लखनऊ
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जल्द ही ऐसा सांस्कृतिक संग्रहालय विकसित होने जा रहा है, जहां जन्म से मोक्ष तक आध्यात्म का हाइटेक संगम होगा। इसके साथ ही जनजातीय विरासत, लोक परंपराएं, संस्कार और भारतीय जीवन दर्शन आधुनिक तकनीक के साथ जीवंत रूप में देखने को मिलेंगे। इस हाइटेक म्यूजियम में 3डी तकनीक से जन्म से मृत्यु तक के 16 संस्कार दिखेंगे।
बीकेटी के चंद्रिकादेवी मंदिर के पास उत्तर प्रदेश संस्कृति संग्राहलय-म्यूजियम एंड रिचुअल सेंटर परियोजना के निर्माण और क्यूरेशन कार्य के लिए राज्य सरकार ने करीब 23.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 8 करोड़ रुपये की धनराशि जारी जारी कर दी गई है। इस परियोजना का काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा
इस हाईटेक संग्रहालय का सबसे खास हिस्सा क्यूरेशन फ्रेमवर्क होगा, जिसमें जन्म से मृत्यु तक भारतीय जीवन यात्रा और अर्थ, धर्म, काम तथा मोक्ष जैसे चार पुरुषार्थों को केंद्र में रखा गया है। आधुनिक तकनीकों जैसे थ्री डी प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राफिक प्रोजेक्शन, पैनोरमिक वीडियो वॉल, काइनेटिक मूर्तियां और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन के जरिए अमूर्त आध्यात्मिक अवधारणाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। गैलरी वन में भारतीय रीति-रिवाजों की उत्पत्ति, वैदिक परंपराएं और प्रकृति के पांच तत्व-पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के साथ उनके संबंध को दर्शाया जाएगा। यहां 270 डिग्री प्रोजेक्शन स्क्रीन पर ओरिएंटेशन फिल्म दिखाई जाएगी। इसी गैलरी में सोलह संस्कारों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिनमें गर्भाधान, नामकरण, अन्नप्राशन, उपनयन, विवाह, संन्यास और अंत्येष्टि जैसे संस्कार शामिल होंगे।
प्रवेश प्लाजा से ओपन थिएटर तक ढेरों सुविधाएं
परियोजना के तहत प्रवेश प्लाजा, पार्किंग, स्मारिका केंद्र, कैफेटेरिया, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम, आवास ब्लॉक, ओपन थिएटर, तालाब, एडमिन ब्लॉक, निगरानी टावर और सौर ऊर्जा उत्पादन प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। संग्रहालय का पूरा ढांचा पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक डिजाइन के समन्वय पर आधारित होगा। यहां आने वाले पर्यटक केवल प्रदर्शनी नहीं देखेंगे, बल्कि भारतीय संस्कारों और जीवनचक्र को अनुभव भी कर सकेंगे।
पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इस परियोजना को इस तरह तैयार किया जाएगा कि यह केवल संग्रहालय न रहकर उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा का जीवंत केंद्र बन जाए। यह केंद्र लखनऊ में सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान देगा और देश-विदेश के पर्यटकों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने का बड़ा माध्यम बनेगा।





