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4.9 KM लंबी मुकुंदरा टनल अंतिम चरण में, जंगल के नीचे दौड़ेगी हाईस्पीड ट्रैफिक

जयपुर

राजस्थान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा आकर्षण बनने जा रही मुकुंदरा टनल अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. कोटा और बूंदी के बीच मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से गुजर रही यह टनल सिर्फ इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के संतुलन की मिसाल भी बनने जा रही है. इस टनल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जहां नीचे से हाईस्पीड ट्रैफिक गुजरेगा, वहीं ऊपर जंगल में वन्यजीव सामान्य रूप से विचरण करते नजर आएंगे. इससे मुकुंदरा टाइगर रिजर्व का प्राकृतिक आवागमन भी प्रभावित नहीं होगा, और एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी.

राजस्थान की सबसे बड़ी टनल
मुकुंदरा टनल राजस्थान की सबसे लंबी सड़क टनल मानी जा रही है. इसकी कुल लंबाई 4.9 किलोमीटर है, जिसमें 3.3 किलोमीटर मुख्य टनल और 1.6 किलोमीटर कट एंड कवर सेक्शन शामिल है. टनल की चौड़ाई करीब 38 मीटर है.

    निर्माण कार्य शुरू: 2019
    निर्धारित समय सीमा: अप्रैल 2026
    अनुमानित लागत: करीब 1000 करोड़ रुपए
    कुल लंबाई: 4.9 किलोमीटर

हाईटेक सुरक्षा सिस्टम से लैस होगी टनल
टनल में फिलहाल लाइटिंग, एआई आधारित प्रदूषण डिटेक्टर सेंसर, जेट फैन, फायर सेफ्टी सिस्टम, सीसीटीवी और कंट्रोल रूम सहित अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं. सभी सुरक्षा मानकों की जांच और परीक्षण के बाद इसे आमजन के लिए खोला जाएगा. टनल की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक कंट्रोल सिस्टम लगाया जा रहा है, जो वाहनों की गति और गतिविधियों पर लगातार नजर रखेगा. कंट्रोल रूम एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम से लैस होंगे.

आपात स्थिति से निपटने के लिए दोनों सुरंगों को 12 स्थानों पर आपस में जोड़ा गया है. ये कनेक्टिविटी पॉइंट्स हर 300 से 400 मीटर की दूरी पर बनाए गए हैं, ज‍िससे दुर्घटना या आग जैसी स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके.

क्यों खास है यह प्रोजेक्ट
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व राजस्थान के महत्वपूर्ण वन क्षेत्रों में शामिल है. यहां बाघों समेत कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है. एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान वन्यजीवों की आवाजाही और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए टनल मॉडल तैयार किया गया, जिससे जंगल का प्राकृतिक स्वरूप बना रहे. विशेषज्ञों के अनुसार, यह मॉडल भविष्य में वन क्षेत्रों से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए उदाहरण बन सकता है.

हाड़ौती को बड़ा फायदा
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल है. इसके शुरू होने से राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा.

यह भी है खास टनल में
एनएचएआई के मुताबिक, साउंड प्रूफ और वाटरप्रूफ टनल है. इसके अंदर होकर गुजरने वाले वाहनों से मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों को किसी तरह का डिस्टरबेंस नहीं होगा. ऑस्ट्रेलिया की नई तकनीक से इस टनल को बनाया जा रहा है. टनल सेंसर से लैस होगी. इसे ग्रीन कॉरिडोर के तौर पर डिजाइन किया गया है. दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे हाईवे 1350 किलोमीटर लंबा है. द‍िल्‍ली से मुंबई जाने में 12 घंटे का समय लगेगा. यह हाईवे केंद्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है. कोटा जिला सीधा दिल्ली-मुंबई से जुड़ जाएगा.

ट्रैफिक जाम से राहत
यात्रा में समय कम लगेगा. उद्योगों और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मजबूती मिलेगी, कृषि आधारित उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे. पर्यटन और निवेश की संभावनाएं बढ़ेगी. कोटा-बूंदी सांसद और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मुकुंदरा टनल का काम जल्द पूरा होने वाला है. इससे एक्सप्रेसवे पर आवागमन आसान होगा. कोटा-झालावाड़ मार्ग पर यातायात की सुगमता भी बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास के साथ किसानों और कृषि आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर खुलेंगे.

NHAI का दावा, अंतिम चरण में काम
एनएचएआई के लाइजनिंग मैनेजर एस.के. सिंह ने बताया कि मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में बन रही टनल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है. दोनों टनल का काम पूरा होते ही यहां आवागमन शुरू कर दिया जाएगा.

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