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ग्राम पंचायत स्तर पर बड़े बदलाव, IAS–RAS अधिकारियों को मिली विशेष शक्तियां

 जयपुर
राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की समस्याओं, विशेषकर जमीन से जुड़े मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जनकल्याण शिविर के अन्तर्गत प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर दिनांक 12 जून से 15 जुलाई तक 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' का वृहद स्तर पर आयोजन किया जा रहा है।

संभागीय आयुक्त और जिला कलक्टरों को मिले विशेष अधिकार इस महा-अभियान के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ने प्रशासनिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया है। अभियान की अवधि के लिए समस्त संभागीय आयुक्तों और जिला कलक्टरों को विशेष रूप से प्राधिकृत किया गया है। इसके तहत वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में 'नॉन-फील्ड' (कार्यालयों/गैर-क्षेत्रीय पदों पर) कार्यरत तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को तुरंत प्रभाव से तहसीलों या उप-तहसीलों के रिक्त पदों पर पदस्थापित कर सकेंगे

राज्यभर में 12 जनवरी से शुरू हो रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' अभियान में मौके पर ही समस्या समाधान के लिए राज्य सरकार ने कई अधिकारियों की शक्तियों को शिविर प्रभारियों व अन्य अधिकारियों को डेलीगेट कर दी है। ये आदेश 12 जून से 15 जुलाई तक प्रभावी होंगे।

शिविर प्रभारी आईएएस, आरएएस को मिली ये शक्तियां
आदेशों के अनुसार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने एवं राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने की जिला कलक्टर की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दे दी गई हैं।
 
राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के अंतर्गत उपखण्ड अधिकारी की शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251-ए व उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत अन्य खातेदार की जोत में से होकर भूमिगत पाइपलाइन बिछाने या नया मार्ग खोलने या विद्यमान मार्ग को चौड़ा करने के लिये उपखण्ड अधिकारियों को प्रदत्त शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं।

राजस्व अभिलेख की त्रुटियों के शुद्धिकरण के प्रकरणों के निस्तारण हेतु उपखण्ड अधिकारी की  शक्तियां भी शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दी गई हैं।

शिविरों में नियुक्त तहसीलदार/नायब तहसीलदार को मिली शक्तियां
राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 53 की उप-धारा (1) व (2) एवं उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत भूमि के बंटवारे की तहसीलदार की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को दी गई हैं।

राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 251 (1) के तहत रास्ते तथा अन्य निजी सुखाचार के अधिकार के तहत तहसीलदार की शक्तियां शिविरों के लिए नियुक्त  समस्त नायब तहसीलदारों को प्रदान की गई हैं।

नामान्तरकरण के मामलों की ग्राम पंचायत की शक्तियां और राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम 18 के अन्तर्गत तहसीलदार की शक्ति व राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (अधिनियम संख्या 15, वर्ष 1956) की धारा 128 के परन्तुक एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/36 दिनांक 04.09.1982 के तहत अविवादित सीमा ज्ञान के मामलो को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां शिविर में नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को प्रदत्त की गई हैं। ऐसे तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को  राज्य सरकार राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251 एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/34 दिनांक 14.09.1982 के तहत मार्गाधिकार या अन्य सुखाचार के वास्तविक उपयोग में विघ्न डाले जाने के मामलों को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां भी दे दी गई हैं।

समय अवधि 15 दिन से 7 दिन की
राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम के खण्ड (ख) के द्वितीय परन्तुक में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये भूमि आवंटन के लिये आवेदन प्रस्तुत किये जाने के लिये जारी उद्घोषणा के लिये निर्धारित पन्द्रह दिवस की कालावधि को कम कर सात दिन कर दिया गया है।

भूमि आवंटन की राज्य सरकार की पॉवर कलेक्टर को
राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 102क के अन्तर्गत आबादी विस्तार हेतु आरक्षित भूमि को स्थानीय निकायों के अधीन किये जाने की राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियां  जिला कलक्टर को दी गई है।

 

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