चंडीगढ़
आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों पर पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा कि उथल पुथल चलती रहती है. आना जाना लगा रहता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति नहीं बल्कि संगठन बड़ा होता है. उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव 2027 में हम अपने काम को लेकर जनता के बीच जाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिस दल ने बीजेपी के साथ हाथ मिलाया वो खत्म हो गई।
राघव चड्ढा को लेकर क्या बोले सीएम मान?
राघव चड्ढा से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, "पंजाब की जनता के साथ उनका कोई संबंध नहीं था. राज्यसभा में ऐसे भी आते हैं जो हार जाते हैं. अरुण जेटली अमृतसर से हारे, राज्यसभा आ गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली कैबिनेट 70 फीसदी राज्यसभा से थी. लेकिन अगर आपको जनता से चुना तो ये बहुत बड़ी बात है. राजेंद्र नगर (दिल्ली विधानसभा की सीट) के लोगों ने राघव चड्ढा को चुन लिया था. लेकिन जब चुने हुए प्रतिनिधि इस्तीफा दे देते हैं तो पब्लिक दोबारा नहीं चुनती।
बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि बहुत सारे देश में ऐसे नेता हुए जो ये बात दिल में ही लेकर चले गए कि काश मुझे जनता चुन ले. सबसे बड़ा उदाहरण मनमोहन सिंह हैं जो 10 सालों तक प्रधानमंत्री रहे लेकिन कभी जनता द्वारा नहीं चुने गए।
‘पार्टी लाइन से अलग’ होने का आरोप
जब राघव चड्ढा (Raghav Chadha Controversy) के संसद में सक्रिय रहने के दावे पर सवाल किया गया, तो मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि अब उनके बयानों का ज्यादा महत्व नहीं रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने पार्टी लाइन का पालन नहीं किया, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
अमन अरोड़ा का सीधा हमला
इस विवाद में पंजाब सरकार के मंत्री और पार्टी नेता अमन अरोड़ा भी खुलकर सामने आए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने ही राघव चड्ढा (Raghav Chadha Controversy) को राजनीति में ऊंचाई तक पहुंचाया, लेकिन उन्होंने सदन में पंजाब से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने के बजाय अन्य विषयों पर ध्यान दिया। अरोड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि चड्ढा ने राज्य के हितों की अपेक्षित मजबूती से पैरवी नहीं की।
‘पंजाब के मुद्दे नहीं उठाए’
पार्टी नेताओं का कहना है कि राघव चड्ढा ने संसद में उन मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी, जो सीधे पंजाब से जुड़े थे। विशेष रूप से ग्रामीण विकास फंड और अन्य राज्य हितों के मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया गया है। नेताओं का मानना है कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर चुप्पी पार्टी की रणनीति के विपरीत है।
बीजेपी के डर का आरोप
विवाद यहीं नहीं रुका। अमन अरोड़ा ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने कुछ मुद्दों को इसलिए नहीं उठाया क्योंकि वे भारतीय जनता पार्टी से टकराव से बचना चाहते थे। हालांकि, इस आरोप पर राघव चड्ढा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
AAP के भीतर बढ़ते मतभेद?
यह पूरा घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के भीतर संभावित मतभेदों की ओर इशारा करता है। जहां एक ओर पार्टी नेतृत्व अनुशासन और सामूहिक रणनीति पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत बयानों और सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं ने अंदरूनी असहमति को उजागर कर दिया है।
राजनीतिक संदेश या आंतरिक संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की बयानबाज़ी (Raghav Chadha Controversy) केवल व्यक्तिगत मतभेद नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर भूमिका और प्राथमिकताओं को लेकर चल रही खींचतान का संकेत भी हो सकती है। यह विवाद आने वाले समय में पार्टी की रणनीति और नेतृत्व की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।
पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच यह बयानबाज़ी अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप लेती दिख रही है। राघव चड्ढा (Raghav Chadha Controversy) के बयान से शुरू हुआ यह विवाद अब पार्टी अनुशासन, राज्य हित और राजनीतिक रणनीति तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी तकरार किस दिशा में जाती है।
हरभजन सिंह के आरोपों पर सीएम ने किया पलटवार
सीएम भगवंत मान ने हरभजन सिंह के पैसे लेकर राज्यसभा टिकट देने के आरोपों पर भी जवाब दिया. उन्होंने कहा, "भज्जी से ही पूछ लो कि उनसे कितने पैसे लिए थे।
बता दें कि बीते महीने राघव चड्ढा, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल और संदीप पाठक सहित 7 आप के राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी और बीजेपी में शामिल हो गए।





