर इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने छात्राओं की शिकायत पर आरोपित शिक्षक रामेंद्र सिंह कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ पाक्सो एक्ट, धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। छात्राओं ने पुलिस को बताया कि शिक्षक कक्षा में पढ़ाते समय मोबाइल पर अश्लील वीडियो दिखाता था और अनुचित व्यवहार करता था। जब छात्राओं ने घर जाकर शिकायत करने की बात कही तो आरोपी ने उन्हें डराया और धमकाया। डर के कारण छात्राएं कई दिनों तक स्कूल नहीं गईं। स्वजन की पूछताछ में खुला मामला बताया जाता है, कि जब छात्राओं ने स्कूल जाना बंद किया तो स्वजनों ने उनसे कारण पूछा। पूछताछ में छात्राओं ने पूरी घटना बताई। उन्होंने कहा कि मोबाइल पर सर गंदे वीडियो दिखाते हैं। इसके बाद स्वजन स्कूल पहुंचे और प्राचार्य से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई न होने पर वे छात्राओं को लेकर देहात थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कक्षा 8वीं की एक छात्रा को मुख्य फरियादी बनाया और अन्य छात्राओं के बयान भी दर्ज किए। डीईओ ने आरोपित शिक्षक को निलंबित किया पुलिस की कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग ने देर रात आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी आरडी मित्तल ने बताया कि उच्च श्रेणी शिक्षक (उच्च पद प्रभार) मूल पद सहायक शिक्षक शासकीय माध्यमिक विद्यालय विक्रमपुरा बीटीआइ परिसर भिंड में पदस्थ रामेंद्र सिंह कुशवाह को शिक्षक की सामाजिक गरिमा को धूमिल करने पर मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में शिक्षक को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। पाक्सो एक्ट में केस दर्ज     छात्रा की शिकायत पर आरोपी शिक्षक रामेंद्र सिंह कुशवाह के खिलाफ पाक्सो एक्ट, धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।- मुकेश शाक्य, टीआई थाना देहात तुरंत निलंबन का आदेश जारी किया     शिक्षक द्वारा की गई हरकत शिक्षक समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है। पुलिस कार्रवाई के बाद विभाग ने तुरंत निलंबन आदेश जारी किया है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। – आरडी मित्तल, डीईओ भिंड  

बड़ी कार्रवाई: बुरहानपुर में आरोपी शिक्षक को निलंबित, विवादित मामला बच्चों को नमाज सिखाने का

बुरहानपुर  बुरहानपुर जिले में सूर्य नमस्कार से पहले स्कूली बच्चों को नमाज कराने का मामला सामने आया है. शिकायत मिलने पर शनिवार को जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) संतोष सिंह सोलंकी खुद स्कूल पहुंचे थे. उन्होंने बच्चों से पूरे मामले की जानकारी ली. मामला देवरी के एक सरकारी स्कूल का है. 5वीं की छात्राओं ने बताया कि उन्हें सूर्य नमस्कार से पहले नमाज की स्टेप्स कराई जाती थी. उन्होंने स्टेप्स करके भी दिखाए.  शुक्रवार को हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष अजीत परदेसी भी स्कूल पहुंचे थे. वहां छात्राओं ने टीचर पर नमाज के स्टेप कराने के आरोप लगाए थे. वहीं इसे लेकर पालकों ने भी आक्रोश जताते हुए कार्रवाई की मांग की थी. पंचनामा बनाया गया था बताया गया है कि दीपावली के अवकाश के दौरान कुछ बच्चों ने जब घर में वह प्रक्रिया दोहराई तो माता-पिता ने पूछा। बच्चों ने बताया कि जबूर अहमद रोजाना योगासन से पहले उन्हें इसका अभ्यास कराता है। इसके बाद करीब दो दर्जन अभिभावक स्कूल पहुंच गए और विरोध दर्ज कराया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी संतोष सिंह सोलंकी को सूचना दी। मामला गंभीर होने से डीईओ स्कूल पहुंचे और पंचनामा बनाया। एक पालक ने कहा, ''मेरे बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं. दीपावली की छुट्टी के दौरान बच्चों ने यह बात घर पर बताई. इसके बाद स्कूल में आकर शिकायत की. इसके बाद जनशिक्षक स्कूल पहुंचे और डीईओ को मामले की जानकारी दी. अपर कलेक्टर बुरहानपुर वीर सिंह चौहान ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बच्चों के बयानों के बाद डीईओ ने आरोपी शिक्षक जबूर अहमद तड़वी को निलंबित कर दिया है.  शिक्षक ने क्या कहा इस बीच जानकारी लगने पर हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष अजीत परदेसी, बजरंग दल के दीपक पवार सहित अन्य पदाधिकारी भी स्कूल पहुंचे और विरोध दर्ज कराया था। इधर, शिक्षक जुबेर अहमद तड़वी का कहना था कि मुझ पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।